सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के पड़रिया गांव में एक विवाहिता खुशबू यादव (23) का शव घर के दूसरे तल स्थित कमरे में फंदे से लटका मिलने से हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, दिनेश यादव की पत्नी खुशबू का शव छत की कुंडी से साड़ी के सहारे लटका मिला। घटना के समय पति दिनेश यादव खेत पर कृषि कार्य के लिए गए हुए थे। बताया जाता है कि दिनेश की मां जब कमरे के पास पहुंचीं तो बहू को फंदे से लटका देख उनके होश उड़ गए। शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर जुट गए और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी है। मृतका अपने पीछे करीब तीन वर्षीय पुत्र को छोड़ गई है। खुशबू का मायका जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा थाना क्षेत्र स्थित सेहरी गांव में है। मायके पक्ष के लोगों ने पुलिस को तहरीर देकर दहेज उत्पीड़न और हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि खुशबू की हत्या कर शव को फंदे से लटका दिया गया है, और उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में थाना प्रभारी निरीक्षक नवीन कुमार सिंह ने बताया कि शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और मायके पक्ष की ओर से तहरीर प्राप्त हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है, और रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस क्षेत्राधिकारी मयंक द्विवेदी का बयान भी इस संबंध में सामने आया है।
सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के पड़रिया गांव में एक विवाहिता खुशबू यादव (23) का शव घर के दूसरे तल स्थित कमरे में फंदे से लटका मिलने से हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, दिनेश यादव की पत्नी खुशबू का शव छत की कुंडी से साड़ी के सहारे लटका मिला। घटना के समय पति दिनेश यादव खेत पर कृषि कार्य के लिए गए हुए थे। बताया जाता है कि दिनेश की मां जब कमरे के पास पहुंचीं तो बहू को फंदे से लटका देख उनके होश उड़ गए। शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर जुट गए और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी है। मृतका अपने पीछे करीब तीन वर्षीय पुत्र को छोड़ गई है। खुशबू का मायका जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा थाना क्षेत्र स्थित सेहरी गांव में है। मायके पक्ष के लोगों ने पुलिस को तहरीर देकर दहेज उत्पीड़न और हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि खुशबू की हत्या कर शव को फंदे से लटका दिया गया है, और उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में थाना प्रभारी निरीक्षक नवीन कुमार सिंह ने बताया कि शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और मायके पक्ष की ओर से तहरीर प्राप्त हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है, और रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस क्षेत्राधिकारी मयंक द्विवेदी का बयान भी इस संबंध में सामने आया है।
- सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के पड़रिया गांव में एक विवाहिता खुशबू यादव (23) का शव घर के दूसरे तल स्थित कमरे में फंदे से लटका मिलने से हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, दिनेश यादव की पत्नी खुशबू का शव छत की कुंडी से साड़ी के सहारे लटका मिला। घटना के समय पति दिनेश यादव खेत पर कृषि कार्य के लिए गए हुए थे। बताया जाता है कि दिनेश की मां जब कमरे के पास पहुंचीं तो बहू को फंदे से लटका देख उनके होश उड़ गए। शोर सुनकर आसपास के लोग मौके पर जुट गए और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया, साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी है। मृतका अपने पीछे करीब तीन वर्षीय पुत्र को छोड़ गई