क्या 'कमीशन' के बदले बिक रही है गरीबों की सेहत? गौर के आरोग्य मंदिरों की बदहाली खोल रही भ्रष्टाचार की पोल। अजीत मिश्रा (खोजी) गौर स्वास्थ्य विभाग का 'खूनी' खेल: आरोग्य मंदिरों को बनाया उगाही का अड्डा, मरीजों की जान से खेल रहे जिम्मेदार! ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश) मरीज बेहाल, अफसर मालामाल: गौर सीएचसी प्रभारी और बीसीपीएम की सरपरस्ती में फल-फूल रहा 'वसूली तंत्र'! योगी सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे जिम्मेदार: इलाज के नाम पर 'तालेबंदी', वसूली के नाम पर 'खुली छूट'। क्या 'कमीशन' के बदले बिक रही है गरीबों की सेहत? गौर के आरोग्य मंदिरों की बदहाली खोल रही भ्रष्टाचार की पोल। मुफ्त दवा और जांच का सपना चकनाचूर: गौर में सीएचओ नदारद, प्रभारी ने साधी चुप्पी। साहब! ये आरोग्य मंदिर हैं या भ्रष्टाचार के अड्डे? बंद केंद्रों के नाम पर दवाओं की 'बंदरबांट' की बू। गौर (बस्ती)।। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां स्वास्थ्य व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए दिन-रात पसीना बहा रहे हैं, वहीं बस्ती जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर में बैठे कुछ 'सफेदपोश' अधिकारी सरकार की साख को बट्टा लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। यहाँ सरकारी आदेशों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके हैं।सूबे की सरकार भले ही 'अंतिम पायदान' तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँचाने का दम भर रही हो, लेकिन बस्ती जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) गौर के जिम्मेदार अधिकारी सरकार की मंशा पर कालिख पोतने में जुटे हैं। गौर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले आयुष्मान आरोग्य मंदिर अब 'आरोग्य' देने के बजाय भ्रष्टाचार के अड्डे बन चुके हैं। ताले में बंद स्वास्थ्य व्यवस्था: मरीज बेहाल, अधिकारी मालामाल महादेवा (बघौड़ा), गयाजीतपुर और तेनुआ—ये तीन नाम उन केंद्रों के हैं जहाँ मीडिया की टीम ने जब दस्तक दी, तो वहां इलाज नहीं बल्कि भारी-भरकम सरकारी ताले लटकते मिले। सुबह के वक्त जब इन केंद्रों पर गरीबों का हुजूम होना चाहिए था, वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। दूर-दराज के गांवों से तपती धूप और कठिनाइयों को पार कर पहुंचे मरीज और उनके तीमारदार गेट पर माथा पटक कर वापस लौट गए। यह केवल तालेबंदी नहीं, बल्कि गौर ब्लॉक की गरीब जनता के भरोसे का गला घोंटने जैसा है।हालिया मीडिया पड़ताल में महादेवा (बघौड़ा), गयाजीतपुर और तेनुआ आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (उप स्वास्थ्य केंद्रों) की हकीकत बेहद डरावनी मिली। इन तीनों केंद्रों पर सन्नाटा पसरा था और मुख्य द्वार पर ताला लटक रहा था। दूर-दराज से इलाज की आस लेकर आए गरीब मरीज घंटों इंतजार के बाद मायूस होकर वापस लौट गए। सवाल यह है कि जब केंद्र ही बंद रहेंगे, तो दवा और इलाज किसे मिलेगा? भ्रष्टाचार का 'गोरखधंधा': सुविधा शुल्क दो और ड्यूटी से गायब रहो! विश्वस्त सूत्रों के हवाले से जो खबर छनकर आ रही है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। चर्चा है कि सीएचसी गौर के प्रभारी डॉ० भास्कर यादव और बीसीपीएम अभिषेक कुमार ने स्वास्थ्य केंद्र को अपनी निजी जागीर बना लिया है।