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राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं में किसानों ने कारखानों के विरोध में एक उग्र आंदोलन किया। यह प्रदर्शन कल हुआ, जिसमें सभी किसान कारखानों के खिलाफ एकजुट हुए और अपनी आवाज बुलंद की।
(ND NEWS CHITTORGARH)Laxman Si
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं में किसानों ने कारखानों के विरोध में एक उग्र आंदोलन किया। यह प्रदर्शन कल हुआ, जिसमें सभी किसान कारखानों के खिलाफ एकजुट हुए और अपनी आवाज बुलंद की।
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- चित्तौड़गढ़ जिले में इन दिनों सामाजिक संगठनों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में, एससी-एसटी विकास परिषद के जिला अधिवेशन में संगठन के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। वहीं, युवा गुर्जर महासभा ने भी अपनी संगठनात्मक गतिविधियों को बढ़ाते हुए राजूलाल गुर्जर (आमोलिया) को जिलाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया है। इन नियुक्तियों और अधिवेशनों से जिले में सामाजिक संगठनों की सक्रियता में वृद्धि देखी जा रही है।1
- चित्तौड़गढ़ के गणगौर गार्डन में योग दिवस की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इन तैयारियों के तहत, राधा कृष्ण पार्क योग परिवार के सदस्यों के साथ पेंशनर समाज और वरिष्ठ नागरिक समाज के सभी सदस्य एक साथ मिलकर योग का अभ्यास कर रहे हैं। इस सामूहिक योग अभ्यास में अन्य लोगों को भी शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।4
- राजस्थान के बेगूं क्षेत्र में प्रस्तावित चंदाखेड़ी लाइम स्टोन प्रोजेक्ट के विरोध में किसानों का भारी गुस्सा सड़कों पर उतर आया। बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीण और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एक साथ एकत्रित हुए, उन्होंने धरना-प्रदर्शन किया और परियोजना को तत्काल रद्द करने की मांग को लेकर प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारी किसानों का स्पष्ट आरोप है कि इस प्रस्तावित खनन परियोजना से क्षेत्र की उपजाऊ कृषि भूमि, महत्वपूर्ण जल स्रोतों और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुँचेगा। किसानों ने अधिकारियों पर अपनी आपत्तियों और चिंताओं को लगातार नजरअंदाज करने का आरोप लगाया, जिसके कारण उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क पर उतरना पड़ा है। धरना स्थल पर किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सवाल उठाया कि यह कैसी सरकार है, जिसमें अन्नदाता को अपनी जमीन और भविष्य बचाने के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि विकास के नाम पर उनकी खेती और आजीविका को खतरे में नहीं डाला जा सकता। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ही कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और भी व्यापक रूप दिया जाएगा। किसानों ने साफ कर दिया कि वे अपनी जमीन, जल और पर्यावरण की रक्षा के लिए अंतिम दम तक संघर्ष जारी रखेंगे, और यह विशाल धरना-प्रदर्शन जेके सीमेंट परियोजना के विरोध में उनके इसी संकल्प का प्रतीक था।1
- चित्तौड़ के बेगूँ स्थित चंदाखेड़ी में भारी संख्या में किसानों ने जेके सीमेंट की प्रस्तावित लाइमस्टोन परियोजना को रद्द करने के विरोध में धरना प्रदर्शन किया और एक ज्ञापन सौंपा। किसानों ने सरकार पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए सवाल उठाया कि यह कैसी सरकार है जिसमें किसानों को अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरना पड़ रहा है।1
- बड़ी सदड़ी में रेलवे ट्रैक निर्माण कार्य के दौरान भारी मात्रा में क्वेंच स्टूडियो में फंसे लोगों की शिकायतें सामने आई हैं। यहां रेलवे ट्रैक पर स्टोन स्टोन स्टॉकहोम का विरोध भी किया जा रहा है। इस संबंध में, एक ग्रामीण महिला ने रेलवे अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है कि यदि यह अवशेष तुरंत नहीं हटाया गया, तो गांव के लोग, बकरियां और गाय के बच्चे रेलवे ट्रैक पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। महिला ने रेलवे निर्माण से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की लेबल जांच और जिम्मेदार अधिकारियों तथा दशों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही, महिला ने ट्रैक और आसपास के क्षेत्रों से नारियल के गोले को भी तुरंत हटाने की अपील की है।1
