शिमला के कुनिहार स्थित पदम सिंह मेमोरियल स्टेडियम में 12 से 16 जून 2026 तक आयोजित भारतीय पेसापालो (डंडगेंद) विश्व कप टीम चयन परीक्षण एवं प्रशिक्षण शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस शिविर का आयोजन पेसापालो एसोसिएशन ऑफ हिमाचल प्रदेश द्वारा किया गया था, जिसमें गो ग्लोबल पेसापालो डेवलपमेंट फाउंडेशन ने आर्थिक सहयोग प्रदान किया। पाँच दिवसीय इस शिविर में देशभर के विभिन्न राज्यों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने भाग लिया, जहाँ उनके तकनीकी कौशल, फिटनेस, अनुशासन, खेल भावना और प्रदर्शन का गहन मूल्यांकन किया गया। चयन समिति ने पुरुष और महिला वर्ग से 24-24 खिलाड़ियों के साथ-साथ मिक्स्ड इवेंट के लिए 12 लड़के और 12 लड़कियों को चुना, जिससे कुल 72 खिलाड़ी प्रारंभिक चयन में शामिल हुए। इसके बाद, अंतिम रैंकिंग और प्रदर्शन के आधार पर 16 पुरुष खिलाड़ी, 16 महिला खिलाड़ी तथा मिक्स्ड इवेंट टीम के लिए 8 लड़के और 8 लड़कियाँ चुनी गईं, इस प्रकार कुल 48 खिलाड़ी भारतीय स्क्वाड का हिस्सा बने हैं। इन चयनित खिलाड़ियों में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, चंडीगढ़, उत्तराखंड, दिल्ली, बिहार, जम्मू-कश्मीर, केरल, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्यों के खिलाड़ी शामिल हैं। यह 48 सदस्यीय टीम आगामी 2 से 5 अक्टूबर 2026 तक सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) में आयोजित होने वाले 12वें पेसापालो विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। कुल 63 सदस्यीय भारतीय दल में खिलाड़ियों के साथ कोच, सहायक कोच, मैनेजर, सहायक मैनेजर, चीफ कोऑर्डिनेटर और सचिव भी शामिल हैं। भारतीय टीम चयन समिति में ललित कुमार, अंकित परब, मरियम एडागी, विनोद सिंह और सचिन त्यागी शामिल थे, जिन्होंने निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से खिलाड़ियों का चयन किया। पेसापालो फेडरेशन ऑफ इंडिया के सचिव चेतन पगवड़, महासचिव डॉ. रमेश कुमार तथा आयोजन सचिव दुर्गा नंद शास्त्री ने सभी चयनित खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए विश्व कप में भारत के शानदार प्रदर्शन का विश्वास जताया है। गौरतलब है कि भारतीय पेसापालो टीम ने वर्ष 2017 और 2019 के विश्व कप में मिक्स्ड इवेंट वर्ग में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था, और इस बार भी पुरुष, महिला तथा मिक्स्ड इवेंट की टीमों से उत्कृष्ट प्रदर्शन और पदक जीतने की उम्मीद की जा रही है।
शिमला के कुनिहार स्थित पदम सिंह मेमोरियल स्टेडियम में 12 से 16 जून 2026 तक आयोजित भारतीय पेसापालो (डंडगेंद) विश्व कप टीम चयन परीक्षण एवं प्रशिक्षण शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस शिविर का आयोजन पेसापालो एसोसिएशन ऑफ हिमाचल प्रदेश द्वारा किया गया था, जिसमें गो ग्लोबल पेसापालो डेवलपमेंट फाउंडेशन ने आर्थिक सहयोग प्रदान किया। पाँच दिवसीय इस शिविर में देशभर के विभिन्न राज्यों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने भाग लिया, जहाँ उनके तकनीकी कौशल, फिटनेस, अनुशासन, खेल भावना और प्रदर्शन का गहन मूल्यांकन किया गया। चयन समिति ने पुरुष और महिला वर्ग से 24-24 खिलाड़ियों के साथ-साथ मिक्स्ड इवेंट के लिए 12 लड़के और 12 लड़कियों को चुना, जिससे कुल 72 खिलाड़ी प्रारंभिक चयन में शामिल हुए। इसके बाद, अंतिम रैंकिंग और प्रदर्शन के आधार पर 16 पुरुष खिलाड़ी, 16 महिला खिलाड़ी तथा मिक्स्ड इवेंट टीम के लिए 8 लड़के और 8 लड़कियाँ चुनी गईं, इस प्रकार कुल 48 खिलाड़ी भारतीय स्क्वाड का हिस्सा बने हैं। इन चयनित खिलाड़ियों में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, चंडीगढ़, उत्तराखंड, दिल्ली, बिहार, जम्मू-कश्मीर, केरल, आंध्र प्रदेश,