आरोप है कि यहाँ एक निश्चित 'रेट लिस्ट' तय है। जो सीएचओ (CHO) साहबों को प्रतिमाह 'सुविधा शुल्क' (कमीशन) पहुँचा देता है, उसे केंद्र से गायब रहने की खुली छूट मिल जाती है। बीसीपीएम और प्रभारी का मुख्य एजेंडा स्वास्थ्य सेवाएं देना नहीं, बल्कि सीएचओ से अवैध वसूली करना बन गया है। सवाल यह उठता है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था किसके भरोसे चलेगी? सूत्रों से प्राप्त सनसनीखेज जानकारी के अनुसार, गौर सीएचसी में भ्रष्टाचार का एक संगठित सिंडिकेट चल रहा है। आरोप है कि सीएचसी प्रभारी डॉ. भास्कर यादव और बीसीपीएम अभिषेक कुमार की सरपरस्ती में सीएचओ (CHO) से प्रतिमाह मोटा 'सुविधा शुल्क' वसूला जाता है। चर्चा है कि जो सीएचओ साहबों की जेब गरम कर देता है, उसे ड्यूटी से गायब रहने की 'अघोषित छूट' मिल जाती है। बीसीपीएम और प्रभारी का मुख्य उद्देश्य मरीजों की सेवा नहीं, बल्कि अवैध उगाही का लक्ष्य पूरा करना रह गया है। दवाइयों और जांच किट का 'अंधेरगर्दी' खेल सरकारी नियमों के अनुसार, इन आरोग्य मंदिरों में सुबह 08 से दोपहर 02 बजे तक मरीजों की निःशुल्क जांच (खून, पेशाब, शुगर, बलगम) और मुफ्त दवा वितरण होना चाहिए। लेकिन जब महीनों तक केंद्र खुलते ही नहीं, तो सरकार द्वारा भेजी जा रही दवाओं की खेप कहाँ जा रही है? क्या इन दवाओं को कागजों पर बांटकर खुले बाजार में बेचा जा रहा है? यदि शासन स्तर से इन केंद्रों के स्टॉक और उपस्थिति पंजिका की निष्पक्ष जांच (Audit) हो जाए, तो बीसीपीएम और प्रभारी के भ्रष्टाचार की परतें उधड़नी तय हैं।सरकारी नियमों के मुताबिक, इन आरोग्य मंदिरों को सुबह 08 बजे से दोपहर 02 बजे तक खुला रहना अनिवार्य है। यहां खून, पेशाब, शुगर और बलगम जैसी जांचें मुफ्त होनी चाहिए। लेकिन जब केंद्र खुलते ही नहीं, तो सरकार द्वारा भेजी जा रही लाखों की दवाइयां और मेडिकल किट आखिर जा कहां रही हैं? क्या इन दवाइयों को कागजों पर खपाकर बंदरबांट किया जा रहा है? यदि निष्पक्ष जांच हो जाए, तो गौर ब्लॉक में एक बड़ा घोटाला उजागर होना तय है। मीडिया के सवालों से भागते 'जिम्मेदार' जब इस पूरी अराजकता पर पक्ष जानने के लिए संबंधित केंद्रों के सीएचओ को फोन किया गया, तो किसी ने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। विडंबना देखिए, पूरे ब्लॉक की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रभारी डॉ० भास्कर यादव ने भी मीडिया के फोन को अनसुना कर दिया। अधिकारियों की यह 'रहस्यमयी चुप्पी' खुद-ब-खुद चीख-चीख कर घोटाले की कहानी बयां कर रही है।जब इस घोर लापरवाही और तालेबंदी के संबंध में संबंधित सीएचओ से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो किसी ने फोन नहीं उठाया। हद तो तब हो गई जब जिम्मेदार सीएचसी प्रभारी डॉ. भास्कर यादव ने भी मीडिया के फोन को रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा। अधिकारियों की यह चुप्पी साफ दर्शाती है कि कहीं न कहीं दाल में काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। मुख्य बिंदु जो जांच के घेरे में हैं: नदारद कर्मचारी: ड्यूटी समय में केंद्रों पर ताला क्यों? अवैध वसूली: क्या बीसीपीएम और प्रभारी की शह पर चल रहा है 'सुविधा शुल्क' का खेल? दवा घोटाला: बंद केंद्रों के नाम पर जारी होने वाली सरकारी दवाइयां कहां गायब हो रही हैं? सीधी चेतावनी: कब जागेगा प्रशासन? सीएचओ, बीसीपीएम और प्रभारी की इस तिकड़ी ने प्रदेश सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को ठेंगे पर रख दिया है। आखिर कब तक भ्रष्टाचार की इस आग में गरीब जनता झुलसती रहेगी? क्या बस्ती के आला अधिकारी इस 'लूटतंत्र' का संज्ञान लेंगे या फिर फाइलें दबाकर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देना जारी रखेंगे? जनता जवाब मांग रही है!
