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झालावाड़ मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एसआरजी चिकित्सालय और जनाना चिकित्सालय के चिकित्सकों ने बेहतरीन समन्वय, उच्च चिकित्सा कौशल और मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण पेश करते हुए पांच माह के एक नवजात को नया जीवन प्रदान किया है। विभिन्न विभागों के टीमवर्क से मिली इस जटिल चिकित्सा सफलता ने न सिर्फ जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को उजागर किया है, बल्कि सरकारी अस्पतालों के प्रति आमजन के विश्वास को भी बढ़ाया है। मध्यप्रदेश के सुसनेर (सोयत) क्षेत्र के कंवरखेड़ी निवासी और पैरामिलिट्री फोर्स में कार्यरत जवान राजेश डांगी की पत्नी सरिता ने जनवरी में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। जन्म के बाद परिवार ने देखा कि एक बच्चा अपनी गर्दन ठीक से संभाल नहीं पा रहा था, जिसके बाद कई जगह सलाह लेने के बाद वे बच्चे को झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एसआरजी चिकित्सालय लाए। यहां न्यूरो सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. रामसेवक योगी ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत भर्ती किया। विस्तृत जांच में सामने आया कि बच्चा हाइड्रोसिफ़लस नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था, जिसमें मस्तिष्क में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो जाता है। बच्चे की आयु केवल पांच माह होने के कारण उसका उपचार करना चिकित्सकों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। विशेषज्ञों ने गहन विचार-विमर्श के बाद दूरबीन पद्धति (एंडोस्कोपी) से जटिल सर्जरी करने का निर्णय लिया। मस्तिष्क का ऑपरेशन इतने छोटे से छेद से करना न्यूरो सर्जरी विभाग के लिए एक कठिन कार्य था, वहीं एनेस्थीसिया विभाग के लिए इतने छोटे शिशु को सुरक्षित रूप से बेहोश करना भी अत्यधिक जोखिमपूर्ण जिम्मेदारी थी। चिकित्सकों की विशेषज्ञता, नर्सिंग स्टाफ की सतर्कता और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय के कारण यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ। ऑपरेशन के बाद बच्चे की निगरानी और उपचार में बाल रोग विभाग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकीय टीम के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप बच्चा अब पूरी तरह से स्वस्थ है और सामान्य रूप से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहा है। 15 जून 2026 को अस्पताल में भर्ती हुए इस बच्चे का पूरा उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पताल अधीक्षक की विशेष अनुमति से बिल्कुल मुफ्त किया गया, जिससे आर्थिक रूप से परेशान परिवार को बड़ी राहत मिली। परिजनों ने बताया कि वे बच्चे के इलाज को लेकर बहुत चिंतित थे और जयपुर, दिल्ली तथा इंदौर जैसे बड़े शहरों में महंगे उपचार की संभावना से निराश हो चुके थे। ऐसे मुश्किल समय में झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने उनके बच्चे को सिर्फ नया जीवन ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें भरोसा और संबल भी प्रदान किया। इस सफल उपचार में न्यूरो सर्जरी विभाग से डॉ. रामसेवक योगी, डॉ. राम अवतार मालव और डॉ. चंदन सिंह, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. उपेंद्र, डॉ. अटल राज और डॉ. संजीव गुप्ता, तथा पीडियाट्रिक विभाग से डॉ. राजेंद्र नागर और डॉ. हेमाराम ने अपनी सेवाएं दीं। नर्सिंग अधिकारी कीर्ति मित्तल और कन्हैयालाल सुथार का सहयोग भी बहुत महत्वपूर्ण रहा। बच्चे के माता-पिता ने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल प्रशासन के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए आमजन से अपील की है कि वे सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

5 hrs ago
user_Jhalawar hulchal
Jhalawar hulchal
झालरापाटन, झालावाड़, राजस्थान•
5 hrs ago

