दमोह जिले के हटा स्थित सरकारी वेयरहाउस में समर्थन मूल्य पर चना और मसूर की खरीदी को लेकर बड़े भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। किसानों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि वेयरहाउस में तय मानकों के विपरीत घटिया गुणवत्ता का चना और मसूर जमा कराया जा रहा है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि गुणवत्ता जांच के लिए NCML कंपनी के अधिकृत सर्वेयरों की जगह कथित फर्जी सर्वेयरों से काम लिया जा रहा है, जिससे अनाज की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, खरीदी केंद्र पर गुणवत्ता परीक्षण की जिम्मेदारी NCML के अधिकृत सर्वेयरों की होती है, लेकिन मौके पर ऐसे व्यक्तियों द्वारा जांच की शिकायत मिली है जिनकी नियुक्ति और अधिकारिता पर संदेह है। आरोप है कि इन कथित फर्जी सर्वेयरों की मिलीभगत से निम्न गुणवत्ता वाले अनाज को भी मानक के अनुरूप बताकर वेयरहाउस में आसानी से जमा किया जा रहा है। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि इस पूरे खेल में वेयरहाउस मैनेजर बिहारी कुशवाहा और NCML कंपनी के सुपरवाइजर दामोदर पटेल की भूमिका भी संदिग्ध है। जानकारी के मुताबिक, सुपरवाइजर दामोदर पटेल समिति प्रभारी से ₹50 प्रति क्विंटल के हिसाब से अवैध वसूली कर रहे हैं, जिससे अमानक अनाज को वेयरहाउस में जमा कराया जा रहा है। इससे नियमों को ताक पर रखकर खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। जानकारों का मानना है कि यदि गुणवत्ता जांच में पारदर्शिता नहीं बरती गई, तो सरकारी भंडारण में बड़ी मात्रा में खराब और अमानक अनाज पहुँच सकता है, जिसका खामियाजा अंततः शासन और उपभोक्ताओं दोनों को भुगतना पड़ेगा। इससे एक ओर जहां शासन को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है, वहीं ईमानदार किसानों के हितों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। किसानों ने जिला प्रशासन, खाद्य विभाग और संबंधित एजेंसियों से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने खरीदी केंद्रों पर कार्यरत सभी सर्वेयरों की पहचान और नियुक्ति की जांच कराने, तथा फर्जी सर्वेयर संदीप पटेल समेत दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। किसानों का आरोप है कि यदि समय रहते इस मामले की जांच नहीं हुई तो समर्थन मूल्य खरीदी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाएगा। इस कथित घोटाले को लेकर क्षेत्र के किसानों और आम नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन गंभीर आरोपों की जांच कर सच्चाई सामने लाता है, या फिर भ्रष्टाचार के इन आरोपों के बीच मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
दमोह जिले के हटा स्थित सरकारी वेयरहाउस में समर्थन मूल्य पर चना और मसूर की खरीदी को लेकर बड़े भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। किसानों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि वेयरहाउस में तय मानकों के विपरीत घटिया गुणवत्ता का चना और मसूर जमा कराया जा रहा है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि गुणवत्ता जांच के लिए NCML कंपनी के अधिकृत सर्वेयरों की जगह कथित फर्जी सर्वेयरों से काम लिया जा रहा है, जिससे अनाज की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, खरीदी केंद्र पर गुणवत्ता परीक्षण की जिम्मेदारी NCML के अधिकृत सर्वेयरों की होती है, लेकिन मौके पर ऐसे व्यक्तियों द्वारा जांच की शिकायत मिली है जिनकी नियुक्ति और अधिकारिता पर संदेह है। आरोप है कि इन कथित फर्जी सर्वेयरों की मिलीभगत से निम्न गुणवत्ता वाले अनाज को भी मानक के अनुरूप बताकर वेयरहाउस में आसानी से जमा किया जा रहा है। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि इस पूरे खेल में वेयरहाउस मैनेजर बिहारी कुशवाहा और NCML कंपनी के सुपरवाइजर दामोदर पटेल की भूमिका भी संदिग्ध है। जानकारी के मुताबिक, सुपरवाइजर दामोदर पटेल समिति प्रभारी से ₹50 प्रति क्विंटल के हिसाब से अवैध वसूली कर रहे हैं, जिससे अमानक अनाज को वेयरहाउस में जमा कराया जा रहा है। इससे नियमों को ताक पर रखकर खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। जानकारों का मानना है कि यदि गुणवत्ता जांच में पारदर्शिता नहीं बरती गई, तो सरकारी भंडारण में बड़ी मात्रा में खराब और अमानक अनाज पहुँच सकता है, जिसका खामियाजा अंततः शासन और उपभोक्ताओं दोनों को भुगतना पड़ेगा। इससे एक ओर जहां शासन को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है, वहीं ईमानदार किसानों के हितों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। किसानों ने जिला प्रशासन, खाद्य विभाग और संबंधित एजेंसियों से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने खरीदी केंद्रों पर कार्यरत सभी सर्वेयरों की पहचान और नियुक्ति की जांच कराने, तथा फर्जी सर्वेयर संदीप पटेल समेत दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। किसानों का आरोप है कि यदि समय रहते इस मामले की जांच नहीं हुई तो समर्थन मूल्य खरीदी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाएगा। इस कथित घोटाले को लेकर क्षेत्र के किसानों और आम नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन गंभीर आरोपों की जांच कर सच्चाई सामने लाता है, या फिर भ्रष्टाचार के इन आरोपों के बीच मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।
- दमोह जिले के हटा स्थित सरकारी वेयरहाउस में समर्थन मूल्य पर चना और मसूर की खरीदी को लेकर बड़े भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। किसानों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि वेयरहाउस में तय मानकों के विपरीत घटिया गुणवत्ता का चना और मसूर जमा कराया जा रहा है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि गुणवत्ता जांच के लिए NCML कंपनी के अधिकृत सर्वेयरों की जगह कथित फर्जी सर्वेयरों से काम लिया जा रहा है, जिससे अनाज की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, खरीदी केंद्र पर गुणवत्ता परीक्षण की जिम्मेदारी NCML के अधिकृत सर्वेयरों की होती है, लेकिन मौके पर ऐसे व्यक्तियों द्वारा जांच की शिकायत मिली है जिनकी नियुक्ति और अधिकारिता पर संदेह है। आरोप है कि इन कथित फर्जी सर्वेयरों की मिलीभगत से निम्न गुणवत्ता वाले अनाज को भी मानक के अनुरूप बताकर वेयरहाउस में आसानी से जमा किया जा रहा है। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि इस पूरे खेल में वेयरहाउस मैनेजर बिहारी कुशवाहा और NCML कंपनी के सुपरवाइजर दामोदर पटेल की भूमिका भी संदिग्ध है। जानकारी के मुताबिक, सुपरवाइजर दामोदर पटेल समिति प्रभारी से ₹50 प्रति क्विंटल के हिसाब से अवैध वसूली कर रहे हैं, जिससे अमानक अनाज को वेयरहाउस में जमा कराया जा रहा है। इससे नियमों को ताक पर रखकर खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। जानकारों का मानना है कि यदि गुणवत्ता जांच में पारदर्शिता नहीं बरती गई, तो सरकारी भंडारण में बड़ी मात्रा में खराब और अमानक अनाज पहुँच सकता है, जिसका खामियाजा अंततः शासन और उपभोक्ताओं दोनों को भुगतना पड़ेगा। इससे एक ओर जहां शासन को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है, वहीं ईमानदार किसानों के हितों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। किसानों ने जिला प्रशासन, खाद्य विभाग और संबंधित एजेंसियों से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने खरीदी केंद्रों पर कार्यरत सभी सर्वेयरों की पहचान और नियुक्ति की जांच कराने, तथा फर्जी सर्वेयर संदीप पटेल समेत दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। किसानों का आरोप है कि यदि समय रहते इस मामले की जांच नहीं हुई तो समर्थन मूल्य खरीदी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाएगा। इस कथित घोटाले को लेकर क्षेत्र के किसानों और आम नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन गंभीर आरोपों की जांच कर सच्चाई सामने लाता है, या फिर भ्रष्टाचार के इन आरोपों के बीच मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे।1