क्या 'कमीशन' के बदले बिक रही है गरीबों की सेहत? गौर के आरोग्य मंदिरों की बदहाली खोल रही भ्रष्टाचार की पोल। अजीत मिश्रा (खोजी) गौर स्वास्थ्य विभाग का 'खूनी' खेल: आरोग्य मंदिरों को बनाया उगाही का अड्डा, मरीजों की जान से खेल रहे जिम्मेदार! ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश) मरीज बेहाल, अफसर मालामाल: गौर सीएचसी प्रभारी और बीसीपीएम की सरपरस्ती में फल-फूल रहा 'वसूली तंत्र'! योगी सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे जिम्मेदार: इलाज के नाम पर 'तालेबंदी', वसूली के नाम पर 'खुली छूट'। क्या 'कमीशन' के बदले बिक रही है गरीबों की सेहत? गौर के आरोग्य मंदिरों की बदहाली खोल रही भ्रष्टाचार की पोल। मुफ्त दवा और जांच का सपना चकनाचूर: गौर में सीएचओ नदारद, प्रभारी ने साधी चुप्पी। साहब! ये आरोग्य मंदिर हैं या भ्रष्टाचार के अड्डे? बंद केंद्रों के नाम पर दवाओं की 'बंदरबांट' की बू। गौर (बस्ती)।। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां स्वास्थ्य व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए दिन-रात पसीना बहा रहे हैं, वहीं बस्ती जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर में बैठे कुछ 'सफेदपोश' अधिकारी सरकार की साख को बट्टा लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। यहाँ सरकारी आदेशों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके हैं।सूबे की सरकार भले ही 'अंतिम पायदान' तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँचाने का दम भर रही हो, लेकिन बस्ती जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) गौर के जिम्मेदार अधिकारी सरकार की मंशा पर कालिख पोतने में जुटे हैं। गौर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले आयुष्मान आरोग्य मंदिर अब 'आरोग्य' देने के बजाय भ्रष्टाचार के अड्डे बन चुके हैं। ताले में बंद स्वास्थ्य व्यवस्था: मरीज बेहाल, अधिकारी मालामाल महादेवा (बघौड़ा), गयाजीतपुर और तेनुआ—ये तीन नाम उन केंद्रों के हैं जहाँ मीडिया की टीम ने जब दस्तक दी, तो वहां इलाज नहीं बल्कि भारी-भरकम सरकारी ताले लटकते मिले। सुबह के वक्त जब इन केंद्रों पर गरीबों का हुजूम होना चाहिए था, वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। दूर-दराज के गांवों से तपती धूप और कठिनाइयों को पार कर पहुंचे मरीज और उनके तीमारदार गेट पर माथा पटक कर वापस लौट गए। यह केवल तालेबंदी नहीं, बल्कि गौर ब्लॉक की गरीब जनता के भरोसे का गला घोंटने जैसा है।हालिया मीडिया पड़ताल में महादेवा (बघौड़ा), गयाजीतपुर और तेनुआ आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (उप स्वास्थ्य केंद्रों) की हकीकत बेहद डरावनी मिली। इन तीनों केंद्रों पर सन्नाटा पसरा था और मुख्य द्वार पर ताला लटक रहा था। दूर-दराज से इलाज की आस लेकर आए गरीब मरीज घंटों इंतजार के बाद मायूस होकर वापस लौट गए। सवाल यह है कि जब केंद्र ही बंद रहेंगे, तो दवा और इलाज किसे मिलेगा? भ्रष्टाचार का 'गोरखधंधा': सुविधा शुल्क दो और ड्यूटी से गायब रहो! विश्वस्त सूत्रों के हवाले से जो खबर छनकर आ रही है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। चर्चा है कि सीएचसी गौर के प्रभारी डॉ० भास्कर यादव और बीसीपीएम अभिषेक कुमार ने स्वास्थ्य केंद्र को अपनी निजी जागीर बना लिया है।आरोप है कि यहाँ एक निश्चित 'रेट लिस्ट' तय है। जो सीएचओ (CHO) साहबों को प्रतिमाह 'सुविधा शुल्क' (कमीशन) पहुँचा देता है, उसे केंद्र से गायब रहने की खुली छूट मिल जाती है। बीसीपीएम और प्रभारी का मुख्य एजेंडा स्वास्थ्य सेवाएं देना नहीं, बल्कि सीएचओ से अवैध वसूली करना बन गया है।
