बसिया: संत जोसेफ इंटर कॉलेज और मोनफ़ोर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में धूमधाम से मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस बसिया (गुमला): प्रखंड के कोनबीर नवाटोली स्थित प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों संत जोसेफ इंटर कॉलेज और मोनफ़ोर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में विश्व आदिवासी दिवस बेहद धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए झारखंड की समृद्ध परंपरा और कला-संस्कृति की अनूठी छटा बिखेरी। *संत जोसेफ इंटर कॉलेज: पारंपरिक लोक नृत्यों से जीवंत हुई झारखंड की संस्कृति* संत जोसेफ इंटर कॉलेज में आयोजित समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि फादर जयप्रकाश एक्का और कॉलेज के प्रिंसिपल ब्रदर सुशील टोप्पो द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर की गई। कॉलेज के विद्यार्थियों ने एक से बढ़कर एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। इन प्रस्तुतियों में विशेष रूप से झारखंड के पारंपरिक लोक नृत्यों के माध्यम से यहाँ की धरोहर को दर्शाया गया। इस अवसर पर बच्चों के बीच पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा के महत्व पर केंद्रित एक भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने बढ़-चढ़कर अपने विचार रखे। कार्यक्रम को सफल बनाने में ब्रदर एडमन, ब्रदर फूलजेन्स सहित कॉलेज के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं और भारी संख्या में छात्र-छात्राओं का सराहनीय योगदान रहा। *मोनफ़ोर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल: प्रकृति रक्षा और विरासत के सम्मान का संदेश* वहीं दूसरी ओर, मोनफ़ोर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में भी विश्व आदिवासी दिवस भव्य तरीके से मनाया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि ब्रदर अलबिनुस टेटे, ब्रदर आरोग्यम और ब्रदर सोनू गरिमामयी रूप से उपस्थित रहे। स्कूल के छात्र-छात्राओं ने आदिवासी समाज की संस्कृति, भाषा और सभ्यता से जुड़े बेहतरीन कार्यक्रम प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि आदिवासी संस्कृति भारत की विविधता और गौरवशाली विरासत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने बच्चों से अपनी विरासत व संस्कृति का सम्मान करने और प्रकृति की रक्षा करने का पुरजोर आह्वान किया। दोनों ही संस्थानों में आयोजित इन कार्यक्रमों ने न केवल बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम किया, बल्कि आधुनिक समाज में पर्यावरण और शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया।
बसिया: संत जोसेफ इंटर कॉलेज और मोनफ़ोर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में धूमधाम से मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस बसिया (गुमला): प्रखंड के कोनबीर नवाटोली स्थित प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों संत जोसेफ इंटर कॉलेज और मोनफ़ोर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में विश्व आदिवासी दिवस बेहद धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए झारखंड की समृद्ध परंपरा और कला-संस्कृति की अनूठी छटा बिखेरी। *संत जोसेफ इंटर कॉलेज: पारंपरिक लोक नृत्यों से जीवंत हुई झारखंड की संस्कृति* संत जोसेफ इंटर कॉलेज में आयोजित समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथि फादर जयप्रकाश एक्का और कॉलेज के प्रिंसिपल ब्रदर सुशील टोप्पो द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर की गई। कॉलेज के
विद्यार्थियों ने एक से बढ़कर एक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। इन प्रस्तुतियों में विशेष रूप से झारखंड के पारंपरिक लोक नृत्यों के माध्यम से यहाँ की धरोहर को दर्शाया गया। इस अवसर पर बच्चों के बीच पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा के महत्व पर केंद्रित एक भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने बढ़-चढ़कर अपने विचार रखे। कार्यक्रम को सफल बनाने में ब्रदर एडमन, ब्रदर फूलजेन्स सहित कॉलेज के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं और भारी संख्या में छात्र-छात्राओं का सराहनीय योगदान रहा। *मोनफ़ोर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल: प्रकृति रक्षा और विरासत के सम्मान का संदेश* वहीं दूसरी ओर, मोनफ़ोर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में भी विश्व आदिवासी दिवस भव्य तरीके से मनाया गया। कार्यक्रम में