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्यों के खिलाड़ी शामिल हैं। यह 48 सदस्यीय टीम आगामी 2 से 5 अक्टूबर 2026 तक सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) में आयोजित होने वाले 12वें पेसापालो विश्व कप में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। कुल 63 सदस्यीय भारतीय दल में खिलाड़ियों के साथ कोच, सहायक कोच, मैनेजर, सहायक मैनेजर, चीफ कोऑर्डिनेटर और सचिव भी शामिल हैं। भारतीय टीम चयन समिति में ललित कुमार, अंकित परब, मरियम एडागी, विनोद सिंह और सचिन त्यागी शामिल थे, जिन्होंने निष्पक्ष एवं पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से खिलाड़ियों का चयन किया। पेसापालो फेडरेशन ऑफ इंडिया के सचिव चेतन पगवड़, महासचिव डॉ. रमेश कुमार तथा आयोजन सचिव दुर्गा नंद शास्त्री ने सभी चयनित खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए विश्व कप में भारत के शानदार प्रदर्शन का विश्वास जताया है। गौरतलब है कि भारतीय पेसापालो टीम ने वर्ष 2017 और 2019 के विश्व कप में मिक्स्ड इवेंट वर्ग में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था, और इस बार भी पुरुष, महिला तथा मिक्स्ड इवेंट की टीमों से उत्कृष्ट प्रदर्शन और पदक जीतने की उम्मीद की जा रही है।
- मौसम विभाग ने किन्नौर और आसपास के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों तक मौसम खराब रहने की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार, इन इलाकों में बारिश, गर्जन और तेज हवाएं चल सकती हैं। विशेष रूप से 18 और 19 जून को 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। स्थानीय प्रशासन ने इन संभावनाओं को देखते हुए लोगों और यात्रियों को सतर्क रहने की सलाह दी है।1
- हिमाचल पुलिस अपने ही एक जवान, कांस्टेबल अजय कुमार, को ढूंढने में विफल रही है। इस गंभीर विफलता पर कांस्टेबल अजय कुमार के परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर 5 तीखे खुलासे किए हैं।1
- बजरंगबली की जय हो के उद्घोष के साथ परम भक्ति और श्रद्धा का भाव व्यक्त किया गया।1
- 15 जून, 2026 को आयोजित हुए कमरुनाग मेले की एक झलक सामने आई है, जिसमें भारी संख्या में भक्तजन पहुँचे। इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं ने 'जय देव कमरुनाग जी' का जयघोष किया।1
- हमीरपुर से जारी एक बयान में, प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता और पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने सुजानपुर विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्यों को लेकर स्थानीय विधायक और लोक निर्माण विभाग (PWD) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राणा ने दावा किया कि राजनीतिक दबाव में नियमों की अनदेखी कर किसानों की जमीन पर जबरन कब्जा किया जा रहा है और सड़क बनाई जा रही है, साथ ही सरकारी धन का भी दुरुपयोग किया गया है। राजेंद्र राणा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2020-21 में विधायक प्राथमिकता के तहत 'पुआड़ से टिक्करी वाया दरली' सड़क को स्वीकृत करवाया था, जिसकी मूल स्वीकृत लंबाई 2 किलोमीटर 55 मीटर थी और इसके लिए नाबार्ड से लगभग ढाई करोड़ रुपये मंजूर