- दमोह जिले के प्रसिद्ध तीर्थस्थल बांदकपुर में प्रस्तावित जागेश्वरनाथ लोक कॉरिडोर के निर्माण के लिए अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। देव जागेश्वरनाथ महादेव मंदिर सार्वजनिक न्यास के अध्यक्ष अधिवक्ता सुरेश कुमार मेहता ने जानकारी देते हुए बताया कि बांदकपुर ट्रस्ट की भूमि पर संचालित किसान सेवा केंद्र पेट्रोल पंप के संचालक और गांव के सरपंच सुनील डाबुल्या को कानूनी नोटिस जारी कर भूमि खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। जानकारी के अनुसार, खसरा नंबर 16/1 की करीब 19,250 वर्गफीट भूमि को वर्ष 2006 में 20 वर्ष की लीज पर दिया गया था, जिसकी अवधि 30 सितंबर 2026 को समाप्त हो रही है। न्यास द्वारा संचालक का लीज अवधि बढ़ाने के लिए प्रस्तुत आवेदन भी निरस्त कर दिया गया है। न्यास के मुताबिक, मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा विकसित किए जा रहे 'जागेश्वरनाथ लोक' कॉरिडोर के लिए इस भूमि की आवश्यकता है। नोटिस में पेट्रोल पंप संचालक को 1 अक्टूबर 2026 तक अपने खर्च पर निर्माण हटाकर भूमि शांतिपूर्वक ट्रस्ट को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। यदि निर्धारित समय सीमा में भूमि खाली नहीं की जाती है, तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई किए जाने की चेतावनी भी दी गई है।1
- दमोह जिले की ग्राम पंचायत सिमरी जालम में आए तेज आंधी-तूफान ने भारी नुकसान पहुँचाया है। तूफान की तेज़ रफ़्तार हवाओं के कारण एक वेयरहाउस की टीन की चादरें उड़ गईं, जिससे भवन को काफी क्षति पहुँची। इस घटना के बाद क्षेत्र में अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया था, हालाँकि गनीमत रही कि इस दौरान कोई जनहानि नहीं हुई। स्थानीय लोगों ने अब प्रशासन से इस नुकसान का सर्वे कर उचित सहायता उपलब्ध कराने की माँग की है।1
- आगरा के बाह क्षेत्र में फायरमैन अमरजीत चौधरी ने अपनी जान की परवाह न करते हुए एक साहसिक कार्य को अंजाम दिया है। उन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए 100 फीट गहरे कुएं में गिरी एक महिला को सुरक्षित बाहर निकालकर उसकी जान बचाई। कुएं में मीथेन गैस होने के बावजूद, फायरमैन चौधरी ने ब्रीदिंग अपरेटस की मदद से नीचे उतरकर यह सफल रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा किया। उनके इस बहादुरी भरे कार्य के लिए पुलिस आयुक्त ने उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया।1
- कटनी जिले के छात्रों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। कलेक्टर आशीष तिवारी ने वर्षा ऋतु के दौरान बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिले के जर्जर शासकीय स्कूलों में व्यापक मरम्मत कार्यों के लिए ₹1 करोड़ 66 लाख 94 हजार 100 की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की है। इस महत्वपूर्ण पहल के तहत, जिले की कुल 82 शालाओं में मरम्मत कार्य कराए जाएंगे, जिनमें विशेष रूप से रीठी तहसील क्षेत्र के 24 स्कूल भी शामिल हैं। इन मरम्मत योग्य स्कूलों का प्रस्ताव जिला शिक्षा केंद्र द्वारा किए गए विस्तृत सर्वेक्षण और तकनीकी परीक्षण के बाद तैयार किया गया था। यह प्रस्ताव डीएमएफ पोर्टल पर अपलोड किया गया, जिसके परीक्षण उपरांत राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल के नोडल अधिकारी द्वारा इसकी अनुमति प्रदान की गई। इसी प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद, कलेक्टर ने इन मरम्मत कार्यों की प्रशासनिक स्वीकृति जारी की है। इस मंजूरी से जिले के 82 और रीठी तहसील के 24 स्कूलों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है, जिससे बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित हो सकेगा।1
