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बीकानेर बॉर्डर पर ‘ड्रोन वार’ नाकाम… खेत में उतरा हथियारों का साया,1 ड्रोन, 5 पिस्टल और 300 कारतूस जब्त

19 hrs ago
user_Duc News Rajsthan चैनल
Duc News Rajsthan चैनल
गंगानगर, श्री गंगानगर, राजस्थान•
19 hrs ago

बीकानेर बॉर्डर पर ‘ड्रोन वार’ नाकाम… खेत में उतरा हथियारों का साया,1 ड्रोन, 5 पिस्टल और 300 कारतूस जब्त

More news from राजस्थान and nearby areas
  • Ram Ram ji
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    Ram Ram ji
    user_जगदीश श्री गंगानगर
    जगदीश श्री गंगानगर
    Journalist गंगानगर, श्री गंगानगर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • भगत सिंह रेस्क्यू टीम श्री गंगानगर के पास आज सुबह कॉल आई थी। सद्भावना नगर से जहां पर बताया गया है कि शिखाधारी साही (हिस्ट्रिक्स इंडिका) है। जख्मी है। जिसे तुरंत रेस्क्यू किया जाए। भगत सिंह रेस्क्यू टीम श्री गंगानगर के संस्थापक राजेन्द्र आलसिखा मौके पर पहुंचे। और रेस्क्यू किया वेटरिनरी हॉस्पिटल श्रीगंगानगर में उसका ट्रीटमेंट किया और वन विभाग वालों को सौंप दिया था। वन विभाग वालों के पास रखने के लिए कोई भी पिंजरा या जाल नहीं था।
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    भगत सिंह रेस्क्यू टीम श्री गंगानगर के पास आज सुबह कॉल आई थी। सद्भावना नगर से जहां पर बताया गया है कि शिखाधारी साही (हिस्ट्रिक्स इंडिका) है। जख्मी है। जिसे तुरंत रेस्क्यू किया जाए। भगत सिंह रेस्क्यू टीम श्री गंगानगर के संस्थापक राजेन्द्र आलसिखा मौके पर पहुंचे। और रेस्क्यू किया वेटरिनरी हॉस्पिटल श्रीगंगानगर में उसका ट्रीटमेंट किया और वन विभाग वालों को सौंप दिया था। वन विभाग
वालों के पास रखने के लिए कोई भी पिंजरा या जाल नहीं था।
    user_Rajinder allsikha
    Rajinder allsikha
    NGO Worker गंगानगर, श्री गंगानगर, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • श्री गंगानगर ​अक्सर कहा जाता है कि बचपन का सबसे खूबसूरत हिस्सा उसके खिलौने होते हैं। लेकिन समाज की कड़वी सच्चाई यह भी है कि जहाँ एक ओर संपन्न परिवारों में बच्चे बड़े होने के बाद खिलौनों के ढेर अलमारियों में धूल फांकते रह जाते हैं, वहीं दूसरी ओर कई ऐसे बच्चे भी हैं जिनके लिए एक सुंदर खिलौना महज एक सपना बनकर रह जाता है। इसी खाई को पाटने और हर बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने के उद्देश्य से तपोवन ट्रस्ट, श्रीगंगानगर द्वारा एक नवीन और प्रेरणादायी प्रकल्प 'तपोवन खिलौना लाइब्रेरी' का शुभारंभ किया जा रहा है। ​इस अभियान का मूल मंत्र है— 'पुराने खिलौने, नई खुशियाँ'। इसका उद्देश्य उन खिलौनों को पुन: उपयोग में लाना है जो अब घरों में काम नहीं आ रहे, ताकि वे उन बच्चों के हाथों तक पहुँच सकें जो महंगे खिलौने खरीदने में असमर्थ हैं। यह न केवल संसाधनों के सदुपयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है, बल्कि समाज में साझा करने (sharing) की संस्कृति को भी बढ़ावा देता है। ​ ​इस प्रकल्प की सबसे विशेष और गौरवशाली बात यह है कि इसकी नींव और संचालन की जिम्मेदारी बच्चों और महिलाओं ने ही उठाई है। आदित्री, अक्षित और दिव्यांशी जैसे बच्चों ने जब मॉल और बाजारों में दूसरे बच्चों को खिलौनों के लिए तरसते देखा, तो उनके मन में यह विचार आया कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए जिससे हर बच्चे का बचपन खुशहाल हो सके। यही विचार आज एक संस्थागत रूप ले चुका है, जिसका सार-संभाल पूरी तरह से महिलाओं और बच्चों के दल द्वारा किया जाएगा। ​लाईब्रेरी की मुख्य विशेषताएँ: ​खिलौने ले जाने की सुविधा: बच्चे लाइब्रेरी से अपनी पसंद के खिलौने एक निश्चित अवधि के लिए घर ले जा सकेंगे और उन्हें वापस जमा करवाकर नए खिलौने ले जा सकेंगे। ​खेल केंद्र (Play Zone): केंद्र पर केवल खिलौने ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार की खेल सामग्री भी उपलब्ध होगी, जहाँ आंगनबाड़ी और स्कूलों के बच्चे आकर सामूहिक रूप से खेल सकते हैं। ​ बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए यहाँ समय-समय पर शिक्षाप्रद डॉक्यूमेंट्री फिल्में दिखाने की विशेष व्यवस्था भी की गई है। ​समाज के लिए एक संदेश ​तपोवन खिलौना लाइब्रेरी मात्र एक संग्रह केंद्र नहीं है, बल्कि यह संवेदनशीलता और सामूहिकता का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि यदि हम थोड़े से प्रयास करें, तो हम अपने बेकार पड़े सामान से किसी दूसरे के जीवन में खुशियों के रंग भर सकते हैं। ​"जब एक खिलौना एक हाथ से दूसरे हाथ में जाता है, तो वह केवल प्लास्टिक या लकड़ी का टुकड़ा नहीं होता, बल्कि वह एक बच्चे की उम्मीद और दूसरे की उदारता का मिलन होता है।" ​अपील: यदि आपके घर में भी ऐसे खिलौने हैं जो अब उपयोग में नहीं आ रहे और अच्छी स्थिति में हैं, तो उन्हें 'तपोवन खिलौना लाइब्रेरी' को दान करें और किसी अनजान चेहरे की मुस्कान का कारण बनें।
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    श्री गंगानगर 
​अक्सर कहा जाता है कि बचपन का सबसे खूबसूरत हिस्सा उसके खिलौने होते हैं। लेकिन समाज की कड़वी सच्चाई यह भी है कि जहाँ एक ओर संपन्न परिवारों में बच्चे बड़े होने के बाद खिलौनों के ढेर अलमारियों में धूल फांकते रह जाते हैं, वहीं दूसरी ओर कई ऐसे बच्चे भी हैं जिनके लिए एक सुंदर खिलौना महज एक सपना बनकर रह जाता है। इसी खाई को पाटने और हर बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने के उद्देश्य से तपोवन ट्रस्ट, श्रीगंगानगर द्वारा एक नवीन और प्रेरणादायी प्रकल्प 'तपोवन खिलौना लाइब्रेरी' का शुभारंभ किया जा रहा है।
​इस अभियान का मूल मंत्र है— 'पुराने खिलौने, नई खुशियाँ'। इसका उद्देश्य उन खिलौनों को पुन: उपयोग में लाना है जो अब घरों में काम नहीं आ रहे, ताकि वे उन बच्चों के हाथों तक पहुँच सकें जो महंगे खिलौने खरीदने में असमर्थ हैं। यह न केवल संसाधनों के सदुपयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है, बल्कि समाज में साझा करने (sharing) की संस्कृति को भी बढ़ावा देता है।
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​इस प्रकल्प की सबसे विशेष और गौरवशाली बात यह है कि इसकी नींव और संचालन की जिम्मेदारी बच्चों और महिलाओं ने ही उठाई है। आदित्री, अक्षित और दिव्यांशी जैसे बच्चों ने जब मॉल और बाजारों में दूसरे बच्चों को खिलौनों के लिए तरसते देखा, तो उनके मन में यह विचार आया कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए जिससे हर बच्चे का बचपन खुशहाल हो सके। यही विचार आज एक संस्थागत रूप ले चुका है, जिसका सार-संभाल पूरी तरह से महिलाओं और बच्चों के दल द्वारा किया जाएगा।
​लाईब्रेरी की मुख्य विशेषताएँ:
​खिलौने ले जाने की सुविधा: बच्चे लाइब्रेरी से अपनी पसंद के खिलौने एक निश्चित अवधि के लिए घर ले जा सकेंगे और उन्हें वापस जमा करवाकर नए खिलौने ले जा सकेंगे।
​खेल केंद्र (Play Zone): केंद्र पर केवल खिलौने ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार की खेल सामग्री भी उपलब्ध होगी, जहाँ आंगनबाड़ी और स्कूलों के बच्चे आकर सामूहिक रूप से खेल सकते हैं।
​
बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए यहाँ समय-समय पर शिक्षाप्रद डॉक्यूमेंट्री फिल्में दिखाने की विशेष व्यवस्था भी की गई है।
​समाज के लिए एक संदेश
​तपोवन खिलौना लाइब्रेरी मात्र एक संग्रह केंद्र नहीं है, बल्कि यह संवेदनशीलता और सामूहिकता का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि यदि हम थोड़े से प्रयास करें, तो हम अपने बेकार पड़े सामान से किसी दूसरे के जीवन में खुशियों के रंग भर सकते हैं।
​"जब एक खिलौना एक हाथ से दूसरे हाथ में जाता है, तो वह केवल प्लास्टिक या लकड़ी का टुकड़ा नहीं होता, बल्कि वह एक बच्चे की उम्मीद और दूसरे की उदारता का मिलन होता है।"
​अपील: यदि आपके घर में भी ऐसे खिलौने हैं जो अब उपयोग में नहीं आ रहे और अच्छी स्थिति में हैं, तो उन्हें 'तपोवन खिलौना लाइब्रेरी' को दान करें और किसी अनजान चेहरे की मुस्कान का कारण बनें।
    user_Ganganagar News
    Ganganagar News
    Mineral water company गंगानगर, श्री गंगानगर, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • Post by Duc News Rajsthan चैनल
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    Post by Duc News Rajsthan चैनल
    user_Duc News Rajsthan चैनल
    Duc News Rajsthan चैनल
    गंगानगर, श्री गंगानगर, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • खाकी का मानवीय चेहरा: जब थाने की बेटी की विदाई में पूरा पुलिस महकमा ने भरा 'मायरा' हनुमानगढ़ ​अक्सर पुलिस की पहचान अनुशासन और सख्ती से होती है, लेकिन राजस्थान के हनुमानगढ़ में पुलिसकर्मियों ने जो मिसाल पेश की है, उसने साबित कर दिया कि वर्दी के भीतर एक संवेदनशील और परोपकारी दिल भी धड़कता है। हनुमानगढ़ जंक्शन थाने में कार्यरत सफाईकर्मी धीरज कुमार की बेटी पूजा के विवाह समारोह में पुलिस महकमा केवल सुरक्षा का जिम्मा संभालने नहीं, बल्कि एक परिवार के रूप में 'मायरा' (भात) भरने पहुँचा।
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    खाकी का मानवीय चेहरा: जब थाने की बेटी की विदाई में पूरा पुलिस महकमा ने भरा  'मायरा'
हनुमानगढ़
​अक्सर पुलिस की पहचान अनुशासन और सख्ती से होती है, लेकिन राजस्थान के हनुमानगढ़ में पुलिसकर्मियों ने जो मिसाल पेश की है, उसने साबित कर दिया कि वर्दी के भीतर एक संवेदनशील और परोपकारी दिल भी धड़कता है। हनुमानगढ़ जंक्शन थाने में कार्यरत सफाईकर्मी धीरज कुमार की बेटी पूजा के विवाह समारोह में पुलिस महकमा केवल सुरक्षा का जिम्मा संभालने नहीं, बल्कि एक परिवार के रूप में 'मायरा' (भात) भरने पहुँचा।
    user_श्रीगंगानगर समाचार
    श्रीगंगानगर समाचार
    गंगानगर, श्री गंगानगर, राजस्थान•
    17 hrs ago
  • Post by Vinod kumar पत्रकार
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    Post by Vinod kumar पत्रकार
    user_Vinod kumar पत्रकार
    Vinod kumar पत्रकार
    गंगानगर, श्री गंगानगर, राजस्थान•
    18 hrs ago
