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गाडरवारा प्रदीप शर्मा एसीएन भारत समाचा गाडरवारा में मौत का तांडव: डंपर के कहर से 3 दिन में 4 जानें गईं, आक्रोशित परिजनों का शांतिदूत तिराहे पर चक्का जाम
कृष्णकांत प्रदीप शर्मा करेली
गाडरवारा प्रदीप शर्मा एसीएन भारत समाचा गाडरवारा में मौत का तांडव: डंपर के कहर से 3 दिन में 4 जानें गईं, आक्रोशित परिजनों का शांतिदूत तिराहे पर चक्का जाम
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- Post by कृष्णकांत प्रदीप शर्मा करेली1
- station Ganj rosra ki halat hai1
- सतीश विश्वकर्मा की रिपोर्ट स्काई इंडिया टीवी चैनल गाडरवारा गाडरवारा में मौत का तांडव: डंपर के कहर से 3 दिन में 4 जानें गईं, आक्रोशित परिजनों का शांतिदूत तिराहे पर चक्का जाम 1
- समर कैंप' नहीं, यह 'संस्कार कैंप': 15 साल के नन्हे पथिक, गुरु के साथ निकले 3000 किमी की नर्मदा परिक्रमा पर नर्सिंगपुर। जहाँ आज की पीढ़ी गर्मी की छुट्टियों में महंगे समर कैंपों में स्विमिंग, पेंटिंग और गैजेट्स के बीच अपना समय बिताती है, वहीं 15 साल की उम्र के 7 बच्चों ने एक ऐसा मार्ग चुना है जो उनके भविष्य की नींव को 'संस्कारों' से सींच रहा है। कंधे पर झोला, हाथ में लाठी और पैरों में छाले लिए ये नन्हे पथिक अपने गुरु के सानिध्य में माँ नर्मदा की पैदल परिक्रमा पर निकले हैं। 45 डिग्री की तपती दोपहरी, ऊबड़-खाबड़ रास्ते और मीलों का सफर—ये बच्चे किसी सुख-सुविधा की तलाश में नहीं, बल्कि 'मैया' की भक्ति में लीन हैं। इन बच्चों के चेहरों पर जो चमक है, वह एसी-कूलर के कमरों में नहीं मिलती। 'नर्मदे हर' के जयकारे के साथ कदम-दर-कदम बढ़ती यह यात्रा केवल परिक्रमा नहीं, बल्कि एक कठिन तपस्या है, जिसे इन बच्चों ने स्वेच्छा से चुना है। आमतौर पर लोग जीवन की भागदौड़ के बाद रिटायरमेंट के समय चार धाम की यात्रा का संकल्प लेते हैं, लेकिन इन बच्चों ने 15 साल की कच्ची उम्र में ही 3000 किलोमीटर की दुर्गम परिक्रमा का संकल्प लेकर सबको हैरान कर दिया है। अमरकंटक से शुरू हुई यह यात्रा दादा महाराज मंदिर होते हुए अब माँ के तटों के साथ-साथ आगे बढ़ रही है। सोच बदल दी इन नन्हे पथिकों ने इन बच्चों ने समाज को एक नई दिशा दिखाई है। जहाँ हम और आप गर्मियों की छुट्टियों में शिमला, मनाली जैसे हिल स्टेशनों का सपना देखते हैं, वहीं इन बच्चों ने भौतिक सुखों को त्यागकर माँ नर्मदा के दर्शन और उनके प्रति कृतज्ञता को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया है। यह 'संस्कार कैंप' न केवल इन बच्चों के साहस को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि यदि सही मार्गदर्शन (गुरु) और संकल्प शक्ति हो, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। यह यात्रा आने वाली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणा है कि धर्म, आस्था और अनुशासन का मार्ग ही जीवन का सच्चा 'कैंप' है।1
- डोंगरगांव: डोंगरगांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम मेहरा खेड़ा में आज अचानक भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि देखते ही देखते आसपास के क्षेत्र में हड़कंप मच गया। डायल 112 और दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई घटना की सूचना मिलते ही गाडरवारा से डायल 112 की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। इस दौरान टीम में स्टाफ दीपक गौरव और पायलट अरुण रजक मुस्तैदी से तैनात रहे। डायल 112 की टीम ने न केवल स्थिति को संभाला बल्कि राहत कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए फायर ब्रिगेड के साथ समन्वय स्थापित किया। कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू आग बुझाने के लिए NTPC और CISF के दमकल कर्मियों को बुलाया गया। दमकल कर्मियों, सीआईएसएफ जवानों और डायल 112 के स्टाफ ने मिलकर मोर्चा संभाला। काफी देर तक चली कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से नियंत्रण पा लिया गया। जान-माल की सुरक्षा डायल 112 के स्टाफ दीपक गौरव और पायलट अरुण रजक की सजगता और दमकल विभाग की सक्रियता से एक बड़ा हादसा होने से बच गया। समय रहते आग पर काबू पा लेने से आसपास की संपत्तियों को कोई बड़ी क्षति नहीं हुई। पुलिस प्रशासन अब आग लगने के कारणों की जांच कर रहा है। स्थानीय ग्रामीणों ने इस त्वरित सहायता के लिए गाडरवारा डायल 112 की टीम और दमकल कर्मियों की सराहना की है।3