सवाल यह उठता है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था किसके भरोसे चलेगी? सूत्रों से प्राप्त सनसनीखेज जानकारी के अनुसार, गौर सीएचसी में भ्रष्टाचार का एक संगठित सिंडिकेट चल रहा है। आरोप है कि सीएचसी प्रभारी डॉ. भास्कर यादव और बीसीपीएम अभिषेक कुमार की सरपरस्ती में सीएचओ (CHO) से प्रतिमाह मोटा 'सुविधा शुल्क' वसूला जाता है। चर्चा है कि जो सीएचओ साहबों की जेब गरम कर देता है, उसे ड्यूटी से गायब रहने की 'अघोषित छूट' मिल जाती है। बीसीपीएम और प्रभारी का मुख्य उद्देश्य मरीजों की सेवा नहीं, बल्कि अवैध उगाही का लक्ष्य पूरा करना रह गया है। दवाइयों और जांच किट का 'अंधेरगर्दी' खेल सरकारी नियमों के अनुसार, इन आरोग्य मंदिरों में सुबह 08 से दोपहर 02 बजे तक मरीजों की निःशुल्क जांच (खून, पेशाब, शुगर, बलगम) और मुफ्त दवा वितरण होना चाहिए। लेकिन जब महीनों तक केंद्र खुलते ही नहीं, तो सरकार द्वारा भेजी जा रही दवाओं की खेप कहाँ जा रही है? क्या इन दवाओं को कागजों पर बांटकर खुले बाजार में बेचा जा रहा है? यदि शासन स्तर से इन केंद्रों के स्टॉक और उपस्थिति पंजिका की निष्पक्ष जांच (Audit) हो जाए, तो बीसीपीएम और प्रभारी के भ्रष्टाचार की परतें उधड़नी तय हैं।सरकारी नियमों के मुताबिक, इन आरोग्य मंदिरों को सुबह 08 बजे से दोपहर 02 बजे तक खुला रहना अनिवार्य है। यहां खून, पेशाब, शुगर और बलगम जैसी जांचें मुफ्त होनी चाहिए। लेकिन जब केंद्र खुलते ही नहीं, तो सरकार द्वारा भेजी जा रही लाखों की दवाइयां और मेडिकल किट आखिर जा कहां रही हैं? क्या इन दवाइयों को कागजों पर खपाकर बंदरबांट किया जा रहा है? यदि निष्पक्ष जांच हो जाए, तो गौर ब्लॉक में एक बड़ा घोटाला उजागर होना तय है। मीडिया के सवालों से भागते 'जिम्मेदार' जब इस पूरी अराजकता पर पक्ष जानने के लिए संबंधित केंद्रों के सीएचओ को फोन किया गया, तो किसी ने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। विडंबना देखिए, पूरे ब्लॉक की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रभारी डॉ० भास्कर यादव ने भी मीडिया के फोन को अनसुना कर दिया। अधिकारियों की यह 'रहस्यमयी चुप्पी' खुद-ब-खुद चीख-चीख कर घोटाले की कहानी बयां कर रही है।जब इस घोर लापरवाही और तालेबंदी के संबंध में संबंधित सीएचओ से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो किसी ने फोन नहीं उठाया। हद तो तब हो गई जब जिम्मेदार सीएचसी प्रभारी डॉ. भास्कर यादव ने भी मीडिया के फोन को रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा। अधिकारियों की यह चुप्पी साफ दर्शाती है कि कहीं न कहीं दाल में काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। मुख्य बिंदु जो जांच के घेरे में हैं: नदारद कर्मचारी: ड्यूटी समय में केंद्रों पर ताला क्यों? अवैध वसूली: क्या बीसीपीएम और प्रभारी की शह पर चल रहा है 'सुविधा शुल्क' का खेल? दवा घोटाला: बंद केंद्रों के नाम पर जारी होने वाली सरकारी दवाइयां कहां गायब हो रही हैं? सीधी चेतावनी: कब जागेगा प्रशासन? सीएचओ, बीसीपीएम और प्रभारी की इस तिकड़ी ने प्रदेश सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को ठेंगे पर रख दिया है। आखिर कब तक भ्रष्टाचार की इस आग में गरीब जनता झुलसती रहेगी? क्या बस्ती के आला अधिकारी इस 'लूटतंत्र' का संज्ञान लेंगे या फिर फाइलें दबाकर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देना जारी रखेंगे? जनता जवाब मांग रही है!