बतौर मुख्य अतिथि ब्रदर अलबिनुस टेटे, ब्रदर आरोग्यम और ब्रदर सोनू गरिमामयी रूप से उपस्थित रहे। स्कूल के छात्र-छात्राओं ने आदिवासी समाज की संस्कृति, भाषा और सभ्यता से जुड़े बेहतरीन कार्यक्रम प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने कहा कि आदिवासी संस्कृति भारत की विविधता और गौरवशाली विरासत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने बच्चों से अपनी विरासत व संस्कृति का सम्मान करने और प्रकृति की रक्षा करने का पुरजोर आह्वान किया। दोनों ही संस्थानों में आयोजित इन कार्यक्रमों ने न केवल बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम किया, बल्कि आधुनिक समाज में पर्यावरण और शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया।
- हम सबको और आपको बदलाव चाहिए बदला होगी तो ही क्राइम घूसखोरी कम होगी कानून व्यवस्था को सही करने के लिए आपको सही जानकारी चाहिए घूसखोरी जैसे अपराध को कम करने के लिए कानूनी जानकारी होना चाहिए गरीब व्यक्ति या अन्य व्यक्तियों के ऊपर अत्याचार ना हो ऐसा कोशिश है हमारा हमें यकीन है आप हमारे समर्थन में रहेंगे भारत माता🇮🇳 की जय1
- छात्रों का दर्द सरकार तक पहुंचाने की कोशिश.? #shorts #shortvideo #short #youtubeshorts #ranchi #news1
- JPSC JSSC छात्र आंदोलन जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम रांची झारखंड JPSC JSSC छात्र आंदोलन जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम रांची झारखंड1
- हमारे पास से गुजर ने वाला नादी है और आवी बारिश का वाजा से पानी लगातार बाड रहा है तो आप लोग नादी से दूर में राहो1
- सालों से जर्जर सड़क परेशान जनता.? #shorts #shortvideo #short #viralvideo #viral #road #ranchi #pani1
- कृपया प्रकाशनार्थ: ============ *दिशोम गुरु शिबू सोरेन का संघर्ष रहेगा अमर, उनके अधूरे सपनों को करेंगे साकार: झारखंड आंदोलनकारी महासभा* *निरू शांति भगत ने कहा, जल, जंगल, जमीन की लड़ाई को नई पीढ़ी तक पहुंचाना ही सच्ची श्रद्धांजलि* कृपया प्रकाशनार्थ: ============ *दिशोम गुरु शिबू सोरेन का संघर्ष रहेगा अमर, उनके अधूरे सपनों को करेंगे साकार: झारखंड आंदोलनकारी महासभा* *निरू शांति भगत ने कहा, जल, जंगल, जमीन की लड़ाई को नई पीढ़ी तक पहुंचाना ही सच्ची श्रद्धांजलि* *मो. कयूम खान बोले– शिबू सोरेन करोड़ों लोगों की आशा, विश्वास और संघर्ष के प्रतीक थे* *अनिल कुमार भगत बोले, दिशोम गुरु का जीवन संघर्ष और सामाजिक न्याय का प्रतीक* लोहरदगा: झारखंड आंदोलनकारी महासभा, लोहरदगा जिला समिति की ओर से मंगलवार को केंद्रीय उपाध्यक्ष नीरू शांति भगत के आवासीय परिसर में झारखंड आंदोलन के प्रणेता, पूर्व मुख्यमंत्री एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक दिशोम गुरु वीर शिबू सोरेन की पुण्यतिथि श्रद्धा और संकल्प के साथ मनाई गई। जिला अध्यक्ष अनिल कुमार भगत की अध्यक्षता में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में आंदोलनकारियों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करने का संकल्प लिया। सभा को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष अनिल कुमार भगत ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन का पूरा जीवन संघर्ष, न्याय और सामाजिक चेतना का प्रतीक रहा।उन्होंने झारखंड राज्य आंदोलन को नई दिशा देने के साथ-साथ आदिवासी अस्मिता और स्वाभिमान की लड़ाई को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनका निधन झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है और उनके संघर्ष की गाथा सदैव प्रेरणा देती रहेगी। केंद्रीय उपाध्यक्ष नीरू शांति भगत ने कहा कि शिबू सोरेन ने अपना संपूर्ण जीवन जल, जंगल, जमीन और आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने सामाजिक न्याय, समानता और शोषित-वंचित वर्ग के उत्थान के लिए निरंतर संघर्ष किया। झारखंड राज्य के निर्माण में उनका योगदान ऐतिहासिक, अविस्मरणीय और आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक है। केंद्रीय प्रधान महासचिव मो. कयूम खान ने कहा कि दिशोम गुरु केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आशा, विश्वास और जनसंघर्ष के प्रतीक थे। उनका सादा जीवन, अटूट संकल्प और जनसेवा की भावना सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी। उन्होंने कहा कि आज की सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके बताए रास्ते पर चलकर समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की सेवा करें तथा झारखंड के सर्वांगीण विकास के लिए ईमानदारी से कार्य करें।कार्यक्रम को कार्यकारी अध्यक्ष अमर किंडो, सचिव विशेषण भगत, उपाध्यक्ष उषा रानी लकड़ा, मनोज उरांव एवं सूरज मोहन लकड़ा सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन के अधूरे सपनों को साकार करने तथा जल, जंगल, जमीन और सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाने के लिए वे अंतिम सांस तक संघर्ष करते रहेंगे। श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में झारखंड आंदोलनकारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे2
- AISA वालों पर गंभीर आरोप? क्या है पुरा मामला। #student_protest_jharkhand झारखंड में चल रहे स्टूडेंट प्रोटेस्ट का आज 15 दिन।1
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