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भक्ति, समरसता व गुरु-निष्ठा का संदेश: बिजोरी छोटी हिन्दू सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब कुशलगढ़ के बिजोरी छोटी में आयोजित भव्य हिन्दू सम्मेलन में सनातन संस्कृति की परम्पराओं और जीवन मूल्यों पर प्रभावशाली विचार व्यक्त किए गए। मुख्य वक्ता मधुसूदन व्यास ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, समरसता और गुरु-भक्ति का विराट जीवन दर्शन है। उन्होंने माँ शबरी और भगवान राम का उदाहरण देते हुए भक्ति में भेदभाव न होने का संदेश दिया। साथ ही रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने की कथा के माध्यम से आत्मपरिवर्तन की महत्ता बताई तथा एकलव्य की गुरु-निष्ठा को प्रेरणादायक बताया। सम्मेलन में नर्सिंग गिरी महाराज, लालचंद भाबोर, मानसिंह डाबी एवं भारत कुमावत ने भी समाज को संगठित व संस्कारित बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे और वातावरण धर्म, संस्कृति व सामाजिक एकता की भावना से ओतप्रोत रहा।

1 hr ago
user_धर्मेंद्र उपाध्याय
धर्मेंद्र उपाध्याय
पत्रकार बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
1 hr ago

भक्ति, समरसता व गुरु-निष्ठा का संदेश: बिजोरी छोटी हिन्दू सम्मेलन में उमड़ा जनसैलाब कुशलगढ़ के बिजोरी छोटी में आयोजित भव्य हिन्दू सम्मेलन में सनातन संस्कृति की परम्पराओं और जीवन मूल्यों पर प्रभावशाली विचार व्यक्त किए गए। मुख्य वक्ता मधुसूदन व्यास ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, समरसता और गुरु-भक्ति का विराट जीवन दर्शन है। उन्होंने माँ शबरी और भगवान राम का उदाहरण देते हुए भक्ति में भेदभाव न होने का संदेश दिया। साथ ही रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने की कथा के माध्यम से आत्मपरिवर्तन की महत्ता बताई तथा एकलव्य की गुरु-निष्ठा को प्रेरणादायक बताया। सम्मेलन में नर्सिंग गिरी महाराज, लालचंद भाबोर, मानसिंह डाबी एवं भारत कुमावत ने भी समाज को संगठित व संस्कारित बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे और वातावरण धर्म, संस्कृति व सामाजिक एकता की भावना से ओतप्रोत रहा।

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  • कुशलगढ़ के बिजोरी छोटी में आयोजित भव्य हिन्दू सम्मेलन में सनातन संस्कृति की परम्पराओं और जीवन मूल्यों पर प्रभावशाली विचार व्यक्त किए गए। मुख्य वक्ता मधुसूदन व्यास ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, समरसता और गुरु-भक्ति का विराट जीवन दर्शन है। उन्होंने माँ शबरी और भगवान राम का उदाहरण देते हुए भक्ति में भेदभाव न होने का संदेश दिया। साथ ही रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने की कथा के माध्यम से आत्मपरिवर्तन की महत्ता बताई तथा एकलव्य की गुरु-निष्ठा को प्रेरणादायक बताया। सम्मेलन में नर्सिंग गिरी महाराज, लालचंद भाबोर, मानसिंह डाबी एवं भारत कुमावत ने भी समाज को संगठित व संस्कारित बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे और वातावरण धर्म, संस्कृति व सामाजिक एकता की भावना से ओतप्रोत रहा।
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    कुशलगढ़ के बिजोरी छोटी में आयोजित भव्य हिन्दू सम्मेलन में सनातन संस्कृति की परम्पराओं और जीवन मूल्यों पर प्रभावशाली विचार व्यक्त किए गए। मुख्य वक्ता मधुसूदन व्यास ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, समरसता और गुरु-भक्ति का विराट जीवन दर्शन है।
उन्होंने माँ शबरी और भगवान राम का उदाहरण देते हुए भक्ति में भेदभाव न होने का संदेश दिया। साथ ही रत्नाकर से महर्षि वाल्मीकि बनने की कथा के माध्यम से आत्मपरिवर्तन की महत्ता बताई तथा एकलव्य की गुरु-निष्ठा को प्रेरणादायक बताया।
सम्मेलन में नर्सिंग गिरी महाराज, लालचंद भाबोर, मानसिंह डाबी एवं भारत कुमावत ने भी समाज को संगठित व संस्कारित बनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे और वातावरण धर्म, संस्कृति व सामाजिक एकता की भावना से ओतप्रोत रहा।
    user_धर्मेंद्र उपाध्याय
    धर्मेंद्र उपाध्याय
    पत्रकार बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    1 hr ago
