logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

महावीर जयंती के उपलक्ष पर 30 मार्च को जिले में शासकीय अवकाश हुआ घोषित कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने जारी किया आदेश 31 मार्च को खुले रहेंगे सभी शासकीय कार्यालय एवं संस्थाएं म.प्र. शासन, सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय, वल्लभ भवन भोपाल के पत्र कमांक एफ 3-1/2025/एक/चार भोपाल दिनांक 29.03.2026 के अनुपालन में तथा जनभावनाओं और स्थानीय परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए, जिला मण्डला हेतु पूर्व में घोषित हेतु सार्वजनिक अवकाश में संशोधन किया जाता है। कैलेंडर वर्ष 2026 हेतु अवकाशों की सूची में "महावीर जयंती" के उपलक्ष्य में दिनांक 31 मार्च 2026 (मंगलवार) को घोषित अवकाश के स्थान पर अब संपूर्ण मण्डला जिले में 30 मार्च 2026 (सोमवार) को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाता है। दिनांक 31 मार्च 2026 (मंगलवार) को सभी शासकीय कार्यालय एवं संस्थाएं पूर्ववत खुले रहेंगे। रविवार को शाम 4:30 बजे कलेक्टर सोमेश मिश्रा द्वारा तत्काल प्रभावशील आदेश जारी किया गया है।

11 hrs ago
user_Vinay Namdeo Nainpur
Vinay Namdeo Nainpur
मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
11 hrs ago

महावीर जयंती के उपलक्ष पर 30 मार्च को जिले में शासकीय अवकाश हुआ घोषित कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने जारी किया आदेश 31 मार्च को खुले रहेंगे सभी शासकीय कार्यालय एवं संस्थाएं म.प्र. शासन, सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय, वल्लभ भवन भोपाल के पत्र कमांक एफ 3-1/2025/एक/चार भोपाल दिनांक 29.03.2026 के अनुपालन में तथा जनभावनाओं और स्थानीय परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए, जिला मण्डला हेतु पूर्व में घोषित हेतु सार्वजनिक अवकाश में संशोधन किया जाता है। कैलेंडर वर्ष 2026 हेतु अवकाशों की सूची में "महावीर जयंती" के उपलक्ष्य में दिनांक 31 मार्च 2026 (मंगलवार) को घोषित अवकाश के स्थान पर अब संपूर्ण मण्डला जिले में 30 मार्च 2026 (सोमवार) को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाता है। दिनांक 31 मार्च 2026 (मंगलवार) को सभी शासकीय कार्यालय एवं संस्थाएं पूर्ववत खुले रहेंगे। रविवार को शाम 4:30 बजे कलेक्टर सोमेश मिश्रा द्वारा तत्काल प्रभावशील आदेश जारी किया गया है।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • मध्यप्रदेश के मण्डला से एक ऐसी कहानी जहाँ आस्था सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि इतिहास की जीवंत विरासत है। गौंडवाना साम्राज्य की कुलदेवी माँ राजराजेश्वरी का प्राचीन मंदिर इन दिनों चैत्र नवरात्रि में भक्ति का विशाल केंद्र बना हुआ है.जहाँ हर शंखनाद के साथ गूंजती है वीरता की गाथा और हर आरती में झलकता है अटूट विश्वास।
    1
    मध्यप्रदेश के मण्डला से एक ऐसी कहानी जहाँ आस्था सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि इतिहास की जीवंत विरासत है।
गौंडवाना साम्राज्य की कुलदेवी माँ राजराजेश्वरी का प्राचीन मंदिर इन दिनों चैत्र नवरात्रि में भक्ति का विशाल केंद्र बना हुआ है.जहाँ हर शंखनाद के साथ गूंजती है वीरता की गाथा और हर आरती में झलकता है अटूट विश्वास।
    user_प्रशांत पटैल
    प्रशांत पटैल
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • चौगान मढ़िया के जवारे विसर्जन का अद्भुत दृश्य
    1
    चौगान मढ़िया के जवारे विसर्जन का अद्भुत दृश्य
