एसआईआर की मार से टूटी मजदूरी, ग्राम प्रधान ने दस हजार मुआवजे की मांग रखी नोटिस के बाद दूसरे राज्यों से लौटे मजदूर, रोज़गार पर पड़ा सीधा असर प्रधान ने निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर की मुआवजे की मांग पीलीभीत।जनपद में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के तहत जारी किए जा रहे सुनवाई नोटिसों ने ग्रामीण इलाकों में खलबली मचा दी है। चंदिया हजारा गांव के ग्राम प्रधान वासुदेव कुंडू समेत उनके परिवार के सदस्यों को भी एसआईआर के अंतर्गत नोटिस भेजे गए हैं। नोटिस मिलने के बाद ग्राम प्रधान ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे अनुचित और जनहित के विरुद्ध बताया है।गुरुवार शाम करीब चार बजे ग्राम प्रधान वासुदेव कुंडू ने बताया कि एसआईआर नोटिसों का असर केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे गांव के सैकड़ों मजदूरों की रोजी-रोटी पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। प्रधान का कहना है कि गांव के कई मजदूर दूसरे राज्यों में रहकर मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे, लेकिन नोटिस की सूचना मिलते ही वे डर और असमंजस की स्थिति में काम छोड़कर गांव लौटने को मजबूर हो गए।प्रधान ने कहा कि मजदूरों को अचानक वापस लौटने से न केवल उनकी मजदूरी छिन गई, बल्कि यात्रा में समय और पैसा भी बर्बाद हुआ। कई मजदूरों ने उधार लेकर सफर किया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और भी कमजोर हो गई है। इस पूरी प्रक्रिया से गरीब मजदूर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।ग्राम प्रधान वासुदेव कुंडू ने इस समस्या को गंभीर बताते हुए केंद्रीय निर्वाचन आयोग को पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने एसआईआर नोटिसों की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा है कि प्रशासनिक कार्रवाई के चलते मजदूरों को हुए नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए। प्रधान ने मांग की है कि प्रभावित प्रत्येक मजदूर को दस हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें हुए आर्थिक नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सके।प्रधान का कहना है कि यदि समय रहते इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया गया तो ग्रामीण क्षेत्रों में भय और असंतोष का माहौल और अधिक गहरा सकता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि एसआईआर प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि आम ग्रामीण और मजदूर बेवजह परेशान न हों।एसआईआर नोटिसों को लेकर उपजे इस विवाद ने अब प्रशासन और निर्वाचन आयोग के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
एसआईआर की मार से टूटी मजदूरी, ग्राम प्रधान ने दस हजार मुआवजे की मांग रखी नोटिस के बाद दूसरे राज्यों से लौटे मजदूर, रोज़गार पर पड़ा सीधा असर प्रधान ने निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर की मुआवजे की मांग पीलीभीत।जनपद में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के तहत जारी किए जा रहे सुनवाई नोटिसों ने ग्रामीण इलाकों में खलबली मचा दी है। चंदिया हजारा गांव के ग्राम प्रधान वासुदेव कुंडू समेत उनके परिवार के सदस्यों को भी एसआईआर के अंतर्गत नोटिस भेजे गए हैं। नोटिस मिलने के बाद ग्राम प्रधान ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे अनुचित और जनहित के विरुद्ध बताया है।गुरुवार शाम करीब चार बजे ग्राम प्रधान वासुदेव कुंडू ने बताया कि एसआईआर नोटिसों का असर केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे गांव के सैकड़ों मजदूरों की रोजी-रोटी पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। प्रधान का कहना है कि गांव के कई मजदूर दूसरे राज्यों में रहकर मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे, लेकिन नोटिस की सूचना मिलते ही वे डर और असमंजस की स्थिति में काम छोड़कर गांव लौटने को मजबूर हो गए।प्रधान ने कहा कि मजदूरों को अचानक वापस लौटने से न केवल उनकी मजदूरी छिन गई, बल्कि यात्रा में समय और पैसा भी बर्बाद हुआ। कई मजदूरों ने उधार लेकर सफर किया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और भी कमजोर हो गई है। इस पूरी प्रक्रिया से गरीब मजदूर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।