झालावाड़ मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एसआरजी चिकित्सालय और जनाना चिकित्सालय के चिकित्सकों ने बेहतरीन समन्वय, उच्च चिकित्सा कौशल और मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण पेश करते हुए पांच माह के एक नवजात को नया जीवन प्रदान किया है। विभिन्न विभागों के टीमवर्क से मिली इस जटिल चिकित्सा सफलता ने न सिर्फ जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को उजागर किया है, बल्कि सरकारी अस्पतालों के प्रति आमजन के विश्वास को भी बढ़ाया है। मध्यप्रदेश के सुसनेर (सोयत) क्षेत्र के कंवरखेड़ी निवासी और पैरामिलिट्री फोर्स में कार्यरत जवान राजेश डांगी की पत्नी सरिता ने जनवरी में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। जन्म के बाद परिवार ने देखा कि एक बच्चा अपनी गर्दन ठीक से संभाल नहीं पा रहा था, जिसके बाद कई जगह सलाह लेने के बाद वे बच्चे को झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एसआरजी चिकित्सालय लाए। यहां न्यूरो सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. रामसेवक योगी ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत भर्ती किया। विस्तृत जांच में सामने आया कि बच्चा हाइड्रोसिफ़लस नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था, जिसमें मस्तिष्क में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो जाता है। बच्चे की आयु केवल पांच माह होने के कारण उसका उपचार करना चिकित्सकों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। विशेषज्ञों ने गहन विचार-विमर्श के बाद दूरबीन पद्धति (एंडोस्कोपी) से जटिल सर्जरी करने का निर्णय लिया। मस्तिष्क का ऑपरेशन इतने छोटे से छेद से करना न्यूरो सर्जरी विभाग के लिए एक कठिन कार्य था, वहीं एनेस्थीसिया विभाग के लिए इतने छोटे शिशु को सुरक्षित रूप से बेहोश करना भी अत्यधिक जोखिमपूर्ण जिम्मेदारी थी। चिकित्सकों की विशेषज्ञता, नर्सिंग स्टाफ की सतर्कता और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय के कारण यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ। ऑपरेशन के बाद बच्चे की निगरानी और उपचार में बाल रोग विभाग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकीय टीम के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप बच्चा अब पूरी तरह से स्वस्थ है और सामान्य रूप से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहा है। 15 जून 2026 को अस्पताल में भर्ती हुए इस बच्चे का पूरा उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पताल अधीक्षक की विशेष अनुमति से बिल्कुल मुफ्त किया गया, जिससे आर्थिक रूप से परेशान परिवार को बड़ी राहत मिली। परिजनों ने बताया कि वे बच्चे के इलाज को लेकर बहुत चिंतित थे और जयपुर, दिल्ली तथा इंदौर जैसे बड़े शहरों में महंगे उपचार की संभावना से निराश हो चुके थे। ऐसे मुश्किल समय में झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने उनके बच्चे को सिर्फ नया जीवन ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें भरोसा और संबल भी प्रदान किया। इस सफल उपचार में न्यूरो सर्जरी विभाग से डॉ. रामसेवक योगी, डॉ. राम अवतार मालव और डॉ. चंदन सिंह, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. उपेंद्र, डॉ. अटल राज और डॉ. संजीव गुप्ता, तथा पीडियाट्रिक विभाग से डॉ. राजेंद्र नागर और डॉ. हेमाराम ने अपनी सेवाएं दीं। नर्सिंग अधिकारी कीर्ति मित्तल और कन्हैयालाल सुथार का सहयोग भी बहुत महत्वपूर्ण रहा। बच्चे के माता-पिता ने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल प्रशासन के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए आमजन से अपील की है कि वे सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