- एंकर - डंफर और बाइक में भीषण टक्कर के बाद 2 बाइक सवारों की मौके पर मौत जिनके शव आज सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए गए । सोमवार सुबह करीब 9 बजे शांतिदूत तिराहे पर उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब मृतकों के परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने शव सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया। परिजनों का साफ कहना है कि जब तक प्रशासन की ओर से उन्हें लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक न चक्काजाम हटेगा और न ही अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनका कहना है कि यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि न्याय की मांग है। सवालों के घेरे में प्रशासन स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इस मार्ग पर लंबे समय से भारी वाहनों का दबाव बना हुआ है, लेकिन प्रशासन और संबंधित विभागों ने लगातार अनदेखी की। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते अलग लेन, ट्रैफिक नियंत्रण और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए होते, तो यह दर्दनाक हादसा टल सकता था। लोगों का कहना है— “हादसा डंपर ने किया, लेकिन जिम्मेदार लापरवाह व्यवस्था है।” गुस्से में जनता, सड़क पर उतरा जनसैलाब घटना के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश देखने को मिला और बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए। चक्काजाम के चलते वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। मौके पर पहुंचे अधिकारी स्थिति को संभालने में जुटे रहे, लेकिन आक्रोशित परिजन बिना लिखित भरोसे के मानने को तैयार नहीं दिखे। क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और लोग प्रशासन से लगातार सवाल कर रहे हैं— मौतों के बाद ही क्यों जागता है सिस्टम? क्या हर बार न्याय के लिए शव सड़क पर रखना पड़ेगा? जनता का आरोप स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन पहले ही संवेदनशीलता दिखाता, तो आज परिजनों को सड़क पर उतरकर न्याय की मांग नहीं करनी पड़ती। लोग अब सिर्फ मुआवजा नहीं, बल्कि जवाबदेही और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब बड़ा सवाल क्या प्रशासन समय रहते कोई ठोस कदम उठाएगा या फिर लोगों का आक्रोश और बढ़ेगा? रिपोर्टर - आकाश चौहान2
- कलेक्टर के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने कराया धरना समाप्त, 30 दिवस में जांच का आश्वासन मांगें पूरी न होने पर पुनः आंदोलन या न्यायालय जाने की चेतावनी साईंखेड़ा। नगर परिषद साईंखेड़ा में कथित गुणवत्ताहीन निर्माण कार्यों, वित्तीय अनियमितताओं एवं जनसमस्याओं को लेकर चल रहे धरना प्रदर्शन को सोमवार को प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद समाप्त कराया गया। तहसीलदार अतुल श्रीवास्तव, मुख्य नगर पालिका अधिकारी साईंखेड़ा जेपी रजक तथा थाना स्टाफ कलेक्टर महोदय के प्रतिनिधि के रूप में धरना स्थल पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर ज्ञापन प्राप्त किया। धरना स्थल पर अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि ज्ञापन में उल्लेखित सभी मांगों एवं शिकायतों पर 30 दिवस के भीतर जांच एवं आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। प्रशासन द्वारा समयसीमा दिए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने धरना स्थगित करने की घोषणा की। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित 30 दिवस की अवधि में बस स्टैंड एवं शॉपिंग कॉम्प्लेक्स निर्माण, नगर परिषद भवन, मुक्तिधाम, तालाब संरक्षण, सड़कों की गुणवत्ता, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत अभियान, खेल मैदान संरक्षण, कृषि उपज मंडी विकास तथा नगर परिषद द्वारा खरीदे गए वाहनों सहित विभिन्न मांगों पर ठोस कार्यवाही नहीं की गई, तो वे पुनः धरने पर बैठने अथवा माननीय न्यायालय के समक्ष जाने के लिए स्वतंत्र होंगे। धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रंजीत तोमर ने कहा कि जनता लंबे समय से इन मुद्दों पर न्याय की प्रतीक्षा कर रही है। प्रशासन द्वारा दिया गया आश्वासन अंतिम अवसर के रूप में स्वीकार किया गया है। यदि समयसीमा में निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा। धरना स्थल पर सुजान सिंह राजपूत, सुशांत राय, नितेश तोमर, पत्रकार कमलेश अवधिया, वीरेंद्र पटेल, जय नारायण अग्रवाल, मुन्नीलाल कुशवाहा, गोपाल प्रसाद अग्रवाल सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं नगरवासी उपस्थित रहे। नगर में इस घटनाक्रम को लेकर व्यापक चर्चा रही ।2
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