सोनभद्र जिले के दुद्धी कस्बे में शुक्रवार को नगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोगों ने मिलकर पारंपरिक मोहर्रम जुलूस निकाला। यह जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जिसमें समुदाय की एकता और सांस्कृतिक धरोहर की स्पष्ट झलक देखने को मिली। जुलूस में ताज़िये, सिप्पड़ और कई अखाड़े शामिल थे। ढोल-ताशे की गूँज के बीच लोगों ने 'या अली, या हुसैन' के नारे लगाकर मातम और श्राद्ध की अपनी परंपरा को बनाए रखा। यह जुलूस देर शाम संकटमोचन मंदिर तिराहे पर स्थित अखाड़े में समाप्त हुआ, जहाँ घंटों तक अखाड़ा प्रदर्शन चला। कलाकारों ने विशेष रूप से लाठी-डंडे के हैरतअंगेज पारंपरिक कौशल का प्रदर्शन कर दर्शकों का मन मोह लिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को मंच पर मौजूद मुख्य अतिथि और विशिष्ट आगंतुकों द्वारा नगद इनाम और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। जुलूस के दौरान विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने जगह-जगह खिचड़ी और जलपान की व्यवस्था की, जिसका लोगों ने भरपूर लाभ उठाया। इस्लाहुल मुस्लेमीन कमेटी और केंद्रीय अखाड़ा कमेटी ने आयोजन में शांति बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसमें मुस्लिम समाज के कई लोगों ने भी सुचारु संचालन में सहयोग दिया। जुलूस कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच निकाला गया। नगर और मार्गों पर पुलिस व प्रशासनिक व्यवस्था चाक-चौबंद रही। मौके पर सीओ राजेश कुमार राय, प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह, एएसआई संजय सिंह, एसआई अमित कुमार और श्यामजी यादव मौजूद थे, जिन्होंने सुरक्षा और मार्ग संचालन का जायजा लिया, जिससे जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सका। देर रात निकले ताज़ियों को बढ़नी नाला स्थित कर्बला पर सुपुर्दे-खाक किया गया। कार्यक्रम में नगरपंचायत अध्यक्ष कमलेश मोहन, केंद्रीय अखाड़ा समिति के अध्यक्ष मुजीब खान, सचिव मैनुद्दीन खलीफा, जामा मस्जिद के सदर कल्लन खान, तालिब खान, राकेश आजाद, मुख्तार अन्सारी, अहमद अली, कलीमुल्लाह खान, निजामुद्दीन, रफी खां, इब्राहिम खां, राकेश आज़ाद, सेराज खान, फिरोज खलीफा, टुन्नू खान, रौशन अली, महबूब खान, नेहाल खलीफा और मन्नू खान सहित बड़ी संख्या में नगरवासी व क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
सोनभद्र जिले के दुद्धी कस्बे में शुक्रवार को नगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में लोगों ने मिलकर पारंपरिक मोहर्रम जुलूस निकाला। यह जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जिसमें समुदाय की एकता और सांस्कृतिक धरोहर की स्पष्ट झलक देखने को मिली। जुलूस में ताज़िये, सिप्पड़ और कई अखाड़े शामिल थे। ढोल-ताशे की गूँज के बीच लोगों ने 'या अली, या हुसैन' के नारे लगाकर मातम और श्राद्ध की अपनी परंपरा को बनाए रखा। यह जुलूस देर शाम
संकटमोचन मंदिर तिराहे पर स्थित अखाड़े में समाप्त हुआ, जहाँ घंटों तक अखाड़ा प्रदर्शन चला। कलाकारों ने विशेष रूप से लाठी-डंडे के हैरतअंगेज पारंपरिक कौशल का प्रदर्शन कर दर्शकों का मन मोह लिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को मंच पर मौजूद मुख्य अतिथि और विशिष्ट आगंतुकों द्वारा नगद इनाम और पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। जुलूस के दौरान विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने जगह-जगह खिचड़ी और जलपान की व्यवस्था की, जिसका लोगों ने भरपूर लाभ उठाया। इस्लाहुल मुस्लेमीन
कमेटी और केंद्रीय अखाड़ा कमेटी ने आयोजन में शांति बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसमें मुस्लिम समाज के कई लोगों ने भी सुचारु संचालन में सहयोग दिया। जुलूस कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच निकाला गया। नगर और मार्गों पर पुलिस व प्रशासनिक व्यवस्था चाक-चौबंद रही। मौके पर सीओ राजेश कुमार राय, प्रभारी निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह, एएसआई संजय सिंह, एसआई अमित कुमार और श्यामजी यादव मौजूद थे, जिन्होंने सुरक्षा और मार्ग संचालन का जायजा लिया, जिससे जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न