  • बांसवाड़ा, 18 फरवरी/गायत्री मण्डल की ओर से संचालित श्री पीताम्बरा आश्रम में एमजी अस्पताल के नर्सिंग अधीक्षक आशीष अधिकारी की अध्यक्षता में आध्यात्मिक संगोष्ठी एवं प्रयोगधर्मा साहित्यसर्जक व मनीषी चिन्तक हरीश आचार्य का एकल सनातन काव्य पाठ कार्यक्रम हुआ। इसमें धर्म-अध्यात्म के विभिन्न तत्त्वों की सारगर्भित चर्चा हुई। इसमें मेघा सराफ, पुष्पा व्यास, राजेन्द्र नानालाल जोशी, यश सराफ, जुगल जयशंकर त्रिवेदी (मुम्बई), चन्द्रेश व्यास, अनिल नरहरि भट्ट, अनिता अधिकारी, आचार्य योगिता व्यास आदि ने विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी के उपरान्त जाने-माने साहित्यकार हरीश आचार्य की आध्यात्मिक सांस्कृतिक रचनाओं पर केन्द्रित एकल काव्य पाठ ने काव्य रसिकों को आनंदित कर दिया। इस अवसर पर श्री पीताम्बरा आश्रम के साधक-साधिकाओं की ओर से पगड़ी, हार तथा उपरणे पहनाकर हरीश आचार्य का अभिनन्दन किया गया। इससे पूर्व आशीष अधिकारी एवं श्रीमती अनिता अधिकारी ने हनुमान पूजा की तथा आरती एवं पुष्पान्जलि विधान पूर्ण किया। हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ भी किए गए।
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    बांसवाड़ा, 18 फरवरी/गायत्री मण्डल की ओर से संचालित श्री पीताम्बरा आश्रम में एमजी अस्पताल के नर्सिंग अधीक्षक आशीष अधिकारी की अध्यक्षता में आध्यात्मिक संगोष्ठी एवं प्रयोगधर्मा साहित्यसर्जक व मनीषी चिन्तक हरीश आचार्य का एकल सनातन काव्य पाठ कार्यक्रम हुआ। इसमें धर्म-अध्यात्म के विभिन्न तत्त्वों की सारगर्भित चर्चा हुई।
इसमें मेघा सराफ, पुष्पा व्यास, राजेन्द्र नानालाल जोशी, यश सराफ, जुगल जयशंकर त्रिवेदी (मुम्बई), चन्द्रेश व्यास, अनिल नरहरि भट्ट, अनिता अधिकारी, आचार्य योगिता व्यास आदि ने विचार व्यक्त किए। 
संगोष्ठी के उपरान्त जाने-माने साहित्यकार हरीश आचार्य की आध्यात्मिक सांस्कृतिक रचनाओं पर केन्द्रित एकल काव्य पाठ ने काव्य रसिकों को आनंदित कर दिया। 
इस अवसर पर श्री पीताम्बरा आश्रम के साधक-साधिकाओं की ओर से पगड़ी, हार तथा उपरणे पहनाकर हरीश आचार्य का अभिनन्दन किया गया। इससे पूर्व आशीष अधिकारी एवं श्रीमती अनिता अधिकारी ने हनुमान पूजा की तथा आरती एवं पुष्पान्जलि विधान पूर्ण किया। हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ भी किए गए।
    user_Subhash Mehta
    Subhash Mehta
    Journalist बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    14 hrs ago
  • Post by Pintu Meena Meena
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    Post by Pintu Meena Meena
    user_Pintu Meena Meena
    Pintu Meena Meena
    अबापुरा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    16 hrs ago
  • Post by Bapulal Ahari
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    Post by Bapulal Ahari
    user_Bapulal Ahari
    Bapulal Ahari
    Electrician गढ़ी, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • कुशलगढ़ जिला बांसवाड़ा राजस्थान रिपोर्टर धर्मेन्द्र कुमार सोनी बिजोरी छोटी में हुआ हिन्दू सम्मेलन : सनातनी परम्परा, माँ शबरी, रत्नाकर और एकलव्य का प्रेरक उदाहरण बताया राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उप खंड क्षेत्र के खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र के गांव बिजोरी छोटी में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में सनातन संस्कृति की महान परम्पराओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, समरसता और गुरु-भक्ति का जीवन दर्शन है। सम्मेलन में माँ शबरी का उदाहरण देते हुए बताया गया कि सच्ची भक्ति में जाति-पाति का कोई भेद नहीं होता। शबरी माता ने प्रेम और श्रद्धा से भगवान श्रीराम को बेर अर्पित किए, और भगवान ने उनकी भावना को स्वीकार किया। यह प्रसंग समरसता और समानता का संदेश देता है। इसी प्रकार रत्नाकर का उल्लेख किया गया, जो बाद में महर्षि वाल्मीकि बने और उन्होंने रामायण जैसे महान ग्रंथ की रचना की। यह उदाहरण दर्शाता है कि सनातन धर्म में आत्मपरिवर्तन और साधना के द्वारा महानता प्राप्त की जा सकती है। साथ ही