राजस्थान के डूंगरपुर जिले में अवैध पशु तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत चौरासी थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। सीमलवाड़ा में हुई इस कार्रवाई में क्रूरतापूर्वक परिवहन की जा रही 38 भैंसों को मुक्त कराया गया और इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देशानुसार तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खींवसिंह एवं वृत्ताधिकारी मदनलाल विश्नोई के पर्यवेक्षण में चौरासी थाना प्रभारी भंवर सिंह राठौड़ के नेतृत्व में एक पुलिस दल ने मुखबिर की सूचना पर वैजा पुलिस चौकी के सामने नाकाबंदी की। नाकाबंदी के दौरान एक संदिग्ध मालवाहक वाहन को रोका गया, जिसकी तलाशी लेने पर उसके भीतर एक विशेष दो मंजिला ढांचा और दोहरे विभाजन की व्यवस्था मिली। इस गुप्त संरचना में 38 भैंसों को अमानवीय तरीके से ठूंस-ठूंसकर भरा गया था, उनके पैर और मुंह रस्सियों से बांधे हुए थे। पशुओं की दयनीय स्थिति देखकर पुलिस दल ने तुरंत सभी भैंसों को वाहन से नीचे उतरवाया और उनके लिए चारे-पानी की व्यवस्था की। पुलिस ने पशुओं के परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे वाहन को जब्त कर लिया और पशुओं के साथ क्रूरता बरतने के आरोप में चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी अवैध रूप से पशुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा रहे थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस्तेखान पुत्र ईस्माईल खान मुल्तानी (55 वर्ष), अरुण पुत्र अयूब मुल्तानी (36 वर्ष), इनिस पुत्र गुलु मुल्तानी (32 वर्ष) तथा मोहम्मद जुनैद पुत्र जावेद मुल्तानी (19 वर्ष) के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी गुजरात राज्य के अरवल्ली जिले के मोडासा क्षेत्र के निवासी हैं। पुलिस अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि पशुओं के साथ क्रूरता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिले में अवैध पशु तस्करी तथा पशु क्रूरता के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा, जिसमें ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस अभियान में थाना प्रभारी भंवर सिंह राठौड़, सहायक उपनिरीक्षक ईश्वरलाल रोत, कांस्टेबल पंकज कुमार, लोकेश कुमार तथा वीरमल कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन पशुओं को कहां से लाया गया था और उन्हें किस गंतव्य तक ले जाया जा रहा था।
राजस्थान के डूंगरपुर जिले में अवैध पशु तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत चौरासी थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। सीमलवाड़ा में हुई इस कार्रवाई में क्रूरतापूर्वक परिवहन की जा रही 38 भैंसों को मुक्त कराया गया और इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देशानुसार तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खींवसिंह एवं वृत्ताधिकारी मदनलाल विश्नोई के पर्यवेक्षण में चौरासी थाना प्रभारी भंवर सिंह राठौड़ के नेतृत्व में एक पुलिस दल ने मुखबिर की सूचना पर वैजा पुलिस चौकी के सामने नाकाबंदी की। नाकाबंदी के दौरान एक संदिग्ध मालवाहक वाहन को रोका गया, जिसकी तलाशी लेने पर उसके भीतर एक विशेष दो मंजिला ढांचा और दोहरे
