logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

हनुमान जयंती: चिरंजीवी महावीरों के प्राकट्य दिवस पर 'अल्पज्ञानियों' के तर्कों का शास्त्र-सम्मत खंडन ​जैसे-जैसे चैत्र पूर्णिमा यानी हनुमान जयंती का पावन पर्व समीप आता है, वैसे ही सोशल मीडिया और समाज में 'कलियुगी महाज्ञानियों' की एक नई फसल उग आती है। ये वे तथाकथित बुद्धिजीवी हैं जो बिना किसी शास्त्र या पुराण का अध्ययन किए, बड़े आत्मविश्वास के साथ ज्ञान बांटते हैं कि— "हनुमान जयंती मत कहिए, हनुमान जन्मोत्सव कहिए, क्योंकि जयंती तो मरे हुए लोगों की मनाई जाती है और हनुमान जी तो जीवित हैं।" अल्पज्ञान से उपजा यह तर्क न केवल हमारी समृद्ध संस्कृत भाषा का अपमान है, बल्कि सनातन धर्म के शास्त्रों और पुराणों के प्रति घोर अज्ञानता का भी प्रतीक है। आइए, इन 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के ज्ञानियों' के गाल पर शास्त्रों और पुराणों का प्रमाण सहित एक वैचारिक तमाचा जड़ते हैं और समझते हैं कि 'जयंती' का वास्तविक और विराट अर्थ क्या है। ​'जयन्ती मङ्गला काली...' - क्या देवी मृत हैं? मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत श्री दुर्गा सप्तशती में माँ भगवती की स्तुति करते हुए सबसे प्रसिद्ध मंत्र पढ़ा जाता है: ​जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥ ​इस मंत्र में आदि शक्ति का पहला नाम ही 'जयन्ती' (जयंती) है। 'जयंती' का अर्थ है— वह जो संपूर्ण चराचर जगत को जीत लेने वाली है, जो सर्वोत्कृष्ट है और जिसकी विजय निश्चित है। क्या कोई अज्ञानी यह कहने का दुस्साहस करेगा कि माँ दुर्गा मृत हैं, इसलिए उनका नाम जयंती है? जयंती तो स्वयं शाश्वत शक्ति का पर्याय है। ​पुराणों में 'जयंती' का अर्थ: कोई मृत्यु नहीं, बल्कि एक शुभ योग स्कंद पुराण और भविष्य पुराण सहित कई शास्त्रों में 'जयंती' को एक अत्यंत पवित्र खगोलीय और आध्यात्मिक 'योग' (Astrological Combination) के रूप में परिभाषित किया गया है। शास्त्रों का वचन है: ​"श्रावणे बहुले पक्षे कृष्णजन्माष्टमी व्रतम्। रोहिणी सहिता चेयं जयन्तीति निगद्यते॥" अर्थात, भाद्रपद (या श्रावण अमान्त) मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि जब रोहिणी नक्षत्र से युक्त होती है, तो उस महापुण्यकारी योग को 'जयंती' कहा जाता है। इसी योग में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ था। क्या परब्रह्म श्रीकृष्ण कभी मृत्यु को प्राप्त होते हैं? नहीं! वह तो अजन्मा और शाश्वत हैं। ​चिरंजीवियों और शाश्वत सत्ताओं की होती है जयंती यदि जयंती केवल मरे हुए लोगों की होती, तो सनातन हिंदू धर्म में इन जयंतियों का क्या औचित्य रह जाता? ​हनुमान जयंती: शास्त्रों के अनुसार (अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः...) हनुमान जी अष्ट चिरंजीवियों में से एक हैं। वे अजर-अमर हैं और कलियुग में सदेह जाग्रत देव हैं। उनकी जयंती उनके उसी अमर और अजेय स्वरूप का उत्सव है। ​परशुराम जयंती: भगवान परशुराम भी चिरंजीवी हैं, फिर भी उनकी जयंती मनाई जाती है। ​ग्रंथ और नदियाँ: मार्गशीर्ष माह में हम 'गीता जयंती' मनाते हैं। वैशाख में 'गंगा जयंती' और माघ में 'नर्मदा जयंती' मनाई जाती है। नदियाँ निरंतर प्रवाहित हैं और श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान का वह अमर प्रकाश है जो कभी नष्ट नहीं हो सकता। तो क्या