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Ram Ram ji
जगदीश श्री गंगानगर
Ram Ram ji
- जगदीश श्री गंगानगरगंगानगर, श्री गंगानगर, राजस्थानRam Ram ji2 hrs ago
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- Ram Ram ji1
- भगत सिंह रेस्क्यू टीम श्री गंगानगर के पास आज सुबह कॉल आई थी। सद्भावना नगर से जहां पर बताया गया है कि शिखाधारी साही (हिस्ट्रिक्स इंडिका) है। जख्मी है। जिसे तुरंत रेस्क्यू किया जाए। भगत सिंह रेस्क्यू टीम श्री गंगानगर के संस्थापक राजेन्द्र आलसिखा मौके पर पहुंचे। और रेस्क्यू किया वेटरिनरी हॉस्पिटल श्रीगंगानगर में उसका ट्रीटमेंट किया और वन विभाग वालों को सौंप दिया था। वन विभाग वालों के पास रखने के लिए कोई भी पिंजरा या जाल नहीं था।1
- श्री गंगानगर अक्सर कहा जाता है कि बचपन का सबसे खूबसूरत हिस्सा उसके खिलौने होते हैं। लेकिन समाज की कड़वी सच्चाई यह भी है कि जहाँ एक ओर संपन्न परिवारों में बच्चे बड़े होने के बाद खिलौनों के ढेर अलमारियों में धूल फांकते रह जाते हैं, वहीं दूसरी ओर कई ऐसे बच्चे भी हैं जिनके लिए एक सुंदर खिलौना महज एक सपना बनकर रह जाता है। इसी खाई को पाटने और हर बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने के उद्देश्य से तपोवन ट्रस्ट, श्रीगंगानगर द्वारा एक नवीन और प्रेरणादायी प्रकल्प 'तपोवन खिलौना लाइब्रेरी' का शुभारंभ किया जा रहा है। इस अभियान का मूल मंत्र है— 'पुराने खिलौने, नई खुशियाँ'। इसका उद्देश्य उन खिलौनों को पुन: उपयोग में लाना है जो अब घरों में काम नहीं आ रहे, ताकि वे उन बच्चों के हाथों तक पहुँच सकें जो महंगे खिलौने खरीदने में असमर्थ हैं। यह न केवल संसाधनों के सदुपयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है, बल्कि समाज में साझा करने (sharing) की संस्कृति को भी बढ़ावा देता है। इस प्रकल्प की सबसे विशेष और गौरवशाली बात यह है कि इसकी नींव और संचालन की जिम्मेदारी बच्चों और महिलाओं ने ही उठाई है। आदित्री, अक्षित और दिव्यांशी जैसे बच्चों ने जब मॉल और बाजारों में दूसरे बच्चों को खिलौनों के लिए तरसते देखा, तो उनके मन में यह विचार आया कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए जिससे हर बच्चे का बचपन खुशहाल हो सके। यही विचार आज एक संस्थागत रूप ले चुका है, जिसका सार-संभाल पूरी तरह से महिलाओं और बच्चों के दल द्वारा किया जाएगा। लाईब्रेरी की मुख्य विशेषताएँ: खिलौने ले जाने की सुविधा: बच्चे लाइब्रेरी से अपनी पसंद के खिलौने एक निश्चित अवधि के लिए घर ले जा सकेंगे और उन्हें वापस जमा करवाकर नए खिलौने ले जा सकेंगे। खेल केंद्र (Play Zone): केंद्र पर केवल खिलौने ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार की खेल सामग्री भी उपलब्ध होगी, जहाँ आंगनबाड़ी और स्कूलों के बच्चे आकर सामूहिक रूप से खेल सकते हैं। बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए यहाँ समय-समय पर शिक्षाप्रद डॉक्यूमेंट्री फिल्में दिखाने की विशेष व्यवस्था भी की गई है। समाज के लिए एक संदेश तपोवन खिलौना लाइब्रेरी मात्र एक संग्रह केंद्र नहीं है, बल्कि यह संवेदनशीलता और सामूहिकता का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि यदि हम थोड़े से प्रयास करें, तो हम अपने बेकार पड़े सामान से किसी दूसरे के जीवन में खुशियों के रंग भर सकते हैं। "जब एक खिलौना एक हाथ से दूसरे हाथ में जाता है, तो वह केवल प्लास्टिक या लकड़ी का टुकड़ा नहीं होता, बल्कि वह एक बच्चे की उम्मीद और दूसरे की उदारता का मिलन होता है।" अपील: यदि आपके घर में भी ऐसे खिलौने हैं जो अब उपयोग में नहीं आ रहे और अच्छी स्थिति में हैं, तो उन्हें 'तपोवन खिलौना लाइब्रेरी' को दान करें और किसी अनजान चेहरे की मुस्कान का कारण बनें।1