हो सका। देर रात निकले ताज़ियों को बढ़नी नाला स्थित कर्बला पर सुपुर्दे-खाक किया गया। कार्यक्रम में नगरपंचायत अध्यक्ष कमलेश मोहन, केंद्रीय अखाड़ा समिति के अध्यक्ष मुजीब खान, सचिव मैनुद्दीन खलीफा, जामा मस्जिद के सदर कल्लन खान, तालिब खान, राकेश आजाद, मुख्तार अन्सारी, अहमद अली, कलीमुल्लाह खान, निजामुद्दीन, रफी खां, इब्राहिम खां, राकेश आज़ाद, सेराज खान, फिरोज खलीफा, टुन्नू खान, रौशन अली, महबूब खान, नेहाल खलीफा और मन्नू खान सहित बड़ी संख्या में नगरवासी व क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
- मजहब-ए-इस्लाम के पहले महीने मोहर्रम की नौवीं तारीख की रात ओबरा नगर में अकीदत, ऐतिहासिक परंपरा और कौमी एकता का अनूठा दृश्य देखने को मिला। ओबरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत कुल आठ निर्धारित पारंपरिक स्थलों पर रखी गईं खूबसूरत ताजिया को देर रात पूरे एहतराम के साथ नगर भ्रमण के लिए निकाला गया। ढोल-ताशे की मातमी धुनों के बीच ये सभी ताजिया मुख्य मार्गों से होते हुए सामूहिक रूप से जामा मस्जिद चौक पर एकत्रित हुईं। यहाँ इस्लामी मान्यताओं के अनुरूप करबला के शहीदों की याद में विशेष दुआख्वानी, फातिहा और मजहबी रस्में शांतिपूर्ण ढंग से अदा की गईं, जिसके बाद ताजिया पुनः अपने-अपने स्थानों के लिए रवाना हो गईं। इस बड़े धार्मिक और पारंपरिक आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में स्थानीय नगर पंचायत का पूरा तंत्र पूरी शिद्दत से जुटा रहा। नगर पंचायत द्वारा जुलूस के मुख्य मार्गों, संपर्क मार्गों और सभी आठ ताजिया स्थलों पर विशेष सफाई अभियान चलाकर मार्ग को सुगम बनाया गया। इसके अतिरिक्त, पूरे जुलूस मार्ग और चौक-चौराहों पर भारी मात्रा में चूने का छिड़काव कर स्वच्छता सुनिश्चित की गई, साथ ही रात के समय सुरक्षा और सुविधा के मद्देनजर पूरे मार्ग पर स्ट्रीट लाइटों और अतिरिक्त प्रकाश की चाक-चौबंद व्यवस्था की गई, जिसकी नगरवासियों ने सराहना की। वहीं, ओबरा पुलिस प्रशासन भी पूरी रात सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए जमीन पर मुस्तैद नजर आया। सभी ताजिया स्थलों और संवेदनशील पॉइंट पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी, और क्षेत्राधिकारी प्रभात राय, थाना प्रभारी सदानंद राय, क्राइम इंस्पेक्टर शमशेर यादव तथा ओबरा चौकी प्रभारी सहित पूरी पुलिस टीम ने लगातार क्षेत्र में पैदल गश्त करते हुए सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और शांति व्यवस्था बनाए रखी। नौवीं की रात को निकलने वाले इस पारंपरिक जुलूस को देखने के लिए ओबरा नगर में भारी संख्या में जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान बुजुर्ग, युवा, महिलाएं और छोटे-छोटे बच्चे बड़ी तादाद में ताजिया के दीदार के लिए सड़कों के किनारे और छतों पर मौजूद रहे। नगर की गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत करते हुए हिंदू समाज के लोगों ने भी बड़ी संख्या में पहुंचकर इस पारंपरिक आयोजन को देखा। जुलूस के दौरान विभिन्न ताजिया कमेटियों के युवाओं ने अखाड़े में लाठी-डंडों और पारंपरिक कलाबाजियों का हैरतअंगेज प्रदर्शन किया, जो इमाम हुसैन और उनके साथियों की बहादुरी का प्रतीकात्मक सम्मान है। देर रात जामा मस्जिद पर सामूहिक मिलाप और दुआ के बाद सभी आठ ताजिया गरिमापूर्ण तरीके से अपने-अपने मूल स्थान पर वापस लौटीं, जिसके बाद अब अगले दिन (10वें रोज) अंतिम विदाई का जुलूस निकाला जाएगा।1
- जंतर मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अब एक अनशन शुरू होने जा रहा है, जिसकी वजह से ‘मोदी सरकार’ बुरी तरह मुश्किल में फंस गई है। ‘कॉकराच जनता पार्टी’ ने इस घटनाक्रम को ‘मोदी सरकार’ के लिए एक गंभीर स्थिति के रूप में उजागर किया है, यह दावा करते हुए कि सरकार अब बुरा फंस गई है।1
- सोनभद्र में अपना दल (एस) के कार्यकर्ताओं ने मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के कार्यालय में धरना प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि शिकायत लेकर पहुंचे उनके साथियों के साथ सीडीओ ने बदसलूकी की, जिसके बाद नाराज सीडीओ कार्यालय से बाहर निकल गईं। प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि सीडीओ माफी मांगती हैं तो ही धरना समाप्त किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि माफी न मांगने की स्थिति में वे और भी अधिक उग्र प्रदर्शन करेंगे।2
