पेड़ों पर माफिया की आरी या अफसरों की कथित मेहरबानी? खरवैया-भवापुर में 15–20 देसी आम के पेड़ों के कटान से हड़कंप धौरहरा में पेड़ों पर माफिया की आरी या अफसरों की कथित मेहरबानी? खरवैया-भवापुर में 15–20 देसी आम के पेड़ों के कटान से हड़कंप धौरहरा। धौरहरा क्षेत्र में कथित अवैध लकड़ी कटान और मिट्टी खनन का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। खरवैया और भवापुर में करीब 15 से 20 देसी आम के पेड़ों के कथित अवैध कटान की खबर ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। आरोप है कि रातों-रात हरे-भरे पेड़ों पर आरी चलाकर लकड़ी तक मौके से हटा दी जाती है और जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। एक ओर सरकार पर्यावरण बचाने और पेड़ लगाने की मुहिम चला रही है, वहीं दूसरी ओर धौरहरा में लगातार पेड़ों के कटने के आरोप सामने आना अपने आप में बड़ा सवाल है। कहीं मिट्टी खनन तो कहीं अवैध लकड़ी कटान—आखिर इस कथित साम्राज्य को कौन चला रहा है और किसका संरक्षण प्राप्त है? अधिकारियों के नाम लेकर संरक्षण का दावा, जांच से ही खुलेगा राज ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि क्षेत्र में कथित रूप से सक्रिय लकड़ी और मिट्टी माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। लोगों का आरोप है कि उन्हें कथित रूप से पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। इस पूरे मामले में क्षेत्राधिकारी धौरहरा शमशेर बहादुर, धौरहरा कोतवाली में तैनात प्रभारी दिनेश शर्मा तथा धौरहरा कस्बे में तैनात वीरेंद्र सिंह का नाम स्थानीय चर्चाओं और आरोपों में लिया जा रहा है। हालांकि इन अधिकारियों पर लगाए जा रहे संरक्षण के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यही कारण है कि निष्पक्ष जांच अब बेहद जरूरी हो जाती है। सवाल यह है कि यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के बाद सच्चाई सामने क्यों न लाई जाए? और यदि कहीं नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों न हो? ‘जानते नहीं हो किसका संरक्षण है’—धमकियों के आरोप से पत्रकार भी चिंतित सबसे गंभीर सवाल केवल पेड़ों के कटान का नहीं, बल्कि पत्रकारों और सोशल मीडिया कर्मियों की सुरक्षा का भी है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि जब कोई पत्रकार या सोशल मीडिया कर्मी कथित अवैध खनन अथवा लकड़ी कटान की फोटो-वीडियो बनाने का प्रयास करता है तो उसे दबाव और धमकी का सामना करना पड़ता है। कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर यह तक कहा जाता है—“जानते नहीं हो, किसका संरक्षण है।” यदि वास्तव में किसी पत्रकार को जान से मारने की धमकी दी गई है तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। प्रशासन को ऐसे प्रत्येक आरोप की तत्काल जांच कर पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। ‘सालों से जमे अधिकारी’ भी सवालों के घेरे में ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। सवाल उठ रहा है कि यदि अवैध कटान और कथित मिट्टी खनन की गतिविधियां लगातार हो रही हैं तो स्थानीय पुलिस, राजस्व और वन विभाग को इसकी भनक क्यों नहीं लगती? क्या यह महज विभागीय लापरवाही है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है? जांच के बिना किसी अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन शिकायतों और आरोपों की निष्पक्ष जांच न करना भी जनता के सवालों को और गंभीर बना देगा। पेड़ कटे तो सिर्फ लकड़ी नहीं गई—भविष्य की सांसें भी खतरे में देसी आम के पेड़ ग्रामीण जीवन और पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लगातार पेड़ों का कटान और दूसरी ओर कथित अवैध मिट्टी खनन से खेतों और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर ग्रामीणों में भय है। आज पेड़ों पर आरी चल रही है, कल खेतों की मिट्टी कमजोर होगी और आने वाली पीढ़ियां इसका खामियाजा भुगतेंगी—तो जवाबदेही किसकी होगी? मुख्यमंत्री के आदेश जमीन पर बेअसर क्यों? सरकार लगातार अवैध खनन और अवैध कटान के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश देती रही है। ऐसे में धौरहरा क्षेत्र में बार-बार इस तरह के आरोप सामने आना प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। क्या