है। खुशबू का मायका जनपद बलरामपुर के पचपेड़वा थाना क्षेत्र स्थित सेहरी गांव में है। मायके पक्ष के लोगों ने पुलिस को तहरीर देकर दहेज उत्पीड़न और हत्या का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि खुशबू की हत्या कर शव को फंदे से लटका दिया गया है, और उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस संबंध में थाना प्रभारी निरीक्षक नवीन कुमार सिंह ने बताया कि शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और मायके पक्ष की ओर से तहरीर प्राप्त हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है, और रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस क्षेत्राधिकारी मयंक द्विवेदी का बयान भी इस संबंध में सामने आया है।1
- प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत चल रहे 100 दिवसीय सघन टीबी खोज विशेष अभियान के तहत, गोनहाडीह के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ने मंगलवार, 2 जून 2026 को हाई-रिस्क ग्राम पंचायत कदमहवा में एक विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य उच्च जोखिम वाली आबादी की टीबी जांच करना था, जिसके लिए हैंड-होल्ड एक्स-रे मशीन का उपयोग किया गया। टीबी जांच के साथ-साथ, मौके पर ही मरीजों के बीपी, ब्लड शुगर, हीमोग्लोबिन और बीएमआई सहित विभिन्न अन्य स्वास्थ्य परीक्षण भी किए गए। जांच के उपरांत, जिन मरीजों को आवश्यकता थी, उन्हें निःशुल्क दवाएं वितरित की गईं। इस अभियान को सफल बनाने में वरिष्ठ लैब पर्यवेक्षक चंदन सिंह, वरिष्ठ एक्स-रे टेक्नीशियन जितेंद्र त्रिपाठी, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी अभिलाषा, एएनएम पूनम, वार्ड बॉय अनुराग, संगिनी सरिता सिंह, आशा कार्यकर्ता आशा देवी और अनुराधा, तथा स्वयंसेवक फतेह बहादुर सिंह एवं मनोज सिंह उपस्थित रहे। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोनहाडीह के प्रभारी अमित त्रिपाठी ने बताया कि पीएचसी क्षेत्र के अन्य हाई-रिस्क गांवों जैसे तेजगढ़, आदिलापुर, हरैयानानकार, मधुकरपुर, पटखौली और तिवारीपुर में भी इसी तरह के विशेष स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर लोगों की जांच की गई और उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं।1
- संतकबीरनगर पुलिस ने जीएसटी के माध्यम से बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने वाले दो इनामिया आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। एसपी संदीप कुमार मीना के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में मेंहदावल एसओ राकेश कुमार सिंह और प्रभारी निरीक्षक जयप्रकाश दूबे के नेतृत्व में गठित टीम ने सौरभ अग्रवाल उर्फ सन्नी और अजीत कुमार को दिल्ली के हरिनगर क्लॉक टावर क्षेत्र से दो मोबाइल के साथ पकड़ा। ये दोनों आरोपी खलीलाबाद थाने में दर्ज एक मुकदमे में वांछित थे, जिसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और आईटी एक्ट सहित जीएसटी एक्ट की विभिन्न धाराएं शामिल हैं। घटना का संक्षिप्त विवरण यह है कि दिनांक 03.07.2025 को राज्य कर खंड-1 संतकबीरनगर के सहायक आयुक्त अरविंद कुमार ने खलीलाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, सर्व श्री यादव इंटरप्राइजेज नामक फर्म ने बिना किसी वास्तविक खरीद के फर्जी चालानों के माध्यम से बिक्री घोषित की और मई 2025 के जीएसटी रिटर्न में ₹18,96,53,679 और ₹18,96,80,190 का बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम किया। इसके अतिरिक्त, अभियुक्तों ने गुरुग्राम की श्री अल्फा इंटरप्राइजेज और दिल्ली की सर्व श्री राधे इंटरप्राइजेज सहित कुल दो फर्मों के माध्यम से भी धोखाधड़ी और जालसाजी कर सरकार को भारी राजस्व का नुकसान पहुंचाया। इसी मामले में, पहले दिनांक 13.02.2026 को संदीप कुमार और अमन