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पनवाड़ क्षेत्र की ग्राम पंचायत लायफल में राज्य सरकार द्वारा आयोजित एक ग्रामीण सेवा शिविर का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस शिविर में पहुँचे ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं और परिवादों को संबंधित अधिकारियों ने ध्यानपूर्वक सुना, जिसके उपरांत उन्हें मौके पर ही इन समस्याओं के तत्काल निस्तारण के निर्देश दिए गए।

8 hrs ago
user_Ram raj Nagar
Ram raj Nagar
Local News Reporter खानपुर, झालावाड़, राजस्थान•
8 hrs ago
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पनवाड़ क्षेत्र की ग्राम पंचायत लायफल में राज्य सरकार द्वारा आयोजित एक ग्रामीण सेवा शिविर का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस शिविर में पहुँचे ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं और परिवादों को संबंधित अधिकारियों ने ध्यानपूर्वक सुना, जिसके उपरांत उन्हें मौके पर ही इन समस्याओं के तत्काल निस्तारण के निर्देश दिए गए।

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  • झालावाड़ मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एसआरजी चिकित्सालय और जनाना चिकित्सालय के चिकित्सकों ने बेहतरीन समन्वय, उच्च चिकित्सा कौशल और मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण पेश करते हुए पांच माह के एक नवजात को नया जीवन प्रदान किया है। विभिन्न विभागों के टीमवर्क से मिली इस जटिल चिकित्सा सफलता ने न सिर्फ जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को उजागर किया है, बल्कि सरकारी अस्पतालों के प्रति आमजन के विश्वास को भी बढ़ाया है। मध्यप्रदेश के सुसनेर (सोयत) क्षेत्र के कंवरखेड़ी निवासी और पैरामिलिट्री फोर्स में कार्यरत जवान राजेश डांगी की पत्नी सरिता ने जनवरी में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। जन्म के बाद परिवार ने देखा कि एक बच्चा अपनी गर्दन ठीक से संभाल नहीं पा रहा था, जिसके बाद कई जगह सलाह लेने के बाद वे बच्चे को झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एसआरजी चिकित्सालय लाए। यहां न्यूरो सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. रामसेवक योगी ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत भर्ती किया। विस्तृत जांच में सामने आया कि बच्चा हाइड्रोसिफ़लस नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था, जिसमें मस्तिष्क में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो जाता है। बच्चे की आयु केवल पांच माह होने के कारण उसका उपचार करना चिकित्सकों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। विशेषज्ञों ने गहन विचार-विमर्श के बाद दूरबीन पद्धति (एंडोस्कोपी) से जटिल सर्जरी करने का निर्णय लिया। मस्तिष्क का ऑपरेशन इतने छोटे से छेद से करना न्यूरो सर्जरी विभाग के लिए एक कठिन कार्य था, वहीं एनेस्थीसिया विभाग के लिए इतने छोटे शिशु को सुरक्षित रूप से बेहोश करना भी अत्यधिक जोखिमपूर्ण जिम्मेदारी थी। चिकित्सकों की विशेषज्ञता, नर्सिंग स्टाफ की सतर्कता और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय के कारण यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ। ऑपरेशन के बाद बच्चे की निगरानी और उपचार में बाल रोग विभाग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकीय टीम के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप बच्चा अब पूरी तरह से स्वस्थ है और सामान्य रूप से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहा है। 15 जून 2026 को अस्पताल में भर्ती हुए इस बच्चे का पूरा उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पताल अधीक्षक की विशेष अनुमति से बिल्कुल मुफ्त किया गया, जिससे आर्थिक रूप से परेशान परिवार को बड़ी राहत मिली। परिजनों ने बताया कि वे बच्चे के इलाज को लेकर बहुत चिंतित थे और जयपुर, दिल्ली तथा इंदौर जैसे बड़े शहरों में महंगे उपचार की संभावना से निराश हो चुके थे। ऐसे मुश्किल समय में झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने उनके बच्चे को सिर्फ नया जीवन ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें भरोसा और संबल भी प्रदान किया। इस सफल उपचार में न्यूरो सर्जरी विभाग से डॉ. रामसेवक योगी, डॉ. राम अवतार मालव और डॉ. चंदन सिंह, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. उपेंद्र, डॉ. अटल राज और डॉ. संजीव गुप्ता, तथा पीडियाट्रिक विभाग से डॉ. राजेंद्र नागर और डॉ. हेमाराम ने अपनी सेवाएं दीं। नर्सिंग अधिकारी कीर्ति मित्तल और कन्हैयालाल सुथार का सहयोग भी बहुत महत्वपूर्ण रहा। बच्चे के माता-पिता ने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल प्रशासन के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए आमजन से अपील की है कि वे सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
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    झालावाड़ मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एसआरजी चिकित्सालय और जनाना चिकित्सालय के चिकित्सकों ने बेहतरीन समन्वय, उच्च चिकित्सा कौशल और मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण पेश करते हुए पांच माह के एक नवजात को नया जीवन प्रदान किया है। विभिन्न विभागों के टीमवर्क से मिली इस जटिल चिकित्सा सफलता ने न सिर्फ जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को उजागर किया है, बल्कि सरकारी अस्पतालों के प्रति आमजन के विश्वास को भी बढ़ाया है। मध्यप्रदेश के सुसनेर (सोयत) क्षेत्र के कंवरखेड़ी निवासी और पैरामिलिट्री फोर्स में कार्यरत जवान राजेश डांगी की पत्नी सरिता ने जनवरी में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। जन्म के बाद परिवार ने देखा कि एक बच्चा अपनी गर्दन ठीक से संभाल नहीं पा रहा था, जिसके बाद कई जगह सलाह लेने के बाद वे बच्चे को झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एसआरजी चिकित्सालय लाए। यहां न्यूरो सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. रामसेवक योगी ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत भर्ती किया। विस्तृत जांच में सामने आया कि बच्चा हाइड्रोसिफ़लस नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था, जिसमें मस्तिष्क में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो जाता है।

