मध्य प्रदेश के डिंडोरी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत रकरिया में भीषण पेयजल संकट से आक्रोशित ग्रामीण, बच्चे और महिलाएं सड़क पर उतरने को मजबूर हो गए। पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे इन लोगों ने रकरिया-चौरा-छिंदगांव मुख्य मार्ग पर खाली बर्तन रखकर चक्काजाम कर दिया, जिससे घंटों तक आवागमन बाधित रहा और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया। यह घटना सरकार के 'हर घर स्वच्छ पेयजल' पहुंचाने के दावों पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि पंचायत द्वारा 4 जून से टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन इसका लाभ पूरे गांव को नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि टैंकर अधिकतर समय सरपंच के घर के पास खड़ा रहता है, जिससे अन्य मोहल्लों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता और लोग भीषण गर्मी में प्यास से जूझने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के हैंडपंप और कुएं लगभग सूख चुके हैं, और जो थोड़े-बहुत जल स्रोत बचे हैं, उनमें भी नाममात्र का ही पानी है। लोगों को करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित कुएं से पानी लाना पड़ रहा है, जो न तो साफ है और न ही पीने योग्य, लेकिन मजबूरी में उसी से गुजारा किया जा रहा है। जब इस मामले में ग्राम पंचायत की सरपंच सुशीला बाई मरावी का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनके घर पर मौजूद बच्चों ने बताया कि सरपंच घर पर नहीं हैं, जिससे ग्रामीणों में और अधिक नाराजगी फैल गई। इस घटना ने यह बड़ा सवाल खड़ा किया है कि गर्मी के मौसम में जल संकट की आशंका पहले से होने के बावजूद पंचायत और जिम्मेदार विभागों ने समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की। करोड़ों रुपये की जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के बावजूद यदि ग्रामीणों को पानी के लिए सड़क जाम करना पड़ रहा है, तो यह केवल स्थानीय व्यवस्था की नहीं बल्कि पूरे तंत्र की विफलता को उजागर करता है। पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए महिलाओं और बच्चों का यूं सड़क पर उतरना बताता है कि योजनाओं की चमकदार रिपोर्टों और जमीनी हकीकत के बीच कितना बड़ा अंतर है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस आंदोलन को केवल एक दिन की घटना मानकर भूल जाता है या फिर रकरिया के प्यासे लोगों को स्थायी समाधान देने की दिशा में ठोस कदम उठाता है, क्योंकि “जब जनता को पानी के लिए सड़क जाम करना पड़े, तो समझ लीजिए समस्या सिर्फ पानी की नहीं, व्यवस्था की भी है।”
मध्य प्रदेश के डिंडोरी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत रकरिया में भीषण पेयजल संकट से आक्रोशित ग्रामीण, बच्चे और महिलाएं सड़क पर उतरने को मजबूर हो गए। पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे इन लोगों ने रकरिया-चौरा-छिंदगांव मुख्य मार्ग पर खाली बर्तन रखकर चक्काजाम कर दिया, जिससे घंटों तक आवागमन बाधित रहा और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया। यह घटना सरकार के 'हर घर स्वच्छ पेयजल' पहुंचाने के दावों पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि पंचायत द्वारा 4 जून से टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन इसका लाभ पूरे गांव को नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि टैंकर अधिकतर समय सरपंच के घर के पास खड़ा रहता है, जिससे अन्य मोहल्लों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच
पाता और लोग भीषण गर्मी में प्यास से जूझने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के हैंडपंप और कुएं लगभग सूख चुके हैं, और जो थोड़े-बहुत जल स्रोत बचे हैं, उनमें भी नाममात्र का ही पानी है। लोगों को करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित कुएं से पानी लाना पड़ रहा है, जो न तो साफ है और न ही पीने योग्य, लेकिन मजबूरी में उसी से गुजारा किया जा रहा है। जब इस मामले में ग्राम पंचायत की सरपंच सुशीला बाई मरावी का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनके घर पर मौजूद बच्चों ने बताया कि सरपंच घर पर नहीं हैं, जिससे ग्रामीणों में और अधिक नाराजगी फैल गई। इस घटना ने यह बड़ा सवाल खड़ा किया है कि गर्मी के मौसम में जल संकट की आशंका पहले से होने के बावजूद पंचायत और