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  • झालावाड़ में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा नेता प्रतिपक्ष आदरणीय श्री राहुल गांधी जी द्वारा आरंभ किए गए 'शिक्षा न्याय संवाद अभियान' के अंतर्गत 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह गुर्जर की अध्यक्षता में गांधी भवन स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें एक प्रेस वार्ता का भी आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता के दौरान, राहुल गांधी जी द्वारा कोटा में आयोजित छात्र संवाद कार्यक्रम में उठाए गए प्रमुख मुद्दों पर गहन चर्चा की गई। इन मुद्दों में महंगी शिक्षा, शिक्षा ऋण (एजुकेशन लोन) का बढ़ता बोझ, देश में लगातार बढ़ती बेरोजगारी, विद्यार्थियों पर बढ़ता आर्थिक बोझ और कोचिंग हब में छात्रों की आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याएँ शामिल थीं। इस अवसर पर इन सभी विषयों पर आधारित एक प्रस्तुतीकरण को प्रोजेक्टर के माध्यम से भी प्रदर्शित किया गया। इस दौरान, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि आज देश का छात्र महंगी शिक्षा और शिक्षा ऋण के बोझ तले दबा हुआ है। उन्होंने चिंता जताई कि रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं, वहीं प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और बढ़ते मानसिक दबाव के कारण अनेक विद्यार्थी निराशा का सामना कर रहे हैं। गुर्जर ने जोर देकर कहा कि देशभर में छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं चिंता का विषय हैं, जिन पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी जी ने छात्र संवाद के माध्यम से युवाओं और विद्यार्थियों के वास्तविक मुद्दों को देश के सामने रखा है, और कांग्रेस पार्टी शिक्षा न्याय, सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार के अवसर तथा छात्रों के सम्मानजनक भविष्य के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी। इस कार्यक्रम और प्रेस वार्ता में विधायक सुरेश गुर्जर, पूर्व जिला अध्यक्ष रघुराज सिंह हाड़ा, विधानसभा प्रत्याशी रामलाल चौहान, चेतराज गहलोत, प्रदेश सचिव देवकीनंदन वर्मा, मोहम्मद सिद्दीक गोरी, संगठन सचिव राजेंद्र शर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष पूरी लाल दांगी, रोड सिंह परमार, नरेंद्र सिंह, इम्तियाज हुसैन, सेवादल अध्यक्ष डॉ. नंद सिंह राठौड़, महिला अध्यक्ष वर्षा शर्मा, कांग्रेस नेता अंबेश मीणा, ओम पाठक, विष्णु दांगी, कालू लाल लोधा, विनोद लोधा, यशपाल सिंह परिहार, देवीलाल लोधा, शंकर सिंह चौहान, रोड सिंह कुंडी खेड़ा सहित युवक कांग्रेस और एनएसयूआई के पदाधिकारी समेत अनेक कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं छात्र-युवा साथी उपस्थित रहे।
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    झालावाड़ में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा नेता प्रतिपक्ष आदरणीय श्री राहुल गांधी जी द्वारा आरंभ किए गए 'शिक्षा न्याय संवाद अभियान' के अंतर्गत 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह गुर्जर की अध्यक्षता में गांधी भवन स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें एक प्रेस वार्ता का भी आयोजन किया गया।

प्रेस वार्ता के दौरान, राहुल गांधी जी द्वारा कोटा में आयोजित छात्र संवाद कार्यक्रम में उठाए गए प्रमुख मुद्दों पर गहन चर्चा की गई। इन मुद्दों में महंगी शिक्षा, शिक्षा ऋण (एजुकेशन लोन) का बढ़ता बोझ, देश में लगातार बढ़ती बेरोजगारी, विद्यार्थियों पर बढ़ता आर्थिक बोझ और कोचिंग हब में छात्रों की आत्महत्या जैसी गंभीर समस्याएँ शामिल थीं। इस अवसर पर इन सभी विषयों पर आधारित एक प्रस्तुतीकरण को प्रोजेक्टर के माध्यम से भी प्रदर्शित किया गया।

इस दौरान, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह गुर्जर ने कहा कि आज देश का छात्र महंगी शिक्षा और शिक्षा ऋण के बोझ तले दबा हुआ है। उन्होंने चिंता जताई कि रोजगार के अवसर लगातार कम हो रहे हैं, वहीं प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और बढ़ते मानसिक दबाव के कारण अनेक विद्यार्थी निराशा का सामना कर रहे हैं। गुर्जर ने जोर देकर कहा कि देशभर में छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं चिंता का विषय हैं, जिन पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी जी ने छात्र संवाद के माध्यम से युवाओं और विद्यार्थियों के वास्तविक मुद्दों को देश के सामने रखा है, और कांग्रेस पार्टी शिक्षा न्याय, सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार के अवसर तथा छात्रों के सम्मानजनक भविष्य के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी।