- Post by Duc News Rajsthan चैनल1
- खाकी का मानवीय चेहरा: जब थाने की बेटी की विदाई में पूरा पुलिस महकमा ने भरा 'मायरा' हनुमानगढ़ अक्सर पुलिस की पहचान अनुशासन और सख्ती से होती है, लेकिन राजस्थान के हनुमानगढ़ में पुलिसकर्मियों ने जो मिसाल पेश की है, उसने साबित कर दिया कि वर्दी के भीतर एक संवेदनशील और परोपकारी दिल भी धड़कता है। हनुमानगढ़ जंक्शन थाने में कार्यरत सफाईकर्मी धीरज कुमार की बेटी पूजा के विवाह समारोह में पुलिस महकमा केवल सुरक्षा का जिम्मा संभालने नहीं, बल्कि एक परिवार के रूप में 'मायरा' (भात) भरने पहुँचा।2
- Post by Vinod kumar पत्रकार10
- मैं @rkheta038 के रूप में Instagra1
- बचपन की मुस्कान को मिलेंगे नए पंख: तपोवन खिलौना (Toys) लाइब्रेरी की अनूठी पहल श्री गंगानगर (कृष्ण आसेरी) अक्सर कहा जाता है कि बचपन का सबसे खूबसूरत हिस्सा उसके खिलौने होते हैं। लेकिन समाज की कड़वी सच्चाई यह भी है कि जहाँ एक ओर संपन्न परिवारों में बच्चे बड़े होने के बाद खिलौनों के ढेर अलमारियों में धूल फांकते रह जाते हैं, वहीं दूसरी ओर कई ऐसे बच्चे भी हैं जिनके लिए एक सुंदर खिलौना महज एक सपना बनकर रह जाता है। इसी खाई को पाटने और हर बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाने के उद्देश्य से तपोवन ट्रस्ट, श्रीगंगानगर द्वारा एक नवीन और प्रेरणादायी प्रकल्प 'तपोवन खिलौना लाइब्रेरी' का शुभारंभ किया जा रहा है। इस अभियान का मूल मंत्र है— 'पुराने खिलौने, नई खुशियाँ'। इसका उद्देश्य उन खिलौनों को पुन: उपयोग में लाना है जो अब घरों में काम नहीं आ रहे, ताकि वे उन बच्चों के हाथों तक पहुँच सकें जो महंगे खिलौने खरीदने में असमर्थ हैं। यह न केवल संसाधनों के सदुपयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है, बल्कि समाज में साझा करने (sharing) की संस्कृति को भी बढ़ावा देता है। इस प्रकल्प की सबसे विशेष और गौरवशाली बात यह है कि इसकी नींव और संचालन की जिम्मेदारी बच्चों और महिलाओं ने ही उठाई है। आदित्री, अक्षित और दिव्यांशी जैसे बच्चों ने जब मॉल और बाजारों में दूसरे बच्चों को खिलौनों के लिए तरसते देखा, तो उनके मन में यह विचार आया कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए जिससे हर बच्चे का बचपन खुशहाल हो सके। यही विचार आज एक संस्थागत रूप ले चुका है, जिसका सार-संभाल पूरी तरह से महिलाओं और बच्चों के दल द्वारा किया जाएगा। लाईब्रेरी की मुख्य विशेषताएँ: खिलौने ले जाने की सुविधा: बच्चे लाइब्रेरी से अपनी पसंद के खिलौने एक निश्चित अवधि के लिए घर ले जा सकेंगे और उन्हें वापस जमा करवाकर नए खिलौने ले जा सकेंगे। खेल केंद्र (Play Zone): केंद्र पर केवल खिलौने ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार की खेल सामग्री भी उपलब्ध होगी, जहाँ आंगनबाड़ी और स्कूलों के बच्चे आकर सामूहिक रूप से खेल सकते हैं। बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए यहाँ समय-समय पर शिक्षाप्रद डॉक्यूमेंट्री फिल्में दिखाने की विशेष व्यवस्था भी की गई है। समाज के लिए एक संदेश तपोवन खिलौना लाइब्रेरी मात्र एक संग्रह केंद्र नहीं है, बल्कि यह संवेदनशीलता और सामूहिकता का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि यदि हम थोड़े से प्रयास करें, तो हम अपने बेकार पड़े सामान से किसी दूसरे के जीवन में खुशियों के रंग भर सकते हैं। "जब एक खिलौना एक हाथ से दूसरे हाथ में जाता है, तो वह केवल प्लास्टिक या लकड़ी का टुकड़ा नहीं होता, बल्कि वह एक बच्चे की उम्मीद और दूसरे की उदारता का मिलन होता है।" अपील: यदि आपके घर में भी ऐसे खिलौने हैं जो अब उपयोग में नहीं आ रहे और अच्छी स्थिति में हैं, तो उन्हें 'तपोवन खिलौना लाइब्रेरी' को दान करें और किसी अनजान चेहरे की मुस्कान का कारण बनें।2