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माननीय केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर जी के छत्तीसगढ़ आगमन पर आज रायपुर स्थित पहुना अतिथि गृह में उनसे सौजन्य भेंट की। इस दौरान महिला एवं बाल विकास से जुड़े विभिन्न जनकल्याणकारी विषयों पर सकारात्मक चर्चा हुई तथा प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण हेतु संचालित योजनाओं को और प्रभावी बनाने पर विचार साझा किए। इस अवसर पर राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा जी उपस्थित रही। Savitri Thakur

1 hr ago
user_Shivnath bagheL
Shivnath bagheL
Newspaper publisher सूरजपुर, सूरजपुर, छत्तीसगढ़•
1 hr ago
37882cad-127a-4df2-9a83-db97339d7c78
0948bcc9-e45f-4edc-bc30-2a573fc9734b

माननीय केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर जी के छत्तीसगढ़ आगमन पर आज रायपुर स्थित पहुना अतिथि गृह में उनसे सौजन्य भेंट की। इस दौरान महिला एवं बाल विकास से जुड़े विभिन्न जनकल्याणकारी विषयों पर सकारात्मक चर्चा हुई तथा प्रदेश में महिलाओं और बच्चों के सशक्तिकरण हेतु संचालित योजनाओं को और प्रभावी बनाने पर विचार साझा किए। इस अवसर पर राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा जी उपस्थित रही। Savitri Thakur

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  • Gram panchayat kraiya vikaskhand ambikapur k anganbadi karyakarta anganbadi ki samshya kahte..khas report himanshu raj md news vice buero chief ambikapur dist.surguja cg.7805838076.
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    Gram panchayat kraiya vikaskhand ambikapur k anganbadi karyakarta anganbadi ki samshya kahte..khas report himanshu raj md news vice buero chief ambikapur dist.surguja cg.7805838076.
    user_Himanshu raj
    Himanshu raj
    Social Media Manager अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    9 hrs ago
  • CM साय पहुंचे कोरिया महोत्सव में अपने हाथों से बनाया दिया
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    CM साय पहुंचे कोरिया महोत्सव में अपने हाथों से बनाया दिया
    user_Sawan kumar
    Sawan kumar
    पत्रकार चिरमिरी, मनेन्द्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर, छत्तीसगढ़•
    17 hrs ago
  • Banaras mein jitne bhi Ghat hai sabka Darshan kar lo dost log,,
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    Banaras mein  jitne bhi Ghat hai sabka Darshan kar lo dost log,,
    user_Dhanesh yadav
    Dhanesh yadav
    मैनपाट, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    24 min ago
  • औरतें बोलना नहीं भूलतीं, उन्हें चुप रहना सिखाया जाता है। धीरे-धीरे, प्यार के नाम पर, इज़्ज़त के नाम पर, और “घर की बात है” कहकर। औरतें जब पहली बार चुप होती हैं, तो कोई नहीं सुनता। जब दूसरी बार चुप होती हैं, तो सब आदत डाल लेते हैं। और जब हमेशा के लिए चुप हो जाती हैं, तो लोग कहते हैं— “बहुत सहनशील थी।” औरतें दर्द नहीं बतातीं, वे काम पूरा करती हैं। बुखार में भी रोटी गोल रहती है, आँसू नमक में घुल जाते हैं। उनके घाव डायरी में नहीं, रसोई के कोनों में छुपे होते हैं। औरतें अपने सपनों को कभी पूरा नहीं छोड़तीं, वे उन्हें धीरे-धीरे छोटा करती जाती हैं बच्चों की कॉपी में, पति की थकान में, और समाज की सुविधाओं में। औरतें जब बोलना चाहती हैं, तो पहले अपने शब्दों से माफी माँगती हैं। “शायद मेरी गलती हो…” “मैं ज़्यादा सोच रही हूँ…” “छोड़िए, रहने दीजिए…” उनके वाक्य हमेशा आधे क्यों रह जाते हैं? औरतें हँसती हैं, क्योंकि रोना महँगा पड़ता है। वे जानती हैं हर सवाल उनके चरित्र से शुरू होगा, और हर जवाब उन्हीं पर खत्म। औरतें घर बदलती हैं, नाम बदलती हैं, रिश्ते बदलती हैं लेकिन अपनी चुप्पी साथ ले जाती हैं। मायके से ससुराल तक एक ही आवाज़ सिखाई जाती है धीमी… संयमित… ज़रूरत से कम। औरतें जब बहुत थक जाती हैं, तो बीमार नहीं पड़तीं, वे खामोश पड़ती हैं। और यह खामोशी सबसे ज़्यादा खतरनाक होती है। औरतें जो बोल नहीं पातीं, वे बहुत कुछ लिख देती हैं— अपने शरीर पर, अपनी आँखों में, और अपने बच्चों के भविष्य में। वे क्रांति नहीं करतीं, वे ज़िंदगी चलाती हैं। और शायद इस दुनिया की सबसे बड़ी अदृश्य ताक़त वही हैं— जो कुछ नहीं कहतीं, लेकिन सब कुछ सहती हैं। अगर आप किसी औरत की चुप्पी सुन रहे हैं, तो समझिए— वह कुछ कह रही है। बस आपको सुनना सीखना होगा। अभी आप सुन रहे थे सुनील गुप्ता की कविता
