एक शिक्षक के भरोसे चल रहा केंद्रीय प्राथमिक विद्यालय साच, 27 बच्चों का भविष्य दांव पर। कृष्ण चंद राणा पांगी न्यूज़ टुडे। जनजातीय क्षेत्र पांगी के शिक्षा खंड में सरकारी स्कूलों की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राजकीय केंद्रीय प्राथमिक विद्यालय साच में शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है, जहां पहली से पांचवीं कक्षा तक के 27 विद्यार्थियों की पढ़ाई मात्र एक SMC (स्कूल प्रबंधन समिति) के शिक्षक के सहारे चल रही है। प्रदेश सरकार द्वारा विद्यालय तो खोल दिए गए, लेकिन शिक्षकों के खाली पद भरने में लगातार लापरवाही बरती जा रही है। साच विद्यालय इसका ताजा उदाहरण बनकर सामने आया है। केंद्रीय प्राथमिक विद्यालय होने के बावजूद यहां एक भी स्थायी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है। विद्यालय में पढ़ने वाले नौनिहालों को सभी विषय—वह भी अंग्रेजी माध्यम में—एक ही शिक्षक द्वारा पढ़ाए जा रहे हैं। इसके साथ ही वही शिक्षक मिड-डे मील, सरकारी डाक, प्रशासनिक कार्यों सहित अन्य जिम्मेदारियां भी निभा रहा है। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाना मुश्किल हो गया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसी विद्यालय के अधीन आने वाले अन्य प्राथमिक स्कूलों की देखरेख की जिम्मेदारी भी उसी एक शिक्षक पर है। इससे शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है। अभिभावकों में रोष, दी आंदोलन की चेतावनी विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर अभिभावकों में गहरा रोष है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, जनजातीय विकास मंत्री, स्थानीय विधायक और आवासीय आयुक्त पांगी से जल्द से जल्द अतिरिक्त शिक्षक नियुक्त करने की मांग की है। अभिभावकों का कहना है कि एक ही शिक्षक को प्री-प्राइमरी से लेकर पांचवीं तक की कक्षाएं संभालनी पड़ रही हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। एसएमसी अध्यक्ष ने उठाए सवाल स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विद्यालय पिछले एक वर्ष से शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। अब हालात इतने खराब हो चुके हैं कि स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि विद्यालय पर्याप्त शिक्षक न होने से स्कूल संचालन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई, तो सभी अभिभावक अपने बच्चों के साथ किलाड़ मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन करेंगे। बच्चों का भविष्य अधर में जनजातीय क्षेत्र के इस विद्यालय की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर एक शिक्षक के भरोसे चल रहे स्कूल में बच्चों को कैसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाएगी। यदि जल्द ही उचित कदम नहीं उठाए गए, तो इन 27 मासूमों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है।
एक शिक्षक के भरोसे चल रहा केंद्रीय प्राथमिक विद्यालय साच, 27 बच्चों का भविष्य दांव पर। कृष्ण चंद राणा पांगी न्यूज़ टुडे। जनजातीय क्षेत्र पांगी के शिक्षा खंड में सरकारी स्कूलों की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राजकीय केंद्रीय प्राथमिक विद्यालय साच में शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है, जहां पहली से पांचवीं कक्षा तक के 27 विद्यार्थियों की पढ़ाई मात्र एक SMC (स्कूल प्रबंधन समिति) के शिक्षक के सहारे चल रही है। प्रदेश सरकार द्वारा विद्यालय तो खोल दिए गए, लेकिन शिक्षकों के खाली पद भरने में लगातार लापरवाही बरती जा रही है। साच विद्यालय इसका ताजा उदाहरण बनकर सामने आया है। केंद्रीय प्राथमिक विद्यालय होने के बावजूद यहां एक भी स्थायी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है। विद्यालय में पढ़ने वाले नौनिहालों को सभी विषय—वह भी अंग्रेजी माध्यम में—एक ही शिक्षक द्वारा पढ़ाए जा रहे हैं। इसके साथ ही वही शिक्षक मिड-डे मील, सरकारी डाक, प्रशासनिक कार्यों सहित अन्य जिम्मेदारियां भी निभा रहा है। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाना मुश्किल हो गया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसी विद्यालय के अधीन आने वाले अन्य प्राथमिक स्कूलों की देखरेख की जिम्मेदारी भी उसी एक शिक्षक पर है। इससे शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है। अभिभावकों में रोष, दी आंदोलन की चेतावनी विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर अभिभावकों में गहरा रोष है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, जनजातीय विकास मंत्री, स्थानीय विधायक और आवासीय आयुक्त पांगी से जल्द से जल्द अतिरिक्त शिक्षक नियुक्त करने की मांग की है। अभिभावकों का कहना है कि एक ही शिक्षक को प्री-प्राइमरी से लेकर पांचवीं तक की कक्षाएं संभालनी पड़ रही हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। एसएमसी अध्यक्ष ने उठाए सवाल स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विद्यालय पिछले एक वर्ष से शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। अब हालात इतने खराब हो चुके हैं कि स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि विद्यालय पर्याप्त शिक्षक न होने से स्कूल संचालन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई, तो सभी अभिभावक अपने बच्चों के साथ किलाड़ मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन करेंगे। बच्चों का भविष्य अधर में जनजातीय क्षेत्र के इस विद्यालय की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर एक शिक्षक के भरोसे चल रहे स्कूल में बच्चों को कैसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाएगी। यदि जल्द ही उचित कदम नहीं उठाए गए, तो इन 27 मासूमों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है।
- जनजातीय क्षेत्र पांगी के शिक्षा खंड में सरकारी स्कूलों की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। राजकीय केंद्रीय प्राथमिक विद्यालय साच में शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है, जहां पहली से पांचवीं कक्षा तक के 27 विद्यार्थियों की पढ़ाई मात्र एक SMC (स्कूल प्रबंधन समिति) के शिक्षक के सहारे चल रही है। प्रदेश सरकार द्वारा विद्यालय तो खोल दिए गए, लेकिन शिक्षकों के खाली पद भरने में लगातार लापरवाही बरती जा रही है। साच विद्यालय इसका ताजा उदाहरण बनकर सामने आया है। केंद्रीय प्राथमिक विद्यालय होने के बावजूद यहां एक भी स्थायी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है। विद्यालय में पढ़ने वाले नौनिहालों को सभी विषय—वह भी अंग्रेजी माध्यम में—एक ही शिक्षक द्वारा पढ़ाए जा रहे हैं। इसके साथ ही वही शिक्षक मिड-डे मील, सरकारी डाक, प्रशासनिक कार्यों सहित अन्य जिम्मेदारियां भी निभा रहा है। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाना मुश्किल हो गया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसी विद्यालय के अधीन आने वाले अन्य प्राथमिक स्कूलों की देखरेख की जिम्मेदारी भी उसी एक शिक्षक पर है। इससे शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमराती नजर आ रही है। अभिभावकों में रोष, दी आंदोलन की चेतावनी विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर अभिभावकों में गहरा रोष है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, जनजातीय विकास मंत्री, स्थानीय विधायक और आवासीय आयुक्त पांगी से जल्द से जल्द अतिरिक्त शिक्षक नियुक्त करने की मांग की है। अभिभावकों का कहना है कि एक ही शिक्षक को प्री-प्राइमरी से लेकर पांचवीं तक की कक्षाएं संभालनी पड़ रही हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। एसएमसी अध्यक्ष ने उठाए सवाल स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विद्यालय पिछले एक वर्ष से शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। अब हालात इतने खराब हो चुके हैं कि स्कूल बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि विद्यालय पर्याप्त शिक्षक न होने से स्कूल संचालन प्रभावित हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई, तो सभी अभिभावक अपने बच्चों के साथ किलाड़ मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन करेंगे। बच्चों का भविष्य अधर में जनजातीय क्षेत्र के इस विद्यालय की स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर एक शिक्षक के भरोसे चल रहे स्कूल में बच्चों को कैसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाएगी। यदि जल्द ही उचित कदम नहीं उठाए गए, तो इन 27 मासूमों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है।1
- नवरात्रि में बेटियों को “देवी” मानने वाला समाज… उसी समाज में एक 3 साल की बच्ची इंसानियत का सबसे डरावना चेहरा झेलती है… जब भी किसी लड़की के साथ कुछ ग़लत होता है… सबसे पहले सवाल उसी से पूछे जाते हैं— क्या पहना था? कहाँ जा रही थी? इतनी रात को बाहर क्यों थी? लेकिन इस बार… सिर्फ 3 साल की बच्ची है… अब क्या पूछोगे उससे? क्या पहना था? क्यों बाहर गई थी? किसके साथ थी? या फिर अब मानोगे… कि ग़लत लड़की नहीं, सड़ तो हमारा समाज गया है!1