- यह कहते हुए रोशन आनंद की आंखें भर आईं। उस शाम वह परिवार के सात अन्य सदस्यों के साथ मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी डैम के क्रूज पर सवार थे। उनका परिवार बच गया, लेकिन हर किसी की 13 में 9 लोगों की मौत हुई, जबकि 4 अब भी लापता हैं। कुछ परिवार अपनों की तलाश में हैं, कुछ के पास सिर्फ यादें और सदमा है। बचे लोग इसे चमत्कार मान रहे हैं, लेकिन उनकी बातों में उस शाम की दहशत साफ है।1
- अजीत मिश्रा (खोजी) गौर स्वास्थ्य विभाग का 'खूनी' खेल: आरोग्य मंदिरों को बनाया उगाही का अड्डा, मरीजों की जान से खेल रहे जिम्मेदार! ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश) मरीज बेहाल, अफसर मालामाल: गौर सीएचसी प्रभारी और बीसीपीएम की सरपरस्ती में फल-फूल रहा 'वसूली तंत्र'! योगी सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे जिम्मेदार: इलाज के नाम पर 'तालेबंदी', वसूली के नाम पर 'खुली छूट'। क्या 'कमीशन' के बदले बिक रही है गरीबों की सेहत? गौर के आरोग्य मंदिरों की बदहाली खोल रही भ्रष्टाचार की पोल। मुफ्त दवा और जांच का सपना चकनाचूर: गौर में सीएचओ नदारद, प्रभारी ने साधी चुप्पी। साहब! ये आरोग्य मंदिर हैं या भ्रष्टाचार के अड्डे? बंद केंद्रों के नाम पर दवाओं की 'बंदरबांट' की बू। गौर (बस्ती)।। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां स्वास्थ्य व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए दिन-रात पसीना बहा रहे हैं, वहीं बस्ती जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर में बैठे कुछ 'सफेदपोश' अधिकारी सरकार की साख को बट्टा लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। यहाँ सरकारी आदेशों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके हैं।सूबे की सरकार भले ही 'अंतिम पायदान' तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँचाने का दम भर रही हो, लेकिन बस्ती जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) गौर के जिम्मेदार अधिकारी सरकार की मंशा पर कालिख पोतने में जुटे हैं। गौर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले आयुष्मान आरोग्य मंदिर अब 'आरोग्य' देने के बजाय भ्रष्टाचार के अड्डे बन चुके हैं। ताले में बंद स्वास्थ्य व्यवस्था: मरीज बेहाल, अधिकारी मालामाल महादेवा (बघौड़ा), गयाजीतपुर और तेनुआ—ये तीन नाम उन केंद्रों के हैं जहाँ मीडिया की टीम ने जब दस्तक दी, तो वहां इलाज नहीं बल्कि भारी-भरकम सरकारी ताले लटकते मिले। सुबह के वक्त जब इन केंद्रों पर गरीबों का हुजूम होना चाहिए था, वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। दूर-दराज के गांवों से तपती धूप और कठिनाइयों को पार कर पहुंचे मरीज और उनके तीमारदार गेट पर माथा पटक कर वापस लौट गए। यह केवल तालेबंदी नहीं, बल्कि गौर ब्लॉक की गरीब जनता के भरोसे का गला घोंटने जैसा है।हालिया मीडिया पड़ताल में महादेवा (बघौड़ा), गयाजीतपुर और तेनुआ आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (उप स्वास्थ्य केंद्रों) की हकीकत बेहद डरावनी मिली। इन तीनों केंद्रों पर सन्नाटा पसरा था और मुख्य द्वार पर ताला लटक रहा था। दूर-दराज से इलाज की आस लेकर आए गरीब मरीज घंटों इंतजार के बाद मायूस होकर वापस लौट गए। सवाल यह है कि जब केंद्र ही बंद रहेंगे, तो दवा और इलाज किसे मिलेगा? भ्रष्टाचार का 'गोरखधंधा': सुविधा शुल्क दो और ड्यूटी से गायब रहो! विश्वस्त सूत्रों के हवाले से जो खबर छनकर आ रही है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। चर्चा है कि सीएचसी गौर के प्रभारी डॉ० भास्कर यादव और बीसीपीएम अभिषेक कुमार ने स्वास्थ्य केंद्र को अपनी निजी जागीर बना लिया है।