इस कार्यक्रम और प्रेस वार्ता में विधायक सुरेश गुर्जर, पूर्व जिला अध्यक्ष रघुराज सिंह हाड़ा, विधानसभा प्रत्याशी रामलाल चौहान, चेतराज गहलोत, प्रदेश सचिव देवकीनंदन वर्मा, मोहम्मद सिद्दीक गोरी, संगठन सचिव राजेंद्र शर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष पूरी लाल दांगी, रोड सिंह परमार, नरेंद्र सिंह, इम्तियाज हुसैन, सेवादल अध्यक्ष डॉ. नंद सिंह राठौड़, महिला अध्यक्ष वर्षा शर्मा, कांग्रेस नेता अंबेश मीणा, ओम पाठक, विष्णु दांगी, कालू लाल लोधा, विनोद लोधा, यशपाल सिंह परिहार, देवीलाल लोधा, शंकर सिंह चौहान, रोड सिंह कुंडी खेड़ा सहित युवक कांग्रेस और एनएसयूआई के पदाधिकारी समेत अनेक कांग्रेस पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं छात्र-युवा साथी उपस्थित रहे।
    user_Jhalawar hulchal
    Jhalawar hulchal
    झालरापाटन, झालावाड़, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • झालावाड़ में 102 वर्षीय वृद्ध उदा बेरवा को जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ से तत्काल मानवीय सहायता मिली, जब वे मंगलवार को अपनी समस्या लेकर उनके पास पहुँचे। जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और आमजन के प्रति मानवीय सरोकारों का यह एक प्रेरणादायी उदाहरण सामने आया है। झालावाड़ जिले के किशनपुरा बारा, पाटलिया कुल्मी निवासी उदा बेरवा ने कलेक्टर को बताया कि वे लंबे समय से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के लाभ से वंचित थे, जिसके कारण उन्हें दैनिक जीवन-यापन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने भावुक होकर अपनी यह परेशानी कलेक्टर के समक्ष रखी और सहायता की गुहार लगाई। वृद्ध की व्यथा सुनते ही जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल रसद विभाग के अधिकारी को निर्देश दिए। इन निर्देशों में परिवादी का आवश्यक दस्तावेजी कार्य पूर्ण कराने, जनआधार पंजीयन करवाने और उन्हें शीघ्र खाद्य सुरक्षा योजना में लाभान्वित करने की बात कही गई। इन निर्देशों के बाद संबंधित अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। इतना ही नहीं, वृद्ध की आयु को देखते हुए जिला कलेक्टर ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को भी निर्देश दिए। उन्होंने वृद्ध को सुरक्षित उनके घर तक पहुँचाने की व्यवस्था करने का आदेश दिया, जिसके बाद चिकित्सा विभाग ने एम्बुलेंस उपलब्ध कराई। इसके फलस्वरूप, वृद्ध उदा बेरवा को उनके गाँव स्थित घर तक सकुशल पहुँचाया गया। जिला प्रशासन की इस आत्मीय पहल से उदा बेरवा अभिभूत हो गए। उनकी आँखों में राहत और संतोष स्पष्ट झलक रहा था, और उन्होंने जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी समस्या का इतनी तत्परता और संवेदनशीलता के साथ समाधान होगा।
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    झालावाड़ में 102 वर्षीय वृद्ध उदा बेरवा को जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ से तत्काल मानवीय सहायता मिली, जब वे मंगलवार को अपनी समस्या लेकर उनके पास पहुँचे। जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और आमजन के प्रति मानवीय सरोकारों का यह एक प्रेरणादायी उदाहरण सामने आया है।

झालावाड़ जिले के किशनपुरा बारा, पाटलिया कुल्मी निवासी उदा बेरवा ने कलेक्टर को बताया कि वे लंबे समय से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के लाभ से वंचित थे, जिसके कारण उन्हें दैनिक जीवन-यापन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने भावुक होकर अपनी यह परेशानी कलेक्टर के समक्ष रखी और सहायता की गुहार लगाई।

वृद्ध की व्यथा सुनते ही जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल रसद विभाग के अधिकारी को निर्देश दिए। इन निर्देशों में परिवादी का आवश्यक दस्तावेजी कार्य पूर्ण कराने, जनआधार पंजीयन करवाने और उन्हें शीघ्र खाद्य सुरक्षा योजना में लाभान्वित करने की बात कही गई। इन निर्देशों के बाद संबंधित अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी।

इतना ही नहीं, वृद्ध की आयु को देखते हुए जिला कलेक्टर ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को भी निर्देश दिए। उन्होंने वृद्ध को सुरक्षित उनके घर तक पहुँचाने की व्यवस्था करने का आदेश दिया, जिसके बाद चिकित्सा विभाग ने एम्बुलेंस उपलब्ध कराई। इसके फलस्वरूप, वृद्ध उदा बेरवा को उनके गाँव स्थित घर तक सकुशल पहुँचाया गया।