बच्चे की आयु केवल पांच माह होने के कारण उसका उपचार करना चिकित्सकों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। विशेषज्ञों ने गहन विचार-विमर्श के बाद दूरबीन पद्धति (एंडोस्कोपी) से जटिल सर्जरी करने का निर्णय लिया। मस्तिष्क का ऑपरेशन इतने छोटे से छेद से करना न्यूरो सर्जरी विभाग के लिए एक कठिन कार्य था, वहीं एनेस्थीसिया विभाग के लिए इतने छोटे शिशु को सुरक्षित रूप से बेहोश करना भी अत्यधिक जोखिमपूर्ण जिम्मेदारी थी। चिकित्सकों की विशेषज्ञता, नर्सिंग स्टाफ की सतर्कता और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय के कारण यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ। ऑपरेशन के बाद बच्चे की निगरानी और उपचार में बाल रोग विभाग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकीय टीम के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप बच्चा अब पूरी तरह से स्वस्थ है और सामान्य रूप से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहा है।

15 जून 2026 को अस्पताल में भर्ती हुए इस बच्चे का पूरा उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पताल अधीक्षक की विशेष अनुमति से बिल्कुल मुफ्त किया गया, जिससे आर्थिक रूप से परेशान परिवार को बड़ी राहत मिली। परिजनों ने बताया कि वे बच्चे के इलाज को लेकर बहुत चिंतित थे और जयपुर, दिल्ली तथा इंदौर जैसे बड़े शहरों में महंगे उपचार की संभावना से निराश हो चुके थे। ऐसे मुश्किल समय में झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने उनके बच्चे को सिर्फ नया जीवन ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें भरोसा और संबल भी प्रदान किया। इस सफल उपचार में न्यूरो सर्जरी विभाग से डॉ. रामसेवक योगी, डॉ. राम अवतार मालव और डॉ. चंदन सिंह, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. उपेंद्र, डॉ. अटल राज और डॉ. संजीव गुप्ता, तथा पीडियाट्रिक विभाग से डॉ. राजेंद्र नागर और डॉ. हेमाराम ने अपनी सेवाएं दीं। नर्सिंग अधिकारी कीर्ति मित्तल और कन्हैयालाल सुथार का सहयोग भी बहुत महत्वपूर्ण रहा। बच्चे के माता-पिता ने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल प्रशासन के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए आमजन से अपील की है कि वे सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
    user_Jhalawar hulchal
    Jhalawar hulchal
    झालरापाटन, झालावाड़, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • नाभि जटका प्रयोग से संबंधित जानकारी उपलब्ध है।
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    नाभि जटका प्रयोग से संबंधित जानकारी उपलब्ध है।
    user_Jagdish Chandra Sharma
    Jagdish Chandra Sharma