आरोप है कि यहाँ एक निश्चित 'रेट लिस्ट' तय है। जो सीएचओ (CHO) साहबों को प्रतिमाह 'सुविधा शुल्क' (कमीशन) पहुँचा देता है, उसे केंद्र से गायब रहने की खुली छूट मिल जाती है। बीसीपीएम और प्रभारी का मुख्य एजेंडा स्वास्थ्य सेवाएं देना नहीं, बल्कि सीएचओ से अवैध वसूली करना बन गया है। सवाल यह उठता है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था किसके भरोसे चलेगी? सूत्रों से प्राप्त सनसनीखेज जानकारी के अनुसार, गौर सीएचसी में भ्रष्टाचार का एक संगठित सिंडिकेट चल रहा है। आरोप है कि सीएचसी प्रभारी डॉ. भास्कर यादव और बीसीपीएम अभिषेक कुमार की सरपरस्ती में सीएचओ (CHO) से प्रतिमाह मोटा 'सुविधा शुल्क' वसूला जाता है। चर्चा है कि जो सीएचओ साहबों की जेब गरम कर देता है, उसे ड्यूटी से गायब रहने की 'अघोषित छूट' मिल जाती है। बीसीपीएम और प्रभारी का मुख्य उद्देश्य मरीजों की सेवा नहीं, बल्कि अवैध उगाही का लक्ष्य पूरा करना रह गया है। दवाइयों और जांच किट का 'अंधेरगर्दी' खेल सरकारी नियमों के अनुसार, इन आरोग्य मंदिरों में सुबह 08 से दोपहर 02 बजे तक मरीजों की निःशुल्क जांच (खून, पेशाब, शुगर, बलगम) और मुफ्त दवा वितरण होना चाहिए। लेकिन जब महीनों तक केंद्र खुलते ही नहीं, तो सरकार द्वारा भेजी जा रही दवाओं की खेप कहाँ जा रही है? क्या इन दवाओं को कागजों पर बांटकर खुले बाजार में बेचा जा रहा है? यदि शासन स्तर से इन केंद्रों के स्टॉक और उपस्थिति पंजिका की निष्पक्ष जांच (Audit) हो जाए, तो बीसीपीएम और प्रभारी के भ्रष्टाचार की परतें उधड़नी तय हैं।सरकारी नियमों के मुताबिक, इन आरोग्य मंदिरों को सुबह 08 बजे से दोपहर 02 बजे तक खुला रहना अनिवार्य है। यहां खून, पेशाब, शुगर और बलगम जैसी जांचें मुफ्त होनी चाहिए। लेकिन जब केंद्र खुलते ही नहीं, तो सरकार द्वारा भेजी जा रही लाखों की दवाइयां और मेडिकल किट आखिर जा कहां रही हैं? क्या इन दवाइयों को कागजों पर खपाकर बंदरबांट किया जा रहा है? यदि निष्पक्ष जांच हो जाए, तो गौर ब्लॉक में एक बड़ा घोटाला उजागर होना तय है। मीडिया के सवालों से भागते 'जिम्मेदार' जब इस पूरी अराजकता पर पक्ष जानने के लिए संबंधित केंद्रों के सीएचओ को फोन किया गया, तो किसी ने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। विडंबना देखिए, पूरे ब्लॉक की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रभारी डॉ० भास्कर यादव ने भी मीडिया के फोन को अनसुना कर दिया। अधिकारियों की यह 'रहस्यमयी चुप्पी' खुद-ब-खुद चीख-चीख कर घोटाले की कहानी बयां कर रही है।जब इस घोर लापरवाही और तालेबंदी के संबंध में संबंधित सीएचओ से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो किसी ने फोन नहीं उठाया। हद तो तब हो गई जब जिम्मेदार सीएचसी प्रभारी डॉ. भास्कर यादव ने भी मीडिया के फोन को रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा। अधिकारियों की यह चुप्पी साफ दर्शाती है कि कहीं न कहीं दाल में काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है। मुख्य बिंदु जो जांच के घेरे में हैं: नदारद कर्मचारी: ड्यूटी समय में केंद्रों पर ताला क्यों? अवैध वसूली: क्या बीसीपीएम और प्रभारी की शह पर चल रहा है 'सुविधा शुल्क' का खेल? दवा घोटाला: बंद केंद्रों के नाम पर जारी होने वाली सरकारी दवाइयां कहां गायब हो रही हैं? सीधी चेतावनी: कब जागेगा प्रशासन? सीएचओ, बीसीपीएम और प्रभारी की इस तिकड़ी ने प्रदेश सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को ठेंगे पर रख दिया है। आखिर कब तक भ्रष्टाचार की इस आग में गरीब जनता झुलसती रहेगी? क्या बस्ती के आला अधिकारी इस 'लूटतंत्र' का संज्ञान लेंगे या फिर फाइलें दबाकर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देना जारी रखेंगे? जनता जवाब मांग रही है!2