- candi mata mandir dan jashdaar4
- Post by Varun Slathia1
- 🔱 चंबा के ऐतिहासिक चौगान में गूंजे “हर-हर महादेव” के जयकारे 🔱 देवभूमि चंबा ने एक बार फिर इतिहास और आस्था के अद्भुत संगम का साक्षी बनकर पूरे वातावरण को शिवमय कर दिया 🙏 करीब 1000 वर्षों पुराने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य अवशेषों के चंबा पहुंचने पर हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। चौगान मैदान में वेद मंत्रों, भक्ति और ध्यान की ऊर्जा ने हर दिल को छू लिया ❤️ 🕉️ गुरुकुल के नन्हे वेद बटुकों के मंत्रोच्चारण से गूंजा वातावरण 🕉️ सामूहिक ध्यान और सत्संग में श्रद्धालुओं ने पाया आत्मिक सुकून 🕉️ “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा चंबा हुआ भक्तिमय आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर के मार्गदर्शन में आयोजित यह भव्य कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक बनकर उभरा 💫 👉 10 दिवसीय हिमाचल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग यात्रा अब प्रदेश के विभिन्न जिलों में आस्था की अलख जगाएगी 👉 कांगड़ा, हमीरपुर, ऊना, मंडी, कुल्लू, सोलन, शिमला होते हुए नाहन तक पहुंचेगा यह पावन कारवां 🌄 चौगान—जहां शिव का पहला पड़ाव माना जाता है—आज फिर दिव्यता से भर उठा - 🙏 आइए, हम भी इस आध्यात्मिक जागरण का हिस्सा बनें और अपनी संस्कृति से जुड़ें1
- Where style meets functionality. This modern kitchen and dining area is designed for seamless living—clean lines, smart storage, and a warm dining vibe all in one space. For interior design ideas and customized solutions, contact Decoory Interiors 📩 DM for inquiries 📞 Contact us: 9821545511 📍Location: GF -71, Gaur City Center, Greater Noida West, Gautam Buddha Nagar, Uttar Pradesh 2013181
- Post by Till The End News1
- पांगी वन मण्डल के दैनिक भोगी मजदूर संघ, पांगी इकाई ने बुधवार को अध्यक्ष राम सिंह की अगुवाई में आवासीय आयुक्त पांगी और वन मण्डल अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर वर्ष 2023 और 2025 के लंबित वेतन भुगतान को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 7 अप्रैल तक भुगतान नहीं किया गया, तो वे अमरण अनशन पर बैठने को मजबूर होंगे। संघ के अनुसार, वन मण्डल पांगी की नर्सरियों में कार्यरत दैनिक भोगी मजदूर लंबे समय से अपने वेतन के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है कि सरकार से नर्सरी फंड कब जारी होगा। मजदूरों का कहना है कि उन्हें बिल के आधार पर मात्र 8 से 10 हजार रुपये तक का भुगतान किया जा रहा है, जबकि सरकार द्वारा निर्धारित दैनिक मजदूरी के अनुसार भुगतान किया जाना चाहिए। अध्यक्ष राम सिंह ने कहा कि “अगर 7 अप्रैल तक दोनों वर्षों का बकाया वेतन नहीं दिया गया, तो सभी मजदूर अमरण अनशन पर बैठेंगे।” वहीं, संघ के सचिव देव राज शर्मा ने बताया कि गत वर्ष तक मजदूरों को 10 हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाते थे, लेकिन वर्ष 2025 में दो माह का वेतन भी पूर्ण रूप से नहीं मिला है। कुछ मजदूरों को 9 हजार तो कुछ को 8 हजार रुपये ही दिए गए हैं। उन्होंने मांग की कि अन्य विभागों के दैनिक भोगियों की तर्ज पर उन्हें भी निर्धारित दिहाड़ी दी जाए। इस संबंध में वन मण्डल अधिकारी पांगी रवि गुलेरिया ने बताया कि दैनिक भोगी मजदूर अपनी वेतन संबंधी मांग लेकर कार्यालय आए थे, जिसे विभाग के उच्च अधिकारियों और सरकार के समक्ष प्राथमिकता के आधार पर रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे ही बजट प्राप्त होगा, भुगतान कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) के तहत प्राप्त कुछ राशि से दो माह का वेतन कुछ रेंज के मजदूरों के खातों में जमा कर दिया गया है, जबकि किलाड़ रेंज के मजदूरों का भुगतान ट्रेजरी में होल्ड होने के कारण लंबित है, जिसे जल्द जारी कर दिया जाएगा। उधर, कार्यकारी आवासीय आयुक्त पांगी अमन दीप सिंह ने कहा कि मजदूर संघ द्वारा ज्ञापन दिया गया है और इस संबंध में वन मण्डल अधिकारी से विस्तृत जानकारी मांगी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले को सरकार और उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाकर जल्द से जल्द भुगतान कराने का प्रयास किया जाएगा।1