- मंडला से बरेला और जबलपुर के बीच भारी मात्रा में ओवरलोड रेत से भरे हाइवा और डंपर बेखौफ होकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन वाहनों में क्षमता से कहीं अधिक रेत भरी होती है और उनका परिवहन भी बिना तिरपाल के किया जाता है। सड़कों पर लगातार गिरती रेत आम राहगीरों की जान को खतरे में डाल रही है और दुर्घटनाओं का कारण बन रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह पूरा खेल खनिज विभाग, आरटीओ और पुलिस प्रशासन की आँखों के सामने लगातार जारी है, बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। प्रशासन की इस चुप्पी के पीछे क्या वजह है, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है। हिंदुस्तान समाचार की इस विशेष रिपोर्ट में इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई है।1
- तेंदूखेड़ा के ग्राम मोहरा निवासी आनंद ठाकुर की पत्नी के नाम से संचालित एक राइस मिल को बिजली विभाग ने चार लाख रुपये से अधिक का बिजली बिल जारी किया था। उपभोक्ता का आरोप है कि मिल साल में केवल चार महीने ही चलती है, फिर भी लगातार ऊँचे बिल भेजे जा रहे थे, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से परेशानी झेलनी पड़ी। इस समस्या के समाधान के लिए बिजली विभाग में कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उपभोक्ता ने जबलपुर स्थित बिजली उपभोक्ता फोरम का रुख किया। फोरम ने मामले की जांच के बाद, चार लाख रुपये से अधिक के मूल बिल को रद्द करते हुए, संशोधित बिल 58 हजार रुपये निर्धारित किया। फोरम ने 2 जून को अपने आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पहले राइस मिल का बिजली कनेक्शन बहाल किया जाए और उसके बाद ही उपभोक्ता से संशोधित बिल की राशि जमा कराई जाए। हालांकि, आरोपों के अनुसार, हर्रई विद्युत वितरण केंद्र द्वारा अब तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई है। कनेक्शन न जुड़ने के कारण राइस मिल का संचालन प्रभावित हो रहा है, जिससे बड़े आर्थिक नुकसान की आशंका बनी हुई है। उपभोक्ता ने विभाग पर फोरम के आदेशों की अनदेखी करने का सीधा आरोप लगाया है और तुरंत बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। यह पूरा प्रकरण बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और उपभोक्ताओं की शिकायतों के निराकरण के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े करता है।1
- दमोह जिले के पटेरा थाना क्षेत्र में मंगलवार को हिंडोरिया-पटेरा मार्ग पर ग्राम तिदनी के पास एक बड़ा हादसा टल गया। यहां एक इलेक्ट्रिक ऑटो अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतर गया और पलट गया। हादसे के वक्त ऑटो में चार बच्चे, तीन महिलाएं और दो पुरुष समेत कुल नौ लोग सवार थे। गनीमत रही कि इस दुर्घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और सभी यात्रियों को मामूली चोटें ही आईं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ऑटो तेज गति के कारण अनियंत्रित हुआ था। दुर्घटना के तुरंत बाद, स्थानीय लोगों की मदद से सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। सूचना मिलने पर पटेरा पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की जांच शुरू कर दी है, जिसकी पड़ताल जारी है।1