न्यायालय से फरार हुआ इनामी अभियुक्त मुठभेड़ में गिरफ्तार, पुलिस की घेराबंदी के आगे नहीं टिक सकी फरारी की कहानी बांदा। कानून की पकड़ से पहले भागने का दुस्साहस आखिरकार पुलिस की सतर्कता और लगातार पीछा करने की रणनीति के सामने टिक नहीं सका। 14 अगस्त को न्यायालय में पेशी के दौरान पुलिस अभिरक्षा से बाथरूम जाने का बहाना बनाकर फरार हुआ एनडीपीएस अभियुक्त संजय उर्फ तन्नु रविवार को पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, थाना तिंदवारी, थाना चिल्ला और एसओजी की संयुक्त टीम बरेठी-असकरन मोड़ पपरेंदा रोड क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि फरार अभियुक्त तमंचा लेकर मिरगहनी पुल से पहले सत्तीमाई मंदिर के पास मौजूद है। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ने का प्रयास किया तो अभियुक्त ने कथित रूप से पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में अभियुक्त के पैर में गोली लगी और उसे घायल अवस्था में गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस के मुताबिक उसकी हालत सामान्य है। उसके कब्जे से 315 बोर का एक तमंचा, दो खोखे और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए। यह गिरफ्तारी महज एक फरार अभियुक्त की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पुलिस के लिए उस चुनौती का जवाब भी है जो न्यायालय परिसर से फरारी के रूप में सामने आई थी। फरार होने के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस के सहारे उसकी गतिविधियों की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं और आखिरकार दो दिन के भीतर उसकी लोकेशन तक पहुंच गई। संजय उर्फ तन्नु पर पहले से ही एनडीपीएस एक्ट और गैंगस्टर एक्ट समेत छह मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक बांदा पलाश बंसल ने ₹25 हजार का इनाम भी घोषित किया था। मगर इस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा और गंभीर पहलू भी है—न्यायालय से पेशी के दौरान एक अभियुक्त का पुलिस अभिरक्षा से फरार हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। पुलिस ने फरार अभियुक्त को तो पकड़ लिया, लेकिन यह सवाल अपनी जगह कायम है कि आखिर न्यायालय जैसी संवेदनशील जगह से एक आरोपी को सुरक्षा घेरे को भेदकर निकल जाने का अवसर मिला कैसे? अभियुक्त की गिरफ्तारी पुलिस की सफलता है, लेकिन ऐसी घटनाएं व्यवस्था को यह याद दिलाती हैं कि अपराधी की चालाकी से ज्यादा मजबूत कानून की निगरानी होनी चाहिए। क्योंकि न्याय की चौखट से अपराधी का भाग निकलना केवल पुलिस की चुनौती नहीं, बल्कि पूरी सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा होती है।
न्यायालय से फरार हुआ इनामी अभियुक्त मुठभेड़ में गिरफ्तार, पुलिस की घेराबंदी के आगे नहीं टिक सकी फरारी की कहानी बांदा। कानून की पकड़ से पहले भागने का दुस्साहस आखिरकार पुलिस की सतर्कता और लगातार पीछा करने की रणनीति के सामने टिक नहीं सका। 14 अगस्त को न्यायालय में पेशी के दौरान पुलिस अभिरक्षा से बाथरूम जाने का बहाना बनाकर फरार हुआ एनडीपीएस अभियुक्त संजय उर्फ तन्नु रविवार को पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, थाना तिंदवारी, थाना चिल्ला और एसओजी की संयुक्त टीम बरेठी-असकरन मोड़ पपरेंदा रोड क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि फरार अभियुक्त तमंचा लेकर मिरगहनी पुल से पहले सत्तीमाई मंदिर के पास मौजूद है। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ने का प्रयास किया तो अभियुक्त ने कथित रूप से पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में अभियुक्त के पैर में गोली लगी और उसे घायल अवस्था में गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस के मुताबिक उसकी हालत सामान्य है। उसके कब्जे से 315 बोर का एक तमंचा, दो खोखे और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए। यह गिरफ्तारी महज एक फरार अभियुक्त की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पुलिस के लिए उस चुनौती का जवाब भी है जो न्यायालय परिसर से फरारी के रूप में सामने आई थी। फरार होने के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस के सहारे उसकी गतिविधियों