खदानों (Coal mines) से कोयला मुख्य रूप से दो तरीकों से निकाला जाता है: सतह खनन (Surface Mining) जब कोयला जमीन के कम गहराई पर हो, और भूमिगत खनन (Underground Mining) जब कोयला धरती के बहुत नीचे हो। इसमें भारी मशीनों, विलायकों और कन्वेयर बेल्ट का उपयोग किया जाता है। सतह खनन (ओपन-कास्ट माइनिंग) ऊपरी परत हटाना: जमीन की सबसे ऊपर की मिट्टी और चट्टान (Overburden) को बुलडोजर और बड़ी मशीनों से हटाया जाता है। [1] खुदाई: विशालकाय मशीनों (जैसे एक्सकेवेटर और शोवेल) द्वारा सीधे कोयले की परत को खोदकर बाहर निकाला जाता है। [1] परिवहन: निकाले गए कोयले को भारी ट्रकों या कन्वेयर बेल्ट के जरिए बाहर भेजा जाता है। [1] भूमिगत खनन (अंडरग्राउंड माइनिंग) सुरंग या शाफ्ट बनाना: जमीन के भीतर जाने के लिए लंबवत शाफ्ट (Shaft) या क्षैतिज सुरंगें बनाई जाती हैं। [1] रूम-एंड-पिलर विधि: इसमें खदान के भीतर कमरेनुमा हिस्से काटे जाते हैं और छत को संभालने के लिए कोयले के बड़े खंभे (Pillars) छोड़े जाते हैं। [1] लॉन्गवॉल विधि: इसमें शक्तिशाली कटर मशीनों (Shearer) द्वारा लंबी दीवार के आकार में कोयला काटा जाता है और पीछे की छत को सुरक्षित रूप से ढहने दिया जाता है। [1]
खदानों (Coal mines) से कोयला मुख्य रूप से दो तरीकों से निकाला जाता है: सतह खनन (Surface Mining) जब कोयला जमीन के कम गहराई पर हो, और भूमिगत खनन (Underground Mining) जब कोयला धरती के बहुत नीचे हो। इसमें भारी मशीनों, विलायकों और कन्वेयर बेल्ट का उपयोग किया जाता है। सतह खनन (ओपन-कास्ट माइनिंग) ऊपरी परत हटाना: जमीन की सबसे ऊपर की मिट्टी और चट्टान (Overburden) को बुलडोजर और बड़ी मशीनों से हटाया जाता है। [1] खुदाई: विशालकाय मशीनों (जैसे एक्सकेवेटर और शोवेल) द्वारा सीधे कोयले की परत को खोदकर बाहर निकाला जाता है। [1] परिवहन: निकाले गए कोयले को भारी ट्रकों या कन्वेयर बेल्ट के जरिए बाहर भेजा जाता है। [1] भूमिगत खनन (अंडरग्राउंड माइनिंग) सुरंग या शाफ्ट बनाना: जमीन के भीतर जाने के लिए लंबवत शाफ्ट (Shaft) या क्षैतिज सुरंगें बनाई जाती हैं। [1] रूम-एंड-पिलर विधि: इसमें खदान के भीतर कमरेनुमा हिस्से काटे जाते हैं और छत को संभालने के लिए कोयले के बड़े खंभे (Pillars) छोड़े जाते हैं। [1] लॉन्गवॉल विधि: इसमें शक्तिशाली कटर मशीनों (Shearer) द्वारा लंबी दीवार के आकार में कोयला काटा जाता है और पीछे की छत को सुरक्षित रूप से ढहने दिया जाता है। [1]
- आजसू नेताओं ने प्रेसवार्ता आयोजित कर कार्यपालक पदाधिकारी पर लगाया बड़ा आरोप1
- डिटर्जेंट पाउडर (सर्फ), यूरिया, कास्टिक सोडा (सोडियम हाइड्रोक्साइड) और रिफाइंड या पाम ऑयल का उपयोग किया जाता है। इसके अलावा दूध की मात्रा और गाढ़ापन बढ़ाने के लिए स्टार्च, ग्लूकोज और कभी-कभी फॉर्मेलिन भी मिलाया जाता है। नकली और मिलावटी दूध तैयार करने के तौर-तरीकों का एक लाइव प्रदर्शन: नकली या मिलावट वाले दूध की पहचान घर पर आसानी से की जा सकती है। असली दूध का स्वाद हल्का मीठा होता है, जबकि नकली या सिंथेटिक दूध में डिटर्जेंट या यूरिया होने के कारण उसका स्वाद कड़वा या साबुन जैसा लगता है। इसके अलावा, असली दूध गर्म करने पर पीला नहीं पड़ता, जबकि हाथों के बीच रगड़ने पर चिकना महसूस होता है। [1, 2, 3, 4, 5] दूध की शुद्धता जांचने के आसान घरेलू तरीके नीचे दिए गए हैं: पानी की मिलावट की जांच (फ्लो टेस्ट) चिकनी और ढलान वाली सतह पर दूध की एक बूंद डालें। शुद्ध दूध धीरे-धीरे बहेगा और पीछे सफेद निशान छोड़ जाएगा। पानी मिला