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मंगलवार को शिमला में अपनी लंबित मांगों को लेकर पिछले 976 दिनों से आंदोलन कर रहे दृष्टिहीनों का प्रदर्शन उग्र हो गया। उन्होंने सचिवालय के बाहर चक्का जाम कर दिया, जिसके कारण मौके पर तनाव का माहौल बन गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। दृष्टिहीन संगठन के सदस्य सरकार पर लगातार अनदेखी का आरोप लगाते हुए बैकलॉग भर्तियां, आरक्षण और अन्य लंबित मांगों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया, जिसके चलते दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
Roshan Sharma
मंगलवार को शिमला में अपनी लंबित मांगों को लेकर पिछले 976 दिनों से आंदोलन कर रहे दृष्टिहीनों का प्रदर्शन उग्र हो गया। उन्होंने सचिवालय के बाहर चक्का जाम कर दिया, जिसके कारण मौके पर तनाव का माहौल बन गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। दृष्टिहीन संगठन के सदस्य सरकार पर लगातार अनदेखी का आरोप लगाते हुए बैकलॉग भर्तियां, आरक्षण और अन्य लंबित मांगों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया, जिसके चलते दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और धक्का-मुक्की हुई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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- वन विभाग ने जांगला के पास एक आपदा मॉक ड्रिल का आयोजन किया। इस अभ्यास के माध्यम से विभाग ने किसी भी आपदा की स्थिति से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया।1
- मनीषा मित्तल हत्याकांड में पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। जिला अदालत ने इस मामले के दोनों आरोपियों को सात दिन के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। अब 22 जून तक इन आरोपियों से गहन पूछताछ की जाएगी।1
- हिमाचल प्रदेश के बल्ह क्षेत्र में दूध उत्पादक किसानों को पिछले पाँच महीने से उनके दूध का भुगतान नहीं मिला है। किसानों ने आरोप लगाया है कि गाय के दूध के लिए 80 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध के लिए 100 रुपये प्रति लीटर देने का जो वादा किया गया था, वह पूरा नहीं किया गया है। इस गंभीर समस्या के खिलाफ, बल्ह के किसानों ने सरकार के विरुद्ध अपना विरोध जताया है। किसानों के हक में खड़े होते हुए, विधायक इंद्र सिंह गांधी ने राज्यपाल को इस संबंध में एक ज्ञापन भी भेजा है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दूध उत्पादकों को जल्द भुगतान नहीं किया गया, तो एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।1
- सैंज की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे रैला के युवा टेक सिंह ठाकुर ने मंगलवार को ग्राम पंचायत रैला का प्रधान पद कार्यभार संभाल लिया है। इस अवसर पर उनके साथ पंचायत के युवा उप प्रधान पराग ठाकुर और अन्य पंचायत प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। स्थानीय ग्रामीणों ने नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया, जहाँ इससे पूर्व पंचायत प्रधान ने सभी वार्ड पंचों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई, जिसके बाद नवगठित ग्राम पंचायत का कार्यकाल विधिवत रूप से आरंभ हुआ। कार्यभार संभालने के बाद, नवनिर्वाचित प्रधान टेक सिंह ठाकुर ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि चुनाव में मिली यह जीत उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि पूरी पंचायत के विश्वास और आशीर्वाद का परिणाम है। उन्होंने इस जीत में महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और सभी वर्गों के भरपूर समर्थन को रेखांकित किया और भरोसा दिलाया कि पंचायत के लोगों ने जिस विश्वास से उन्हें चुना है, उसे वे कभी टूटने नहीं देंगे। प्रधान ठाकुर ने अपनी प्राथमिकताओं में पंचायत के विकास कार्यों को गति