गीता और गंगा मृत हो गए हैं? ​यह भ्रांति फैली कैसे? स्वतंत्रता के बाद आधुनिक भारत में सरकारी कामकाज और कैलेंडरों में महापुरुषों (गांधी जयंती, अंबेडकर जयंती, महावीर जयंती) के सम्मान में इस उत्तम शब्द 'जयंती' का प्रयोग होने लगा। चूँकि ये महापुरुष अब भौतिक देह में नहीं थे, तो आम जनमानस ने अपनी सीमित समझ से यह मान लिया कि जीवित व्यक्ति का 'हैप्पी बर्थडे' या 'जन्मदिन' होता है, और मरने के बाद वह 'जयंती' बन जाती है। ​स्मरण रहे 'जयंती' का अर्थ मृत्यु से नहीं, बल्कि 'उत्कर्ष, अजेयता और शाश्वतता' से है। जो मृत्यु को जीत ले, जो समय की सीमाओं से परे हो जाए, और जिसके प्रकट होने मात्र से अंधकार पर प्रकाश की 'विजय' (जय) हो, उसी के प्राकट्य दिवस को 'जयंती' कहने का विधान है। ​इसलिए, इस बार जब कोई अल्पज्ञानी आपको 'हनुमान जयंती' के बजाय 'जन्मोत्सव' कहने का अवांछित उपदेश दे, तो उसे विनम्रतापूर्वक बताएँ कि हम साधारण मनुष्यों का जन्मदिन या जन्मोत्सव होता है; जो समय और काल के महानायक हैं, जो अजर-अमर हैं, उनकी तो केवल जयंती ही होती है!

8 hrs ago
user_शैल शक्ति
शैल शक्ति
लालकुआँ, नैनीताल, उत्तराखंड•
8 hrs ago
ed1c9bc0-4d00-47df-bf32-4ab4ccac39e7

हनुमान जयंती: चिरंजीवी महावीरों के प्राकट्य दिवस पर 'अल्पज्ञानियों' के तर्कों का शास्त्र-सम्मत खंडन ​जैसे-जैसे चैत्र पूर्णिमा यानी हनुमान जयंती का पावन पर्व समीप आता है, वैसे ही सोशल मीडिया और समाज में 'कलियुगी महाज्ञानियों' की एक नई फसल उग आती है। ये वे तथाकथित बुद्धिजीवी हैं जो बिना किसी शास्त्र या पुराण का अध्ययन किए, बड़े आत्मविश्वास के साथ ज्ञान बांटते हैं कि— "हनुमान जयंती मत कहिए, हनुमान जन्मोत्सव कहिए, क्योंकि जयंती तो मरे हुए लोगों की मनाई जाती है और हनुमान जी तो जीवित हैं।" अल्पज्ञान से उपजा यह तर्क न केवल हमारी समृद्ध संस्कृत भाषा का अपमान है, बल्कि सनातन धर्म के शास्त्रों और पुराणों के प्रति घोर अज्ञानता का भी प्रतीक है। आइए, इन 'व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के ज्ञानियों' के गाल पर शास्त्रों और पुराणों का प्रमाण सहित एक वैचारिक तमाचा जड़ते हैं और समझते हैं कि 'जयंती' का वास्तविक और विराट अर्थ क्या है। ​'जयन्ती मङ्गला काली...' - क्या देवी मृत हैं? मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत श्री दुर्गा सप्तशती में माँ भगवती की स्तुति करते हुए सबसे प्रसिद्ध मंत्र पढ़ा जाता है: ​जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥ ​इस मंत्र में आदि शक्ति का पहला नाम ही 'जयन्ती' (जयंती) है। 'जयंती' का अर्थ है— वह जो संपूर्ण चराचर जगत को जीत लेने वाली है, जो सर्वोत्कृष्ट है और जिसकी विजय निश्चित है। क्या कोई अज्ञानी यह कहने का दुस्साहस करेगा कि माँ दुर्गा मृत हैं, इसलिए उनका नाम जयंती है? जयंती तो स्वयं शाश्वत शक्ति का पर्याय है। ​पुराणों में 'जयंती' का अर्थ: कोई मृत्यु नहीं, बल्कि एक शुभ योग स्कंद पुराण और भविष्य पुराण सहित कई शास्त्रों में 'जयंती' को एक अत्यंत पवित्र खगोलीय और आध्यात्मिक 'योग' (Astrological Combination) के रूप में परिभाषित किया गया है। शास्त्रों का वचन है: ​"श्रावणे बहुले पक्षे कृष्णजन्माष्टमी व्रतम्। रोहिणी सहिता चेयं जयन्तीति निगद्यते॥" अर्थात, भाद्रपद (या श्रावण अमान्त) मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि जब रोहिणी नक्षत्र से युक्त होती है, तो उस महापुण्यकारी योग को 'जयंती' कहा जाता है। इसी योग में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ था। क्या परब्रह्म श्रीकृष्ण कभी मृत्यु को प्राप्त होते हैं? नहीं! वह तो अजन्मा और शाश्वत हैं। ​चिरंजीवियों और शाश्वत सत्ताओं की होती है जयंती यदि जयंती केवल मरे हुए लोगों की होती, तो सनातन हिंदू धर्म में इन जयंतियों का क्या औचित्य रह जाता? ​हनुमान जयंती: शास्त्रों के अनुसार (अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनुमांश्च विभीषणः...) हनुमान जी अष्ट चिरंजीवियों में से एक हैं। वे अजर-अमर हैं और कलियुग में सदेह जाग्रत देव हैं। उनकी जयंती उनके उसी अमर और अजेय स्वरूप का उत्सव है। ​परशुराम जयंती: भगवान परशुराम भी चिरंजीवी हैं, फिर भी उनकी जयंती मनाई जाती है। ​ग्रंथ और नदियाँ: मार्गशीर्ष माह में हम 'गीता जयंती' मनाते हैं। वैशाख में 'गंगा जयंती' और माघ में 'नर्मदा जयंती' मनाई जाती है। नदियाँ निरंतर प्रवाहित हैं और श्रीमद्भगवद्गीता ज्ञान का वह अमर प्रकाश है जो कभी नष्ट नहीं हो सकता। तो क्या गीता और गंगा मृत हो गए हैं? ​यह भ्रांति फैली कैसे? स्वतंत्रता के बाद आधुनिक भारत में सरकारी कामकाज और कैलेंडरों में महापुरुषों (गांधी जयंती, अंबेडकर जयंती, महावीर जयंती) के सम्मान में इस उत्तम शब्द 'जयंती' का प्रयोग होने लगा। चूँकि ये महापुरुष अब भौतिक देह में नहीं थे, तो आम जनमानस ने अपनी सीमित समझ से यह मान लिया कि जीवित व्यक्ति का 'हैप्पी बर्थडे' या 'जन्मदिन' होता है, और मरने के बाद वह 'जयंती' बन जाती है। ​स्मरण रहे 'जयंती' का अर्थ मृत्यु से नहीं, बल्कि 'उत्कर्ष, अजेयता और शाश्वतता' से है। जो मृत्यु को जीत ले, जो समय की सीमाओं से परे हो जाए, और जिसके प्रकट होने मात्र से अंधकार पर प्रकाश की 'विजय' (जय) हो, उसी के प्राकट्य दिवस को 'जयंती' कहने का विधान है। ​इसलिए, इस बार जब कोई अल्पज्ञानी आपको 'हनुमान जयंती' के बजाय 'जन्मोत्सव' कहने का अवांछित उपदेश दे, तो उसे विनम्रतापूर्वक बताएँ कि हम साधारण मनुष्यों का जन्मदिन या जन्मोत्सव होता है; जो समय और काल के महानायक हैं, जो अजर-अमर हैं, उनकी तो केवल जयंती ही होती है!

  • user_दीवानराम, नैनीताल उत्तराखंड
    दीवानराम, नैनीताल उत्तराखंड
    धारी, नैनीताल, उत्तराखंड
    जय, हो माता, अंजनी के लाल,
    3 hrs ago
More news from उत्तराखंड and nearby areas
  • Post by Jagdish Ballabh Sharma
    1
    Post by Jagdish Ballabh Sharma
    user_Jagdish Ballabh Sharma
    Jagdish Ballabh Sharma
    Teacher हल्द्वानी, नैनीताल, उत्तराखंड•
    8 hrs ago
  • कालाढूंगी चकलुवा में युवक पर जानलेवा हमला ट्रैक्टर से रोदने की कोशिश
    1
    कालाढूंगी चकलुवा में युवक पर जानलेवा हमला ट्रैक्टर से रोदने की कोशिश
    user_UTTARAKHAND SHAKTI NEWS
    UTTARAKHAND SHAKTI NEWS
    Kaladhungi, Nainital•
    1 hr ago
  • Post by 7News Live Uk
    1
    Post by 7News Live Uk
    user_7News Live Uk
    7News Live Uk
    Kaladhungi, Nainital•
    4 hrs ago
  • विडियो देखें-देश-विदेश अमेरिका vs ईरान युद्ध ईरान पर जमीनी हमला करने के लिए अमेरिका ने 17000 जवान भेजे। किसी भी कीमत पर ट्रम्प ईरान से जीतना चाहते है, क्या ये ट्रंप की गलती होगी या ईरान मानेगा हार ?
