संभल के ग्राम कसेरुआ में किसानों ने कृषि भूमि अधिग्रहण के विरोध में एक विशाल किसान महापंचायत का आयोजन कर सरकार के खिलाफ अपना रोष व्यक्त किया। इस महापंचायत में भूमि अधिग्रहण, खेती की बढ़ती लागत और फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी जैसे प्रमुख मुद्दों को लेकर आवाज बुलंद की गई, साथ ही संघर्ष को तेज करने का भी संकल्प लिया गया। यह कार्यक्रम ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन (AIKKMS) के बैनर तले गोकुल सिंह एवं तेजपाल सिंह के बाग में आयोजित किया गया था, जिसमें क्षेत्र के सैकड़ों किसान शामिल हुए। महापंचायत की अध्यक्षता अमर सिंह ने की। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय नेता सत्यभान सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि विकास के नाम पर उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण किसानों के अस्तित्व पर सीधा हमला है। उन्होंने कृषि भूमि की सुरक्षा और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक व्यापक जनसंघर्ष खड़ा करने का आह्वान किया। सत्यभान सिंह ने किसानों को समय पर खाद न मिलने और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि सरकार एमएसपी की कानूनी गारंटी की किसानों की पुरानी मांग पर कोई गंभीर कदम नहीं उठा रही है। महापंचायत में कृषि भूमि अधिग्रहण के विरोध, किसानों के अधिकारों की सुरक्षा, बढ़ती खेती की लागत और ग्रामीण रोजगार जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई, और भविष्य के किसान आंदोलनों की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया। किसानों ने स्पष्ट संदेश दिया कि विकास के नाम पर उनकी उपजाऊ जमीन छीनी जा रही है और वे अपनी जमीन, आजीविका तथा अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेंगे। उन्होंने संकल्प लिया कि एमएसपी की कानूनी गारंटी मिलने और किसानों की समस्याओं का समाधान होने तक यह आंदोलन जारी रहेगा। महापंचायत में जिला अध्यक्ष सोमपाल सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष भगवान सिंह, जिला सचिव संजय राघव सहित बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करने की प्रतिज्ञा ली।
संभल के ग्राम कसेरुआ में किसानों ने कृषि भूमि अधिग्रहण के विरोध में एक विशाल किसान महापंचायत का आयोजन कर सरकार के खिलाफ अपना रोष व्यक्त किया। इस महापंचायत में भूमि अधिग्रहण, खेती की बढ़ती लागत और फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी जैसे प्रमुख मुद्दों को लेकर आवाज बुलंद की गई, साथ ही संघर्ष को तेज करने का भी संकल्प लिया गया। यह कार्यक्रम ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन (AIKKMS) के बैनर तले गोकुल सिंह एवं तेजपाल सिंह के बाग में आयोजित किया गया था, जिसमें क्षेत्र के सैकड़ों किसान शामिल हुए। महापंचायत की अध्यक्षता अमर सिंह ने की। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय नेता सत्यभान सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि विकास के नाम पर उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण किसानों के अस्तित्व पर सीधा हमला है। उन्होंने कृषि भूमि की सुरक्षा और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक व्यापक जनसंघर्ष खड़ा करने का आह्वान किया। सत्यभान सिंह ने किसानों को समय पर
खाद न मिलने और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि सरकार एमएसपी की कानूनी गारंटी की किसानों की पुरानी मांग पर कोई गंभीर कदम नहीं उठा रही है। महापंचायत में कृषि भूमि अधिग्रहण के विरोध, किसानों के अधिकारों की सुरक्षा, बढ़ती खेती की लागत और ग्रामीण रोजगार जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई, और भविष्य के किसान आंदोलनों की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया। किसानों ने स्पष्ट संदेश दिया कि विकास के नाम पर उनकी उपजाऊ जमीन छीनी जा रही है और वे अपनी जमीन, आजीविका तथा अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेंगे। उन्होंने संकल्प लिया कि एमएसपी की कानूनी गारंटी मिलने और किसानों की समस्याओं का समाधान होने तक यह आंदोलन जारी रहेगा। महापंचायत में जिला अध्यक्ष सोमपाल सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष भगवान सिंह, जिला सचिव संजय राघव सहित बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करने की प्रतिज्ञा ली।