हुआ नकली दूध बिना कोई निशान छोड़े तेजी से बह जाएगा। [1, 2, 3] डिटर्जेंट की मिलावट की जांच (शेक टेस्ट) थोड़ी मात्रा में दूध लेकर उसमें बराबर मात्रा में पानी मिलाएं और जोर से हिलाएं। [1, 2] डिटर्जेंटयुक्त दूध में बहुत ज्यादा और देर तक टिकने वाला घना झाग बन जाता है। [1, 2, 3] शुद्ध दूध में या तो झाग बनता ही नहीं है या बनता है तो तुरंत खत्म हो जाता है। [1, 2, 3] स्टार्च की मिलावट की जांच (आयोडीन टेस्ट) थोड़े से दूध को उबालकर ठंडा करें। इसमें आयोडीन टिंचर या आयोडीन की कुछ बूंदें डालें। स्टार्च मिला होने पर दूध का रंग नीला या नीला-काला हो जाता है। शुद्ध दूध का रंग नहीं बदलता है। [1, 2, 3] यूरिया की मिलावट की जांच एक टेस्ट ट्यूब में थोड़ा दूध लें और उसमें सोयाबीन या अरहर पाउडर मिलाएं। [1] अच्छी तरह मिलाने के बाद 5 मिनट के लिए छोड़ दें। [1] इसमें लाल लिटमस पेपर डालें; अगर पेपर नीला हो जाए, तो दूध में यूरिया की मिलावट है। [1]1
- गढ़वा। प्रेमी संग जंगल में बिताई रात! सनकी प्रेमी 5 बच्चे की मां को लेकर... गढ़वा में एक महिला के अपने कथित प्रेमी के साथ घर छोड़ने की खबर चर्चा का विषय बनी हुई है। बताया जा रहा है कि दोनों ने जंगल में रात बिताई, जिसके बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। मामले की वास्तविक स्थिति और सभी पक्षों की जानकारी सामने आना अभी बाकी है।1
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- Post by Pawan Gupta1
- बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सेवा हेतु माली मालाकार कल्याण संघर्ष मोर्चा इंडिया फाउंडेशन ने किया मैंगो जूस व नारियल पानी का वितरण देवघर स्थित पवित्र बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सेवा के उद्देश्य से माली मालाकार कल्याण संघर्ष मोर्चा इंडिया फाउंडेशन द्वारा झारखंड गेट के समीप मैंगो जूस एवं नारियल पानी का नि:शुल्क वितरण किया गया। इस सेवा कार्य का नेतृत्व फाउंडेशन के राष्ट्रीय संस्थापक एवं रंका निवासी प्रकाश मालाकार ने किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद भगत, राष्ट्रीय सचिव शशि मालाकार, राजेंद्र मालाकार, बबलू सैनी, रामकृपाल मालाकार सहित संस्था के अनेक समाजसेवी एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर बाबा धाम पहुंचने वाले कांवरियों एवं अन्य श्रद्धालुओं को गर्मी और उमस से राहत दिलाने के उद्देश्य से मैंगो जूस और नारियल पानी वितरित किया। राष्ट्रीय संस्थापक प्रकाश मालाकार ने कहा कि सावन के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की सेवा करना संस्था का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि भविष्य में भी फाउंडेशन समाजहित एवं जनसेवा से जुड़े ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित करता रहेगा। श्रद्धालुओं ने इस सेवा कार्य की सराहना करते हुए संस्था के सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान सेवा, सहयोग और मानवता का संदेश भी दिया इस कार्यक्रम में उपस्थित राष्ट्रीय संयोजक सतीश मालाकार मनोज सैनी संरक्षक राष्ट्रीय संयोजक बालगोविंद माली उमाशंकर सैनी एवं समाज के सभी पदाधिकारी कार्य में सहयोग कर रहे थे1
- मध्यान भोजन में बच्चों को मिल रहा है पानी में उबला आलू1
- डुमरी विधानसभा के विधायक टाइगर जयराम माता ने बताया कि एग्जाम करो धोना चाहिए और बच्चे की मांगे पूरी होनी चाहिए जिससे बच्चों का खुशी का लहर है और इससे सपा चलता है इससे साफ पता चलता है कि टाइगर जयराम महत1