  • मैं @rkheta038 के रूप में Instagra
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    मैं @rkheta038 के रूप में Instagra
    user_खेता राम नायक गूगल ईया
    खेता राम नायक गूगल ईया
    कलांवाली, सिरसा, हरियाणा•
    19 hrs ago
  • बचपन की मुस्कान को मिलेंगे नए पंख: तपोवन खिलौना (Toys) लाइब्रेरी की अनूठी पहल श्री गंगानगर (कृष्ण आसेरी) ​अक्सर कहा जाता है कि बचपन का सबसे खूबसूरत हिस्सा उसके खिलौने होते हैं। लेकिन समाज की कड़वी सच्चाई यह भी है कि जहाँ एक ओर संपन्न परिवारों में बच्चे बड़े होने के बाद खिलौनों के ढेर अलमारियों में धूल फांकते रह जाते हैं, वहीं दूसरी ओर कई ऐसे बच्चे भी हैं जिनके लिए एक सुंदर खिलौना महज एक सपना बनकर रह जाता है। इसी खाई को पाटने और हर बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने के उद्देश्य से तपोवन ट्रस्ट, श्रीगंगानगर द्वारा एक नवीन और प्रेरणादायी प्रकल्प 'तपोवन खिलौना लाइब्रेरी' का शुभारंभ किया जा रहा है। ​इस अभियान का मूल मंत्र है— 'पुराने खिलौने, नई खुशियाँ'। इसका उद्देश्य उन खिलौनों को पुन: उपयोग में लाना है जो अब घरों में काम नहीं आ रहे, ताकि वे उन बच्चों के हाथों तक पहुँच सकें जो महंगे खिलौने खरीदने में असमर्थ हैं। यह न केवल संसाधनों के सदुपयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है, बल्कि समाज में साझा करने (sharing) की संस्कृति को भी बढ़ावा देता है। ​ ​इस प्रकल्प की सबसे विशेष और गौरवशाली बात यह है कि इसकी नींव और संचालन की जिम्मेदारी बच्चों और महिलाओं ने ही उठाई है। आदित्री, अक्षित और दिव्यांशी जैसे बच्चों ने जब मॉल और बाजारों में दूसरे बच्चों को खिलौनों के लिए तरसते देखा, तो उनके मन में यह विचार आया कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए जिससे हर बच्चे का बचपन खुशहाल हो सके। यही विचार आज एक संस्थागत रूप ले चुका है, जिसका सार-संभाल पूरी तरह से महिलाओं और बच्चों के दल द्वारा किया जाएगा। ​लाईब्रेरी की मुख्य विशेषताएँ: ​खिलौने ले जाने की सुविधा: बच्चे लाइब्रेरी से अपनी पसंद के खिलौने एक निश्चित अवधि के लिए घर ले जा सकेंगे और उन्हें वापस जमा करवाकर नए खिलौने ले जा सकेंगे। ​खेल केंद्र (Play Zone): केंद्र पर केवल खिलौने ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार की खेल सामग्री भी उपलब्ध होगी, जहाँ आंगनबाड़ी और स्कूलों के बच्चे आकर सामूहिक रूप से खेल सकते हैं। ​ बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए यहाँ समय-समय पर शिक्षाप्रद डॉक्यूमेंट्री फिल्में दिखाने की विशेष व्यवस्था भी की गई है। ​समाज के लिए एक संदेश ​तपोवन खिलौना लाइब्रेरी मात्र एक संग्रह केंद्र नहीं है, बल्कि यह संवेदनशीलता और सामूहिकता का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि यदि हम थोड़े से प्रयास करें, तो हम अपने बेकार पड़े सामान से किसी दूसरे के जीवन में खुशियों के रंग भर सकते हैं। ​"जब एक खिलौना एक हाथ से दूसरे हाथ में जाता है, तो वह केवल प्लास्टिक या लकड़ी का टुकड़ा नहीं होता, बल्कि वह एक बच्चे की उम्मीद और दूसरे की उदारता का मिलन होता है।" ​अपील: यदि आपके घर में भी ऐसे खिलौने हैं जो अब उपयोग में नहीं आ रहे और अच्छी स्थिति में हैं, तो उन्हें 'तपोवन खिलौना लाइब्रेरी' को दान करें और किसी अनजान चेहरे की मुस्कान का कारण बनें।