    Video Creator छिपाबड़ौद, बारां, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • छबड़ा के भुवाखेड़ी स्थित ओशो आशीष ध्यान केंद्र में 23 जून 2026, मंगलवार को प्रातः लगभग 5 बजे एक अद्भुत और कौतूहलपूर्ण घटना हुई, जब केंद्र के परिसर में बने स्वीमिंग पूल में एक नाग दिखाई दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नागदेव कुछ समय तक पूल के जल में ऐसे विचरण करते रहे, मानो स्नान कर रहे हों, और फिर अचानक ही दृष्टि से ओझल हो गए। प्रातःकालीन गतिविधियों के लिए ध्यान केंद्र पहुंचे साधकों ने जब पूल में नाग को देखा, तो वे पहले तो आश्चर्यचकित रह गए, लेकिन बाद में उन्होंने श्रद्धा और उत्सुकता के साथ उसे निहारा। बताया गया कि नाग कुछ मिनटों तक जल में शांत भाव से रहा और फिर बिना किसी को नुकसान पहुंचाए रहस्यमयी ढंग से वहां से चला गया। इस घटना की सूचना क्षेत्र में फैलते ही यह लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। कई श्रद्धालुओं ने इसे आध्यात्मिक दृष्टि से एक शुभ संकेत माना, वहीं कुछ लोगों ने इसे प्राकृतिक घटना बताते हुए वर्षा ऋतु में सर्पों के बाहर निकलने की सामान्य प्रक्रिया कहा। ध्यान केंद्र के संचालक एस. एल. नागर, स्वामी ध्यान गगन (जो ओशो संन्यासी हैं), और ध्यान केंद्र से जुड़े स्वामी ध्यान साक्षी और स्वामी ध्यान रामस्वरूपा सहित अन्य लोगों ने बताया कि केंद्र का परिसर प्राकृतिक वातावरण से घिरा हुआ है, जिसके कारण विभिन्न जीव-जंतु समय-समय पर यहां दिखाई देते रहते हैं। हालांकि, नाग के अचानक प्रकट होने और कुछ ही क्षणों बाद गायब हो जाने की इस घटना ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। प्रातःकाल की इस अनोखी घटना को देखने वाले लोगों के बीच दिनभर इसकी चर्चा होती रही, और कई लोगों ने इसे प्रकृति व जीव-जगत के साथ सामंजस्य का एक सुंदर उदाहरण बताया, जबकि श्रद्धालुओं ने नागदेव के दर्शन को सौभाग्य का प्रतीक माना।
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    छबड़ा के भुवाखेड़ी स्थित ओशो आशीष ध्यान केंद्र में 23 जून 2026, मंगलवार को प्रातः लगभग 5 बजे एक अद्भुत और कौतूहलपूर्ण घटना हुई, जब केंद्र के परिसर में बने स्वीमिंग पूल में एक नाग दिखाई दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नागदेव कुछ समय तक पूल के जल में ऐसे विचरण करते रहे, मानो स्नान कर रहे हों, और फिर अचानक ही दृष्टि से ओझल हो गए। प्रातःकालीन गतिविधियों के लिए ध्यान केंद्र पहुंचे साधकों ने जब पूल में नाग को देखा, तो वे पहले तो आश्चर्यचकित रह गए, लेकिन बाद में उन्होंने श्रद्धा और उत्सुकता के साथ उसे निहारा। बताया गया कि नाग कुछ मिनटों तक जल में शांत भाव से रहा और फिर बिना किसी को नुकसान पहुंचाए रहस्यमयी ढंग से वहां से चला गया।