ग्राम प्रधान वासुदेव कुंडू ने इस समस्या को गंभीर बताते हुए केंद्रीय निर्वाचन आयोग को पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने एसआईआर नोटिसों की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा है कि प्रशासनिक कार्रवाई के चलते मजदूरों को हुए नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए। प्रधान ने मांग की है कि प्रभावित प्रत्येक मजदूर को दस हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें हुए आर्थिक नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सके।प्रधान का कहना है कि यदि समय रहते इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया गया तो ग्रामीण क्षेत्रों में भय और असंतोष का माहौल और अधिक गहरा सकता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि एसआईआर प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि आम ग्रामीण और मजदूर बेवजह परेशान न हों।एसआईआर नोटिसों को लेकर उपजे इस विवाद ने अब प्रशासन और निर्वाचन आयोग के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
- सुबह राहगीरों ने शव को लटका देखा तो तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को नीचे उतरवाकर पहचान कराई, जिसकी पहचान शहर के छोटा खुदागंज निवासी 25 वर्षीय अनिल पाल के रूप में हुई। पुलिस ने मौके से CCTV फुटेज कब्जे में लिया। फुटेज में युवक सुबह करीब 4:45 बजे ऑफिस के अंदर जाता दिखाई देता है, लेकिन इसके बाद अचानक कैमरे बंद हो जाते हैं, जिससे मामला और संदिग्ध हो गया है। परिजनों का आरोप है कि अनिल की हत्या कर शव को फंदे से लटकाया गया है। मृतक के भाई ने बताया कि सुबह करीब 4:30 बजे प्रॉपर्टी डीलर ने अनिल को फोन कर ऑफिस बुलाया था। इसके बाद उसकी हत्या कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की गई। बताया जा रहा है कि अनिल पहले उसी प्रॉपर्टी डीलिंग कंपनी में काम करता था। ऑफिस में काम करने वाली एक युवती को लेकर अनिल और प्रॉपर्टी डीलर के बीच विवाद चल रहा था। परिजनों का कहना है कि इसी विवाद के चलते अनिल को पहले नौकरी से निकाला गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और कॉल डिटेल्स व CCTV फुटेज के आधार पर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारण स्पष्ट हो पाएंगे। फिलहाल परिजनों के आरोपों को गंभीरता से लेकर कार्रवाई की जा रही है।1
- नोटिस के बाद दूसरे राज्यों से लौटे मजदूर, रोज़गार पर पड़ा सीधा असर प्रधान ने निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर की मुआवजे की मांग पीलीभीत।जनपद में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के तहत जारी किए जा रहे सुनवाई नोटिसों ने ग्रामीण इलाकों में खलबली मचा दी है। चंदिया हजारा गांव के ग्राम प्रधान वासुदेव कुंडू समेत उनके परिवार के सदस्यों को भी एसआईआर के अंतर्गत नोटिस भेजे गए हैं। नोटिस मिलने के बाद ग्राम प्रधान ने कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे अनुचित और जनहित के विरुद्ध बताया है।गुरुवार शाम करीब चार बजे ग्राम प्रधान वासुदेव कुंडू ने बताया कि एसआईआर नोटिसों का असर केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे गांव के सैकड़ों मजदूरों की रोजी-रोटी पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। प्रधान का कहना है कि गांव के कई मजदूर दूसरे राज्यों में रहकर मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे, लेकिन नोटिस की सूचना मिलते ही वे डर और असमंजस की स्थिति में काम छोड़कर गांव लौटने को मजबूर हो गए।प्रधान ने कहा कि मजदूरों को अचानक वापस लौटने से न केवल उनकी मजदूरी छिन गई, बल्कि यात्रा में समय और पैसा भी बर्बाद हुआ। कई मजदूरों ने उधार लेकर सफर किया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और भी कमजोर हो गई है। इस पूरी प्रक्रिया से गरीब मजदूर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित हुआ है।ग्राम प्रधान वासुदेव कुंडू ने इस समस्या को गंभीर बताते हुए केंद्रीय निर्वाचन आयोग को पत्र भेजा है। पत्र में उन्होंने एसआईआर नोटिसों की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा है कि प्रशासनिक कार्रवाई के चलते मजदूरों को हुए नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए। प्रधान ने मांग की है कि प्रभावित प्रत्येक मजदूर को दस हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि उन्हें हुए आर्थिक नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सके।प्रधान का कहना है कि यदि समय रहते इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया गया तो ग्रामीण क्षेत्रों में भय और असंतोष का माहौल और अधिक गहरा सकता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि एसआईआर प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि आम ग्रामीण और मजदूर बेवजह परेशान न हों।एसआईआर नोटिसों को लेकर उपजे इस विवाद ने अब प्रशासन और निर्वाचन आयोग के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।1