स्थानीय स्तर पर सरकार के आदेशों की अनदेखी हो रही है? क्या कथित माफिया प्रशासन से ज्यादा ताकतवर हो चुके हैं? क्या किसी अधिकारी का संरक्षण वास्तव में प्राप्त है? और अगर नहीं, तो फिर इन आरोपों की निष्पक्ष जांच से परहेज क्यों? इन सवालों का जवाब अब जनता चाहती है। वन मंत्री और राजस्व विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग हक की आवाज़ न्यूज़ के माध्यम से स्थानीय लोगों की मांग है कि वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन संयुक्त रूप से खरवैया व भवापुर में हुए कथित पेड़ कटान की जांच कराए। मौके पर पहुंचकर पेड़ों की संख्या, कटान की अनुमति, लकड़ी की बरामदगी तथा संबंधित भूमि और परिवहन की जांच की जाए। साथ ही धौरहरा क्षेत्र में कथित अवैध मिट्टी खनन और लकड़ी कटान के पूरे नेटवर्क की भी जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो जन आंदोलन का रास्ता अपनाने की नौबत आ सकती है। अब फैसला जांच करेगी, चर्चा नहीं यह मामला केवल 15–20 आम के पेड़ों का नहीं है। यह पर्यावरण, कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल बन चुका है। अगर आरोप गलत हैं तो जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए। और अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो चाहे वह कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति हो, कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि सवाल साफ है— धौरहरा में कानून का राज चलेगा या कथित माफियाओं का? पेड़ों पर चलने वाली आरी रुकेगी या ऐसे ही चलती रहेगी? और यदि कल किसी पत्रकार या सामाजिक कार्यकर्ता के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उसकी जवाबदेही आखिर किसकी होगी? हक की आवाज़ न्यूज़ जनता की आवाज़ को जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर जांच का आदेश देता है या मामला भी बाकी शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।
पेड़ों पर माफिया की आरी या अफसरों की कथित मेहरबानी? खरवैया-भवापुर में 15–20 देसी आम के पेड़ों के कटान से हड़कंप धौरहरा में पेड़ों पर माफिया की आरी या अफसरों की कथित मेहरबानी? खरवैया-भवापुर में 15–20 देसी आम के पेड़ों के कटान से हड़कंप धौरहरा। धौरहरा क्षेत्र में कथित अवैध लकड़ी कटान और मिट्टी खनन का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। खरवैया और भवापुर में करीब 15 से 20 देसी आम के पेड़ों के कथित अवैध कटान की खबर ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। आरोप है कि रातों-रात हरे-भरे पेड़ों पर आरी चलाकर लकड़ी तक मौके से हटा दी जाती है और जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। एक ओर सरकार पर्यावरण बचाने और पेड़ लगाने की मुहिम चला रही है, वहीं दूसरी ओर धौरहरा में लगातार पेड़ों के कटने के आरोप सामने आना अपने आप में बड़ा सवाल है। कहीं मिट्टी खनन तो कहीं अवैध लकड़ी कटान—आखिर इस कथित साम्राज्य को कौन चला रहा है और किसका संरक्षण प्राप्त है? अधिकारियों के नाम लेकर संरक्षण का दावा, जांच से ही खुलेगा राज ग्रामीणों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि क्षेत्र में कथित रूप से सक्रिय लकड़ी और मिट्टी माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। लोगों का आरोप है कि उन्हें कथित रूप से पुलिस विभाग के कुछ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। इस पूरे मामले में क्षेत्राधिकारी धौरहरा शमशेर बहादुर, धौरहरा कोतवाली में तैनात प्रभारी दिनेश शर्मा तथा धौरहरा कस्बे में तैनात वीरेंद्र सिंह का नाम स्थानीय चर्चाओं और आरोपों में लिया जा रहा है। हालांकि इन अधिकारियों पर लगाए जा रहे संरक्षण के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यही कारण है कि निष्पक्ष जांच अब बेहद जरूरी हो जाती है। सवाल यह है कि यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के बाद सच्चाई सामने क्यों न लाई जाए? और यदि कहीं नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों न हो? ‘जानते नहीं हो किसका संरक्षण है’—धमकियों के आरोप से पत्रकार भी चिंतित सबसे गंभीर सवाल केवल पेड़ों के कटान का नहीं, बल्कि पत्रकारों और सोशल मीडिया कर्मियों