इस घटना की सूचना क्षेत्र में फैलते ही यह लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। कई श्रद्धालुओं ने इसे आध्यात्मिक दृष्टि से एक शुभ संकेत माना, वहीं कुछ लोगों ने इसे प्राकृतिक घटना बताते हुए वर्षा ऋतु में सर्पों के बाहर निकलने की सामान्य प्रक्रिया कहा। ध्यान केंद्र के संचालक एस. एल. नागर, स्वामी ध्यान गगन (जो ओशो संन्यासी हैं), और ध्यान केंद्र से जुड़े स्वामी ध्यान साक्षी और स्वामी ध्यान रामस्वरूपा सहित अन्य लोगों ने बताया कि केंद्र का परिसर प्राकृतिक वातावरण से घिरा हुआ है, जिसके कारण विभिन्न जीव-जंतु समय-समय पर यहां दिखाई देते रहते हैं। हालांकि, नाग के अचानक प्रकट होने और कुछ ही क्षणों बाद गायब हो जाने की इस घटना ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। प्रातःकाल की इस अनोखी घटना को देखने वाले लोगों के बीच दिनभर इसकी चर्चा होती रही, और कई लोगों ने इसे प्रकृति व जीव-जगत के साथ सामंजस्य का एक सुंदर उदाहरण बताया, जबकि श्रद्धालुओं ने नागदेव के दर्शन को सौभाग्य का प्रतीक माना।
    user_Alakh Jyoti Yog Present
    Alakh Jyoti Yog Present
    Yoga instructor Chhabra, Baran•
    7 hrs ago
  • गुना के फतेहगढ़ में एक 5 फीट ऊंची पुलिया के निर्माण का कार्य फिर से शुरू हो गया है, जिस पर ग्रामीणों ने कड़ा अल्टीमेटम दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे उनमें गहरा रोष है। ग्रामीणों के अनुसार, अधिकारियों के निरीक्षण के बावजूद इस मुद्दे का कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकला है। ग्रामीणों ने इस बात पर जोर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा और भविष्य में होने वाली परेशानियों को देखते हुए पुलिया के डिजाइन में बदलाव किया जाना चाहिए। अपनी मांगों को अनसुना किए जाने पर ग्रामीणों ने अब स्पष्ट रूप से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। यह जनहित का मुद्दा बन गया है, और ग्रामीण अपनी आवाज बुलंद कर अधिकारियों से तत्काल समाधान की मांग कर रहे हैं।
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    गुना के फतेहगढ़ में एक 5 फीट ऊंची पुलिया के निर्माण का कार्य फिर से शुरू हो गया है, जिस पर ग्रामीणों ने कड़ा अल्टीमेटम दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे उनमें गहरा रोष है।

ग्रामीणों के अनुसार, अधिकारियों के निरीक्षण के बावजूद इस मुद्दे का कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकला है। ग्रामीणों ने इस बात पर जोर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा और भविष्य में होने वाली परेशानियों को देखते हुए पुलिया के डिजाइन में बदलाव किया जाना चाहिए।

अपनी मांगों को अनसुना किए जाने पर ग्रामीणों ने अब स्पष्ट रूप से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। यह जनहित का मुद्दा बन गया है, और ग्रामीण अपनी आवाज बुलंद कर अधिकारियों से तत्काल समाधान की मांग कर रहे हैं।
    user_Pankaj Boudh
    Pankaj Boudh
    Local News Reporter छबड़ा, बारां, राजस्थान•
    12 hrs ago
  • कोटा के भीमगंजमंडी स्थित हाट रोड पर 23 जून, मंगलवार को नगर निगम द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान पर स्थानीय दुकानदारों और लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। राजस्थान संपर्क पोर्टल पर मिली एक शिकायत के आधार पर हुई इस कार्रवाई में निगम की टीम ने क्षेत्र से अस्थायी अतिक्रमण और अवैध टीन शेड हटाए, साथ ही कई होर्डिंग भी जब्त किए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और दोबारा अतिक्रमण पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के दौरान कनिष्ठ अभियंता नरेंद्र नागर और अतिक्रमण प्रभारी अजर अहमद सहित निगम का अमला मौजूद रहा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह शिकायत सेना द्वारा की गई थी, जिसमें बताया गया था कि अतिक्रमण के कारण शाम के समय हाट रोड पर आवागमन मुश्किल हो जाता है, जिससे सेना के बच्चों के वाहनों को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि, कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए भेदभाव का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जिन लोगों ने वास्तव में सड़क और सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण कर रखा है, उन्हें अभियान में छोड़ दिया गया, जबकि कुछ ऐसे दुकानदारों के चबूतरे तोड़ दिए गए जिनका कोई अतिक्रमण नहीं था। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस मामले में निष्पक्ष जांच कराने और सभी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि किसी के साथ अन्याय न हो। दूसरी ओर, निगम अधिकारियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार और प्राप्त शिकायत के आधार पर ही की गई है। क्षेत्र में इस कार्रवाई को लेकर लोगों में अभी भी चर्चा का माहौल बना हुआ है, और प्रभावित दुकानदार निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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    कोटा के भीमगंजमंडी स्थित हाट रोड पर 23 जून, मंगलवार को नगर निगम द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान पर स्थानीय दुकानदारों और लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। राजस्थान संपर्क पोर्टल पर मिली एक शिकायत के आधार पर हुई इस कार्रवाई में निगम की टीम ने क्षेत्र से अस्थायी अतिक्रमण और अवैध टीन शेड हटाए, साथ ही कई होर्डिंग भी जब्त किए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और दोबारा अतिक्रमण पाए जाने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के दौरान कनिष्ठ अभियंता नरेंद्र नागर और अतिक्रमण प्रभारी अजर अहमद सहित निगम का अमला मौजूद रहा।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह शिकायत सेना द्वारा की गई थी, जिसमें बताया गया था कि अतिक्रमण के कारण शाम के समय हाट रोड पर आवागमन मुश्किल हो जाता है, जिससे सेना के बच्चों के वाहनों को निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।