हुए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान विधायक ने सड़क का प्रारंभिक बिंदु बदलकर इसे चिन्हित स्थल की बजाय किसी और जगह से शुरू करवा दिया, जिससे सड़क की वास्तविक लंबाई बढ़कर करीब 4 किलोमीटर हो गई। राणा ने कागजों में स्वीकृत लंबाई और धरातल पर निर्मित सड़क की लंबाई में बड़े अंतर की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया कि यदि नाबार्ड की डीपीआर 2 किलोमीटर 55 मीटर की थी, तो सड़क 4 किलोमीटर कैसे बन गई और इसकी अनुमति किस स्तर पर ली गई। पूर्व विधायक ने विशेष रूप से आरोप लगाया कि आर.के. शर्मा और उनके परिवार की लगभग 3 कनाल 4 मरले भूमि को बिना गिफ्ट डीड, बिना सहमति और बिना किसी मुआवजे के सड़क निर्माण में शामिल कर लिया गया, जिसे उन्होंने किसानों के अधिकारों का खुला उल्लंघन बताया। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में लोग स्टे ले आए हैं, जिससे सरकारी धन की बर्बादी हुई है। राणा ने जोर दिया कि विकास कार्यों के नाम पर किसानों की जमीन हड़पने का प्रयास किसी भी कीमत पर उचित नहीं ठहराया जा सकता और यदि भूमि की आवश्यकता है तो नियमानुसार सहमति और मुआवजे की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। राणा ने लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि सुजानपुर मंडल में कनिष्ठ अभियंता का पद लंबे समय से रिक्त होने के कारण निर्माण कार्यों की निगरानी और तकनीकी परीक्षण किसके माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह से इस बात की जांच बिठाने की मांग की कि अधिकारियों ने किसके दबाव में आकर ऐसी अनियमितता की और सरकारी फंड का दुरुपयोग किया। राणा ने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों ने दबाव में ऐसी अनियमितता की है, उनकी सैलरी से इसकी वसूली होनी चाहिए। राजेंद्र राणा ने स्पष्ट किया कि भाजपा विकास कार्यों के खिलाफ नहीं है और प्रत्येक गांव व घर तक सड़क पहुंचना आवश्यक है, लेकिन विकास की आड़ में किसानों को उजाड़ना और कानूनों को ताक पर रखना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाने और जांच में किसी भी विधायक, अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही, उन्होंने प्रभावित किसानों की भूमि और सरकारी धन के उपयोग का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने की भी मांग की। राणा ने विश्वास जताया कि सुजानपुर की जनता सब कुछ देख रही है और लोकतंत्र में अंततः सत्य सामने आकर रहेगा, तथा सरकार निष्पक्ष जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति स्पष्ट करेगी।1
- महाराष्ट्र के मुंबई से संबंध रखने वाले एक व्यक्ति, जो इन दिनों परिवार सहित मणिकर्ण घाटी के मतेउडां गांव में अस्थाई रूप से रह रहे हैं, उन्होंने गौ सेवा के पुनीत कार्य के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान किया है। यह व्यक्ति गौ सेवा रक्षक दल कुल्लू के अध्यक्ष शेरा नेगी के समाज सेवा के कार्यों को एक वीडियो के माध्यम से देख उनसे मिले। शेरा नेगी के प्रयासों से प्रेरित होकर, उन्होंने गौ सेवा में अपना सहयोग देते हुए ₹10,000 की नकद राशि दान की।1
- यह आवाज़ उठाई गई है कि स्थानीय कानून प्रवर्तन को आंध्र प्रदेश में कॉलेज के बाहर लड़कियों से छेड़छाड़ करने वालों के साथ हुए व्यवहार और उनके अंजाम से सीख लेनी चाहिए। इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि 'हमारे यहां के' कानून के रखवालों को भी इस तरह के मामलों से निपटने के तरीकों पर ध्यान देना चाहिए।1