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त्रिवेणी क्षेत्र में पचास लाख गैलन पानी वाली बडी़ टंकी का निर्माण करना चाहिए,,,, त्रिवेणी क्षेत्र में कुंड के पास एक पचास लाख गैलन पानी की नई टंकी का निर्माण कर क्षेत्र में पेयजल समस्या से छुटकारा मिल सकता है या फिर प्रत्येक गली चौराहे पर नलकूप जो लगभग पांच सौ फीट गहराई से नौ सौ फीट तक खनन करवाया जा सकता है महापौर ध्यान दें
रमेश कुमार वर्मा, रतलाम मध्यप्रदेश
त्रिवेणी क्षेत्र में पचास लाख गैलन पानी वाली बडी़ टंकी का निर्माण करना चाहिए,,,, त्रिवेणी क्षेत्र में कुंड के पास एक पचास लाख गैलन पानी की नई टंकी का निर्माण कर क्षेत्र में पेयजल समस्या से छुटकारा मिल सकता है या फिर प्रत्येक गली चौराहे पर नलकूप जो लगभग पांच सौ फीट गहराई से नौ सौ फीट तक खनन करवाया जा सकता है महापौर ध्यान दें
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- कुशलगढ़ जिला बांसवाड़ा राजस्थान रिपोर्टर धर्मेन्द्र कुमार सोनी (कुशलगढ़,, अज्ञात वास के समय ज़हां पांडवों ने की तपस्या उन पांच डुंगरी पर भक्तो ने बनाई कुटीया ,जल्द ही पांच डुंगरियो पर बिराजे गे पांच पांडव संग माता कुंती व पांचाली द्रोपदी) राजस्थान के बांसवाड़ा जिले को लोड़ी काशी यानी लघु काशी कहां जाता है महाभारत काल में कौरवों ने पाण्डवों को सकुनी की चालों से हरा कर पांडवों को अज्ञात वास तक बिताना पड़ा, अज्ञात वास के समय पांचों पांडवों ने घोटीया आंबा में भगवान शिव की पुजा अर्चना आराधना धार्मिक अनुष्ठान की वंहा से पांडव राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उप खंड क्षेत्र के खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र की ग्राम पंचायत वरसाला में आएं जंहा उस समय घना जंगल हुआ करता था जंहा एक साथ पांच डुंगरीया पास पास थी तथा दो डुंगरिया अलग थी जंहा पांडवों ने मातारानी 64जोगनिया सरोना धाम की इन डुंगरीयो पर घौर जप-तप यज्ञ हवन अनुष्ठान पुजा अर्चना कर यहा से पांचों पांडव अपनी मां व पांचाली संग माता रानी 64जोगनिया सरोना धाम गए किदवंती अनुसार यह द्वापरयुग का एक पांडवों का तपस्वी स्थल है आज भी सभी डुंगरिया विधिमान है इस बार वहां के भक्तों ने पांच डुंगरी के सोंदरिय करण को लेकर पांच डुंगरी पर भक्तो ने कुटीया का निर्माण किया है तथा यहां पर पांचों पांडवों माता कुंती व पांचाली द्रोपदी की मुर्तीयो को लगाने की बात सामने आई है1
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