हालांकि, कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए भेदभाव का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जिन लोगों ने वास्तव में सड़क और सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण कर रखा है, उन्हें अभियान में छोड़ दिया गया, जबकि कुछ ऐसे दुकानदारों के चबूतरे तोड़ दिए गए जिनका कोई अतिक्रमण नहीं था। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से इस मामले में निष्पक्ष जांच कराने और सभी अतिक्रमणकारियों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि किसी के साथ अन्याय न हो। दूसरी ओर, निगम अधिकारियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार और प्राप्त शिकायत के आधार पर ही की गई है।

क्षेत्र में इस कार्रवाई को लेकर लोगों में अभी भी चर्चा का माहौल बना हुआ है, और प्रभावित दुकानदार निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
    user_Kishan Lal jangid
    Kishan Lal jangid
    Real Estate Developer Ladpura, Kota•
    8 min ago
  • अतिक्रमण दस्त प्रभारी संजीव श्रीवास्तव ने नगर निगम की कार्रवाई के संबंध में गरीब परिवारों को समझाइश दी है। उन्होंने गरीब परिवारों से इस कार्रवाई को लेकर बातचीत की।
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    अतिक्रमण दस्त प्रभारी संजीव श्रीवास्तव ने नगर निगम की कार्रवाई के संबंध में गरीब परिवारों को समझाइश दी है। उन्होंने गरीब परिवारों से इस कार्रवाई को लेकर बातचीत की।
    user_Sadbhavna sandesh news
    Sadbhavna sandesh news
    लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • झालावाड़ में महेश नवमी के अवसर पर जिला माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा ऑनलाइन फैंसी ड्रेस और सीडी सजाओ प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। मंडल की अध्यक्ष प्रीति शारदा और सचिव अलका कासट के निर्देशन में आयोजित इस प्रतियोगिता में जिले भर से लगभग 25 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सचिव अलका कासट ने बताया कि सभी प्रतिभागियों की प्रस्तुतियाँ बेहद आकर्षक और रचनात्मक थीं, जिससे निर्णायकों के लिए विजेताओं का चुनाव करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य बन गया था। प्रतियोगिता के परिणामों के अनुसार, फैंसी ड्रेस स्पर्धा में 41 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में झालावाड़ की कृष्णा परतानी और कृष्णा बागला ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। झालावाड़ की आशा कासट और झालरापाटन की अरुणा मंत्री संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान पर रहीं, जबकि भवानीमंडी की नीतू बाहेती ने तृतीय स्थान हासिल किया। इस आयु वर्ग में मनोहरथाना की स्नेहा बागला और दहीखेड़ा की सीमा माहेश्वरी को विशेष प्रोत्साहन पुरस्कार से नवाजा गया। वहीं, 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में डग की शिखा जाजू ने पहला स्थान जीता, झालरापाटन की रागिनी मंत्री दूसरे स्थान पर रहीं और डग की महिमा जाजू ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
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    झालावाड़ में महेश नवमी के अवसर पर जिला माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा ऑनलाइन फैंसी ड्रेस और सीडी सजाओ प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। मंडल की अध्यक्ष प्रीति शारदा और सचिव अलका कासट के निर्देशन में आयोजित इस प्रतियोगिता में जिले भर से लगभग 25 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सचिव अलका कासट ने बताया कि सभी प्रतिभागियों की प्रस्तुतियाँ बेहद आकर्षक और रचनात्मक थीं, जिससे निर्णायकों के लिए विजेताओं का चुनाव करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य बन गया था।