की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं और आखिरकार दो दिन के भीतर उसकी लोकेशन तक पहुंच गई। संजय उर्फ तन्नु पर पहले से ही एनडीपीएस एक्ट और गैंगस्टर एक्ट समेत छह मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक बांदा पलाश बंसल ने ₹25 हजार का इनाम भी घोषित किया था। मगर इस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा और गंभीर पहलू भी है—न्यायालय से पेशी के दौरान एक अभियुक्त का पुलिस अभिरक्षा से फरार हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। पुलिस ने फरार अभियुक्त को तो पकड़ लिया, लेकिन यह सवाल अपनी जगह कायम है कि आखिर न्यायालय जैसी संवेदनशील जगह से एक आरोपी को सुरक्षा घेरे को भेदकर निकल जाने का अवसर मिला कैसे? अभियुक्त की गिरफ्तारी पुलिस की सफलता है, लेकिन ऐसी घटनाएं व्यवस्था को यह याद दिलाती हैं कि अपराधी की चालाकी से ज्यादा मजबूत कानून की निगरानी होनी चाहिए। क्योंकि न्याय की चौखट से अपराधी का भाग निकलना केवल पुलिस की चुनौती नहीं, बल्कि पूरी सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा होती है।
- 🚨 बांदा में सड़क पर ‘रईसजादों’ की स्टंटबाजी! क्या कानून की चौखट पर हैसियत भी देखी जाती है? सड़कें किसी की निजी जागीर नहीं, जहां रफ्तार के नशे में जिंदगी से खिलवाड़ किया जाए। सोशल मीडिया पर वायरल कथित वीडियो बांदा कोतवाली नगर थाना क्षेत्र का बताया जा रहा है। यदि वीडियो की पुष्टि होती है, तो यह केवल यातायात नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि स्वयं और राहगीरों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली गंभीर हरकत है।लेकिन असली सवाल स्टंट से भी बड़ा है—क्या कानून की नजर में चेहरे और हैसियत देखकर नियमों का रंग बदल जाता है?अगर यही दुस्साहस किसी गरीब या आम आदमी ने किया होता, तो क्या चालान, वाहन सीज और कानूनी कार्रवाई की तलवार इतनी देर तक म्यान में रहती?कानून की खूबसूरती इसी में है कि उसकी तराजू पर न गरीबी भारी हो, न रसूख। अपराध यदि अपराध है, तो उसका मूल्यांकन व्यक्ति की जेब से नहीं, उसके कृत्य से होना चाहिए। अब नजर यातायात पुलिस पर है— क्या वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर वाहन और चालक की पहचान की जाएगी? क्या नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होने पर नियमानुसार कार्रवाई होगी?क्योंकि सड़क पर स्टंट सिर्फ करतब नहीं, किसी अनजान परिवार के लिए मातम का कारण भी बन सकता है।🔥 हैसियत चाहे कितनी भी बड़ी हो, कानून से बड़ी नहीं होनी चाहिए।नियम गरीब के लिए डंडा और रसूखदार के लिए तमाशा बन जाएं—तो फिर सवाल सड़क पर नहीं, व्यवस्था के माथे पर खड़ा होता है।1
- बांदा: 25 हजार का इनामी फरार एनडीपीएस अभियुक्त पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार बांदा। न्यायालय से पेशी के दौरान फरार हुए 25 हजार रुपये के इनामी एनडीपीएस अभियुक्त संजय उर्फ तन्नु को तिंदवारी, चिल्ला पुलिस व एसओजी की संयुक्त टीम ने पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। मिरगहनी पुल के पास सत्तीमाई मंदिर के आगे पुलिस ने घेराबंदी की, जिस पर अभियुक्त ने फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में पैर में गोली लगने से वह घायल हो गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसके कब्जे से 315 बोर का तमंचा, दो खोखा कारतूस और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए। अभियुक्त पर गैंगस्टर व एनडीपीएस एक्ट समेत आधा दर्जन मुकदमे दर्ज हैं।1
- गिट्टी लदे ट्रेलर की चपेट में आया साइकिल सवार, मौके पर मौत, मची अफरा तफरी। गिट्टी लदे ट्रेलर की चपेट में आया साइकिल सवार, मौके पर मौत, मची अफरा तफरी। तिंदवारी बांदा फतेहपुर राजमार्ग पर पपरेंदा तिराहे के निकट रविवार की शाम उस वक्त अफरा तफरी मच गई जब ट्रेलर नें एक साइकिल सवाल मजदूर को टक्कर मार दी । हादसे में मजदूर की मौत हो गई। घटना के बाद अफरा तफरी मच गई। बांदा फतेहपुर राजमार्ग पर बांदा से गिट्टी लेकर फतेहपुर की ओर जा रहे ट्रेलर ने सामने से आ रहे साइकिल सवार को टक्कर मार दी। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया ।घायल की घटना स्थल पर ही मौत हो गई। चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। बबेरू थाना क्षेत्र के रगौली निवासी इंद्रपाल वर्मा का 32 वर्षीय पुत्र संतोष वर्मा साइकिल से अपनी ससुराल तेरहीमाफी छठी समारोह में शामिल होने जा रहा था ।इस दौरान तिराहे के पास बांदा की तरफ से आ रहे ट्रेलर ने साइकिल में टक्कर मार दी। जिससे उसकी मौत हो गई । ट्रेलर चालक चालक मौके से टेलर छोड़कर भाग निकला। घटना से परिवार में कोहरा मच गया मृतक अपने पीछे पत्नी मीरा चार बच्चों को छोड़ गया है। पत्नी मीरा ने बताया कि ईट भट्टे में पथाई का काम करके परिवार का भरण पोषण करते रहे हैं। घटनास्थल पर स्थानीय पुलिस ने पहुंचकर शव अपने कब्जे में लिया है। चल ही माफी के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि जयकरण वर्मा ने बताया कि परिवार बेहद गरीब है।गांव में चुन्नू वर्मा के छठी का कार्यक्रम था उसी में शामिल होने वह आ रहा था पत्नी मायके में ही थी। घटना से खुशी की जगह परिवार में मातम छा गया।1
- *तिरंगे का अपमान-बिना 'अशोक चक्र' के फहरा दिया झंडा* बाँदा। 15 अगस्त के दिन जब पूरा देश तिरंगे को सलाम कर रहा था, उसी दिन उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा के तिंदवारी ब्लॉक में राष्ट्रीय ध्वज की शान को तार-तार कर दिया गया। बैंक ऑफ बड़ौदा, तिंदवारी शाखा में स्वतंत्रता दिवस पर जो झंडा फहराया गया, उसमें बीच का 'अशोक चक्र' ही गायब था। यानी ये तिरंगा नहीं, तिरंगे का मजाक था।सबसे शर्मनाक बात ये रही कि बैंक कर्मियों को गलती दिखी, फिर भी किसी ने झंडा उतारकर सही झंडा लगाने की जहमत नहीं उठाई। बिना चक्र वाला झंडा फहराकर सभी अंदर चले गए और देशभक्ति का ढोंग करके निकल लिए।किसी जागरूक नागरिक ने इसका वीडियो बना लिया। वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। अब लोग सवाल कर रहे हैं - क्या सरकारी संस्थानों में राष्ट्रभक्ति सिर्फ दिखावा बनकर रह गई है?_ वीडियो वायरल होते ही जिले भर में गुस्सा है। लोगों का कहना है जिन हाथों से तिरंगा फहराया जाना था, उन्हीं हाथों से उसका अपमान हुआ। ये माफी लायक गलती नहीं है। दोषी बैंक कर्मियों पर राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 के तहत सख्त कार्रवाई हो और बैंक प्रबंधन को भी जवाबदेह ठहराया जाए।जिला प्रशासन और बैंक प्रबंधन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन वायरल वीडियो के बाद अब जांच के आदेश तय माने जा रहे हैं।2
- उत्तर प्रदेश में 762 नगर निकायों के लिए बड़ा अपडेट | Property Tax बकायेदारों को राहत | OTS Scheme 2026 | UP Latest News उत्तर प्रदेश में संपत्ति कर से जुड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। 15 अगस्त 2026 से प्रदेश के 762 नगर निकायों में एकमुश्त समझौता योजना यानी OTS व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत संपत्ति कर के बकायेदारों को अपना बकाया चुकाने के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार किस्तों में भुगतान की सुविधा मिल सकती है। योजना का उद्देश्य बकाया कर की वसूली बढ़ाने के साथ नागरिकों को भुगतान में सुविधा देना है।1
- हमीरपुर जिले के रिजर्व पुलिस लाइन पर 80 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर किया गया ध्वजारोहण 🇮🇳 हमीरपुर में 80वें स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण हमीरपुर। 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रिजर्व पुलिस लाइन्स, जनपद हमीरपुर में पुलिस अधीक्षक हमीरपुर द्वारा विधिवत ध्वजारोहण किया गया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने राष्ट्रध्वज को सलामी देकर देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा का संकल्प लिया। समारोह में पुलिस विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।1