जिला प्रशासन की इस आत्मीय पहल से उदा बेरवा अभिभूत हो गए। उनकी आँखों में राहत और संतोष स्पष्ट झलक रहा था, और उन्होंने जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी समस्या का इतनी तत्परता और संवेदनशीलता के साथ समाधान होगा।
    user_HARI MOHAN CHUDAWAT
    HARI MOHAN CHUDAWAT
    Local News Reporter झालरापाटन, झालावाड़, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • पनवाड़ क्षेत्र की ग्राम पंचायत लायफल में राज्य सरकार द्वारा आयोजित एक ग्रामीण सेवा शिविर का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस शिविर में पहुँचे ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं और परिवादों को संबंधित अधिकारियों ने ध्यानपूर्वक सुना, जिसके उपरांत उन्हें मौके पर ही इन समस्याओं के तत्काल निस्तारण के निर्देश दिए गए।
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    पनवाड़ क्षेत्र की ग्राम पंचायत लायफल में राज्य सरकार द्वारा आयोजित एक ग्रामीण सेवा शिविर का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस शिविर में पहुँचे ग्रामीणों की विभिन्न समस्याओं और परिवादों को संबंधित अधिकारियों ने ध्यानपूर्वक सुना, जिसके उपरांत उन्हें मौके पर ही इन समस्याओं के तत्काल निस्तारण के निर्देश दिए गए।
    user_Ram raj Nagar
    Ram raj Nagar
    Local News Reporter खानपुर, झालावाड़, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • झालावाड़ जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने आमजन से 'झगड़ा प्रथा' के दुष्परिणामों को लेकर एक विशेष अपील की है। इस अपील के माध्यम से उन्होंने इस प्रथा के नकारात्मक प्रभावों के प्रति लोगों को सचेत करने का प्रयास किया है।
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    झालावाड़ जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने आमजन से 'झगड़ा प्रथा' के दुष्परिणामों को लेकर एक विशेष अपील की है। इस अपील के माध्यम से उन्होंने इस प्रथा के नकारात्मक प्रभावों के प्रति लोगों को सचेत करने का प्रयास किया है।
    user_हर क्षेत्र की खबर
    हर क्षेत्र की खबर
    Local News Reporter खानपुर, झालावाड़, राजस्थान•
    16 hrs ago
  • पिडावा नगर में साफ-सफाई की स्थिति अत्यंत खराब है, जहाँ 56 दरवाजा क्षेत्र में बिल्कुल भी स्वच्छता नहीं है। इसके अलावा, नगर के कई अन्य स्थानों पर भी सफाई का कोई इंतजाम नहीं है। चवली तट की भी यही स्थिति है, जहाँ गंदगी पसरी हुई है। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही पिडावा नगर पालिका ने चवली तट को स्वच्छ करने का जिम्मा उठाया था, बावजूद इसके पूरे पिडावा में स्वच्छता पूरी तरह से नदारद है।
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    पिडावा नगर में साफ-सफाई की स्थिति अत्यंत खराब है, जहाँ 56 दरवाजा क्षेत्र में बिल्कुल भी स्वच्छता नहीं है। इसके अलावा, नगर के कई अन्य स्थानों पर भी सफाई का कोई इंतजाम नहीं है। चवली तट की भी यही स्थिति है, जहाँ गंदगी पसरी हुई है। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले ही पिडावा नगर पालिका ने चवली तट को स्वच्छ करने का जिम्मा उठाया था, बावजूद इसके पूरे पिडावा में स्वच्छता पूरी तरह से नदारद है।
    user_Mudit sharma
    Mudit sharma
    Astrologer पिरावा, झालावाड़, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • छीपाबड़ौद कस्बे में मंगलवार को इमाम हुसैन की याद में अलम सजदे का जुलूस अत्यंत श्रद्धा और परंपरागत तरीके से निकाला गया। इस जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद, युवा और बच्चे शामिल हुए। मोहर्रम लाइसेंसधारी शकील हुसैन और नईम मोहम्मद ने बताया कि यह जुलूस हर वर्ष की तरह इस साल भी इमाम हुसैन की स्मृति में निकाला गया। जुलूस शाम 6 बजे मंसूरी मस्जिद, इमाम चौक से शुरू हुआ, जिसमें अलम और अखाड़े भी साथ रहे। यह सब्जी मंडी, बस स्टैंड और मुख्य बाजार से होते हुए निर्धारित मार्ग से गुजरा तथा रात 8 बजे इमाम चौक पर संपन्न हुआ। इस दौरान मार्ग में कई स्थानों पर जुलूस परंपरागत तरीके से रुका, जिसमें जुलूस कमेटी के सभी जिम्मेदारान और समाज के अकीदतमंद सक्रिय रूप से साथ रहे। मोहर्रम कमेटी के आगामी कार्यक्रम के अनुसार, 25 जून गुरुवार को रात्रि में और 26 जून शुक्रवार को दिन में मोहर्रम के जुलूस निकाले जाएंगे।
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    छीपाबड़ौद कस्बे में मंगलवार को इमाम हुसैन की याद में अलम सजदे का जुलूस अत्यंत श्रद्धा और परंपरागत तरीके से निकाला गया। इस जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद, युवा और बच्चे शामिल हुए। मोहर्रम लाइसेंसधारी शकील हुसैन और नईम मोहम्मद ने बताया कि यह जुलूस हर वर्ष की तरह इस साल भी इमाम हुसैन की स्मृति में निकाला गया। जुलूस शाम 6 बजे मंसूरी मस्जिद, इमाम चौक से शुरू हुआ, जिसमें अलम और अखाड़े भी साथ रहे। यह सब्जी मंडी, बस स्टैंड और मुख्य बाजार से होते हुए निर्धारित मार्ग से गुजरा तथा रात 8 बजे इमाम चौक पर संपन्न हुआ। इस दौरान मार्ग में कई स्थानों पर जुलूस परंपरागत तरीके से रुका, जिसमें जुलूस कमेटी के सभी जिम्मेदारान और समाज के अकीदतमंद सक्रिय रूप से साथ रहे।

