आज, 22 जून, फिल्म 'घायल' की रिलीज के 35 साल पूरे हो गए हैं, जो 1990 में इसी दिन सिनेमाघरों में आई थी। दिलचस्प बात यह है कि इसी दिन आमिर खान की फिल्म 'दिल' भी रिलीज हुई थी, जैसा कि बॉक्स ऑफिस इंडिया के आंकड़ों से पुष्टि होती है, जबकि कई लोग दावा करते हैं कि दोनों फिल्में अलग-अलग हफ्ते रिलीज हुई थीं। बॉक्स ऑफिस पर दोनों ही फिल्में ब्लॉकबस्टर रहीं, हालांकि 'दिल' उस साल की नंबर वन फिल्म बनी और 'घायल' ने दूसरा स्थान हासिल किया। सैकनिल्क डॉट कॉम के अनुसार, 'घायल' का बजट ढाई करोड़ रुपये था और इसने साढ़े आठ करोड़ रुपये की कमाई की थी। 'घायल' के निर्देशक राजकुमार संतोषी, जो उन दिनों गोविंद निहलानी साहब के असिस्टेंट डायरेक्टर थे, सनी देओल को फिल्म 'अर्जुन' की शूटिंग के दौरान देखकर बहुत प्रभावित हुए थे। उन्होंने तभी ठान लिया था कि मौका मिलने पर वे सनी देओल के साथ फिल्म बनाएंगे। समय के साथ, संतोषी ने एक कहानी पर काम किया और शुरू में कमल हासन को हीरो लेने का इरादा किया, लेकिन निर्माताओं ने उन पर पैसे लगाने से मना कर दिया। बाद में मिथुन चक्रवर्ती ने भी इस कहानी में दिलचस्पी दिखाई, मगर तब तक एक फाइनेंसर संजय दत्त के साथ यह फिल्म बनाना चाहता था। संजय दत्त की व्यस्तता के कारण, राजकुमार संतोषी ने आखिरकार सनी देओल को फिल्म के लिए राजी कर लिया। फाइनेंसर सनी के साथ फिल्म बनाने को तैयार था, लेकिन एक शर्त रखी कि सनी अपनी फीस कम करें और अगर फिल्म सौ हफ्तों तक चलती है तो उन्हें एक लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा, क्योंकि सनी की पिछली कुछ फिल्मों का प्रदर्शन खास नहीं रहा था। हालांकि, संतोषी को जल्द ही पता चला कि फाइनेंसर के पास फंड्स की कमी है और उसकी पिछली फिल्म की शूटिंग रुकी हुई है। यह जानकर सनी देओल, राजकुमार संतोषी को लेकर राजस्थान पहुंचे, जहां धर्मेंद्र 'बंटवारा' फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। धर्मेंद्र ने संतोषी की कहानी सुनी और उनके नैरेशन से बहुत प्रभावित हुए। जब संतोषी ने बताया कि वह पी.एल. संतोषी के पुत्र हैं – जो कभी फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने लेखक और निर्देशक थे (उन्होंने देव आनंद की डेब्यू फिल्म 'हम एक हैं' निर्देशित की थी और अशोक कुमार की फिल्म 'झूला' के डायलॉग व स्क्रीनप्ले लिखे थे) – तो धर्मेंद्र ने उन्हें गले लगा लिया, क्योंकि धर्मेंद्र संघर्ष के दिनों में पी.एल. संतोषी से परिचित थे। इस तरह धर्मेंद्र ने राजकुमार संतोषी की कहानी पर फिल्म 'घायल' को प्रोड्यूस करने का फैसला किया। फिल्म की हीरोइन के लिए सनी देओल डिंपल कपाड़िया को चाहते थे, लेकिन धर्मेंद्र ने उनके कथित अफेयर की खबरों के चलते मना कर दिया। श्रीदेवी भी व्यस्त थीं, इसलिए आखिरकार मीनाक्षी शेषाद्री को हीरोइन चुना गया। फिल्म की शूटिंग के दौरान कुछ यादगार वाकये भी हुए। मौसमी चटर्जी, जो सनी देओल की भाभी के किरदार में थीं, सनी के अक्सर सेट पर देर से आने से नाराज़ हो गईं। एक दिन जब सनी को बहुत देर हो गई, तो मौसमी चटर्जी खुद उनके घर पहुंचीं और उन्हें डांटते हुए कहा, "तुम फिल्मों में काम करने लायक नहीं हो सनी। क्यों धरम जी का नाम खराब कर रहे हो?" मौसमी चटर्जी की इस डांट का सनी पर गहरा असर हुआ; उन्होंने माफी मांगी और फिर कभी देर नहीं की। हालांकि, बाद में मौसमी चटर्जी का देओल परिवार से कुछ विवाद हो गया था, जिसके चलते