- Post by Shivaji Sonkar2
- *थाना कोतवाली खलीलाबाद अन्तर्गत एक महिला द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या कर लेने व पुलिस द्वारा कृत कार्यवाही के सम्बन्ध में अपर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर द्वारा दी गयी जानकारी1
- *अपर पुलिस अधीक्षक ने नवनियुक्त कांस्टेबलों को दिए बेहतर पुलिसिंग के गुर* संदीप कुमार मीणा के निर्देशन में थाना महुली परिसर में नवनियुक्त पुलिस कांस्टेबलों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सुशील कुमार सिंह द्वारा नव नियुक्त पुलिस कर्मियों को बेहतर पुलिसिंग, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा एवं जनसेवा के मूल मंत्र बताए गए। बैठक के दौरान दुर्गेश कुमार पांडे सहित थाने के सभी स्टॉप भी उपस्थित रहे। अधिकारियों द्वारा नव नियुक्त कांस्टेबलों को बताया गया कि पुलिस सेवा केवल नौकरी नहीं बल्कि समाज की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था बनाए रखने तथा आमजन में विश्वास स्थापित करने का महत्वपूर्ण दायित्व है। अपर पुलिस अधीक्षक ने सभी नव नियुक्त पुलिस कर्मियों को निर्देशित किया कि वे जनता से विनम्र व्यवहार करें, शिकायतों का त्वरित निस्तारण करें, कानून व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं तथा अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करें।* साथ ही उन्हें साइबर अपराध, महिला सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, बीट पुलिसिंग एवं अपराध नियंत्रण के आधुनिक तरीकों की जानकारी देते हुए सतर्क एवं संवेदनशील पुलिसिंग अपनाने हेतु प्रेरित किया गया। बैठक के अंत में सभी नवनियुक्त कांस्टेबलों को निष्ठा, अनुशासन एवं समर्पण भाव से कार्य करने हेतु प्रेरित किया गया तथा उज्ज्वल सेवा जीवन की शुभकामनाएं दी गईं। थाना महुली पुलिस जनसेवा एवं सुरक्षा हेतु सतत प्रतिबद्ध है।4
- संतकबीरनगर। जनपद न्यायालय परिसर स्थित सभागार में सिविल बार एसोसिएशन द्वारा एक गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें लखनऊ में आयोजित ज्यूडिशियल स्पोर्ट्स मीट में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर नौ पदक हासिल करने वाले न्यायिक अधिकारियों को सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि को जनपद के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए बार पदाधिकारियों ने अधिकारियों की सराहना की। कार्यक्रम में जनपद न्यायाधीश रणधीर सिंह समेत अन्य न्यायिक अधिकारियों को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों का खेल के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह जनपद की प्रतिष्ठा को भी बढ़ाता है। अपने संबोधन में जनपद न्यायाधीश रणधीर सिंह ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में खेलकूद, योग अथवा व्यायाम को शामिल करना चाहिए, जिससे शारीरिक एवं मानसिक संतुलन बना रहता है। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी अजय त्रिपाठी ने कहा कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का वास होता है और इस प्रकार के आयोजन समाज को सकारात्मक संदेश देते हैं। एडीजे गजेंद्र कुमार ने न्यायिक अधिकारियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि यह उपलब्धि आने वाले समय में अन्य लोगों को भी प्रेरित करेगी। वहीं एडीजे पास्को कोर्ट कृष्ण कुमार एवं एडीजे एससीएसटी कोर्ट कुलदीप कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया। सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ईश्वर प्रसाद पाठक ने कहा कि जनपद के इतिहास में यह पहला अवसर है जब न्यायिक अधिकारियों ने प्रदेश स्तर पर खेल के