की सुरक्षा का भी है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि जब कोई पत्रकार या सोशल मीडिया कर्मी कथित अवैध खनन अथवा लकड़ी कटान की फोटो-वीडियो बनाने का प्रयास करता है तो उसे दबाव और धमकी का सामना करना पड़ता है। कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर यह तक कहा जाता है—“जानते नहीं हो, किसका संरक्षण है।” यदि वास्तव में किसी पत्रकार को जान से मारने की धमकी दी गई है तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। प्रशासन को ऐसे प्रत्येक आरोप की तत्काल जांच कर पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। ‘सालों से जमे अधिकारी’ भी सवालों के घेरे में ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। सवाल उठ रहा है कि यदि अवैध कटान और कथित मिट्टी खनन की गतिविधियां लगातार हो रही हैं तो स्थानीय पुलिस, राजस्व और वन विभाग को इसकी भनक क्यों नहीं लगती? क्या यह महज विभागीय लापरवाही है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है? जांच के बिना किसी अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन शिकायतों और आरोपों की निष्पक्ष जांच न करना भी जनता के सवालों को और गंभीर बना देगा। पेड़ कटे तो सिर्फ लकड़ी नहीं गई—भविष्य की सांसें भी खतरे में देसी आम के पेड़ ग्रामीण जीवन और पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लगातार पेड़ों का कटान और दूसरी ओर कथित अवैध मिट्टी खनन से खेतों और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर को लेकर ग्रामीणों में भय है। आज पेड़ों पर आरी चल रही है, कल खेतों की मिट्टी कमजोर होगी और आने वाली पीढ़ियां इसका खामियाजा भुगतेंगी—तो जवाबदेही किसकी होगी? मुख्यमंत्री के आदेश जमीन पर बेअसर क्यों? सरकार लगातार अवैध खनन और अवैध कटान के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश देती रही है। ऐसे में धौरहरा क्षेत्र में बार-बार इस तरह के आरोप सामने आना प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। क्या स्थानीय स्तर पर सरकार के आदेशों की अनदेखी हो रही है? क्या कथित माफिया प्रशासन से ज्यादा ताकतवर हो चुके हैं? क्या किसी अधिकारी का संरक्षण वास्तव में प्राप्त है? और अगर नहीं, तो फिर इन आरोपों की निष्पक्ष जांच से परहेज क्यों? इन सवालों का जवाब अब जनता चाहती है। वन मंत्री और राजस्व विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग हक की आवाज़ न्यूज़ के माध्यम से स्थानीय लोगों की मांग है कि वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन संयुक्त रूप से खरवैया व भवापुर में हुए कथित पेड़ कटान की जांच कराए। मौके पर पहुंचकर पेड़ों की संख्या, कटान की अनुमति, लकड़ी की बरामदगी तथा संबंधित भूमि और परिवहन की जांच की जाए। साथ ही धौरहरा क्षेत्र में कथित अवैध मिट्टी खनन और लकड़ी कटान के पूरे नेटवर्क की भी जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो जन आंदोलन का रास्ता अपनाने की नौबत आ सकती है। अब फैसला जांच करेगी, चर्चा नहीं यह मामला केवल 15–20 आम के पेड़ों का नहीं है। यह पर्यावरण, कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल बन चुका है। अगर आरोप गलत हैं तो जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए। और अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो चाहे वह कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति हो, कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि सवाल साफ है— धौरहरा में कानून का राज चलेगा या कथित माफियाओं का? पेड़ों पर चलने वाली आरी रुकेगी या ऐसे ही चलती रहेगी? और यदि कल किसी पत्रकार या सामाजिक कार्यकर्ता के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उसकी जवाबदेही आखिर किसकी होगी? हक की आवाज़ न्यूज़ जनता की आवाज़ को जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर जांच का आदेश देता है या मामला भी बाकी शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।