मोहर्रम कमेटी के आगामी कार्यक्रम के अनुसार, 25 जून गुरुवार को रात्रि में और 26 जून शुक्रवार को दिन में मोहर्रम के जुलूस निकाले जाएंगे।
    user_User10561
    User10561
    छिपाबड़ौद, बारां, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • झालावाड़ मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एसआरजी चिकित्सालय और जनाना चिकित्सालय के चिकित्सकों ने बेहतरीन समन्वय, उच्च चिकित्सा कौशल और मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण पेश करते हुए पांच माह के एक नवजात को नया जीवन प्रदान किया है। विभिन्न विभागों के टीमवर्क से मिली इस जटिल चिकित्सा सफलता ने न सिर्फ जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को उजागर किया है, बल्कि सरकारी अस्पतालों के प्रति आमजन के विश्वास को भी बढ़ाया है। मध्यप्रदेश के सुसनेर (सोयत) क्षेत्र के कंवरखेड़ी निवासी और पैरामिलिट्री फोर्स में कार्यरत जवान राजेश डांगी की पत्नी सरिता ने जनवरी में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। जन्म के बाद परिवार ने देखा कि एक बच्चा अपनी गर्दन ठीक से संभाल नहीं पा रहा था, जिसके बाद कई जगह सलाह लेने के बाद वे बच्चे को झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एसआरजी चिकित्सालय लाए। यहां न्यूरो सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. रामसेवक योगी ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत भर्ती किया। विस्तृत जांच में सामने आया कि बच्चा हाइड्रोसिफ़लस नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था, जिसमें मस्तिष्क में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो जाता है। बच्चे की आयु केवल पांच माह होने के कारण उसका उपचार करना चिकित्सकों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। विशेषज्ञों ने गहन विचार-विमर्श के बाद दूरबीन पद्धति (एंडोस्कोपी) से जटिल सर्जरी करने का निर्णय लिया। मस्तिष्क का ऑपरेशन इतने छोटे से छेद से करना न्यूरो सर्जरी विभाग के लिए एक कठिन कार्य था, वहीं एनेस्थीसिया विभाग के लिए इतने छोटे शिशु को सुरक्षित रूप से बेहोश करना भी अत्यधिक जोखिमपूर्ण जिम्मेदारी थी। चिकित्सकों की विशेषज्ञता, नर्सिंग स्टाफ की सतर्कता और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय के कारण यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ। ऑपरेशन के बाद बच्चे की निगरानी और उपचार में बाल रोग विभाग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकीय टीम के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप बच्चा अब पूरी तरह से स्वस्थ है और सामान्य रूप से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहा है। 15 जून 2026 को अस्पताल में भर्ती हुए इस बच्चे का पूरा उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पताल अधीक्षक की विशेष अनुमति से बिल्कुल मुफ्त किया गया, जिससे आर्थिक रूप से परेशान परिवार को बड़ी राहत मिली। परिजनों ने बताया कि वे बच्चे के इलाज को लेकर बहुत चिंतित थे और जयपुर, दिल्ली तथा इंदौर जैसे बड़े शहरों में महंगे उपचार की संभावना से निराश हो चुके थे। ऐसे मुश्किल समय में झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने उनके बच्चे को सिर्फ नया जीवन ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें भरोसा और संबल भी प्रदान किया। इस सफल उपचार में न्यूरो सर्जरी विभाग से डॉ. रामसेवक योगी, डॉ. राम अवतार मालव और डॉ. चंदन सिंह, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. उपेंद्र, डॉ. अटल राज और डॉ. संजीव गुप्ता, तथा पीडियाट्रिक विभाग से डॉ. राजेंद्र नागर और डॉ. हेमाराम ने अपनी सेवाएं दीं। नर्सिंग अधिकारी कीर्ति मित्तल और कन्हैयालाल सुथार का सहयोग भी बहुत महत्वपूर्ण रहा। बच्चे के माता-पिता ने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल प्रशासन के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए आमजन से अपील की है कि वे सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
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    झालावाड़ मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एसआरजी चिकित्सालय और जनाना चिकित्सालय के चिकित्सकों ने बेहतरीन समन्वय, उच्च चिकित्सा कौशल और मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण पेश करते हुए पांच माह के एक नवजात को नया जीवन प्रदान किया है। विभिन्न विभागों के टीमवर्क से मिली इस जटिल चिकित्सा सफलता ने न सिर्फ जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को उजागर किया है, बल्कि सरकारी अस्पतालों के प्रति आमजन के विश्वास को भी बढ़ाया है। मध्यप्रदेश के सुसनेर (सोयत) क्षेत्र के कंवरखेड़ी निवासी और पैरामिलिट्री फोर्स में कार्यरत जवान राजेश डांगी की पत्नी सरिता ने जनवरी में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। जन्म के बाद परिवार ने देखा कि एक बच्चा अपनी गर्दन ठीक से संभाल नहीं पा रहा था, जिसके बाद कई जगह सलाह लेने के बाद वे बच्चे को झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के एसआरजी चिकित्सालय लाए। यहां न्यूरो सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. रामसेवक योगी ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत भर्ती किया। विस्तृत जांच में सामने आया कि बच्चा हाइड्रोसिफ़लस नामक गंभीर बीमारी से पीड़ित था, जिसमें मस्तिष्क में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो जाता है।