    user_Govardhan kushwaha
    Govardhan kushwaha
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
  • Post by Salim khan
    1
    Post by Salim khan
    user_Salim khan
    Salim khan
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    19 hrs ago
  • उपनगर महाराजपुर में सनसनी: युवक की हत्या कर शव ग्राउंड में फेंका
    1
    उपनगर महाराजपुर में सनसनी: युवक की हत्या कर शव ग्राउंड में फेंका
    user_Sanjay nanda
    Sanjay nanda
    Local News Reporter Mandla, Madhya Pradesh•
    20 hrs ago
  • आदिवासी बहुल क्षेत्र मवई इन दिनों महुआ की मिठास से सराबोर है। जंगल की धरती पर बिछे महुआ के फूल केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि यह यहां के हजारों परिवारों की आजीविका का आधार हैं। सुबह की पहली किरण से पहले ही महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे टोकरी-बोरे लेकर जंगल की ओर निकल पड़ते हैं। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने का जरिया है—जहां हर गिरा हुआ फूल उनके घर के चूल्हे को जलाने की उम्मीद बन जाता है। जंगल की हरियाली और साल का वैभव मवई का वन क्षेत्र अपनी अनूठी प्रकृति के कारण विशेष पहचान रखता है। जब अन्य स्थानों पर पतझड़ के कारण पेड़ सूने हो जाते हैं, तब यहां के साल वृक्ष निरंतर हरियाली बनाए रखते हैं। साल के पत्ते धीरे-धीरे गिरते हैं और उसी क्रम में नए पत्ते आते रहते हैं, जिससे जंगल साल भर जीवंत और हरा-भरा दिखाई देता है। महुआ के बाद साल में फूल और फल (बीज/वीजा) लगते हैं, जो ग्रामीणों की आय का दूसरा बड़ा स्रोत है। पहले इन वन उपजों की खरीदी सहकारी समितियों और वन विभाग के माध्यम से समर्थन मूल्य पर होती थी, जिससे ग्रामीणों को उचित दाम मिल जाता था। लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था कमजोर हो गई है, जिससे ग्रामीणों को अपनी मेहनत का फल औने-पौने दामों पर व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है। आजीविका का एकमात्र आधार मवई क्षेत्र में रोजगार के अवसर बेहद सीमित हैं। खेती भी पूरी तरह मौसम पर निर्भर है। ऐसे में महुआ और साल बीज ही ग्रामीणों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इन्हीं से मिलने वाली आय से वे बीज, बैल, खाद, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों की पूर्ति करते हैं। मनरेगा जैसी योजनाएं कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं। निजी रोजगार के अवसर नगण्य हैं। परिणामस्वरूप वन संपदा ही यहां के लोगों का एकमात्र सहारा बन गई है। लेकिन जब इस संपदा का उचित मूल्य नहीं मिलता, तो यह सहारा भी कमजोर पड़ने लगता है। वन कटाई : बढ़ता हुआ संकट वन विभाग द्वारा निरंतर और अनियंत्रित कटाई से जंगलों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। जहां पहले घने वृक्षों की छाया थी, वहां अब खालीपन नजर आने लगा है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में यह वनांचल अपनी पहचान खो सकता है। वन कटाई के दुष्परिणाम केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं जल स्रोतों का सूखना वन्य जीवों का पलायन जलवायु असंतुलन ग्रामीणों की आय में गिरावट यह संकट पर्यावरणीय होने के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक भी है। बाजार और मूल्य का असंतुलन एक ओर शहरों में महुआ से बने उत्पाद—जैसे मिठाइयां, चॉकलेट और अन्य खाद्य सामग्री—महंगे दामों पर बिकते हैं, वहीं दूसरी ओर वनांचल में महुआ का मूल्य इतना कम मिलता