उन्हें 'घायल' की सक्सेस पार्टी में आमंत्रित नहीं किया गया था, और उन्होंने इस पर अपनी नाराजगी भी जताई थी। फिल्म के कुछ एक्शन सीक्वेंस भी काफी खतरनाक थे; एक ट्रक चेज़ सीन में सनी देओल ने खुद ही स्टंट किया, जब ट्रक और उनके बीच बहुत कम फासला था और सड़क गीली थी। धर्मेंद्र ने यह देखकर निर्देशक और स्टंट कोऑर्डिनेटर पर गुस्सा भी किया था। क्लाइमैक्स का ऊंचे झूले से कूदने वाला स्टंट एक्शन मास्टर भीखू वर्मा ने करने से मना कर दिया था, जिसे उनके भाई और एसोसिएट स्टंट कोऑर्डिनेटर टीनू वर्मा ने किया। टीनू इस सीन को करते समय सेफ्टी बॉक्स के किनारे गिरे और बाल-बाल बचे। क्लाइमैक्स में सनी देओल अपने किरदार में इतने खो गए थे कि उन्होंने अमरीश पुरी जी की गर्दन इतनी जोर से पकड़ी कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी, जिसके लिए सनी ने बाद में अमरीश पुरी जी से बहुत माफी मांगी थी। आज अमरीश पुरी जी का जन्मदिवस भी है, वे 1932 में आज ही के दिन जन्मे थे। यह भी बताया गया है कि 1987 में विंदू दारा सिंह और मोहम्मद मोरानी वी.एम. फिल्म्स के बैनर तले 'घायल' नाम की एक फिल्म प्रोड्यूस करने वाले थे, जिसमें सनी देओल को ही हीरो लिया गया था। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल संगीत दे रहे थे, सलीम खान ने कहानी लिखी थी, और महेश भट्ट निर्देशन करने वाले थे, लेकिन कुछ कारणों से वह फिल्म बंद हो गई थी। 'घायल' को कई महत्वपूर्ण पुरस्कार मिले थे। इसे सर्वश्रेष्ठ फिल्म का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला, जिसे धर्मेंद्र ने प्राप्त किया। सनी देओल को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, राजकुमार संतोषी को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और सर्वश्रेष्ठ कहानी, वी.एन. मायेकर को सर्वश्रेष्ठ एडिटर, राजन कोठारी को सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफर और नितिश रॉय को सर्वश्रेष्ठ आर्ट डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। 36वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में 'घायल' को सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म प्रोवाइडिंग होलसम एंटरटेनमेंट का अवॉर्ड मिला, जिसे धर्मेंद्र जी ने लिया, और सनी देओल को स्पेशल ज्यूरी अवॉर्ड से नवाजा गया। वहीं, 'घायल' के साथ रिलीज हुई फिल्म 'दिल' को केवल एक अवॉर्ड मिला, जो माधुरी दीक्षित को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए दिया गया था।
आज, 22 जून, फिल्म 'घायल' की रिलीज के 35 साल पूरे हो गए हैं, जो 1990 में इसी दिन सिनेमाघरों में आई थी। दिलचस्प बात यह है कि इसी दिन आमिर खान की फिल्म 'दिल' भी रिलीज हुई थी, जैसा कि बॉक्स ऑफिस इंडिया के आंकड़ों से पुष्टि होती है, जबकि कई लोग दावा करते हैं कि दोनों फिल्में अलग-अलग हफ्ते रिलीज हुई थीं। बॉक्स ऑफिस पर दोनों ही फिल्में ब्लॉकबस्टर रहीं, हालांकि 'दिल' उस साल की नंबर वन फिल्म बनी और 'घायल' ने दूसरा स्थान हासिल किया। सैकनिल्क डॉट कॉम के अनुसार, 'घायल' का बजट ढाई करोड़ रुपये था और इसने साढ़े आठ करोड़ रुपये की कमाई की थी। 