उपाध्याय नामक दो अन्य आरोपियों को भी खलीलाबाद पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर न्यायालय भेजा गया था। उनकी गिरफ्तारी और बरामदगी के आधार पर अभियोग में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 340(2), 61(2), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66सी/66डी और जीएसटी एक्ट की धारा 132 बढ़ाई गई थी। पुलिस के अनुसार, इन अभियुक्तों का अपराध करने का तरीका यह था कि वे अपने सहयोगियों के साथ मिलकर जाली और कूटरचित (फर्जी) दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकारी पोर्टल पर 'सर्व श्री यादव इंटरप्राइजेज' जैसी अस्तित्वहीन बोगस फर्में पंजीकृत कराते थे। संदीप ने सौरभ अग्रवाल के साथ सांठगांठ कर अपनी विभिन्न क्लाइंट फर्मों के लिए फर्जी बिल बनवाए। ये लोग व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए डेटा साझा करते थे। अमन लैपटॉप पर 'बीजी सॉफ्टवेयर' का उपयोग कर फर्जी प्रपत्रों के आधार पर फर्जी फर्मों का रजिस्ट्रेशन कराकर फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार करता था, जबकि संदीप इन बोगस फर्मों के जीएसटी रिटर्न (GSTR-1) दाखिल करता था। इस कागजी खेल को वास्तविक दिखाने के लिए, माल खरीदने वाली असली फर्म बोगस फर्म के बैंक खाते में पैसे भेजती थी, जिसे 'सर्कुलर ट्रेडिंग' (पैसों को कई खातों में घुमाकर) या नकद निकासी के माध्यम से वापस ले लिया जाता था। इस फर्जी खरीद को दिखाकर वास्तविक फर्में भारी-भरकम आईटीसी क्लेम कर अपनी टैक्स चोरी करती थीं। गिरफ्तार अभियुक्तों ने पूछताछ में बताया कि वे अपने साथी संदीप के साथ मिलकर जाली प्रपत्रों के आधार पर बोगस/फर्जी फर्में रजिस्टर कराते थे और इन फर्जी फर्मों से फर्जी/जाली इनवाइस/ई-वे बिल तैयार कर दूसरों की वास्तविक फर्मों/कंपनियों को बेचकर जीएसटी की चोरी करते थे। इस गिरफ्तारी में मेंहदावल एसओ राकेश कुमार सिंह, कांस्टेबल धीरेंद्र प्रताप सिंह, कांस्टेबल अनिकेश यादव सहित लखनऊ एसटीएफ के निरीक्षक शैलेंद्र कुमार, हेड कांस्टेबल बीर प्रताप, हेड कांस्टेबल अजीत कुमार सिंह, हेड कांस्टेबल सुरेश सिंह और हेड कांस्टेबल मुनेंद्र सिंह आदि पुलिस टीम शामिल रही।3
- योगी बाबा ने ताबड़तोड़ एक्शन लिया है, जिसके चलते अब किसी भी तरह की गलती की कोई गुंजाइश नहीं बची है।1
- गाँव में जनता का रोड है।2
- महाराजगंज जिले में पड़ रही भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप से जहां आम आदमी परेशान हैं, वहीं जंगल में रहने वाले बेजुबान जानवर भी अत्यधिक कठिनाई का सामना कर रहे हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए, लोगों से पुरज़ोर अपील की गई है कि वे पशु-पक्षी और अन्य जीवों की मदद के लिए आगे आएं। अनुरोध किया गया है कि यात्रा करते समय, इन बेजुबानों को कुछ खाने-पीने का सामान अवश्य उपलब्ध कराएं।1
- संतकबीरनगर पुलिस को जीएसटी कर चोरी और फर्जी बिलिंग के एक बड़े मामले में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने दिल्ली के हरिनगर क्लॉक टावर क्षेत्र से 50-50 हजार रुपये के इनामी दो वांछित आरोपियों, सौरभ अग्रवाल उर्फ सन्नी और अजीत कुमार को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से दो मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं। ये आरोपी फर्जी फर्मों के माध्यम से जाली बिल और ई-वे बिल तैयार कराकर करोड़ों रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम कराने के आरोप में फरार चल रहे थे। पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह और क्षेत्राधिकारी खलीलाबाद प्रियम राजशेखर पाण्डेय के पर्यवेक्षण में गठित टीम ने यह कार्रवाई की। राज्य कर विभाग के सहायक आयुक्त अरविन्द कुमार की तहरीर पर वर्ष 2025 में कोतवाली खलीलाबाद में एक मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच में खुलासा हुआ कि कुछ व्यक्तियों ने फर्जी फर्मों के जरिए बिना किसी वास्तविक व्यापारिक लेनदेन के करोड़ों रुपये के जाली बिल जारी किए थे। जीएसटी रिटर्न में लगभग 19 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट दर्शाकर सरकार को भारी राजस्व हानि पहुंचाई गई थी। पता चला है कि गुरुग्राम और दिल्ली स्थित फर्जी फर्मों के जरिए कागजी लेनदेन दिखाकर यह कर चोरी की जा रही थी। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने फर्जीवाड़े के तरीके का खुलासा किया। वे अपने सहयोगियों के साथ मिलकर जाली दस्तावेजों के आधार पर बोगस फर्मों का पंजीकरण कराते थे। इसके बाद, विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए जाते थे। इन दस्तावेजों को वास्तविक कंपनियों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को उपलब्ध कराया जाता था, जिससे वे फर्जी खरीद दिखाकर बड़ी मात्रा में इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठा सकें। लेनदेन को वास्तविक दर्शाने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से दस्तावेज और डेटा साझा किए जाते थे, और बैंक खातों के जरिए धनराशि का आदान-प्रदान कर उसे विभिन्न खातों में घुमाया जाता था या नकद निकाल लिया जाता था। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए जीएसटी चोरी को अंजाम दिया जा रहा था। इस मामले में पूर्व में दो अन्य आरोपियों, संदीप कुमार और अमन उपाध्याय को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जिनके खिलाफ साक्ष्य मिलने पर आईटी एक्ट और जीएसटी एक्ट की विभिन्न धाराएं भी बढ़ाई गई थीं। मेहदावल थाना पुलिस और लखनऊ एसटीएफ की संयुक्त टीम ने इस गिरफ्तारी को अंजाम दिया। पुलिस का कहना है कि मामले में अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और फर्जी जीएसटी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी।2
- सिद्धार्थनगर जिले के ड्रेनेज खंड में निविदा प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है, जहाँ ठेकेदार जयंती पांडेय समेत कई ठेकेदारों ने अधिशाषी अभियंता पर टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता बरतने और नियमों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के कारण विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। ठेकेदारों का कहना है कि जिन कार्यों के लिए नियमानुसार ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया अपनाई जानी थी, उन्हें ऑफलाइन कराने की तैयारी की गई। इसके साथ ही, निविदा की सूचना ऐसे समाचार पत्रों में प्रकाशित की गई जिनका स्थानीय स्तर पर सीमित प्रसार है, जिससे अधिकतर इच्छुक ठेकेदारों को समय पर जानकारी नहीं मिल सकी। ठेकेदारों ने यह भी आरोप लगाया है कि नियमों के अनिवार्य होने के बावजूद विभागीय कार्यालय के सूचना पट्ट पर निविदा संबंधी कोई सूचना प्रदर्शित नहीं की गई। निविदा प्रपत्रों की बिक्री को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं; इच्छुक ठेकेदारों के मुताबिक, अंतिम तिथि 1 जून तक कई प्रयासों के बावजूद उन्हें फॉर्म उपलब्ध नहीं कराए गए। इन अनियमितताओं को लेकर ठेकेदारों ने विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई है, जिसके बाद निविदा निरस्त किए जाने की चर्चा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ है, जिससे ठेकेदारों के अनुसार स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस मामले में अधिशाषी अभियंता कृपाशंकर भारती का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है। ठेकेदारों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। यदि इन आरोपों में सत्यता पाई जाती है, तो यह मामला सरकारी निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।1