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सीहोर जिले के अमलाह में एक चलती कार में अचानक भीषण आग लग गई, जिसके कारण पूरी गाड़ी धू-धू कर जलकर खाक हो गई। यह घटना तब हुई जब कार से अचानक धुआं निकलने लगा। खतरे को भांपते हुए, कार में सवार लोगों ने तुरंत गाड़ी रोकी और सुरक्षित उससे नीचे उतर गए। कार से उतरने के बाद, कार सवारों और स्थानीय लोगों ने मिलकर पानी तथा अन्य साधनों की मदद से आग पर काबू पाने का भरसक प्रयास किया। हालांकि, आग इतनी तेजी से फैली कि पल भर में ही पूरी कार आग की लपटों से घिर गई। लोग बेबस होकर दूर खड़े तमाशा देखने को मजबूर हो गए।
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सीहोर जिले के अमलाह में एक चलती कार में अचानक भीषण आग लग गई, जिसके कारण पूरी गाड़ी धू-धू कर जलकर खाक हो गई। यह घटना तब हुई जब कार से अचानक धुआं निकलने लगा। खतरे को भांपते हुए, कार में सवार लोगों ने तुरंत गाड़ी रोकी और सुरक्षित उससे नीचे उतर गए। कार से उतरने के बाद, कार सवारों और स्थानीय लोगों ने मिलकर पानी तथा अन्य साधनों की मदद से आग पर काबू पाने का भरसक प्रयास किया। हालांकि, आग इतनी तेजी से फैली कि पल भर में ही पूरी कार आग की लपटों से घिर गई। लोग बेबस होकर दूर खड़े तमाशा देखने को मजबूर हो गए।
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- आष्टा में सत्यजा सेवा संस्था द्वारा 2 जून से 8 जून तक आयोजित किए जाने वाले 11 लाख रुद्राक्ष महोत्सव और भव्य कथा कार्यक्रम को प्रशासनिक अनुमति नहीं मिलने के कारण स्थगित कर दिया गया है। पिछले दो दिनों से क्षेत्र में आई तेज आंधी और प्रतिकूल मौसम के कारण आयोजन स्थल की व्यवस्थाएं प्रभावित हुई थीं, जिसके बाद प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कार्यक्रम की अनुमति देने में अपनी असमर्थता व्यक्त की। इस विषय पर हुई एक बैठक में हिंदू उत्सव समिति, सकल समाज, मानस भवन समिति, शीतला माता समिति, व्यापार महासंघ, श्री राम मंदिर समिति और सत्यजा सेवा संस्था सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों तथा संत-महात्माओं ने विचार-विमर्श किया। जनहित और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए, सभी की सर्वसम्मति से कार्यक्रम को स्थगित करने का निर्णय लिया गया। संत-महात्माओं ने विश्वास दिलाया है कि यह आयोजन भविष्य में नई तिथियों के साथ भव्य रूप से पुनः आयोजित किया जाएगा। समिति द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, भव्य कथा कार्यक्रम अब अगले वर्ष आयोजित किया जाएगा, जबकि 11 लाख रुद्राक्ष वितरण अभियान 15 अगस्त से गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर चलाया जाएगा। वहीं, कन्या विवाह सम्मेलन अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 8 जून को मानस भवन में आयोजित किया जाएगा। सत्यजा सेवा संस्था के अध्यक्ष संजीव सोनी ‘पांचम’ ने सभी श्रद्धालुओं, माताओं-बहनों और नगरवासियों से इस निर्णय में सहयोग देने और संस्था का समर्थन बनाए रखने की अपील की है।1
- इछावर नगर पालिका द्वारा स्वच्छता के दावों की पोल पहली ही बारिश में खुल गई है। हल्की बारिश होने पर ही नालियों का गंदा कचरा दोनों तरफ से बहकर सड़कों पर फैल गया। इस स्थिति से यह साफ जाहिर होता है कि नगर पालिका नियमित साफ-सफाई की ओर ध्यान नहीं दे रही है और स्वच्छता के प्रति उदासीन है।4
- देवास जिले की बागली तहसील के कमलापुर थाने में हनुमान जी की सेना, यानी वानर सेना, पहुँची, मानो उन्हें थाना प्रभारी सज्जन सिंह मीणा से किसी महत्वपूर्ण विषय पर लंबी चर्चा करनी हो। वानर सेना करीब 20-25 मिनट तक थाना प्रभारी के सामने उनकी मेज पर बैठी रही। हनुमान जी के भक्त मीणा जी ने उनका स्वागत किया और उन्हें केले, सेंव तथा अन्य फल खिलाकर सम्मान व्यक्त किया। जिस प्रकार सतयुग में हनुमान जी ने लंका जाकर अहंकारी रावण को उसके पापों का प्रायश्चित करने की चेतावनी दी थी, उसी प्रकार कलयुग में यह वानर सेना कमलापुर थाना प्रभारी के पास वन विभाग में बैठे भ्रष्टाचारियों को इशारों-इशारों में एक संदेश देने पहुँची। संदेश यह था कि वे जंगल कटवाना बंद कर दें, अन्यथा उनका वंश ही खत्म हो जाएगा। यह चेतावनी इसलिए दी गई क्योंकि कमलापुर जिनवाणी के जंगलों को वन विभाग में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों ने लकड़ी माफियाओं के साथ मिलकर रातों-रात पूरी तरह खत्म करवा दिया है। इसे वानर राज की अंतिम चेतावनी समझा जाए, क्योंकि यदि यह विनाश जारी रहा, तो इन भ्रष्टाचारियों के आगे-पीछे रोने वाला कोई नहीं मिलेगा।1
- मध्य प्रदेश में बारिश का दौर शुरू हो चुका है। राज्य के भीतर पहली बारिश दर्ज की गई है, जिससे वर्षाकाल की शुरुआत हुई है।1
- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी ने 31 मई 2026 को शुजालपुर में प्रवेश किया है।1
- मध्य प्रदेश के कालापीपल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 'टपोरी लाल' बयान को लेकर सियासी बवाल खड़ा हो गया है। इसी कड़ी में, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कालापीपल के पंचमुखी चौराहे पर डॉ. यादव के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने उनके पुतले को जलाने का प्रयास किया, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस कोशिश को नाकाम कर दिया। हालात उस वक्त और तनावपूर्ण हो गए जब पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच सीधी झड़प हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस को वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। यह घटना राजनीतिक गलियारों में नेताओं की बयानबाजी से पैदा हो रहे टकराव की राजनीति पर गंभीर सवाल उठाती है।1