- भीलवाड़ा जिले के भुणास श्रमिक शिविर में बुधवार को बड़ी संख्या में श्रमिकों ने एक एलडीसी पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का आरोप लगाते हुए जमकर विरोध-प्रदर्शन किया। आक्रोशित श्रमिकों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए उपखंड अधिकारी (SDM) विवेक गुर्जर को एक ज्ञापन सौंपा। श्रमिकों का आरोप है कि विभिन्न दस्तावेजी कार्यों और प्रक्रियाओं के नाम पर उनसे अवैध रूप से लगभग एक हजार रुपये तक की राशि मांगी जा रही थी। उन्होंने बताया कि पैसे न देने पर उनके कार्यों में अनावश्यक देरी की जाती है या उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। श्रमिकों का यह भी कहना है कि इस संबंध में पूर्व में भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कुछ श्रमिकों ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर यह राशि BDO गजेंद्र सिंह के नाम का हवाला देकर मांगी जा रही थी। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। विवाद बढ़ने पर श्रमिकों के प्रतिनिधिमंडल ने SDM विवेक गुर्जर को ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने, आरोपित एलडीसी को तत्काल हटाने और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। श्रमिकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी शिकायतों पर शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो वे एक व्यापक आंदोलन करने को मजबूर होंगे। नोट: इस समाचार में लगाए गए आरोप श्रमिकों द्वारा ज्ञापन में किए गए दावों पर आधारित हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या जांच का परिणाम अभी सामने नहीं आया है।2
- एक विचारोत्तेजक चर्चा में पति-पत्नी के रिश्तों में त्याग, सम्मान और साझेदारी के महत्व पर प्रकाश डाला गया है। अक्सर देखा जाता है कि एक पति अपने परिवार को बेहतर जीवन देने के लिए संघर्ष करता है; वह भले ही खुद पुराने कपड़े पहने या कार्यस्थल पर अपमान सहे, लेकिन घर लौटते समय पत्नी और बच्चों के लिए कुछ न कुछ ज़रूर लेकर आता है। नई गाड़ी लाने पर सबसे पहले पत्नी को चाबी देकर घूमने चलने को कहता है, या नई साड़ी, गहने, फोन जैसी चीज़ों से परिवार की खुशी में अपनी खुशी तलाशता है। हालांकि, इस पर एक अहम सवाल उठाया गया है कि क्या जब पत्नी कमाती है, तो वह भी उसी सम्मान, विश्वास और अपनापन के साथ अपनी कमाई से खरीदी गई गाड़ी की चाबी पति को देकर कह सकती है कि 'चलो, आज हम दोनों घूमने चलते हैं?' यह प्रश्न इस बात पर ज़ोर देता है कि रिश्ते बराबरी से नहीं, बल्कि आपसी सम्मान, त्याग और साझेदारी से मज़बूत होते हैं। यदि त्याग सिर्फ एक तरफ से ही हो, तो रिश्ते में संतुलन नहीं रह जाता है, जिससे रिश्ते की सच्चाई और गहराई पर सवाल उठते हैं।1
- शौर्य, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के अमर प्रतीक वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई गई। चित्तौड़गढ़ की पुण्य एवं वीरभूमि पर आयोजित इस कार्यक्रम में आदरणीय विधायक महोदय, वरिष्ठजन, युवा साथियों, मातृशक्ति और नन्हे-मुन्ने बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सभी ने वीर शिरोमणि को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। महाराणा प्रताप को केवल एक नाम नहीं, बल्कि त्याग, संघर्ष, आत्मसम्मान, राष्ट्रप्रेम और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण की जीवंत मिसाल बताया गया। यह संदेश दिया गया कि विपरीत परिस्थितियों में भी स्वाभिमान, संस्कृति और सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए, जैसा कि महाराणा प्रताप ने घास की रोटी खाकर भी अपना स्वाभिमान और मातृभूमि की रक्षा का संघर्ष जीवन भर निभाया था। उन्हें इतिहास नहीं, बल्कि हर भारतवासी के हृदय में बसने वाली राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा बताया गया। इस अवसर पर विशेष रूप से युवाओं से आग्रह किया गया कि वे महाराणा प्रताप के जीवन से साहस, नेतृत्व, राष्ट्रभक्ति, आत्मसम्मान और संघर्षशीलता की प्रेरणा लेकर समाज एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दें। यह भी जोर दिया गया कि आज भारत को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो अपने संस्कारों, संस्कृति और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानें। आयुष हॉस्पिटल, चित्तौड़गढ़ ने इस अवसर पर सभी नागरिकों को महाराणा प्रताप के आत्मबल, अनुशासन और दृढ़ संकल्प से प्रेरणा लेते हुए अपने जीवन में नित्य योग, आयुर्वेदिक दिनचर्या और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। हॉस्पिटल के अनुसार, योग शरीर, मन और आत्मा को सशक्त बनाता है, और स्वदेशी चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद हमारी हजारों वर्षों पुरानी वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक धरोहर है, जो स्वस्थ, निरोग और संतुलित जीवन का आधार है। भारतीय संस्कृति को केवल जीवन जीना नहीं, बल्कि स्वस्थ, संस्कारित, अनुशासित और सम्मानपूर्ण जीवन का मार्ग दिखाने वाली बताया गया। अंत में, सभी से महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलने और एक स्वस्थ, स्वाभिमानी, संस्कारित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लेने का आह्वान किया गया, यह दोहराते हुए कि जब तक सूर्य चंद्र रहेगा, मेवाड़ का गौरव अमर रहेगा।4
- हमेशा की भांति, सेठ जी के अनुयायियों को आज भी उनके लाइव दर्शन करने का अवसर प्रदान किया गया है। यह आमंत्रण भक्तों को उनके दर्शनों का लाभ उठाने के लिए दिया गया है।1