विभाजन की व्यवस्था मिली। इस गुप्त संरचना में 38 भैंसों को अमानवीय तरीके से ठूंस-ठूंसकर भरा गया था, उनके पैर और मुंह रस्सियों से बांधे हुए थे। पशुओं की दयनीय स्थिति देखकर पुलिस दल ने तुरंत सभी भैंसों को वाहन से नीचे उतरवाया और उनके लिए चारे-पानी की व्यवस्था की। पुलिस ने पशुओं के परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे वाहन को जब्त कर लिया और पशुओं के साथ क्रूरता बरतने के आरोप में चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी अवैध रूप से पशुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा रहे थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस्तेखान पुत्र ईस्माईल खान मुल्तानी (55 वर्ष), अरुण पुत्र अयूब मुल्तानी (36 वर्ष), इनिस पुत्र गुलु मुल्तानी (32 वर्ष) तथा
मोहम्मद जुनैद पुत्र जावेद मुल्तानी (19 वर्ष) के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी गुजरात राज्य के अरवल्ली जिले के मोडासा क्षेत्र के निवासी हैं। पुलिस अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि पशुओं के साथ क्रूरता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिले में अवैध पशु तस्करी तथा पशु क्रूरता के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा, जिसमें ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस अभियान में थाना प्रभारी भंवर सिंह राठौड़, सहायक उपनिरीक्षक ईश्वरलाल रोत, कांस्टेबल पंकज कुमार, लोकेश कुमार तथा वीरमल कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन पशुओं को कहां से लाया गया था और उन्हें किस गंतव्य तक ले जाया जा रहा था।
- राजस्थान के डूंगरपुर जिले में अवैध पशु तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत चौरासी थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। सीमलवाड़ा में हुई इस कार्रवाई में क्रूरतापूर्वक परिवहन की जा रही 38 भैंसों को मुक्त कराया गया और इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देशानुसार तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक खींवसिंह एवं वृत्ताधिकारी मदनलाल विश्नोई के पर्यवेक्षण में चौरासी थाना प्रभारी भंवर सिंह राठौड़ के नेतृत्व में एक पुलिस दल ने मुखबिर की सूचना पर वैजा पुलिस चौकी के सामने नाकाबंदी की। नाकाबंदी के दौरान एक संदिग्ध मालवाहक वाहन को रोका गया, जिसकी तलाशी लेने पर उसके भीतर एक विशेष दो मंजिला ढांचा और दोहरे विभाजन की व्यवस्था मिली। इस गुप्त संरचना में 38 भैंसों को अमानवीय तरीके से ठूंस-ठूंसकर भरा गया था, उनके पैर और मुंह रस्सियों से बांधे हुए थे। पशुओं की दयनीय स्थिति देखकर पुलिस दल ने तुरंत सभी भैंसों को वाहन से नीचे उतरवाया और उनके लिए चारे-पानी की व्यवस्था की। पुलिस ने पशुओं के परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे वाहन को जब्त कर लिया और पशुओं के साथ क्रूरता बरतने के आरोप में चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपी अवैध रूप से पशुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा रहे थे। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस्तेखान पुत्र ईस्माईल खान मुल्तानी (55 वर्ष), अरुण पुत्र अयूब मुल्तानी (36 वर्ष), इनिस पुत्र गुलु मुल्तानी (32 वर्ष) तथा मोहम्मद जुनैद पुत्र जावेद मुल्तानी (19 वर्ष) के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी गुजरात राज्य के अरवल्ली जिले के मोडासा क्षेत्र के निवासी हैं। पुलिस अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि पशुओं के साथ क्रूरता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिले में अवैध पशु तस्करी तथा पशु क्रूरता के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाएगा, जिसमें ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस अभियान में थाना प्रभारी भंवर सिंह राठौड़, सहायक उपनिरीक्षक ईश्वरलाल रोत, कांस्टेबल पंकज कुमार, लोकेश कुमार तथा वीरमल कुमार ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन पशुओं को कहां से लाया गया था और उन्हें किस गंतव्य तक ले जाया जा रहा था।3
- राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी 'वन्दे गंगाजल' अभियान के तहत धम्बोला कस्बे में तालाब की पाल पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जल संरक्षण एवं जल स्रोतों के संवर्धन का संदेश देना और इसमें जनभागीदारी को बढ़ावा देना था। इस अवसर पर जिला कलक्टर देशपाल, उपखण्ड अधिकारी संजय चरपोटा, विकास अधिकारी ललित पंड्या, भाजपा प्रत्याशी करीलाल ननोमा, सिमलवाड़ा मंडल अध्यक्ष परेश पाटीदार सहित कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में तालाब किनारे विधिवत पूजा-अर्चना कर जल स्रोतों के संरक्षण का संकल्प लिया गया। इसके पश्चात, जिला कलक्टर देशपाल सहित अन्य अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने सक्रिय रूप से श्रमदान करते हुए तालाब की साफ-सफाई और संरक्षण कार्यों में अपना योगदान दिया। मौके पर उपस्थित अधिकारियों ने जोर देते हुए कहा कि जल ही जीवन का आधार है और जल स्रोतों का संरक्षण एक सामूहिक जिम्मेदारी है। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि जल संरक्षण के प्रयास केवल जनसहभागिता से ही सफल हो सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों को वर्षा जल संचयन, जल बचत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया गया। अभियान के तहत क्षेत्र के जल स्रोतों को स्वच्छ एवं संरक्षित रखने का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया।2
- डूंगरपुर जिला क्षेत्र की चिखली पंचायत समिति में बुधवार शाम करीब 6 बजे अचानक मौसम का मिजाज बदलने से भारी तबाही हुई है। तेज आंधी-तूफान के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने पूरे क्षेत्र में जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। ढूंढी कुआं, रोयडा, सेंडोला, गुंदलारा, नई बस्ती बड़गमा, शीशॉट, डूंगर, दरियाटी, मीठी लिमड़ी, डूंगर सारण, गंदेरी और पंचकुंडी पियोला सहित आस-पास के ग्रामीण इलाकों में प्रकृति का सबसे अधिक प्रकोप देखने को मिला है, जहाँ कई ग्रामीणों के आशियाने और रोजगार के साधन पूरी तरह उजड़ गए हैं। तूफान की रफ्तार इतनी तेज थी कि गांवों में दर्जनों कच्चे-पक्के मकानों के ऊपर लगे केलू और टीन शेड भरभरा कर उड़ गए। ढूंढी निवासी देवा पिता वालु डिंडोर के मकान के टीन शेड पूरी तरह उड़ गए, जिससे पूरे घर में पानी भर गया; घटना के समय उनकी दुकान के टीन शेड भी हवा में उड़ गए, और उन्होंने बड़ी मुश्किल से भागकर अपनी जान बचाई। इसी तरह कुआं निवासी हुका पिता वेला पारगी की दुकान के शेड उड़ने से भारी आर्थिक नुकसान हुआ। ढूंढी निवासी सरदेव के गैरेज के टीन शेड भी हवा में उड़ गए, वहीं ढूंढी के ही रमण पिता भेम के मकान पर लगे सीमेंट के शेड उड़ने से उनके घर में भारी मात्रा में पानी भर गया और उन्हें काफी नुकसान हुआ। कुआं न्यू कॉलोनी में पोपट पिता वीरचंद डामोर के सब्जी के ठेले के शेड उड़ गए, जिससे सारी सब्जी सड़क पर बिखर गई और बड़ा नुकसान हुआ। ढूंढी कुआं, रोयदा और सेंडोला सहित प्रभावित गांवों में घरों के भीतर पानी भरने से लोगों का घरेलू सामान, राशन, अनाज और कपड़े पूरी तरह भीग कर खराब हो चुके हैं, जिससे कई परिवारों के सामने सिर छुपाने और खाने-पीने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा, क्षेत्र में कई जगहों पर पेड़ धराशायी हो गए और विद्युत आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है।4