है कि मजदूरी तक नहीं निकल पाती। यह स्पष्ट रूप से बाजार व्यवस्था की असमानता को दर्शाता है। इसी प्रकार, महुआ से पारंपरिक रूप से बनाई जाने वाली शराब भी ग्रामीणों के लिए आय का स्रोत है, लेकिन उसे न तो उचित पहचान मिल पाई है और न ही बेहतर बाजार। संभावनाएं और समाधान यदि सरकार और समाज मिलकर प्रयास करें, तो मवई का वनांचल आत्मनिर्भरता का एक आदर्श मॉडल बन सकता है। महुआ और साल बीज की समर्थन मूल्य पर खरीदी पुनः शुरू की जाए। टोना-पत्तल (पत्तों से बने उत्पाद) जैसी वन उपज को भी बाजार और न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाए। मनरेगा और अन्य रोजगार योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। वन कटाई पर नियंत्रण रखते हुए स्थानीय समुदाय को वन प्रबंधन में भागीदार बनाया जाए। महुआ आधारित उत्पादों (खाद्य पदार्थ और पेय) पर शोध कर उनकी गुणवत्ता, स्वाद और सुगंध में सुधार किया जाए, ताकि उन्हें बड़े बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थान मिल सके। महुआ से बनने वाले पारंपरिक पेय को वैज्ञानिक तरीके से विकसित कर उसे कानूनी और आर्थिक रूप से संगठित उद्योग का रूप दिया जाए, जिससे आदिवासी समुदाय को सीधा लाभ मिल सके। मवई का जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि वहां के आदिवासी समाज की जीवनरेखा है। महुआ की खुशबू में उनकी आशाएं बसती हैं और साल के वृक्षों में उनका भविष्य छिपा है। यदि जंगल सुरक्षित रहेगा, तो ही यह जीवन चक्र चलता रहेगा। अन्यथा, यह वनांचल केवल स्मृतियों और कहानियों में सिमट कर रह जाएगा। वनों का संरक्षण केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के अस्तित्व की रक्षा है, जिनकी रोजी-रोटी इन जंगलों से जुड़ी हुई है।
    1
    आदिवासी बहुल क्षेत्र मवई इन दिनों महुआ की मिठास से सराबोर है। जंगल की धरती पर बिछे महुआ के फूल केवल प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि यह यहां के हजारों परिवारों की आजीविका का आधार हैं। सुबह की पहली किरण से पहले ही महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चे टोकरी-बोरे लेकर जंगल की ओर निकल पड़ते हैं। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन जीने का जरिया है—जहां हर गिरा हुआ फूल उनके घर के चूल्हे को जलाने की उम्मीद बन जाता है।
जंगल की हरियाली और साल का वैभव
मवई का वन क्षेत्र अपनी अनूठी प्रकृति के कारण विशेष पहचान रखता है। जब अन्य स्थानों पर पतझड़ के कारण पेड़ सूने हो जाते हैं, तब यहां के साल वृक्ष निरंतर हरियाली बनाए रखते हैं। साल के पत्ते धीरे-धीरे गिरते हैं और उसी क्रम में नए पत्ते आते रहते हैं, जिससे जंगल साल भर जीवंत और हरा-भरा दिखाई देता है।
महुआ के बाद साल में फूल और फल (बीज/वीजा) लगते हैं, जो ग्रामीणों की आय का दूसरा बड़ा स्रोत है। पहले इन वन उपजों की खरीदी सहकारी समितियों और वन विभाग के माध्यम से समर्थन मूल्य पर होती थी, जिससे ग्रामीणों को उचित दाम मिल जाता था। लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था कमजोर हो गई है, जिससे ग्रामीणों को अपनी मेहनत का फल औने-पौने दामों पर व्यापारियों को बेचना पड़ रहा है।
आजीविका का एकमात्र आधार
मवई क्षेत्र में रोजगार के अवसर बेहद सीमित हैं। खेती भी पूरी तरह मौसम पर निर्भर है। ऐसे में महुआ और साल बीज ही ग्रामीणों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इन्हीं से मिलने वाली आय से वे बीज, बैल, खाद, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों की पूर्ति करते हैं।