'घायल' के निर्देशक राजकुमार संतोषी, जो उन दिनों गोविंद निहलानी साहब के असिस्टेंट डायरेक्टर थे, सनी देओल को फिल्म 'अर्जुन' की शूटिंग के दौरान देखकर बहुत प्रभावित हुए थे। उन्होंने तभी ठान लिया था कि मौका मिलने पर वे सनी देओल के साथ फिल्म बनाएंगे। समय के साथ, संतोषी ने एक कहानी पर काम किया और शुरू में कमल हासन को हीरो लेने का इरादा किया, लेकिन निर्माताओं ने उन पर पैसे लगाने से मना कर दिया। बाद में मिथुन चक्रवर्ती ने भी इस कहानी में दिलचस्पी दिखाई, मगर तब तक एक फाइनेंसर संजय दत्त के साथ यह फिल्म बनाना चाहता था। संजय दत्त की व्यस्तता के कारण, राजकुमार संतोषी ने आखिरकार सनी देओल को फिल्म के लिए राजी कर लिया। फाइनेंसर सनी के साथ फिल्म बनाने को तैयार था, लेकिन एक शर्त रखी कि सनी अपनी फीस कम करें और अगर फिल्म सौ हफ्तों तक चलती है तो उन्हें एक लाख रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा, क्योंकि सनी की पिछली कुछ फिल्मों का प्रदर्शन खास नहीं रहा था। हालांकि, संतोषी को जल्द ही पता चला कि फाइनेंसर के पास फंड्स की कमी है और उसकी पिछली फिल्म की शूटिंग रुकी हुई है। यह जानकर सनी देओल, राजकुमार संतोषी को लेकर राजस्थान पहुंचे, जहां धर्मेंद्र 'बंटवारा' फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। धर्मेंद्र ने संतोषी की कहानी सुनी और उनके नैरेशन से बहुत प्रभावित हुए। जब संतोषी ने बताया कि वह पी.एल. संतोषी के पुत्र हैं – जो कभी फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने लेखक और निर्देशक थे (उन्होंने देव आनंद की डेब्यू फिल्म 'हम एक हैं' निर्देशित की थी और अशोक कुमार की फिल्म 'झूला' के डायलॉग व स्क्रीनप्ले लिखे थे) – तो धर्मेंद्र ने उन्हें गले लगा लिया, क्योंकि धर्मेंद्र संघर्ष के दिनों में पी.एल. संतोषी से परिचित थे। इस तरह धर्मेंद्र ने राजकुमार संतोषी की कहानी पर फिल्म 'घायल' को प्रोड्यूस करने का फैसला किया। फिल्म की हीरोइन के लिए सनी देओल डिंपल कपाड़िया को चाहते थे, लेकिन धर्मेंद्र ने उनके कथित अफेयर की खबरों के चलते मना कर दिया। श्रीदेवी भी व्यस्त थीं, इसलिए आखिरकार मीनाक्षी शेषाद्री को हीरोइन चुना गया। फिल्म की शूटिंग के दौरान कुछ यादगार वाकये भी हुए। मौसमी चटर्जी, जो सनी देओल की भाभी के किरदार में थीं, सनी के अक्सर सेट पर देर से आने से नाराज़ हो गईं। एक दिन जब सनी को बहुत देर हो गई, तो मौसमी चटर्जी खुद उनके घर पहुंचीं और उन्हें डांटते हुए कहा, "तुम फिल्मों में काम करने लायक नहीं हो सनी। क्यों धरम जी का नाम खराब कर रहे हो?" मौसमी चटर्जी की इस डांट का सनी पर गहरा असर हुआ; उन्होंने माफी मांगी और फिर कभी देर नहीं की। हालांकि, बाद में मौसमी चटर्जी का देओल परिवार से कुछ विवाद हो गया था, जिसके चलते उन्हें 'घायल' की सक्सेस पार्टी में आमंत्रित नहीं किया गया था, और उन्होंने इस पर अपनी नाराजगी भी जताई थी। फिल्म के कुछ एक्शन सीक्वेंस भी काफी खतरनाक थे; एक ट्रक चेज़ सीन में सनी देओल ने खुद ही स्टंट किया, जब ट्रक और उनके बीच बहुत कम फासला था और सड़क गीली थी। धर्मेंद्र ने यह देखकर निर्देशक और स्टंट कोऑर्डिनेटर पर गुस्सा भी किया था। क्लाइमैक्स का ऊंचे झूले से कूदने वाला स्टंट एक्शन मास्टर भीखू वर्मा ने करने से मना कर दिया था, जिसे उनके भाई और एसोसिएट स्टंट कोऑर्डिनेटर टीनू वर्मा ने किया। टीनू इस सीन को करते समय सेफ्टी बॉक्स के किनारे गिरे और बाल-बाल बचे। क्लाइमैक्स में सनी देओल अपने किरदार में इतने खो गए थे कि उन्होंने अमरीश पुरी जी की गर्दन इतनी जोर से पकड़ी कि उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी, जिसके लिए सनी ने बाद में अमरीश पुरी जी से बहुत माफी मांगी थी। आज अमरीश पुरी जी का जन्मदिवस भी है, वे 1932 में आज ही के दिन जन्मे थे। यह भी बताया गया है कि 1987 में विंदू दारा सिंह और मोहम्मद मोरानी वी.