जिम्मेदार विभागों ने समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की। करोड़ों रुपये की जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के बावजूद यदि ग्रामीणों को पानी के लिए सड़क जाम करना पड़ रहा है, तो यह केवल स्थानीय व्यवस्था की नहीं बल्कि पूरे तंत्र की विफलता को उजागर करता है। पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए महिलाओं और बच्चों का यूं सड़क पर उतरना बताता है कि योजनाओं की चमकदार रिपोर्टों और जमीनी हकीकत के बीच कितना बड़ा अंतर है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस आंदोलन को केवल एक दिन की घटना मानकर भूल जाता है या फिर रकरिया के प्यासे लोगों को स्थायी समाधान देने की दिशा में ठोस कदम उठाता है, क्योंकि “जब जनता को पानी के लिए सड़क जाम करना पड़े, तो समझ लीजिए समस्या सिर्फ पानी की नहीं, व्यवस्था की भी है।”
- डिंडोरी में पुलिस अधीक्षक आशीष खरे के निर्देश पर गाड़ासरई पुलिस ने 08 जून को अवैध शराब के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है। यह कार्रवाई मुखबिर की सूचना पर की गई। पुलिस टीम ने ग्राम कोसमडीह में घेराबंदी कर दबिश दी, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी नानु उर्फ विवेक परस्ते (26 वर्ष) के घर के पास बाड़ी में, धान के पैरा के नीचे छिपाकर रखी गई 140 लीटर अवैध अंग्रेजी शराब बरामद की गई। जब्त की गई शराब की अनुमानित कीमत लगभग 1 लाख 10 हजार रुपये आंकी गई है। पुलिस ने आरोपी को तत्काल गिरफ्तार कर आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत मामला दर्ज किया और उसे न्यायालय में पेश किया। इस सराहनीय सफलता में थाना प्रभारी अमृत कुमार तिग्गा सहित पूरी गाड़ासरई पुलिस टीम की मुख्य भूमिका रही।3
- डिंडोरी जनसुनवाई में मजियाखार संगम टोला में निवास कर रही एक बेसहारा साध्वी माता जी ने अपनी सुरक्षा को लेकर कलेक्टर से गुहार लगाई है। साध्वी माता जी ने बताया कि उन्हें असामाजिक तत्वों द्वारा लगातार सताया जा रहा है, जिसके कारण उन्होंने कलेक्टर से सुरक्षा प्रदान करने की अपील की है।3
- मध्य प्रदेश के डिंडोरी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत रकरिया में भीषण पेयजल संकट से आक्रोशित ग्रामीण, बच्चे और महिलाएं सड़क पर उतरने को मजबूर हो गए। पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझ रहे इन लोगों ने रकरिया-चौरा-छिंदगांव मुख्य मार्ग पर खाली बर्तन रखकर चक्काजाम कर दिया, जिससे घंटों तक आवागमन बाधित रहा और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया। यह घटना सरकार के 'हर घर स्वच्छ पेयजल' पहुंचाने के दावों पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि पंचायत द्वारा 4 जून से टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई थी, लेकिन इसका लाभ पूरे गांव को नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि टैंकर अधिकतर समय सरपंच के घर के पास खड़ा रहता है, जिससे अन्य मोहल्लों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता और लोग भीषण गर्मी में प्यास से जूझने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के हैंडपंप और कुएं लगभग सूख चुके हैं, और जो थोड़े-बहुत जल स्रोत बचे हैं, उनमें भी नाममात्र का ही पानी है। लोगों को करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित कुएं से पानी लाना पड़ रहा है, जो न तो साफ है और न ही पीने योग्य, लेकिन मजबूरी में उसी से गुजारा किया जा रहा है। जब इस मामले में ग्राम पंचायत की सरपंच सुशीला बाई मरावी का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उनके घर पर मौजूद बच्चों ने बताया कि सरपंच घर पर नहीं हैं, जिससे ग्रामीणों में और अधिक नाराजगी फैल गई। इस घटना ने यह बड़ा सवाल खड़ा किया है कि गर्मी के मौसम में जल संकट की आशंका पहले से होने के बावजूद पंचायत और जिम्मेदार विभागों ने समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की। करोड़ों रुपये की जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं के बावजूद यदि ग्रामीणों को पानी के लिए सड़क जाम करना पड़ रहा है, तो यह केवल स्थानीय व्यवस्था की नहीं बल्कि पूरे तंत्र की विफलता को उजागर करता है। पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए महिलाओं और बच्चों का यूं सड़क पर उतरना बताता है कि योजनाओं की चमकदार रिपोर्टों और जमीनी हकीकत के बीच कितना बड़ा अंतर है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस आंदोलन को केवल एक दिन की घटना मानकर भूल जाता है या फिर रकरिया के प्यासे लोगों को स्थायी समाधान देने की दिशा में ठोस कदम उठाता है, क्योंकि “जब जनता को पानी के लिए सड़क जाम करना पड़े, तो समझ लीजिए समस्या सिर्फ पानी की नहीं, व्यवस्था की भी है।”3
- शहडोल जिले के सीधी थाना क्षेत्र में सोमवार दोपहर करीब 3 बजे एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना ओदारी नदी नर्सरी के पास हुई, जहाँ कूदरी से सीधी जा रहा एक बाइक सवार युवक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक पेड़ से टकरा गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि युवक की जान तुरंत चली गई। पुलिस ने मृतक की पहचान तेंदुडोल निवासी 35 वर्षीय भजन सिंह के रूप में की है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल घटनास्थल पर पहुंची, जांच शुरू की, और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में दुर्घटना का कारण तेज रफ्तार को बताया गया है।2
- शहडोल जिले के रामपुर बटूरा मेगा प्रोजेक्ट क्षेत्र में संचालित जय अम्बे कंपनी के कार्यालय में घुसकर कर्मचारियों को धमकाने और फायरिंग करने का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना से पूरे क्षेत्र में भय और दहशत का माहौल है। एसईसीएल सोहागपुर के अंतर्गत रामपुर बटूरा ओसीएम में कोयला एवं ओबी उत्खनन का कार्य कर रही निजी ठेका कंपनी जय अम्बे के कार्यालय में श्रीराम विश्वकर्मा अपने साथियों पप्पू विश्वकर्मा और मिथलेश चर्मकार उर्फ लकी के साथ पहुंचे थे। कंपनी कर्मचारियों आलोक त्रिपाठी और अमन क्षत्रीय ने आरोप लगाया है कि इन तीनों आरोपियों ने देशी कट्टा दिखाकर उन्हें जान से मारने की धमकी दी और अवैध वसूली की मांग की। कर्मचारियों द्वारा विरोध करने पर आरोपियों ने कार्यालय परिसर में फायरिंग कर दी, जिससे वहाँ अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारी किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर निकल गए। पीड़ितों का कहना है कि आरोपी लंबे समय से कंपनी पर कथित रूप से गुंडा टैक्स का दबाव बना रहे थे और आए दिन काम में बाधा डालते हुए धमकियां देते थे। घटना के बाद जब कर्मचारी अमलाई थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंचे, तब भी आरोपियों ने मोबाइल पर गाली-गलौज करते हुए शिकायत वापस लेने और जान से मारने की धमकी दी। इस मामले में अमलाई थाने में शिकायत दर्ज कर ली गई है, और घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।1
- डिंडोरी जिले के रकरिया गांव में रविवार को गहराते जल संकट से परेशान ग्रामीणों ने शाहपुर-छिंदगांव मार्ग पर बर्तन रखकर चक्काजाम कर दिया। यह विरोध प्रदर्शन गांव में पानी की गंभीर कमी को लेकर था। लगभग 1900 की आबादी वाले इस गांव में कुएं और हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं है, जिससे ग्रामीणों को पीने का पानी लाने के लिए दूर जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत द्वारा स्वीकृत पानी का टैंकर गांव में नहीं आता, बल्कि सरपंच सुशीला मरावी के घर पर ही खड़ा रहता है। हालांकि, सरपंच ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि टैंकर चालक के उपलब्ध न होने के कारण देरी हुई। घटना की जानकारी मिलते ही थाना प्रभारी केवल सिंह परते मौके पर पहुंचे। उन्होंने सरपंच से बात की और शाम 4 बजे तक पानी के टैंकर की व्यवस्था करवाई, जिसके बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम समाप्त कर दिया।2
- जबलपुर-अमरकंटक नेशनल हाईवे NH45 पर एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसमें एक युवक की मौत हो गई। यह दर्दनाक दुर्घटना एक पिकअप वाहन और मोटरसाइकिल के बीच हुई टक्कर के कारण हुई।1