एकलव्य का प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत किया गया। एकलव्य ने गुरु द्रोणाचार्य को मन ही मन गुरु मानकर कठिन साधना की और अद्वितीय धनुर्धर बने। जब गुरु दक्षिणा के रूप में अंगूठा मांगा गया, तो उन्होंने बिना संकोच उसे अर्पित कर दिया। यह प्रसंग गुरु-भक्ति, समर्पण और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। सम्मेलन में यह संदेश दिया गया कि सनातन परम्परा हमें भक्ति (शबरी), आत्मपरिवर्तन (रत्नाकर) और गुरु-निष्ठा (एकलव्य) का मार्ग दिखाती है। समाज को इन आदर्शों को अपनाकर समरस, संस्कारित और संगठित बनाना चाहिए। इस अवसर पर वक्ता मधुसूदन व्यास नरसिंह गिरी महाराज लालचन्द भाभोर मानसीह डाबी सहित अन्य लोग भी मौजूद थे उक्त जानकारी भरत जी कुमावत ने दी
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    कुशलगढ़ जिला बांसवाड़ा राजस्थान रिपोर्टर धर्मेन्द्र कुमार सोनी 
बिजोरी छोटी में हुआ हिन्दू सम्मेलन : सनातनी परम्परा, माँ शबरी, रत्नाकर और एकलव्य का प्रेरक उदाहरण बताया 
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उप खंड क्षेत्र के खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र के गांव 
बिजोरी छोटी में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में सनातन संस्कृति की महान परम्पराओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, समरसता और गुरु-भक्ति का जीवन दर्शन है।
सम्मेलन में माँ शबरी का उदाहरण देते हुए बताया गया कि सच्ची भक्ति में जाति-पाति का कोई भेद नहीं होता। शबरी माता ने प्रेम और श्रद्धा से भगवान श्रीराम को बेर अर्पित किए, और भगवान ने उनकी भावना को स्वीकार किया। यह प्रसंग समरसता और समानता का संदेश देता है।
इसी प्रकार रत्नाकर का उल्लेख किया गया, जो बाद में महर्षि वाल्मीकि बने और उन्होंने रामायण जैसे महान ग्रंथ की रचना की। यह उदाहरण दर्शाता है कि सनातन धर्म में आत्मपरिवर्तन और साधना के द्वारा महानता प्राप्त की जा सकती है।
साथ ही एकलव्य का प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत किया गया। एकलव्य ने गुरु द्रोणाचार्य को मन ही मन गुरु मानकर कठिन साधना की और अद्वितीय धनुर्धर बने। जब गुरु दक्षिणा के रूप में अंगूठा मांगा गया, तो उन्होंने बिना संकोच उसे अर्पित कर दिया। यह प्रसंग गुरु-भक्ति, समर्पण और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है।
सम्मेलन में यह संदेश दिया गया कि सनातन परम्परा हमें भक्ति (शबरी),   आत्मपरिवर्तन (रत्नाकर) और गुरु-निष्ठा (एकलव्य) का मार्ग दिखाती है। समाज को इन आदर्शों को अपनाकर समरस, संस्कारित और संगठित बनाना चाहिए। 
इस अवसर पर वक्ता मधुसूदन व्यास
नरसिंह गिरी महाराज
लालचन्द भाभोर
मानसीह डाबी सहित अन्य लोग भी मौजूद थे उक्त जानकारी भरत जी कुमावत ने दी
    user_Dharmendra Soni
    Dharmendra Soni
    Kushalgarh, Banswara•
    15 hrs ago
  • ग्राम अंबोदिया में ऐसे हाल है
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    ग्राम अंबोदिया में ऐसे हाल है
    user_Sanjay Mori
    Sanjay Mori
    रतलाम, रतलाम, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • Post by राघवेन्द्र सिंह
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    Post by राघवेन्द्र सिंह
    user_राघवेन्द्र सिंह
    राघवेन्द्र सिंह
    पत्रकार जावरा, रतलाम, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • बांसवाड़ा विधायक अर्जुन सिंह बामनिया ने विधानसभा में टी ए डी छात्रावासों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। टी ए डी छात्रावास में भ्रष्टाचार का आरोप, मंत्री बाबूलाल खराड़ी नहीं दे पाए जवाब
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    बांसवाड़ा विधायक अर्जुन सिंह बामनिया ने विधानसभा में टी ए डी छात्रावासों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। टी ए डी छात्रावास में भ्रष्टाचार का आरोप, मंत्री बाबूलाल खराड़ी नहीं दे पाए जवाब
    user_Subhash Mehta
    Subhash Mehta
    Journalist बांसवाड़ा, बांसवाड़ा, राजस्थान•
    14 hrs ago
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