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- Post by Varun Slathia1
- जनजातीय क्षेत्र पांगी के शिक्षा खंड में सरकारी स्कूलों की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राजकीय केंद्रीय प्राथमिक विद्यालय साच में शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है, जहां पहली से पांचवीं कक्षा तक के 27 विद्यार्थियों की पढ़ाई मात्र एक SMC (स्कूल प्रबंधन समिति) के शिक्षक के सहारे चल रही है। प्रदेश सरकार द्वारा विद्यालय तो खोल दिए गए, लेकिन शिक्षकों के खाली पद भरने में लगातार लापरवाही बरती जा रही है। साच विद्यालय इसका ताजा उदाहरण बनकर सामने आया है। केंद्रीय प्राथमिक विद्यालय होने के बावजूद यहां एक भी स्थायी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है। विद्यालय में पढ़ने वाले नौनिहालों को सभी विषय—वह भी अंग्रेजी माध्यम में—एक ही शिक्षक द्वारा पढ़ाए जा रहे हैं। इसके साथ ही वही शिक्षक मिड-डे मील, सरकारी डाक, प्रशासनिक कार्यों सहित अन्य जिम्मेदारियां भी निभा रहा है। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाना मुश्किल हो गया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसी विद्यालय के अधीन आने वाले अन्य प्राथमिक स्कूलों की देखरेख की जिम्मेदारी भी उसी एक शिक्षक पर है। इससे शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है। अभिभावकों में रोष, दी आंदोलन की चेतावनी विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर अभिभावकों में गहरा रोष है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, जनजातीय विकास मंत्री, स्थानीय विधायक और आवासीय आयुक्त पांगी से जल्द से जल्द अतिरिक्त शिक्षक नियुक्त करने की मांग की है। अभिभावकों का कहना है कि एक ही शिक्षक को प्री-प्राइमरी से लेकर पांचवीं तक की कक्षाएं संभालनी पड़ रही हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। एसएमसी अध्यक्ष ने उठाए सवाल स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विद्यालय पिछले एक वर्ष से शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। अब हालात इतने खराब हो चुके हैं कि स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि विद्यालय पर्याप्त शिक्षक न होने से स्कूल संचालन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई, तो सभी अभिभावक अपने बच्चों के साथ किलाड़ मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन करेंगे। बच्चों का भविष्य अधर में जनजातीय क्षेत्र के इस विद्यालय की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर एक शिक्षक के भरोसे चल रहे स्कूल में बच्चों को कैसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाएगी। यदि जल्द ही उचित कदम नहीं उठाए गए, तो इन 27 मासूमों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है।1
- Post by Sanam Aijaz1