मनरेगा जैसी योजनाएं कागजों तक सीमित होकर रह गई हैं। निजी रोजगार के अवसर नगण्य हैं। परिणामस्वरूप वन संपदा ही यहां के लोगों का एकमात्र सहारा बन गई है। लेकिन जब इस संपदा का उचित मूल्य नहीं मिलता, तो यह सहारा भी कमजोर पड़ने लगता है।
वन कटाई : बढ़ता हुआ संकट
वन विभाग द्वारा निरंतर और अनियंत्रित कटाई से जंगलों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। जहां पहले घने वृक्षों की छाया थी, वहां अब खालीपन नजर आने लगा है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले समय में यह वनांचल अपनी पहचान खो सकता है।
वन कटाई के दुष्परिणाम केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं
जल स्रोतों का सूखना
वन्य जीवों का पलायन
जलवायु असंतुलन
ग्रामीणों की आय में गिरावट
यह संकट पर्यावरणीय होने के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक भी है।
बाजार और मूल्य का असंतुलन
एक ओर शहरों में महुआ से बने उत्पाद—जैसे मिठाइयां, चॉकलेट और अन्य खाद्य सामग्री—महंगे दामों पर बिकते हैं, वहीं दूसरी ओर वनांचल में महुआ का मूल्य इतना कम मिलता है कि मजदूरी तक नहीं निकल पाती। यह स्पष्ट रूप से बाजार व्यवस्था की असमानता को दर्शाता है।
इसी प्रकार, महुआ से पारंपरिक रूप से बनाई जाने वाली शराब भी ग्रामीणों के लिए आय का स्रोत है, लेकिन उसे न तो उचित पहचान मिल पाई है और न ही बेहतर बाजार।
संभावनाएं और समाधान
यदि सरकार और समाज मिलकर प्रयास करें, तो मवई का वनांचल आत्मनिर्भरता का एक आदर्श मॉडल बन सकता है।
महुआ और साल बीज की समर्थन मूल्य पर खरीदी पुनः शुरू की जाए।
टोना-पत्तल (पत्तों से बने उत्पाद) जैसी वन उपज को भी बाजार और न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाए।
मनरेगा और अन्य रोजगार योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
वन कटाई पर नियंत्रण रखते हुए स्थानीय समुदाय को वन प्रबंधन में भागीदार बनाया जाए।
महुआ आधारित उत्पादों (खाद्य पदार्थ और पेय) पर शोध कर उनकी गुणवत्ता, स्वाद और सुगंध में सुधार किया जाए, ताकि उन्हें बड़े बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक स्थान मिल सके।
महुआ से बनने वाले पारंपरिक पेय को वैज्ञानिक तरीके से विकसित कर उसे कानूनी और आर्थिक रूप से संगठित उद्योग का रूप दिया जाए, जिससे आदिवासी समुदाय को सीधा लाभ मिल सके।
मवई का जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि वहां के आदिवासी समाज की जीवनरेखा है। महुआ की खुशबू में उनकी आशाएं बसती हैं और साल के वृक्षों में उनका भविष्य छिपा है।
यदि जंगल सुरक्षित रहेगा, तो ही यह जीवन चक्र चलता रहेगा। अन्यथा, यह वनांचल केवल स्मृतियों और कहानियों में सिमट कर रह जाएगा।
वनों का संरक्षण केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि उन लाखों लोगों के अस्तित्व की रक्षा है, जिनकी रोजी-रोटी इन जंगलों से जुड़ी हुई है।
    user_Neelesh THAKUR
    Neelesh THAKUR
    मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    21 hrs ago
  • घुघरी (मंडला) — अमरकंटक से नर्मदा की दंडवत परिक्रमा पर निकले बाबा जी का घुघरी नगर में आगमन हुआ, जिसे देखकर श्रद्धालुओं में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना। बाबा जी दाहिनी ओर से परिक्रमा करते हुए दंडवत के माध्यम से अपनी कठिन यात्रा जारी रखे हुए हैं। स्थानीय लोगों ने उनकी तपस्या और आस्था की सराहना करते हुए आशीर्वाद लिया तथा उनकी सफल यात्रा की कामना की। बाबा जी की यह कठिन साधना श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
