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More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
- मध्य प्रदेश के गुना जिले के चाचौड़ा में एक रास्ते की बेहद खराब स्थिति पर चिंता जताई गई है। नागरिकों ने संबंधित अधिकारियों से अनुरोध किया है कि इस मार्ग पर मुरम डालकर इसे ठीक किया जाए, ताकि लोगों को आने-जाने में हो रही असुविधा से मुक्ति मिल सके।2
- राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ लसुड़ल्या माना के राधेश्याम नामक व्यक्ति को सरकारी कागजों में मृत घोषित कर दिया गया है। शासन के नुमाइंदों की इस कथित कारगुजारी के कारण, एक जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत बताकर उसे शासन की विभिन्न योजनाओं से वंचित कर दिया गया, जिसमें विशेष रूप से प्रधानमंत्री आवास योजना शामिल है। इस बात का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित राधेश्याम, प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ न मिलने की शिकायत करने जनपद और तहसील कार्यालय पहुंचे। वहाँ के अधिकारियों ने उन्हें बताया कि राधेश्याम की तो मृत्यु हो चुकी है और उनका कोई वारिस भी नहीं है, जिसे सुनकर फरियादी अवाक रह गए। राधेश्याम केवल पीएम आवास की शिकायत ही नहीं, बल्कि कीचड़ और नाली निर्माण से संबंधित समस्याओं को लेकर भी अधिकारियों के दफ्तर गए थे। इस गंभीर मामले को लेकर राजगढ़ कलेक्टर से जनसुनवाई के माध्यम से शिकायत की गई है। शिकायत में अधिकारियों की इस "अजब कारगुजारी" पर तंज कसते हुए कहा गया है कि जब नरसिंहगढ़ क्षेत्र के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें मृत घोषित ही कर दिया है, तो अब उनका मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी करवा दिया जाए। फरियादी ने राजगढ़ कलेक्टर से मामले की गहन जांच करवाने और उन अधिकारियों की पहचान कर उन पर उचित कार्यवाही करने की मांग की है जिन्होंने उन्हें सरकारी कागजों में "जिंदा मार दिया"।1
- विदिशा जिले के सिरोंज में किसानों ने आज ई-पोर्टल पर यूरिया खाद बुक करते समय डीएपी और एनपीके खाद खरीदने की अनिवार्यता के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी किसानों ने मौके पर पहुंचे सिरोंज एसडीम को विदिशा जिलाधीश के नाम एक ज्ञापन सौंपकर इस बाध्यता को तत्काल समाप्त करने की मांग की। किसान नेता सुरेंद्र रघुवंशी ने इस दौरान कहा कि जब किसानों को डीएपी और एनपीके की आवश्यकता थी, तब सरकारी अधिकारियों ने यूरिया की बजाय इन्हीं खादों को लेने की बात कही थी। लेकिन अब, जब किसानों की बोनी पूरी हो चुकी है और फसलों को केवल यूरिया की जरूरत है, तब ई-टोकन पोर्टल पर डीएपी या एनपीके जैसे फॉस्फेटिक उर्वरक पहले लेने की अनिवार्यता दिखाई जा रही है। उन्होंने इसे पूरी तरह से किसान विरोधी बताते हुए सवाल उठाया कि क्या अब किसान अपनी फसल की जरूरत भी ई-टोकन पोर्टल से पूछकर तय करेगा। रघुवंशी ने स्पष्ट किया कि किसानों को जिस खाद की आवश्यकता है, उन्हें वही खाद मिलनी चाहिए और अनावश्यक उर्वरक खरीदने का दबाव बनाना अनुचित है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने तत्काल इस "किसान विरोधी व्यवस्था" को समाप्त नहीं किया और ई-टोकन पोर्टल से यह अनिवार्यता नहीं हटाई, तो प्रदेशभर में किसानों के हित में एक व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने 'तुगलकी फरमान' चलने से इनकार करते हुए सरकार से मांग की कि किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार ही खाद उपलब्ध कराई जाए। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित थे।4
- यह पोस्ट बचपन की यादों को समर्पित है, जो बारिश और मनमोहक मुस्कान से जुड़ी सच्ची खुशी को बयां करती है। अगर आपको भी अपना बचपन याद आ जाए, तो वीडियो को लाइक, शेयर और सब्सक्राइब करने का आग्रह किया गया है।1
- मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के लटेरी में एक पीएम श्री स्कूल के प्राचार्य का तबादला उस समय कर दिया गया है, जब वे जनगणना ड्यूटी पर तैनात थे। इस तबादले को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं। मामले में खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्होंने इस प्राचार्य के तबादले के लिए कोई अनुमति प्रदान नहीं की थी।1
- मध्य प्रदेश के गुना शहर में बुधवार सुबह दिनदहाड़े 17 लाख रुपये की लूट की वारदात से सनसनी फैल गई। शहर के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के फॉयगा रोड स्थित शिव मंदिर के पास तीन बदमाशों ने एक कलेक्शन एजेंट को निशाना बनाते हुए उसकी आँखों में मिर्च स्प्रे झोंक दिया और नकदी से भरा बैग छीनकर फरार हो गए। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, राजस्थान के बीकानेर निवासी वासुदेव शर्मा वर्तमान में गुना के बड़ा जैन मंदिर गली में रहते हैं और कुंभराज के एक धनिया व्यापारी के यहां कलेक्शन का काम करते हैं। मंगलवार को वे पचौर से व्यापारियों से भुगतान लेकर लौटे थे, और बुधवार सुबह यह रकम व्यापारी तक पहुंचाने के लिए निकले थे। रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे तीन बदमाशों ने उन्हें रोका और आँखों में मिर्च स्प्रे डालकर नकदी से भरा बैग छीन लिया। घटना की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पूरे शहर में नाकाबंदी कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और शहर के प्रमुख मार्गों व निकास बिंदुओं पर संदिग्धों की तलाश कर रही है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि बदमाशों को इतनी बड़ी रकम ले जाए जाने की पहले से सूचना थी या उन्होंने रेकी कर वारदात को अंजाम दिया, साथ ही कलेक्शन की जानकारी किन-किन लोगों को थी और कहीं किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका तो नहीं है। दिनदहाड़े हुई इस बड़ी लूट के बाद शहर के व्यापारियों में दहशत का माहौल है। व्यापारिक संगठनों ने पुलिस से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी और व्यापारियों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों तथा पीड़ित के बयान के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास जारी है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।1
- बुधवार सुबह विदिशा के सिविल लाइन क्षेत्र में, पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर के निवास के ठीक सामने, दो तेज रफ्तार मोपेड वाहनों की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। इस हादसे में एक मोपेड पर सवार दो युवक और दूसरी मोपेड पर सवार एक युवक घायल हो गए थे, जिन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा जांच के बाद एक घायल युवक राजकुमार आदिवासी को मृत घोषित कर दिया गया, जिसकी पहचान सुभाष नगर निवासी के रूप में हुई है। मृतक के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है और इसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। घटना स्थल से दो घायल युवकों को पुलिस कर्मियों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया था।4
- बारुईपुर पीड़िता के लिए न्याय की माँग को लेकर तृणमूल कांग्रेस द्वारा बलीगंज से हावड़ा तक बुलाई गई रैली में, कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही बलीगंज में तनाव बढ़ गया। कोलकाता उच्च न्यायालय की सशर्त अनुमति के बाद जब कार्यकर्ता और समर्थक जमा होना शुरू हुए, तो कथित तौर पर विपक्षी समर्थकों ने 'चोर-चोर' के नारे लगाए। इसके जवाब में, 'जय बांग्ला' के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। इस घटना के बाद, तृणमूल ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दावा है कि यह विरोध प्रदर्शन लोगों के गुस्से का परिणाम है। गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने इस रैली के लिए प्रतिभागियों की संख्या और यातायात प्रबंधन को लेकर कई शर्तें लगाई थीं।1