एम. फिल्म्स के बैनर तले 'घायल' नाम की एक फिल्म प्रोड्यूस करने वाले थे, जिसमें सनी देओल को ही हीरो लिया गया था। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल संगीत दे रहे थे, सलीम खान ने कहानी लिखी थी, और महेश भट्ट निर्देशन करने वाले थे, लेकिन कुछ कारणों से वह फिल्म बंद हो गई थी। 'घायल' को कई महत्वपूर्ण पुरस्कार मिले थे। इसे सर्वश्रेष्ठ फिल्म का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला, जिसे धर्मेंद्र ने प्राप्त किया। सनी देओल को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, राजकुमार संतोषी को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और सर्वश्रेष्ठ कहानी, वी.एन. मायेकर को सर्वश्रेष्ठ एडिटर, राजन कोठारी को सर्वश्रेष्ठ सिनेमैटोग्राफर और नितिश रॉय को सर्वश्रेष्ठ आर्ट डायरेक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। 36वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में 'घायल' को सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म प्रोवाइडिंग होलसम एंटरटेनमेंट का अवॉर्ड मिला, जिसे धर्मेंद्र जी ने लिया, और सनी देओल को स्पेशल ज्यूरी अवॉर्ड से नवाजा गया। वहीं, 'घायल' के साथ रिलीज हुई फिल्म 'दिल' को केवल एक अवॉर्ड मिला, जो माधुरी दीक्षित को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए दिया गया था।
- बरहरवा-फरक्का मुख्य पथ पर एक भीषण बाइक दुर्घटना में तीन लोगों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई, जबकि एक पांच वर्षीय बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। यह हादसा बरारी पंचायत भवन के पास एक मोड़ पर हुआ जब एक बाइक और ट्रक के बीच टक्कर हो गई। जानकारी के अनुसार, बरहरवा थाना क्षेत्र के साहेबडंगा गांव निवासी बदरुल शेख के पुत्र इस्माइल शेख (22 वर्ष) अपनी मां आएशा बीबी (45 वर्ष), बेटी रुली खातून (18 वर्ष) और पांच वर्षीय बेटी मर्जिया खातून के साथ पश्चिम बंगाल के धुलियान गए थे। वे रुली खातून को डॉक्टर दिखाने के बाद शाम लगभग चार बजे अपनी स्प्लेंडर बाइक (पंजीकरण संख्या JH18P 3323) से घर लौट रहे थे, तभी ट्रक संख्या JH 16 H 0025 की चपेट में आ गए। इस दुर्घटना में आएशा बीबी, रुली खातून और इस्माइल शेख की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, घायल मर्जिया खातून को प्राथमिक उपचार के लिए बरहरवा सीएचसी ले जाया गया। घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने बरहरवा-फरक्का मुख्य पथ को जाम कर दिया। सूचना मिलने पर बरहरवा थाना प्रभारी सुमित कुमार सिंह, एसआई अनिल यादव, रंजय यादव और राजनाथ साव दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आक्रोशित ग्रामीणों को समझा-बुझाकर सड़क जाम समाप्त कराया। थाना प्रभारी सुमित कुमार सिंह ने बताया कि शवों को कब्जे में ले लिया गया है और ट्रक को जब्त कर विधिवत कार्यवाही के तहत मामले की छानबीन की जा रही है।3
- साहिबगंज जिला के बरहरवा प्रखंड स्थित बरारी पंचायत के पास एक दर्दनाक घटना घटी है।1
