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🚨 *ब्रेकिंग पोलखोल* 💥 *गाडरवारा में मौत का हाईवे* ! NTPC *के डंपरों का कहर, 2 लोगों की दर्दनाक मौत”!
कृष्णकांत प्रदीप शर्मा करेली
🚨 *ब्रेकिंग पोलखोल* 💥 *गाडरवारा में मौत का हाईवे* ! NTPC *के डंपरों का कहर, 2 लोगों की दर्दनाक मौत”!
More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- Post by कृष्णकांत प्रदीप शर्मा करेली1
- Post by पंकज गुप्ता "पत्रकार"1
- ठेमी थाना अंतर्गत नयागांव में पड़ोस में रहने वाले दो पड़ोसियों के बीच पुरानी रंजिश को लेकर मारपिट की घटना हो गई जिसमें दोनों पक्षो के बीच लाठी डंडे चलने की सूचना प्राप्त हुई वही मारपिट की घटना में गजराज को गम्भीर चोट आ गई और उसने दम तोड़ दिया जिससे पुरे गांव में दहशत का माहौल हो गया वही ग्रामीणों ने ठेमी थाना पुलिस को जैसे ही घटना की सूचना दी तो थाने से पुलिस मौके पर पहुची और मौके पर पंचनामा कार्यवाही कर मर्ग प्रकरण कायम किया गया वही शव को जिला अस्पताल लाया गया और शवगृह में रखवाया गया वही पुलिस पूरे मामले में जांच में जुटी हुई हैं घटना को अंजाम देकर आरोपित भी फरार हो गए पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी हुई हैं।1
- समर कैंप' नहीं, यह 'संस्कार कैंप': 15 साल के नन्हे पथिक, गुरु के साथ निकले 3000 किमी की नर्मदा परिक्रमा पर नरसिहपुर। जहाँ आज की पीढ़ी गर्मी की छुट्टियों में महंगे समर कैंपों में स्विमिंग, पेंटिंग और गैजेट्स के बीच अपना समय बिताती है, वहीं 15 साल की उम्र के 7 बच्चों ने एक ऐसा मार्ग चुना है जो उनके भविष्य की नींव को 'संस्कारों' से सींच रहा है। कंधे पर झोला, हाथ में लाठी और पैरों में छाले लिए ये नन्हे पथिक अपने गुरु के सानिध्य में माँ नर्मदा की पैदल परिक्रमा पर निकले हैं। छुट्टी नहीं, यह है तपस्या 45 डिग्री की तपती दोपहरी, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और मीलों का सफर—ये बच्चे किसी सुख-सुविधा की तलाश में नहीं, बल्कि 'मैया' की भक्ति में लीन हैं। इन बच्चों के चेहरों पर जो चमक है, वह एसी-कूलर के कमरों में नहीं मिलती। 'नर्मदे हर' के जयकारे के साथ कदम-दर-कदम बढ़ती यह यात्रा केवल परिक्रमा नहीं, बल्कि एक कठिन तपस्या है, जिसे इन बच्चों ने स्वेच्छा से चुना है। बचपन में ठाना, जो बड़े उम्र में सोचते हैं आमतौर पर लोग जीवन की भागदौड़ के बाद रिटायरमेंट के समय चार धाम की यात्रा का संकल्प लेते हैं, लेकिन इन बच्चों ने 15 साल की कच्ची उम्र में ही 3000 किलोमीटर की दुर्गम परिक्रमा का संकल्प लेकर सबको हैरान कर दिया है। अमरकंटक से शुरू हुई यह यात्रा दादा महाराज मंदिर होते हुए अब माँ के तटों के साथ-साथ आगे बढ़ रही है। सोच बदल दी इन नन्हे पथिकों ने इन बच्चों ने समाज को एक नई दिशा दिखाई है। जहाँ हम और आप गर्मियों की छुट्टियों में शिमला, मनाली जैसे हिल स्टेशनों का सपना देखते हैं, वहीं इन बच्चों ने भौतिक सुखों को त्यागकर माँ नर्मदा के दर्शन और उनके प्रति कृतज्ञता को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया है। यह 'संस्कार कैंप' न केवल इन बच्चों के साहस को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि यदि सही मार्गदर्शन (गुरु) और संकल्प शक्ति हो, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। यह यात्रा आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है कि धर्म, आस्था और अनुशासन का मार्ग ही जीवन का सच्चा 'कैंप' है।1
- 22 तारीख से चल रहे धरना प्रदर्शन के तीन दिन गुजरने के बाद क्रमिक भूख हड़ताल के पहले दिन जनपद कार्यालय के बाजू में जनता धरने पर बैठी थी और कलेक्टर महोदया जनपद पंचायत कार्यालय में बैठकें लेकर धरना स्थल के सामने से बिना किसी संवाद के चले जाना नगर परिषद साईंखेड़ा में हो रहे भ्रष्टाचार को मोन समर्थन दे गईं ।1
- Post by Dharmendra sahu1
- समस्त जिलावासी आगामी जनगणना कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि स्व-गणना के माध्यम से नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं, जिससे प्रक्रिया सरल, तेज और पारदर्शी बनेगी। उन्होंने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे सही और सटीक जानकारी दर्ज करें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।1
- Post by कृष्णकांत प्रदीप शर्मा करेली1