प्रतियोगिता के परिणामों के अनुसार, फैंसी ड्रेस स्पर्धा में 41 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में झालावाड़ की कृष्णा परतानी और कृष्णा बागला ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। झालावाड़ की आशा कासट और झालरापाटन की अरुणा मंत्री संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान पर रहीं, जबकि भवानीमंडी की नीतू बाहेती ने तृतीय स्थान हासिल किया। इस आयु वर्ग में मनोहरथाना की स्नेहा बागला और दहीखेड़ा की सीमा माहेश्वरी को विशेष प्रोत्साहन पुरस्कार से नवाजा गया। वहीं, 25 से 40 वर्ष आयु वर्ग की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में डग की शिखा जाजू ने पहला स्थान जीता, झालरापाटन की रागिनी मंत्री दूसरे स्थान पर रहीं और डग की महिमा जाजू ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
    user_Jhalawar hulchal
    Jhalawar hulchal
    झालरापाटन, झालावाड़, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • छिपाबड़ौद स्टेडियम में 'समुद्र मंथन प्राणायाम' का अभ्यास किया जा सकता है। स्वस्थ वृद्धावस्था प्राप्त करने के लिए योग करने पर विशेष बल दिया गया है।
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    छिपाबड़ौद स्टेडियम में 'समुद्र मंथन प्राणायाम' का अभ्यास किया जा सकता है। स्वस्थ वृद्धावस्था प्राप्त करने के लिए योग करने पर विशेष बल दिया गया है।
    user_Jagdish Chandra Sharma
    Jagdish Chandra Sharma
    Video Creator छिपाबड़ौद, बारां, राजस्थान•
    17 hrs ago
  • फतेहगढ़ के विशनवाड़ा स्वास्थ्य केंद्र में एक बड़ा विवाद सामने आया है, जहाँ अस्पताल परिसर के भीतर एक हार्वेस्टर खड़ा किए जाने से ग्रामीण बेहद आक्रोशित हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सरपंच ने स्वास्थ्य केंद्र की सुरक्षा के लिए लगाई गई तार जाली और बाउंड्री को जानबूझकर नुकसान पहुँचाया है, ताकि हार्वेस्टर को अंदर खड़ा किया जा सके। इस हरकत के कारण अस्पताल परिसर में आवारा पशुओं का प्रवेश काफी बढ़ गया है, जिससे चारों ओर गंदगी फैल रही है और मरीजों व स्टाफ की सुरक्षा को लेकर गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। नाराज़ ग्रामीणों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कराने और जो भी दोषी पाए जाएँ, उनके खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। दूसरी ओर, तहसीलदार ने इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि इसकी जाँच कराई जाएगी और यदि परिसर में किसी भी तरह का अतिक्रमण या अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह घटना इस बात पर गंभीर सवाल खड़े करती है कि क्या सरकारी अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में निजी वाहन खड़ा करना नैतिक और कानूनी रूप से सही है।
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    फतेहगढ़ के विशनवाड़ा स्वास्थ्य केंद्र में एक बड़ा विवाद सामने आया है, जहाँ अस्पताल परिसर के भीतर एक हार्वेस्टर खड़ा किए जाने से ग्रामीण बेहद आक्रोशित हैं। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सरपंच ने स्वास्थ्य केंद्र की सुरक्षा के लिए लगाई गई तार जाली और बाउंड्री को जानबूझकर नुकसान पहुँचाया है, ताकि हार्वेस्टर को अंदर खड़ा किया जा सके।

इस हरकत के कारण अस्पताल परिसर में आवारा पशुओं का प्रवेश काफी बढ़ गया है, जिससे चारों ओर गंदगी फैल रही है और मरीजों व स्टाफ की सुरक्षा को लेकर गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।

नाराज़ ग्रामीणों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच कराने और जो भी दोषी पाए जाएँ, उनके खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। दूसरी ओर, तहसीलदार ने इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए कहा है कि इसकी जाँच कराई जाएगी और यदि परिसर में किसी भी तरह का अतिक्रमण या अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना इस बात पर गंभीर सवाल खड़े करती है कि क्या सरकारी अस्पताल जैसे संवेदनशील परिसर में निजी वाहन खड़ा करना नैतिक और कानूनी रूप से सही है।
    user_Pankaj Boudh
    Pankaj Boudh
    Local News Reporter Fatehgarh•
    15 hrs ago
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