बच्चे की आयु केवल पांच माह होने के कारण उसका उपचार करना चिकित्सकों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। विशेषज्ञों ने गहन विचार-विमर्श के बाद दूरबीन पद्धति (एंडोस्कोपी) से जटिल सर्जरी करने का निर्णय लिया। मस्तिष्क का ऑपरेशन इतने छोटे से छेद से करना न्यूरो सर्जरी विभाग के लिए एक कठिन कार्य था, वहीं एनेस्थीसिया विभाग के लिए इतने छोटे शिशु को सुरक्षित रूप से बेहोश करना भी अत्यधिक जोखिमपूर्ण जिम्मेदारी थी। चिकित्सकों की विशेषज्ञता, नर्सिंग स्टाफ की सतर्कता और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय के कारण यह जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ। ऑपरेशन के बाद बच्चे की निगरानी और उपचार में बाल रोग विभाग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चिकित्सकीय टीम के निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप बच्चा अब पूरी तरह से स्वस्थ है और सामान्य रूप से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहा है।

15 जून 2026 को अस्पताल में भर्ती हुए इस बच्चे का पूरा उपचार आयुष्मान भारत योजना के तहत अस्पताल अधीक्षक की विशेष अनुमति से बिल्कुल मुफ्त किया गया, जिससे आर्थिक रूप से परेशान परिवार को बड़ी राहत मिली। परिजनों ने बताया कि वे बच्चे के इलाज को लेकर बहुत चिंतित थे और जयपुर, दिल्ली तथा इंदौर जैसे बड़े शहरों में महंगे उपचार की संभावना से निराश हो चुके थे। ऐसे मुश्किल समय में झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने उनके बच्चे को सिर्फ नया जीवन ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें भरोसा और संबल भी प्रदान किया। इस सफल उपचार में न्यूरो सर्जरी विभाग से डॉ. रामसेवक योगी, डॉ. राम अवतार मालव और डॉ. चंदन सिंह, एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. उपेंद्र, डॉ. अटल राज और डॉ. संजीव गुप्ता, तथा पीडियाट्रिक विभाग से डॉ. राजेंद्र नागर और डॉ. हेमाराम ने अपनी सेवाएं दीं। नर्सिंग अधिकारी कीर्ति मित्तल और कन्हैयालाल सुथार का सहयोग भी बहुत महत्वपूर्ण रहा। बच्चे के माता-पिता ने डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अस्पताल प्रशासन के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए आमजन से अपील की है कि वे सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
    user_Jhalawar hulchal
    Jhalawar hulchal
    झालरापाटन, झालावाड़, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • झालावाड़ शहर में नेशनल हाईवे-52 पर कृषि विज्ञान केंद्र से सहकार भवन, झालरापाटन रोड तक सड़क किनारे बने नालों की टूटी और खुली स्लैबें राहगीरों के लिए लगातार गंभीर खतरा बनी हुई हैं। कई स्थानों पर स्लैब अपनी जगह से खिसकी हुई हैं, जिससे नाले का बड़ा हिस्सा खुला पड़ा है और किसी भी वक्त गंभीर हादसा होने की आशंका बनी रहती