- जनपद संभल में नदियों और तालाबों की 700 बीघा से अधिक जमीन को अवैध कब्जों से मुक्त करा लिया गया है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद की गई है, जिन्होंने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को तालाबों और नदियों से अवैध कब्जों को हटाने के निर्देश दिए थे। संभल के जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि शासन के आदेशों के अनुसार, जनपद के जलीय स्रोतों को उनके मूल स्वरूप में वापस लाने की कार्यवाही की जा रही है। पूरे जनपद में ऐसे 65 तालाब चिह्नित किए गए हैं जिनका क्षेत्रफल 2 हेक्टेयर से अधिक है, और इन्हें अतिक्रमण मुक्त कराकर तालाबों के तौर पर पुनर्जीवित किया जाना है। इसके साथ ही, पुरानी नदियों और उनके स्रोतों पर भी काम किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने बताया कि पिछले लगभग 7 से 10 दिनों के भीतर 700 बीघा से अधिक ऐसी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराया गया है, और विकास विभाग द्वारा इस जमीन को उसके मूल स्वरूप में लाने का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार की कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी।4
- संभल के ग्राम कसेरुआ में किसानों ने कृषि भूमि अधिग्रहण के विरोध में एक विशाल किसान महापंचायत का आयोजन कर सरकार के खिलाफ अपना रोष व्यक्त किया। इस महापंचायत में भूमि अधिग्रहण, खेती की बढ़ती लागत और फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी जैसे प्रमुख मुद्दों को लेकर आवाज बुलंद की गई, साथ ही संघर्ष को तेज करने का भी संकल्प लिया गया। यह कार्यक्रम ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन (AIKKMS) के बैनर तले गोकुल सिंह एवं तेजपाल सिंह के बाग में आयोजित किया गया था, जिसमें क्षेत्र के सैकड़ों किसान शामिल हुए। महापंचायत की अध्यक्षता अमर सिंह ने की। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय नेता सत्यभान सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि विकास के नाम पर उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण किसानों के अस्तित्व पर सीधा हमला है। उन्होंने कृषि भूमि की सुरक्षा और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक व्यापक जनसंघर्ष खड़ा करने का आह्वान किया। सत्यभान सिंह ने किसानों को समय पर खाद न मिलने और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि सरकार एमएसपी की कानूनी गारंटी की किसानों की पुरानी मांग पर कोई गंभीर कदम नहीं उठा रही है। महापंचायत में कृषि भूमि अधिग्रहण के विरोध, किसानों के अधिकारों की सुरक्षा, बढ़ती खेती की लागत और ग्रामीण रोजगार जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई, और भविष्य के किसान आंदोलनों की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया। किसानों ने स्पष्ट संदेश दिया कि विकास के नाम पर उनकी उपजाऊ जमीन छीनी जा रही है और वे अपनी जमीन, आजीविका तथा अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेंगे। उन्होंने संकल्प लिया कि एमएसपी की कानूनी गारंटी मिलने और किसानों की समस्याओं का समाधान होने तक यह आंदोलन जारी रहेगा। महापंचायत में जिला अध्यक्ष सोमपाल सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष भगवान सिंह, जिला सचिव संजय राघव सहित बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करने की प्रतिज्ञा ली।2
- safai karmi aate nahi1
- स्थानीय जानकारी के अनुसार, नल का पानी अब पीने के योग्य नहीं रहा है।1
- जनगणना कार्य के दौरान एक व्यक्ति को इतना आदर और सम्मान मिला कि उसे महसूस हुआ जैसे यह उसकी अपनी सगी माँ का दिया हुआ सम्मान हो। इस अनुभव पर व्यक्ति ने बताया कि ऐसा सम्मान तो अमीरों के घरों में भी नहीं मिलता है।1
- बदायूँ जिले के ग्राम करेंगी में हनुमान मंदिर के पास स्थित सरकारी हैंडपंप पिछले कई दिनों से खराब पड़ा है और पूरी तरह से टूट गया है। यह नल गाँव और रास्ते से आने-जाने वाले लोगों के लिए पीने के पानी का एक महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन गाँव का कोई भी व्यक्ति इसकी मरम्मत कराने के लिए तैयार नहीं है। इस समस्या के समाधान के लिए संबंधित विभाग से विनम्र निवेदन किया गया है कि कृपया इस नल को जल्द से जल्द ठीक कराया जाए।4
- एक सफेद बाघ खेलते हुए देखा गया, जिसकी सुंदरता बेहद मनमोहक लग रही थी। पोस्ट में बताया गया है कि ब्लैक पैंथर और शेर भी बहुत खूबसूरत दिखते हैं।1
- एक चौंकाने वाले मामले में, एक 24 साल की युवती को जबरन एक 45 साल के व्यक्ति से शादी कराई जा रही है। इस अन्यायपूर्ण कृत्य पर गहरा सवाल उठाते हुए पूछा गया है कि क्या यह वास्तव में न्याय है, और लोगों से इस पर अपनी प्रतिक्रिया देने का आग्रह किया गया है।1