- हमीरपुर :सड़क की मांग को लेकर छात्रों के प्रदर्शन पर हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान हमीरपुर। सड़क की मांग को लेकर ‘Zen Alpha’ के छात्र-छात्राओं द्वारा किए गए प्रदर्शन का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। सोशल मीडिया, डिजिटल मीडिया और समाचार पत्रों में मामला प्रकाशित होने के बाद हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार समेत संबंधित विभागों और अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की गई है। जानकारी के मुताबिक हाईकोर्ट की ओर से उत्तर प्रदेश राज्य सरकार, जिलाधिकारी हमीरपुर, प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग (PWD), अधिशासी अभियंता PWD हमीरपुर तथा वन विभाग को नोटिस जारी किया गया है। गौरतलब है कि 11 अगस्त को हमीरपुर मुख्यालय से करीब छह किलोमीटर दूर चंदूपुर ग्राम पंचायत से जुड़े करीब आधा दर्जन मजरों के लगभग 200 छात्र-छात्राएं सड़क की मांग को लेकर तिरंगा हाथ में लेकर पैदल कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। बरसात के बीच छात्र-छात्राओं को दलदल और कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ा। बच्चे अपने अभिभावकों के साथ जिलाधिकारी से सड़क बनवाने की फरियाद लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद बच्चों और उनके अभिभावकों ने जिलाधिकारी से मुलाकात करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें कार्यालय के अंदर जाने से रोक दिया। इसके बाद छात्र-छात्राओं और अभिभावकों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर सड़क निर्माण की मांग उठाई। मामले का वीडियो और खबरें सोशल मीडिया, डिजिटल मीडिया तथा समाचार पत्रों में सामने आने के बाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान लेने से प्रशासनिक और लोक निर्माण विभाग में भी हलचल बढ़ गई है। अब सभी की निगाहें 24 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।1
- न्यायालय से फरार हुआ इनामी अभियुक्त मुठभेड़ में गिरफ्तार, पुलिस की घेराबंदी के आगे नहीं टिक सकी फरारी की कहानी बांदा। कानून की पकड़ से पहले भागने का दुस्साहस आखिरकार पुलिस की सतर्कता और लगातार पीछा करने की रणनीति के सामने टिक नहीं सका। 14 अगस्त को न्यायालय में पेशी के दौरान पुलिस अभिरक्षा से बाथरूम जाने का बहाना बनाकर फरार हुआ एनडीपीएस अभियुक्त संजय उर्फ तन्नु रविवार को पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, थाना तिंदवारी, थाना चिल्ला और एसओजी की संयुक्त टीम बरेठी-असकरन मोड़ पपरेंदा रोड क्षेत्र में संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि फरार अभियुक्त तमंचा लेकर मिरगहनी पुल से पहले सत्तीमाई मंदिर के पास मौजूद है। पुलिस ने घेराबंदी कर उसे पकड़ने का प्रयास किया तो अभियुक्त ने कथित रूप से पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में अभियुक्त के पैर में गोली लगी और उसे घायल अवस्था में गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस के मुताबिक उसकी हालत सामान्य है। उसके कब्जे से 315 बोर का एक तमंचा, दो खोखे और तीन जिंदा कारतूस बरामद हुए। यह गिरफ्तारी महज एक फरार अभियुक्त की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पुलिस के लिए उस चुनौती का जवाब भी है जो न्यायालय परिसर से फरारी के रूप में सामने आई थी। फरार होने के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस के सहारे उसकी गतिविधियों की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं और आखिरकार दो दिन के भीतर उसकी लोकेशन तक पहुंच गई। संजय उर्फ तन्नु पर पहले से ही एनडीपीएस एक्ट और गैंगस्टर एक्ट समेत छह मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक बांदा पलाश बंसल ने ₹25 हजार का इनाम भी घोषित किया था। मगर इस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा और गंभीर पहलू भी है—न्यायालय से पेशी के दौरान एक अभियुक्त का पुलिस अभिरक्षा से फरार हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। पुलिस ने फरार अभियुक्त को तो पकड़ लिया, लेकिन यह सवाल अपनी जगह कायम है कि आखिर न्यायालय जैसी संवेदनशील जगह से एक आरोपी को सुरक्षा घेरे को भेदकर निकल जाने का अवसर मिला कैसे? अभियुक्त की गिरफ्तारी पुलिस की सफलता है, लेकिन ऐसी घटनाएं व्यवस्था को यह याद दिलाती हैं कि अपराधी की चालाकी से ज्यादा मजबूत कानून की निगरानी होनी चाहिए। क्योंकि न्याय की चौखट से अपराधी का भाग निकलना केवल पुलिस की चुनौती नहीं, बल्कि पूरी सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा होती है।1