- डूंगरपुर जिले में अवैध पशु तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई में पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। चौरासी पुलिस थाना ने एक ट्रक में बनाए गए डबल पार्टीशन का भंडाफोड़ करते हुए 38 भैंसों को बेहद क्रूरता से ठूंस-ठूंसकर ले जाए जाने का मामला पकड़ा है। तस्करी के इस तरीके में, ट्रक के भीतर एक दो मंजिला ढांचा तैयार किया गया था और भैंसों के मुँह तथा पैर रस्सियों से बेरहमी से बाँध दिए गए थे। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उक्त ट्रक को जब्त कर लिया और इस मामले से जुड़े चार आरोपियों को भी गिरफ्तार किया। सभी 38 भैंसों को सुरक्षित रूप से ट्रक से निकालकर उनके लिए चारा-पानी की उचित व्यवस्था की गई।1
- आज सुराता में कुदरत का कहर बरपा है, जिसके कारण क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है।1
- डूंगरपुर जिले के छाणी मगरी क्षेत्र में आए तेज आंधी तूफान के कारण व्यापक नुकसान हुआ है। इस तूफान से कई घरों की केलू और टिन शेड की छतें उड़ गईं। बड़े-बड़े आम के पेड़ भी गिर गए, जिससे सड़क पर आवागमन में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। छाणी मगरी धाम के आसपास के इलाकों में भी आंधी तूफान ने भारी क्षति पहुंचाई है।1
- डूंगरपुर में 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' के तहत आयोजित मीडिया राउंड टेबल में मीडिया ने जल संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बुधवार, 3 जून को जिला परिषद के ईडीपी सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में जिला कलक्टर देशलदान ने मीडिया का आभार व्यक्त करते हुए संबोधित किया। इस अवसर पर, जिला कलक्टर देशलदान ने अभियान के तहत किए गए कार्यों का विवरण दिया, जिसमें पिछले वर्ष के कार्यों का प्रभाव, पहाड़ियों पर बने चेकडेम, शहरी संरचनाएं और जल संरचनाओं से बरसात का पानी रुकने से वेस्टलैंड का वॉटर हाउस में बदलना शामिल था। उन्होंने बताया कि पानी के व्यर्थ बहने से रुकने के कारण भूजल स्तर में वृद्धि हुई है, पहाड़ियां हरी-भरी हुई हैं, भूमि में नमी बढ़ी है, चारागाह विकसित हुए हैं और पानी की उपलब्धता बढ़ी है, जिससे अभियान की सफलता स्पष्ट रूप से दिख रही है। उन्होंने इस वर्ष के लिए पारंपरिक जल स्रोतों की साफ-सफाई, बड़े तालाबों और एनीकट की साफ-सफाई, तथा जागरूकता कार्यक्रमों की भी जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि पुराने जल स्रोतों को साफ कर पेयजल योजनाओं से जोड़ने और 'हरियालो राजस्थान' के तहत प्रत्येक ब्लॉक में एक मॉडल फलदार बगीचा विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत में सहायक निदेशक सूचना एवं जनसंपर्क श्रीमती छाया चौबीसा और वाटर शेड अधीक्षण अभियंता मूलाराम सोलंकी ने जिला कलक्टर और सीईओ सहित सभी मीडिया कर्मियों का उपरणा ओढ़ाकर स्वागत किया। मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं नोडल अधिकारी वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान, हनुमान सिंह राठौड़ ने पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, हरियालो राजस्थान, कर्मभूमि से मातृभूमि, और जल संरक्षण स्रोतों के संरक्षण जैसे अभियान के अंतर्गत किए गए कार्यों की विस्तृत जानकारी दी, और मीडिया की सोशल ऑडिट भूमिका को बहुत महत्वपूर्ण बताया। अधिशासी अभियंता वाटर शेड संदीप पांडे ने जल की वर्तमान उपलब्धता, भूजल स्तर, डार्क ज़ोन, भविष्य में पानी की उपलब्धता की स्थिति, वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान का महत्व, तथा गत वर्ष के कार्यों और उनके प्रभाव पर एक सराहनीय पावर प्रेजेंटेशन दिया, जिसमें अधिशासी अभियंता रवि कटारा, सहायक अभियंता प्रतिभा कटारा, और लेखाधिकारी प्रतीक जैन ने भी सहयोग किया। कार्यक्रम के अंत में वाटर शेड अधीक्षण अभियंता मूलाराम सोलंकी ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उद्योग विभाग महाप्रबंधक भगवान दास और एपीआरओ मोहन खराड़ी सहित मीडिया कर्मी, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक जनसंपर्क ने किया। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने जल संरक्षण करने, प्लास्टिक मुक्त बनाने, और पर्यावरण संरक्षण करने का संकल्प भी लिया।3
- बुधवार शाम सीमलवाड़ा क्षेत्र में मौसम ने अचानक करवट ली, जहाँ दिनभर की भीषण गर्मी और उमस के बाद तेज हवाओं से राहत मिली। हालांकि, कुछ ही देर बाद शुरू हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने पूरे जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया, जिससे क्षेत्र के कई स्थानों पर भारी नुकसान की खबरें सामने आईं। शाम होते ही आसमान में घने बादल छा गए और तेज हवाएं चलने लगीं, जिसके तुरंत बाद भारी बारिश और कई क्षेत्रों में ओले गिरने लगे। इससे सड़कों पर पानी भर गया, जिससे आवागमन बाधित हुआ और लोगों को काफी परेशानी हुई। बाजारों में मौजूद लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागे, वहीं दोपहिया वाहन चालक भी बारिश से बचने के लिए इधर-उधर शरण लेते दिखाई दिए। तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण कई स्थानों पर पेड़ गिरे, जिससे कुछ मार्गों पर आवाजाही प्रभावित हुई और लोगों को वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़े। बांसिया सागवाड़ा मार्ग पर भी बड़े-बड़े पेड़ गिरने से वाहनों की आवाजाही पर असर पड़ा। लोक निर्माण विभाग खंड सीमलवाड़ा के सहायक अभियंता शैलेश रोत ने तत्काल जेसीबी की व्यवस्था कर पेड़ों को हटवाया और आवाजाही सुचारू करवाई। ग्रामीण क्षेत्रों सहित विभिन्न गांवों और कस्बों में कई मकानों को नुकसान पहुँचा। कई घरों के टीन शेड उखड़ गए और कुछ स्थानों पर मकानों की छतों को भी क्षति पहुँची। चाड़ोली गाँव में विजय कलाल के घर के आँगन में खड़ी कार पर ईंटें गिरने से कार क्षतिग्रस्त हो गई, और कई विद्युत पोल भी उखड़ गए। चाड़ोली के सरपंच रमेश भगोरा ने बताया कि इस आंधी-बारिश से क्षेत्र में काफी नुकसान हुआ है, जिसमें कई मकानों से केलू (छत के टाइल्स) गिर गए। धंबोला कस्बे में सीमलवाड़ा मार्ग पर मुख्य सड़क पर बारिश का पानी जमा होने से सड़क तालाब में तब्दील हो गई, क्योंकि दोनों ओर पानी की निकासी नहीं हो पा रही थी। देर शाम तक किसी जनहानि की सूचना नहीं मिली थी, लेकिन व्यापक रूप से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। बारिश और ओलावृष्टि शुरू होते ही कई क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति भी बाधित हो गई, जिससे लोगों को अंधेरे और गर्मी दोनों की समस्या झेलनी पड़ी। विद्युत विभाग की टीमों ने आपूर्ति बहाल करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। अचानक हुई बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली, लेकिन तेज हवाओं, ओलावृष्टि और बारिश के कारण किसानों और आमजन की चिंताएं बढ़ गई हैं। कई ग्रामीण क्षेत्रों से खेतों में खड़ी फसलों और बागवानी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी मौसम में बदलाव की संभावना व्यक्त की है, जिसके मद्देनजर प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने, पेड़ों और जर्जर भवनों के पास खड़े नहीं होने तथा आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलने की अपील की है।1