- भारतवर्ष में युवा अपनी जिंदगी के बहुमूल्य साल यानी कि करें 35 साल की उम्र तक सिर्फ नौकरी की तलाश में बर्बाद कर देते हैं जबकि विदेशों में 15 साल की उम्र से ही युवा अपनी रोजी-रोटी के साथ पढ़ाई करते हैं यानी पढ़ाई करते हुए ही वे अपनी ड्यूटी का आना भी शुरू कर देते हैं वह हमारे यहां की युवाओं की तरह नौकरियों की तलाश में जिंदगी बर्बाद नहीं करते हैं।1
- अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए 'एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट' लागू करने की मांग को लेकर वकीलों में आक्रोश MYogiAdityanath Jitin Prasada Varun Gandhi #UttarPradesh #pilibhit1
- पीलीभीत पुलिस लाइन में शुक्रवार को साप्ताहिक परेड का आयोजन किया गया पुलिस अधीक्षक सुकृति माधव मिश्र ने रिजर्व पुलिस लाइन पहुंचकर परेड की सलामी ली और व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया इस दौरान पुलिस कर्मियों की शारीरिक दक्षता के साथ-साथ आपातकालीन सेवाओं और बुनियादी सुविधाओं का भी जायजा लिया गया परेड के दौरान सभी पुलिस कर्मियों ने कदमताल करते हुए अपनी तैयारी का प्रदर्शन किया इसके तत्काल बाद शास्त्र ड्रिल का आयोजन किया गया जिसमें हथियारों के रखरखाव और सुरक्षित प्रयोग पर विशेष ध्यान दिया गया पुलिस अधीक्षक ने ड्यूटी के दौरान शास्त्रों के सही रखरखाव और प्रभावी उपयोग को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया जिसमें किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त न करने के निर्देश दिए1
- पीलीभीत में ऑफिस के बाहर कर्मचारी का लटका मिला शव और परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप2
- पीलीभीत बीसलपुर क्षेत्र विलसंडा से लौट रहे थे शादी समारोह से तभी अचानक बीसलपुर क्षेत्र ईटगाव चौराहा पर बुजुर्ग महिला रोड क्रॉस कर रही थी तभी महिला बुजुर्ग बचाने के चक्कर में बाइक संतुलन बिगड़ा बाइक सवार गंभीर रूप से घायल होने पर प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती1
- पीलीभीत पुलिस लाइन में शुक्रवार को साप्ताहिक परेड का आयोजन किया गया, जिसमें पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव मिश्रा ने रिजर्व पुलिस लाइन पहुंचकर परेड की सलामी ली और व्यवस्थाओं का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान पुलिसकर्मियों की शारीरिक दक्षता, अनुशासन और आपातकालीन सेवाओं की तैयारियों का जायजा लिया गया। निरीक्षण के दौरान जनता की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाली यूपी-112 (PRV) वाहनों की तकनीकी स्थिति की जांच की गई। वाहनों में मौजूद जीवन रक्षक उपकरणों—जैसे फर्स्ट एड किट और अग्निशामक यंत्र—की उपलब्धता और कार्यक्षमता को परखा गया। चालकों से संवाद कर तकनीकी समस्याओं की जानकारी ली गई, ताकि सेवाओं में किसी प्रकार की बाधा न आए। पुलिस अधीक्षक ने निर्देश दिए कि सभी कर्मचारी आपात स्थिति में उपकरणों के सही उपयोग के लिए प्रशिक्षित रहें। परेड और ड्रिल के बाद पुलिस लाइन की विभिन्न शाखाओं का निरीक्षण किया गया। परिवहन शाखा, भोजनालय, आरटीसी बैरक, क्वार्टर गार्ड, कंपोजिट कंट्रोल रूम और वात्सल्य कक्ष जैसी महत्वपूर्ण जगहों की व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। भोजनालय में भोजन की गुणवत्ता और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया, जबकि बैरकों में जवानों के रहने की व्यवस्था की समीक्षा की गई। वात्सल्य कक्ष में दी जा रही सुविधाओं को भी परखा गया। निरीक्षण के अंत में प्रतिसार निरीक्षक को पूरे परिसर में उच्च स्तरीय स्वच्छता बनाए रखने और सरकारी संपत्तियों के रखरखाव को मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। परेड के दौरान पुलिसकर्मियों ने कदमताल करते हुए अपनी तैयारी का प्रदर्शन किया। इसके बाद आयोजित शस्त्र ड्रिल में हथियारों के सुरक्षित रख-रखाव और प्रभावी उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट निर्देश दिए कि ड्यूटी के दौरान हथियारों के उपयोग में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साप्ताहिक परेड और निरीक्षण के जरिए पुलिस लाइन की व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने और आपात स्थितियों से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने पर बल दिया गया।1