क्षेत्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल की है। महामंत्री निरंजन सिंह ने भविष्य में बार एवं बेंच के संयुक्त तत्वावधान में खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित करने की बात कही। कार्यक्रम को प्राधिकरण के सचिव व सिविल जज (सीनियर डिवीजन) सुनील कुमार सिंह, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चेतना त्यागी, न्यायिक मजिस्ट्रेट अशोक कसौधन, अभिनव त्रिपाठी, पूर्व अध्यक्ष महीप बहादुर पाल, वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रभूषण मणि त्रिपाठी, राकेश मिश्र, चीफ डिफेंस काउंसिल अंजय कुमार श्रीवास्तव, पूर्व महामंत्री नवनीत कुमार पांडेय, जिला शासकीय अधिवक्ता विशाल श्रीवास्तव आदि अधिवक्ताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी उपस्थित जनों ने न्यायिक अधिकारियों की उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की। #SantKabirNagar #JudicialOfficers #SportsAchievement #JudicialSportsMeet #ProudMoment #BarAssociation #सम्मान_समारोह #खेलकूद #प्रेरणा #उत्तरप्रदेश #Lucknow #BreakingNews #NewsUpdate #HindiNews #liveuponenews2
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- ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश अजीत मिश्रा (खोजी) बस्ती (उत्तर प्रदेश): जनपद के हरैया तहसील क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ आरकेवीएस (RKVS) इंटर कॉलेज में चल रहे जनगणना 2027 के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान माहौल उस समय गरमा गया जब कॉलेज प्रबंधक और शिक्षकों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि शिक्षकों ने प्रशिक्षण का बहिष्कार कर विद्यालय के मुख्य गेट पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। 🛑अपमान का आरोप और शिक्षकों का आक्रोश मिली जानकारी के अनुसार, जनगणना 2027 के लिए आयोजित प्रशिक्षण शिविर में बड़ी संख्या में शिक्षक हिस्सा लेने पहुँचे थे। आरोप है कि प्रशिक्षण के दौरान कॉलेज प्रबंधक ने शिक्षकों के साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें अपमानित किया। इस घटना से शिक्षकों का स्वाभिमान आहत हुआ और उन्होंने एकजुट होकर विद्यालय परिसर में नारेबाजी शुरू कर दी। "शिक्षक समाज का दर्पण है और उनके सम्मान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रबंधक का व्यवहार निंदनीय है।" > — प्रदर्शनकारी शिक्षक 🛑विद्यालय गेट पर जमी भीड़, माहौल तनावपूर्ण घटना के बाद विद्यालय के बाहर शिक्षकों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा है। प्रदर्शनकारी शिक्षक कॉलेज प्रबंधक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों की भीड़ भी मौके पर जुटने लगी है। विद्यालय परिसर के भीतर और बाहर भारी हलचल देखी जा रही है और वर्तमान में माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। 🛑प्रमुख बिंदु: घटनास्थल: आरकेवीएस इंटर कॉलेज, हरैया तहसील, बस्ती। कारण: जनगणना 2027 प्रशिक्षण के दौरान प्रबंधक द्वारा कथित बदसलूकी। मांग: प्रबंधक के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई या सार्वजनिक माफी। वर्तमान स्थिति: शिक्षकों का प्रदर्शन जारी, कार्य पूरी तरह ठप। 🛑क्या होगी आगे की कार्रवाई? अब सभी की निगाहें प्रशासन और शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों पर टिकी हैं। क्या आरोपी प्रबंधक के खिलाफ शासन कोई ठोस कदम उठाएगा? या फिर आपसी समझौते से मामला शांत होगा? फिलहाल, शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें न्याय और सम्मान नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगे। बस्ती मंडल की पल-पल की खबरों के लिए बने रहिए हमारे साथ।1