    1
    घुघरी (मंडला) — अमरकंटक से नर्मदा की दंडवत परिक्रमा पर निकले बाबा जी का घुघरी नगर में आगमन हुआ, जिसे देखकर श्रद्धालुओं में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना। बाबा जी दाहिनी ओर से परिक्रमा करते हुए दंडवत के माध्यम से अपनी कठिन यात्रा जारी रखे हुए हैं।
स्थानीय लोगों ने उनकी तपस्या और आस्था की सराहना करते हुए आशीर्वाद लिया तथा उनकी सफल यात्रा की कामना की। बाबा जी की यह कठिन साधना श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
    user_Pankaj Jhariya
    Pankaj Jhariya
    News Anchor घुघरी, मंडला, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • मंडला जिले से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, रविवार को शाम 4:00 बजे जहां संदिग्ध परिस्थितियों में एक युवक और एक युवती के शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। यह पूरा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के एमसीसी ग्राउंड स्थित कुंभ स्थल का है, जहां एक युवक का शव पेड़ से लटका हुआ मिला है। मृतक की पहचान ज्वालाजी वार्ड निवासी अंकित उर्फ मंगल के रूप में की गई है, जिसका शव नीम के पेड़ पर फांसी के फंदे से लटका मिला। वहीं, घटनास्थल की जांच के दौरान पुलिस को पास ही एक छीन के पेड़ के नीचे एक युवती का शव भी बरामद हुआ है, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया है। सूचना मिलते ही मौके पर महाराजपुर थाना प्रभारी डॉ. जय सिंह धुर्वे सहित कोतवाली और महाराजपुर पुलिस की टीम पहुंच गई है और घटनास्थल को घेरकर बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस फिलहाल हर एंगल से मामले की जांच कर रही है—चाहे वह आत्महत्या हो या फिर कोई आपराधिक घटना, सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है
    1
    मंडला जिले से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, रविवार को शाम 4:00 बजे जहां संदिग्ध परिस्थितियों में एक युवक और एक युवती के शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है।
यह पूरा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के एमसीसी ग्राउंड स्थित कुंभ स्थल का है, जहां एक युवक का शव पेड़ से लटका हुआ मिला है। मृतक की पहचान ज्वालाजी वार्ड निवासी अंकित उर्फ मंगल के रूप में की गई है, जिसका शव नीम के पेड़ पर फांसी के फंदे से लटका मिला। वहीं, घटनास्थल की जांच के दौरान पुलिस को पास ही एक छीन के पेड़ के नीचे एक युवती का शव भी बरामद हुआ है, जिससे मामला और भी गंभीर हो गया है। सूचना मिलते ही मौके पर महाराजपुर थाना प्रभारी डॉ. जय सिंह धुर्वे सहित कोतवाली और महाराजपुर पुलिस की टीम पहुंच गई है और घटनास्थल को घेरकर बारीकी से जांच की जा रही है। पुलिस फिलहाल हर एंगल से मामले की जांच कर रही है—चाहे वह आत्महत्या हो या फिर कोई आपराधिक घटना, सभी संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है
    user_Vinay Namdeo Nainpur
    Vinay Namdeo Nainpur
    मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • Post by Salim khan
    1
    Post by Salim khan
    user_Salim khan
    Salim khan
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    21 hrs ago
  • Post by प्रशांत पटैल
    1
    Post by प्रशांत पटैल
    user_प्रशांत पटैल
    प्रशांत पटैल
    Local News Reporter मंडला, मंडला, मध्य प्रदेश•
    21 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.