    1
    विडियो देखें-देश-विदेश 
अमेरिका vs ईरान युद्ध 
ईरान पर जमीनी हमला करने के लिए अमेरिका ने 17000 जवान भेजे।  
किसी भी कीमत पर ट्रम्प ईरान से जीतना चाहते है, 
क्या ये ट्रंप की गलती होगी या ईरान मानेगा हार ?
    user_नवीन चन्द्र आर्य
    नवीन चन्द्र आर्य
    कोसिया कुटौली, नैनीताल, उत्तराखंड•
    3 hrs ago
  • अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया की आज की सबसे बड़ी खबर यही है। नासा आज देर रात चंद्रमा पर चार इंसानों के ले जा रहा है, वीडियो में तैयारी देखिए। इस मिशन का नाम आर्टेमिस 2 मून मिशन है।
    4
    अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में दुनिया की आज की सबसे बड़ी खबर यही है। नासा आज देर रात चंद्रमा पर चार इंसानों के ले जा रहा है, वीडियो में तैयारी देखिए। इस मिशन का नाम आर्टेमिस 2 मून मिशन है।
    user_NTL
    NTL
    कोसिया कुटौली, नैनीताल, उत्तराखंड•
    4 hrs ago
  • बिलासपुर में धार्मिक स्थलों के पास प्रस्तावित देशी शराब की दुकान को लेकर लोगों ने कड़ा विरोध जताया। बाद में जिलाधिकारी को संबोधित दो अलग-अलग ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपकर शराब की दुकान को स्थानांतरित कराने की मांग की। बुधवार को पूर्व पालिकाध्यक्ष मोहम्मद हसन खां के नेतृत्व में लोग तहसील भवन पहुंचे।जहां पर उन्होंने उपजिलाधिकारी अरुण कुमार से मुलाकात कर डीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापक में कहा कि प्रस्तावित दुकान धार्मिक स्थल जैसे दो कब्रिस्तान,मजार और घनी आबादी के पास है।ऐसी जगह पर शराब की दुकान खुलना न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करेगा,बल्कि क्षेत्र के शांतिपूर्ण माहौल व सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा करेगा। जिसे तत्काल स्थानांतरित कराने की मांग की।इस मौके पर जफर सुखनैन खां,मुराद हसन खां, जैद खां,रिजवान अहमद, कप्तान खां आदि मौजूद रहे। वहीं दूसरी ओर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के नगर अध्यक्ष मोहम्मद अनस खां ने कार्यकर्ताओं के साथ तहसील पहुंचकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।जिसमें कहा कि प्रस्तावित देशी शराब की दुकान की दूरी धार्मिक स्थलों से पचास मीटर तक नहीं है।ऐसे में लोग कब्रिस्तान तथा मजार जैसे आस्था के स्थल में बढ़-चढ़कर शामिल होते हैं।क्योंकि यह लोगों की धार्मिक भावनाओं और श्रद्धा से जुड़े होते हैं। उन्होंने अधिकारियों से शराब की दुकान को जल्द हटाए वाएं की मांग की। इसके अलावा उन्होंने आवारा कुत्तों को पकड़वाएं जाने, एसबीआई शाखा के बराबर में तथा पोस्ट आफिस के सामने वक्फ बोर्ड की भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग की हैं।इस मौके पर मोहम्मद याकूब खां,माहिर खां,शुऐब सलमानी,संजीव, दिनेश, फैजान खां,रोहित,आशु खां आदि उपस्थित रहे।
    4
    बिलासपुर में धार्मिक स्थलों के पास प्रस्तावित देशी शराब की दुकान को लेकर लोगों ने कड़ा विरोध जताया। बाद में जिलाधिकारी को संबोधित दो अलग-अलग ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपकर शराब की दुकान को स्थानांतरित कराने की मांग की। 