- बिहार के स्कूलों में दिन-दहाड़े हथियारों की मौजूदगी और बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कई घटनाओं ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है, जिसमें एक सरकारी शिक्षक द्वारा स्कूल में बंदूक लाने और धमकी देने से लेकर एक बच्चे द्वारा स्कूल में गोली चलाने तक की वारदातें शामिल हैं। बीते 31 जुलाई को सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज के एक स्कूल में एक नर्सरी का बच्चा अपने स्कूल बैग में बंदूक लेकर पहुँच गया था। इस बच्चे ने तीसरी कक्षा के एक छात्र को गोली भी मार दी, हालाँकि सौभाग्य से वह छात्र बच गया। इसके अतिरिक्त, बिहार के एक सरकारी शिक्षक पर आरोप है कि वह स्कूल में बंदूक लेकर आते हैं, उसे लहराते हैं और "ठोक देंगे" जैसी धमकियाँ देते हैं। स्कूलों में हथियारों की यह समस्या केवल बिहार तक सीमित नहीं है, क्योंकि राघौगढ़ ब्लॉक के ग्रामीणों ने भी एक सरकारी स्कूल के शिक्षक पर बंदूक लेकर स्कूल आने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने इस पूरी घटना का एक वीडियो भी बनाया है, जो अब वायरल हो रहा है और जिसके बाद मामले में नोटिस जारी किया गया है। 1994 के गन-फ्री स्कूल्स एक्ट में यह प्रावधान है कि स्कूल में बंदूक लाने वाले छात्रों को ज़्यादातर मामलों में कम से कम एक साल के लिए निष्कासित कर दिया जाए। इन घटनाओं के बावजूद, यह स्पष्ट नहीं है कि स्कूलों में कितने बच्चे बंदूकों के साथ पकड़े जाते हैं, जो बच्चों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।1
- गढ़वा जिले में अब आरओ मशीनें मात्र ₹4500 में उपलब्ध हैं। ये मशीनें 1 साल की गारंटी के साथ मिल रही हैं, जिससे परिवारों को शुद्ध और सुरक्षित पीने का पानी मिल सके। यह उन लोगों के लिए एक किफायती विकल्प बताया जा रहा है जो अपने परिवार के लिए स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करना चाहते हैं।1
- सोनभद्र जिले के मधुपुर और राबर्ट्सगंज क्षेत्रों में जल नल से संबंधित परेशानी सामने आई है। इस समस्या से निपटने के लिए स्थानीय लोग स्वयं अपने हाथों से आवश्यक सुधार कार्य कर रहे हैं।1
- तमिलनाडु से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ 'सीएम विजय' के नाम से भी जाने जाने वाले लोकप्रिय अभिनेता और 'थलपति' विजय को सोने की अंगूठी का तोहफा मिला है।1
- झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल ही में राज्य के विभिन्न विभागों में हज़ारों महिलाओं को नियुक्ति-पत्र वितरित किए हैं। इन नियुक्तियों में 62 बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) और 237 महिला पर्यवेक्षिकाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने 319 शिक्षकों और 17 महिला पर्यवेक्षिकाओं को भी नियुक्ति-पत्र सौंपे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग को मज़बूत करने के उद्देश्य से 62 बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों (CDPO) और 237 महिला पर्यवेक्षकों को नियुक्ति-पत्र दिए गए। रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान 319 सहायक शिक्षकों और 17 महिला पर्यवेक्षकों को उनकी नियुक्तियां सौंपी गईं। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने के लिए 262 स्वास्थ्यकर्मियों को भी नियुक्ति-पत्र वितरित किए गए, जिनमें फूड सेफ्टी ऑफिसर, स्पेशलिस्ट मेडिकल ऑफिसर, सीनियर हॉस्पिटल मैनेजर और फाइनेंस मैनेजर जैसे पद शामिल हैं। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग की पासिंग आउट परेड में भी महिला भागीदारी की सराहना की, जहाँ 81 महिला पुलिस कांस्टेबलों ने अपना प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है।1
- सिंगरौली पुलिस द्वारा साइबर अपराधों से जनता को बचाने के उद्देश्य से एक विशेष अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान 15 दिनों तक चलेगा, जिसका मुख्य लक्ष्य नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और उन्हें इन अपराधों से सुरक्षित रखना है।1