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    औरतें
बोलना नहीं भूलतीं,
उन्हें
चुप रहना
सिखाया जाता है।
धीरे-धीरे,
प्यार के नाम पर,
इज़्ज़त के नाम पर,
और
“घर की बात है”
कहकर।
औरतें
जब पहली बार
चुप होती हैं,
तो
कोई नहीं सुनता।
जब दूसरी बार
चुप होती हैं,
तो
सब आदत डाल लेते हैं।
और
जब हमेशा के लिए
चुप हो जाती हैं,
तो
लोग कहते हैं—
“बहुत सहनशील थी।”
औरतें
दर्द नहीं बतातीं,
वे
काम पूरा करती हैं।
बुखार में भी
रोटी गोल रहती है,
आँसू
नमक में घुल जाते हैं।
उनके घाव
डायरी में नहीं,
रसोई के कोनों में
छुपे होते हैं।
औरतें
अपने सपनों को
कभी
पूरा नहीं छोड़तीं,
वे
उन्हें
धीरे-धीरे
छोटा करती जाती हैं
बच्चों की कॉपी में,
पति की थकान में,
और
समाज की सुविधाओं में।
औरतें
जब बोलना चाहती हैं,
तो
पहले अपने शब्दों से
माफी माँगती हैं।
“शायद मेरी गलती हो…”
“मैं ज़्यादा सोच रही हूँ…”
“छोड़िए, रहने दीजिए…”
उनके वाक्य
हमेशा
आधे क्यों रह जाते हैं?
औरतें
हँसती हैं,
क्योंकि
रोना महँगा पड़ता है।
वे जानती हैं
हर सवाल
उनके चरित्र से शुरू होगा,
और
हर जवाब
उन्हीं पर खत्म।
औरतें
घर बदलती हैं,
नाम बदलती हैं,
रिश्ते बदलती हैं
लेकिन
अपनी चुप्पी
साथ ले जाती हैं।
मायके से ससुराल तक
एक ही आवाज़
सिखाई जाती है
धीमी…
संयमित…
ज़रूरत से कम।
औरतें
जब बहुत थक जाती हैं,
तो
बीमार नहीं पड़तीं,
वे
खामोश पड़ती हैं।
और
यह खामोशी
सबसे ज़्यादा
खतरनाक होती है।
औरतें
जो बोल नहीं पातीं,
वे
बहुत कुछ
लिख देती हैं—
अपने शरीर पर,
अपनी आँखों में,
और
अपने बच्चों के भविष्य में।
वे
क्रांति नहीं करतीं,
वे
ज़िंदगी चलाती हैं।
और
शायद
इस दुनिया की
सबसे बड़ी
अदृश्य ताक़त
वही हैं—
जो
कुछ नहीं कहतीं,
लेकिन
सब कुछ
सहती हैं।
अगर आप
किसी औरत की
चुप्पी सुन रहे हैं,
तो
समझिए—
वह
कुछ कह रही है।
बस
आपको
सुनना सीखना होगा।
अभी आप सुन रहे थे सुनील गुप्ता की कविता
    user_Sunil Gupta
    Sunil Gupta
    पत्रकार सीतापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    2 min ago
  • Post by विवेक टेंट एंड साउंड बगीचा
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    Post by विवेक टेंट एंड साउंड बगीचा
    user_विवेक टेंट एंड साउंड बगीचा
    विवेक टेंट एंड साउंड बगीचा
    Tent House Supplier बगीचा, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    1 hr ago
  • दिन प्रतिदिन ठगी सामने आ रही हैं की लोग कलेक्टर बन कर लोगों को ठग कर पैसा लिए जा रहे है आखिर ऐसे क्यू
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    दिन प्रतिदिन ठगी सामने आ रही हैं की लोग कलेक्टर बन कर लोगों को ठग कर पैसा लिए जा रहे है आखिर ऐसे क्यू
    user_हमर जशपुर
    हमर जशपुर
    Bagicha, Jashpur•
    8 hrs ago
  • हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शिक्षकों पर VSK ऐप का दबाव गलत, दंडात्मक कार्रवाई और अनिवार्यता पर लगाई ‘अंतरिम रोक’ छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और निगरानी के लिए लागू किए गए ‘VSK ऐप’ को लेकर चल रहे विवाद में बिलासपुर उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी शिक्षक को उसकी इच्छा के विरुद्ध व्यक्तिगत मोबाइल फोन पर थर्ड-पार्टी ऐप इंस्टॉल करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। जस्टिस एन.के. चंद्रवंशी की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता शिक्षक के खिलाफ किसी भी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। ​निजी संपत्ति और निजता का अधिकार प्रमुख आधार यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब शिक्षक कमलेश सिंह बिसेन ने सरकार के उस फरमान को चुनौती दी, जिसमें शिक्षकों के निजी मोबाइल को शासकीय कार्य के लिए उपयोग करना अनिवार्य कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने स्वयं कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए दो टूक कहा कि शिक्षकों का व्यक्तिगत मोबाइल उनकी निजी संपत्ति है, जिसे सरकार बिना सहमति के ‘ऑफिसियल टूल’ की तरह इस्तेमाल नहीं कर सकती। साथ ही, थर्ड-पार्टी ऐप से डेटा सुरक्षा और व्यक्तिगत निजता (Privacy) के उल्लंघन का गंभीर खतरा बना रहता है। ​सरकार से दो सप्ताह में मांगा जवाब हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों को प्रथम दृष्टया स्वीकार करते हुए राज्य शासन को नोटिस जारी कर 14 दिनों के भीतर विस्तृत हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि मामले की अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता को ऐप डाउनलोड करने के लिए बाध्य न किया जाए और न ही इस आधार पर उसके वेतन या सेवा रिकॉर्ड पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डाला जाए। ​डिजिटल प्रशासन के दौर में मील का पत्थर कानूनी गलियारों में इस आदेश को डिजिटल प्रशासन और कर्मचारी अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार किसी ऐप को अनिवार्य करना चाहती है, तो उसे संसाधन (मोबाइल और डेटा) भी स्वयं उपलब्ध कराने चाहिए। फिलहाल यह राहत तकनीकी रूप से याचिकाकर्ता तक सीमित है, लेकिन आने वाली सुनवाई में होने वाला फैसला प्रदेश के हजारों शिक्षकों के भविष्य और कार्यप्रणाली की दिशा तय करेगा।
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    हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शिक्षकों पर VSK ऐप का दबाव गलत, दंडात्मक कार्रवाई और अनिवार्यता पर लगाई ‘अंतरिम रोक’
छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और निगरानी के लिए लागू किए गए ‘VSK ऐप’ को लेकर चल रहे विवाद में बिलासपुर उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी भी शिक्षक को उसकी इच्छा के विरुद्ध व्यक्तिगत मोबाइल फोन पर थर्ड-पार्टी ऐप इंस्टॉल करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। जस्टिस एन.के. चंद्रवंशी की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता शिक्षक के खिलाफ किसी भी तरह की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है।
​निजी संपत्ति और निजता का अधिकार प्रमुख आधार
यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब शिक्षक कमलेश सिंह बिसेन ने सरकार के उस फरमान को चुनौती दी, जिसमें शिक्षकों के निजी मोबाइल को शासकीय कार्य के लिए उपयोग करना अनिवार्य कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने स्वयं कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए दो टूक कहा कि शिक्षकों का व्यक्तिगत मोबाइल उनकी निजी संपत्ति है, जिसे सरकार बिना सहमति के ‘ऑफिसियल टूल’ की तरह इस्तेमाल नहीं कर सकती। साथ ही, थर्ड-पार्टी ऐप से डेटा सुरक्षा और व्यक्तिगत निजता (Privacy) के उल्लंघन का गंभीर खतरा बना रहता है।
​सरकार से दो सप्ताह में मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों को प्रथम दृष्टया स्वीकार करते हुए राज्य शासन को नोटिस जारी कर 14 दिनों के भीतर विस्तृत हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि मामले की अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता को ऐप डाउनलोड करने के लिए बाध्य न किया जाए और न ही इस आधार पर उसके वेतन या सेवा रिकॉर्ड पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डाला जाए।
​डिजिटल प्रशासन के दौर में मील का पत्थर
कानूनी गलियारों में इस आदेश को डिजिटल प्रशासन और कर्मचारी अधिकारों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार किसी ऐप को अनिवार्य करना चाहती है, तो उसे संसाधन (मोबाइल और डेटा) भी स्वयं उपलब्ध कराने चाहिए। फिलहाल यह राहत तकनीकी रूप से याचिकाकर्ता तक सीमित है, लेकिन आने वाली सुनवाई में होने वाला फैसला प्रदेश के हजारों शिक्षकों के भविष्य और कार्यप्रणाली की दिशा तय करेगा।
    user_Jarif Khan
    Jarif Khan
    Journalist सीतापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़•
    14 hrs ago
  • गांव के सरपंच उपसरपंच और चुने हुए पंच गण अवस्था जांच की बच्चो को किस तरह से भोजन की सुविधा दी जा रही हैं
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    गांव के सरपंच उपसरपंच और चुने हुए पंच गण अवस्था जांच की बच्चो को किस तरह से भोजन की सुविधा दी जा रही हैं
    user_हमर जशपुर
    हमर जशपुर
    Bagicha, Jashpur•
    11 hrs ago
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