- बरहरवा-फरक्का मुख्य पथ (एनएच-80) पर बरारी गांव के समीप सोमवार को एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। यह दुर्घटना उस वक्त हुई जब बाइक सवार मां, बेटा और बहन 18 चक्का ट्रेलर की चपेट में आ गए, जिससे उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। इस हादसे में चार वर्षीय एक बच्ची भी गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मृत व्यक्तियों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस फिलहाल इस सड़क दुर्घटना की गहन जांच में जुटी हुई है।1
- झारखंड के दुमका जिले के धोबना गाँव में कुदरत के कहर और चोरों के दुस्साहस के कारण अंधेरा छा गया है। गाँव में यह स्थिति प्राकृतिक प्रकोप और चोरों के दुस्साहसिक कृत्यों के फलस्वरूप उत्पन्न हुई है।1
- दुमका जिले के रानेश्वर प्रखंड स्थित रंगालिया पंचायत के पलासपाड़ा से पाथरचाल गांव जाने वाले रास्ते पर राज्यसभा सांसद निधि से बने गार्डवाल के निर्माण में गंभीर अनियमितता का आरोप लगा है। हाल ही में बने इस गार्डवाल में कई जगहों पर दरारें आ गई हैं, जिससे इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह गार्डवाल राज्यसभा सांसद शिबू सोरेन की निधि से ₹2,51,000 की लागत से बनाया गया था, जिसका योजना संख्या 268/2025-26 है। निर्माण कार्य की एजेंसी जिला अभियंता, जिला परिषद दुमका है। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह गार्डवाल मात्र 2-3 महीने पहले ही बनाया गया था। निरीक्षण के दौरान देखा गया कि नवनिर्मित गार्डवाल में कई स्थानों पर दरारें आ चुकी हैं। गार्डवाल के किनारे मिट्टी की भराई नहीं की गई है, जिससे पथ और गार्डवाल के बीच खाली जगह बनी हुई है, जो दुर्घटना का कारण बन सकती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गार्डवाल निर्माण के समय नींव पर बेड ढलाई नहीं की गई थी और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। साथ ही, गार्डवाल की ऊँचाई भी मापदंड के अनुसार नहीं है और इसे अनुपयोगी जगह पर बनाया गया है। आरोप है कि गार्डवाल कार्य में लकड़ाघाटी गांव का एक मुंशी किस्म का व्यक्ति बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था, जिसने अपने हित साधने के लिए नियमों की अनदेखी करते हुए काम को जैसे-तैसे अंजाम दिया। इन गंभीर अनियमितताओं को लेकर विभागीय कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।1
- पूरे देश में आग सुरक्षा को लेकर एक गंभीर स्थिति बनी हुई है, जहाँ प्रशासन को किसी इमारत में आग लगने के बाद ही यह याद आता है कि उस भवन के पास आवश्यक NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं था। यह दर्शाता है कि सुरक्षा और नियमों के पालन के मामले में, हर जगह सब कुछ 'भगवान भरोसे' ही चल रहा है, और समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं।1
- झारखंड के बड़ा तालबोना गांव में एक अनोखे बच्चे ने अपनी असाधारण क्षमता का प्रदर्शन करते हुए सभी को चौंका दिया। इस बच्चे ने दीवार पर चढ़कर एक हैरतअंगेज करतब दिखाया, जिसे देखकर लोग आश्चर्यचकित रह गए। यह अनोखा प्रदर्शन गांव में चर्चा का विषय बन गया है।3
- उत्तर प्रदेश के लखनऊ के अलीगंज में एक कोचिंग में आग लगने की घटना के बाद घटनास्थल पर जबरदस्त बैरिकेडिंग कर दी गई है। इस अग्निकांड के मद्देनजर पत्रकारों को भी कोचिंग से लगभग 150 मीटर की दूरी पर रोक दिया गया है, और किसी भी तरह के सवालों के जवाब देने से हर कोई बच रहा है। यह घटना एक तीन मंजिला बिल्डिंग में हुई थी, और अभी भी चारों तरफ एम्बुलेंस खड़ी हुई हैं।1