देना, युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और जन समस्याओं का समयबद्ध समाधान करना बताया। उन्होंने जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का संकल्प लेते हुए कहा कि पंचायत क्षेत्र में सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, युवाओं को खेल गतिविधियों, कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी योजनाओं से जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे, साथ ही नशा मुक्ति अभियान के तहत जागरूकता कैंप भी चलाए जाएंगे। पंचायत के उप प्रधान पराग ठाकुर ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि वे एक राजनीतिक परिवार से संबंध रखते हैं और बिना किसी भेदभाव के पंचायत में विकास कार्य सुनिश्चित करेंगे। उनका मुख्य ध्यान युवाओं को स्वरोजगार अपनाने, नशा मुक्ति और विकास कार्यों में नई सोच व आधुनिक दृष्टिकोण को अपनाने पर रहेगा। उन्होंने हर वार्ड में विकास की रोशनी पहुँचाने के लिए पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम करने का वादा किया। नवनिर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों ने कार्यभार संभालने के पहले ही दिन विकास कार्यों का एक रोड मैप बनाकर हर घर में विकास की रोशनी पहुँचाने का आश्वासन दिया है।1
- शिमला के कुनिहार स्थित पदम सिंह मेमोरियल स्टेडियम में 12 से 16 जून 2026 तक आयोजित भारतीय पेसापालो (डंडगेंद) विश्व कप टीम चयन परीक्षण एवं प्रशिक्षण शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस शिविर का आयोजन पेसापालो एसोसिएशन ऑफ हिमाचल प्रदेश द्वारा किया गया था, जिसमें गो ग्लोबल पेसापालो डेवलपमेंट फाउंडेशन ने आर्थिक सहयोग प्रदान किया। पाँच दिवसीय इस शिविर में देशभर के विभिन्न राज्यों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने भाग लिया, जहाँ उनके तकनीकी कौशल, फिटनेस, अनुशासन, खेल भावना और प्रदर्शन का गहन मूल्यांकन किया गया। चयन समिति ने पुरुष और महिला वर्ग से 24-24 खिलाड़ियों के साथ-साथ मिक्स्ड इवेंट के लिए 12 लड़के और 12 लड़कियों को चुना, जिससे कुल 72 खिलाड़ी प्रारंभिक चयन में शामिल हुए। इसके बाद, अंतिम रैंकिंग और प्रदर्शन के आधार पर 16 पुरुष खिलाड़ी, 16 महिला खिलाड़ी तथा मिक्स्ड इवेंट टीम के लिए 8 लड़के और 8 लड़कियाँ चुनी गईं, इस प्रकार कुल 48 खिलाड़ी भारतीय स्क्वाड का हिस्सा बने हैं। इन चयनित खिलाड़ियों में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, चंडीगढ़, उत्तराखंड, दिल्ली, बिहार, जम्मू-कश्मीर, केरल, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्यों के खिलाड़ी शामिल हैं। यह 48 सदस्यीय टीम आगामी 2 से 5 अक्टूबर 2026 तक सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) में आयोजित होने वाले 12वें पेसापालो विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। कुल 63 सदस्यीय भारतीय दल में खिलाड़ियों के साथ कोच, सहायक कोच, मैनेजर, सहायक मैनेजर, चीफ कोऑर्डिनेटर और सचिव भी शामिल हैं। भारतीय टीम चयन समिति में ललित कुमार, अंकित परब, मरियम एडागी, विनोद सिंह और सचिन त्यागी शामिल थे, जिन्होंने निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से खिलाड़ियों का चयन किया। पेसापालो फेडरेशन ऑफ इंडिया के सचिव चेतन पगवड़, महासचिव डॉ. रमेश कुमार तथा आयोजन सचिव दुर्गा नंद शास्त्री ने सभी चयनित खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए विश्व कप में भारत के शानदार प्रदर्शन का विश्वास जताया है। गौरतलब है कि भारतीय पेसापालो टीम ने वर्ष 2017 और 2019 के विश्व कप में मिक्स्ड इवेंट वर्ग में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था, और इस बार भी पुरुष, महिला तथा मिक्स्ड इवेंट की टीमों से उत्कृष्ट प्रदर्शन और पदक जीतने की उम्मीद की जा रही है।2
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