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    बचपन की मुस्कान को मिलेंगे नए पंख: तपोवन खिलौना (Toys) लाइब्रेरी की अनूठी पहल
श्री गंगानगर (कृष्ण आसेरी) 
​अक्सर कहा जाता है कि बचपन का सबसे खूबसूरत हिस्सा उसके खिलौने होते हैं। लेकिन समाज की कड़वी सच्चाई यह भी है कि जहाँ एक ओर संपन्न परिवारों में बच्चे बड़े होने के बाद खिलौनों के ढेर अलमारियों में धूल फांकते रह जाते हैं, वहीं दूसरी ओर कई ऐसे बच्चे भी हैं जिनके लिए एक सुंदर खिलौना महज एक सपना बनकर रह जाता है। इसी खाई को पाटने और हर बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने के उद्देश्य से तपोवन ट्रस्ट, श्रीगंगानगर द्वारा एक नवीन और प्रेरणादायी प्रकल्प 'तपोवन खिलौना लाइब्रेरी' का शुभारंभ किया जा रहा है।
​इस अभियान का मूल मंत्र है— 'पुराने खिलौने, नई खुशियाँ'। इसका उद्देश्य उन खिलौनों को पुन: उपयोग में लाना है जो अब घरों में काम नहीं आ रहे, ताकि वे उन बच्चों के हाथों तक पहुँच सकें जो महंगे खिलौने खरीदने में असमर्थ हैं। यह न केवल संसाधनों के सदुपयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है, बल्कि समाज में साझा करने (sharing) की संस्कृति को भी बढ़ावा देता है।
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​इस प्रकल्प की सबसे विशेष और गौरवशाली बात यह है कि इसकी नींव और संचालन की जिम्मेदारी बच्चों और महिलाओं ने ही उठाई है। आदित्री, अक्षित और दिव्यांशी जैसे बच्चों ने जब मॉल और बाजारों में दूसरे बच्चों को खिलौनों के लिए तरसते देखा, तो उनके मन में यह विचार आया कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए जिससे हर बच्चे का बचपन खुशहाल हो सके। यही विचार आज एक संस्थागत रूप ले चुका है, जिसका सार-संभाल पूरी तरह से महिलाओं और बच्चों के दल द्वारा किया जाएगा।
​लाईब्रेरी की मुख्य विशेषताएँ:
​खिलौने ले जाने की सुविधा: बच्चे लाइब्रेरी से अपनी पसंद के खिलौने एक निश्चित अवधि के लिए घर ले जा सकेंगे और उन्हें वापस जमा करवाकर नए खिलौने ले जा सकेंगे।
​खेल केंद्र (Play Zone): केंद्र पर केवल खिलौने ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार की खेल सामग्री भी उपलब्ध होगी, जहाँ आंगनबाड़ी और स्कूलों के बच्चे आकर सामूहिक रूप से खेल सकते हैं।
​
बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए यहाँ समय-समय पर शिक्षाप्रद डॉक्यूमेंट्री फिल्में दिखाने की विशेष व्यवस्था भी की गई है।
​समाज के लिए एक संदेश
​तपोवन खिलौना लाइब्रेरी मात्र एक संग्रह केंद्र नहीं है, बल्कि यह संवेदनशीलता और सामूहिकता का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि यदि हम थोड़े से प्रयास करें, तो हम अपने बेकार पड़े सामान से किसी दूसरे के जीवन में खुशियों के रंग भर सकते हैं।
​"जब एक खिलौना एक हाथ से दूसरे हाथ में जाता है, तो वह केवल प्लास्टिक या लकड़ी का टुकड़ा नहीं होता, बल्कि वह एक बच्चे की उम्मीद और दूसरे की उदारता का मिलन होता है।"
​अपील: यदि आपके घर में भी ऐसे खिलौने हैं जो अब उपयोग में नहीं आ रहे और अच्छी स्थिति में हैं, तो उन्हें 'तपोवन खिलौना लाइब्रेरी' को दान करें और किसी अनजान चेहरे की मुस्कान का कारण बनें।
    user_श्रीगंगानगर समाचार
    श्रीगंगानगर समाचार
    गंगानगर, श्री गंगानगर, राजस्थान•
    18 hrs ago
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