है। यह स्थिति पैदल चलने वाले लोगों, दोपहिया वाहन चालकों और बुजुर्गों के लिए बेहद जोखिमपूर्ण है, खासकर यह देखते हुए कि यह मार्ग शहर के प्रमुख और व्यस्त मार्गों में से एक है जहां दिनभर लोगों और वाहनों की आवाजाही रहती है। शहर के निर्भय सिंह सर्किल पर इसी तरह के एक खुले नाले के कारण कुछ वर्ष पहले एक युवक की दर्दनाक मौत भी हो चुकी है। इस गंभीर घटना के बावजूद, समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हादसे के बाद भी संबंधित विभाग ने पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए, जिससे कई स्थानों पर अभी भी सीमेंट की स्लैब टूटकर झुक गई हैं और नाले का हिस्सा पूरी तरह खुला है। नागरिकों ने आशंका जताई है कि यदि खुले नालों की जल्द मरम्मत नहीं की गई तो फिर कोई और हादसा हो सकता है। इसे देखते हुए, लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, नगर परिषद और अन्य संबंधित विभागों से तत्काल मांग की है कि इन खुले नालों की मरम्मत कर मजबूत स्लैब लगाई जाएं, साथ ही चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा बैरिकेड भी लगाए जाएं।
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    झालावाड़ शहर में नेशनल हाईवे-52 पर कृषि विज्ञान केंद्र से सहकार भवन, झालरापाटन रोड तक सड़क किनारे बने नालों की टूटी और खुली स्लैबें राहगीरों के लिए लगातार गंभीर खतरा बनी हुई हैं। कई स्थानों पर स्लैब अपनी जगह से खिसकी हुई हैं, जिससे नाले का बड़ा हिस्सा खुला पड़ा है और किसी भी वक्त गंभीर हादसा होने की आशंका बनी रहती है। यह स्थिति पैदल चलने वाले लोगों, दोपहिया वाहन चालकों और बुजुर्गों के लिए बेहद जोखिमपूर्ण है, खासकर यह देखते हुए कि यह मार्ग शहर के प्रमुख और व्यस्त मार्गों में से एक है जहां दिनभर लोगों और वाहनों की आवाजाही रहती है।

शहर के निर्भय सिंह सर्किल पर इसी तरह के एक खुले नाले के कारण कुछ वर्ष पहले एक युवक की दर्दनाक मौत भी हो चुकी है। इस गंभीर घटना के बावजूद, समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हादसे के बाद भी संबंधित विभाग ने पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए, जिससे कई स्थानों पर अभी भी सीमेंट की स्लैब टूटकर झुक गई हैं और नाले का हिस्सा पूरी तरह खुला है।

नागरिकों ने आशंका जताई है कि यदि खुले नालों की जल्द मरम्मत नहीं की गई तो फिर कोई और हादसा हो सकता है। इसे देखते हुए, लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, नगर परिषद और अन्य संबंधित विभागों से तत्काल मांग की है कि इन खुले नालों की मरम्मत कर मजबूत स्लैब लगाई जाएं, साथ ही चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा बैरिकेड भी लगाए जाएं।
    user_Ravindra Singh
    Ravindra Singh
    पत्रकार झालरापाटन, झालावाड़, राजस्थान•
    9 hrs ago
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