- खमरिया में जुलूस-ए-मोहम्मदी में उमड़ा आस्था का सैलाब, सुरक्षा में साथ रही खमरिया पुलिस खमरिया, संवाददाता। थाना खमरिया क्षेत्र के कस्बा खमरिया में बारावफात के अवसर पर जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए और उत्साह के साथ जुलूस निकालकर पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के प्रति अपनी खिराज-ए-अकीदत पेश की। कस्बे की प्रमुख सड़कों से निकले जुलूस में लोगों में खासा उत्साह नजर आया। जगह-जगह लोगों ने जुलूस का स्वागत किया। जुलूस के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। थानाध्यक्ष निर्मल तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम जुलूस के साथ मौजूद रही और पूरे मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था संभाले रखी। पुलिस की सक्रियता के चलते जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।1
- नेपाल में पानी के सैलाब के चलते नदी के किनारे खड़ी कई मंजिला इमारत नदी के बीच पहुंच गयी है,बस ढहने के कगार पर है। सबसे ऊपरी छत पर खडा हुआ एक लड़का अपनी टीशर्ट घुमाकर सेना के हैलीकाप्टर से मदद मांगता है। हैलीकाप्टर इस छत तक आने का प्रयास करता है और फिर छत के एक सिरे पर नीचे..और नीचे आ जाता है। लड़का हैलीकाप्टर को जैसे ही छूता है, ऊपर बैठा सैनिक उसे हाथ पकड़कर ऊपर उठा लेता है.....रेस्क्यू पूरा होते ही आसपास मौजूद लोग तालियां बजाकर उत्साह वर्धन करते है।1
- ईद मिलादुन्नबी पर कस्बा खीरी में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, विशाल जुलूस ने बांधा समां कस्बा खीरी, लखीमपुर खीरी। ईद मिलादुन्नबी के मुबारक मौके पर बुधवार को कस्बा खीरी में विशाल जुलूस निकाला गया। जुलूस में बच्चे, बुजुर्ग और नौजवान बड़ी संख्या में शामिल हुए। पूरे कस्बे में धार्मिक नारों और नातों की गूंज से माहौल खुशनुमा नजर आया। जुलूस में शामिल लोग पूरे जोश और अकीदत के साथ आगे बढ़ते रहे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोगों की मौजूदगी ने जुलूस की रौनक बढ़ा दी। जगह-जगह लोगों ने जुलूस का स्वागत किया। जुलूस के दौरान “लब्बैक या रसूल अल्लाह” की सदाएं गूंजती रहीं। ईद मिलादुन्नबी को लेकर कस्बा खीरी में लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। विशाल जुलूस ने पूरे कस्बे में समां बांध दिया। कस्बा खीरी की गलियों में अकीदत, मोहब्बत और मिलादुन्नबी की रौनक साफ दिखाई दी।1
- लखीमपुर में बारावफात का जुलूस निकाला भारी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग1
- मितौली में निकला भव्य जुलूस, हजारों लोग हुए शामिल किया1
- ब्रेकिंग न्यूज़ मा.मुख्य मंत्री योगी आदित्यनाथ जी के आदेश अनुसार 27,28 और 29 अगस्त को 27, 28 और 29 अगस्त को हर बेटी, बहन और माता अपने एक सहयात्री के साथ उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की बसों तथा सिटी बसों में निःशुल्क यात्रा कर सकेंगी...1
- *ईद मिलादुन्नबी पर गुरुदेव खेड़ा में गूंजा अमन और भाईचारे का पैगाम* *मैगलगंज, खीरी। 12* रबी-उल-अव्वल के मुबारक मौके पर ग्राम गुरुदेव खेड़ा में ईद मिलादुन्नबी का पर्व श्रद्धा, उत्साह और सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर मुस्लिम समाज के लोगों ने एक-दूसरे को ईद मिलादुन्नबी की दिली मुबारकबाद पेश की और अमन, मोहब्बत, भाईचारे तथा इंसानियत का पैगाम दिया। कार्यक्रम में मौलाना लियाकत हैदरी, इमाम कमेटी अध्यक्ष राजू, मौलाना युसुफ रजा, मौलाना साद रजा, ग्राम प्रधान लल्लू उर्फ कादिर, सरबर रजा कादरी, आफरान, मौलाना मुकीम सहित पूर्व प्रधान इरफान खान, हिदायत अली, सहीमन खान, रिजवान कुरैशी, शाहनवाज हाशमी, आजम खान, सलमान खान, जावेद खान, सोहेल खान, गुफरान खान मोहम्मद फैजान समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि ईद मिलादुन्नबी का संदेश आपसी प्रेम, भाईचारे और इंसानियत को मजबूत करने का है। सभी ने देश और समाज में अमन-चैन, खुशहाली एवं बरकत की दुआ की। वहीं कार्यक्रम को लेकर पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा। मैगलगंज इंस्पेक्टर संजीव कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे और शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान आपसी सौहार्द और भाईचारे का माहौल कायम रहा तथा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।1
- Sitapur के चर्चित मठ की बेशकीमती 1100 बीघा जमीन पर उठे सवाल, DM तक पहुंचा मामला, जांच के बाद सामने आएगा सच !1