बुधवार को पूर्व पालिकाध्यक्ष मोहम्मद हसन खां के नेतृत्व में लोग तहसील भवन पहुंचे।जहां पर उन्होंने उपजिलाधिकारी अरुण कुमार से मुलाकात कर डीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापक में कहा कि प्रस्तावित दुकान धार्मिक स्थल जैसे दो कब्रिस्तान,मजार और घनी आबादी के पास है।ऐसी जगह पर शराब की दुकान खुलना न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करेगा,बल्कि क्षेत्र के शांतिपूर्ण माहौल व सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा करेगा। जिसे तत्काल स्थानांतरित कराने की मांग की।इस मौके पर जफर सुखनैन खां,मुराद हसन खां, जैद खां,रिजवान अहमद, कप्तान खां आदि मौजूद रहे। वहीं दूसरी ओर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के नगर अध्यक्ष मोहम्मद अनस खां ने कार्यकर्ताओं के साथ तहसील पहुंचकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।जिसमें कहा कि प्रस्तावित देशी शराब की दुकान की दूरी धार्मिक स्थलों से पचास मीटर तक नहीं है।ऐसे में लोग कब्रिस्तान तथा मजार जैसे आस्था के स्थल में बढ़-चढ़कर शामिल होते हैं।क्योंकि यह लोगों की धार्मिक भावनाओं और श्रद्धा से जुड़े होते हैं। उन्होंने अधिकारियों से शराब की दुकान को जल्द हटाए वाएं की मांग की। इसके अलावा उन्होंने आवारा कुत्तों को पकड़वाएं जाने, एसबीआई शाखा के बराबर में तथा पोस्ट आफिस के सामने वक्फ बोर्ड की भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग की हैं।इस मौके पर मोहम्मद याकूब खां,माहिर खां,शुऐब सलमानी,संजीव, दिनेश, फैजान खां,रोहित,आशु खां आदि उपस्थित रहे।
    user_कामरान खांन कम्मु
    कामरान खांन कम्मु
    बिलासपुर, रामपुर, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • Post by Junaid Junaid
    1
    Post by Junaid Junaid
    user_Junaid Junaid
    Junaid Junaid
    सुआर, रामपुर, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • कालाढुंगी (चकलुवा) से बड़ी खबर कालाढुंगी क्षेत्र के चकलुवा में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक युवक पर जानलेवा हमला करने की कोशिश की गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, चकलुवा निवासी हिमांशु देवपा अपने परिजनों के साथ अपनी गाड़ी पर बैठे हुए थे, तभी अचानक एक ट्रैक्टर चालक ने उन पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि ट्रैक्टर सवार युवक ने बार-बार उन्हें कुचलने की कोशिश की। स्थिति को भांपते हुए हिमांशु देवपा ने मौके से भागकर अपनी जान बचाई। घटना के बाद आरोपी युवक मौके से फरार हो गया। यह पूरी घटना पास में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई है, जो अब पुलिस जांच का अहम हिस्सा बन चुकी है। पुलिस जांच में जुटी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपी की तलाश जारी है।
    1
    कालाढुंगी (चकलुवा) से बड़ी खबर कालाढुंगी क्षेत्र के चकलुवा में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक युवक पर जानलेवा हमला करने की कोशिश की गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, चकलुवा निवासी हिमांशु देवपा अपने परिजनों के साथ अपनी गाड़ी पर बैठे हुए थे, तभी अचानक एक ट्रैक्टर चालक ने उन पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि ट्रैक्टर सवार युवक ने बार-बार उन्हें कुचलने की कोशिश की। स्थिति को भांपते हुए हिमांशु देवपा ने मौके से भागकर अपनी जान बचाई। घटना के बाद आरोपी युवक मौके से फरार हो गया। यह पूरी घटना पास में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई है, जो अब पुलिस जांच का अहम हिस्सा बन चुकी है। पुलिस जांच में जुटी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपी की तलाश जारी है।
    user_UTTARAKHAND SHAKTI NEWS
    UTTARAKHAND SHAKTI NEWS
    Kaladhungi, Nainital•
    10 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.