कोटपूतली-बहरोड़ जिले में जोधपुरा संघर्ष समिति ने अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्ट्रेट पर अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू कर दिया है। यह आंदोलन एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के आदेशों की आठ माह बाद भी पालना न होने पर भारी नाराजगी और रोष व्यक्त करते हुए किया जा रहा है। महापड़ाव शुरू करने से पहले, धरणार्थी नगर परिषद पार्क में इकट्ठा हुए और नारेबाजी करते हुए पैदल मार्च कर जिला कलक्टर कार्यालय पहुंचे, जिसके बाद जिला कलक्टर कार्यालय के सामने नारेबाजी करते हुए अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू किया गया। इस महापड़ाव में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं भी शामिल हैं। निर्जला एकादशी के दिन महिलाओं ने मंदिर न जा पाने के कारण महापड़ाव स्थल पर ही भजन-कीर्तन कर भक्तिमय माहौल बना दिया, लेकिन उनकी मांगों को लेकर उनके तेवर बेहद सख्त नजर आए। सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शुक्लावास और सचिव कैलाश यादव ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन संवेदनहीन बना हुआ है। उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी में महापड़ाव स्थल पर सुलभ शौचालय और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जिससे आंदोलनरत महिलाओं और उनके साथ आए छोटे बच्चों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद, प्रशासन पूरी तरह से मस्त और सुस्त बना हुआ है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते उनकी वाजिब मांगों पर ध्यान नहीं दिया और उनका समाधान नहीं किया, तो शुक्रवार से धरना स्थल पर ही क्रमिक अनशन के रूप में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। राधेश्याम शुक्लावास और कैलाश यादव ने दोहराया कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों को पूरा नहीं करता, यह आंदोलन थमने वाला नहीं है, और प्रशासन की सुस्ती ही उन्हें आंदोलन को और अधिक उग्र बनाने पर मजबूर कर रही है।
कोटपूतली-बहरोड़ जिले में जोधपुरा संघर्ष समिति ने अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्ट्रेट पर अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू कर दिया है। यह आंदोलन एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के आदेशों की आठ माह बाद भी पालना न होने पर भारी नाराजगी और रोष व्यक्त करते हुए किया जा रहा है। महापड़ाव शुरू करने से पहले, धरणार्थी नगर परिषद पार्क में इकट्ठा हुए और नारेबाजी करते हुए पैदल मार्च कर जिला कलक्टर कार्यालय पहुंचे, जिसके बाद जिला कलक्टर कार्यालय के सामने नारेबाजी करते हुए अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू किया गया। इस महापड़ाव में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं भी शामिल हैं। निर्जला एकादशी के दिन महिलाओं ने मंदिर न जा पाने के कारण महापड़ाव स्थल पर ही भजन-कीर्तन कर भक्तिमय माहौल बना दिया, लेकिन उनकी मांगों को लेकर उनके तेवर बेहद सख्त नजर आए। सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शुक्लावास और सचिव कैलाश यादव ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन संवेदनहीन बना हुआ है। उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी में महापड़ाव स्थल पर सुलभ शौचालय और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जिससे आंदोलनरत महिलाओं और उनके साथ आए छोटे बच्चों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद, प्रशासन पूरी तरह से मस्त और सुस्त बना हुआ है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते उनकी वाजिब मांगों पर ध्यान नहीं दिया और उनका समाधान नहीं किया, तो शुक्रवार से धरना स्थल पर ही क्रमिक अनशन के रूप में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। राधेश्याम शुक्लावास और कैलाश यादव ने दोहराया कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों को पूरा नहीं करता, यह आंदोलन थमने वाला नहीं है, और प्रशासन की सुस्ती ही उन्हें आंदोलन को और अधिक उग्र बनाने पर मजबूर कर रही है।
- कोटपूतली-बहरोड़ जिले में हुए प्रशासनिक फेरबदल के बाद, नवनियुक्त पुलिस उपाधीक्षक (DySP) लक्ष्मी सुथार ने आज अपना आधिकारिक पदभार ग्रहण कर लिया। कार्यभार संभालने से ठीक पहले, DySP सुथार ने उपखंड कार्यालय परिसर में स्थित सिद्ध गणेश मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया। उन्होंने इस दौरान क्षेत्र में अमन, चैन और सुख-समृद्धि की कामना की। पदभार ग्रहण करने के दौरान, कार्यालय के अधीनस्थ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने गुलदस्ता भेंट कर नई महिला अधिकारी का गर्मजोशी से स्वागत किया। 'जनता सेवा लाईव-84 न्यूज़' से हुई बातचीत में, DySP सुथार ने कार्यभार संभालने के बाद अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि कोटपूतली और आसपास के ग्रामीण अंचलों में कानून व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ कर एक अपराध मुक्त क्षेत्र बनाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। इसके साथ ही, उन्होंने त्वरित जनसुनवाई पर जोर दिया, ताकि आम जनता को अपनी समस्याओं के लिए भटकना न पड़े और शिकायतों का तुरंत व निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित हो सके। DySP सुथार ने जनता और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर कम्युनिटी पुलिसिंग को बढ़ावा देने की बात भी कही।1
- राष्ट्रीय जाट महासभा ने सोडावास में अपने नए कार्यालय का विधिवत और भव्य उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम समाज के गणमान्य व्यक्तियों और पदाधिकारियों की उपस्थिति में उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। उद्घाटन समारोह की शुरुआत जाट समाज के महापुरुषों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर और उनके आदर्शों को स्मरण करते हुए की गई। इस अवसर पर, जिला उपाध्यक्ष शीशराम कोक ने महापुरुषों के जीवन संघर्ष, त्याग और समाज के प्रति उनके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला, साथ ही युवाओं को उनके पदचिन्हों पर चलने का संदेश दिया। जिला सचिव विनोद चौधरी ने स्पष्ट किया कि यह नया कार्यालय समाज के संगठन को मजबूती प्रदान करेगा और सामाजिक, शैक्षणिक तथा युवा गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। इस कार्यक्रम में तहसील अध्यक्ष मनजीत सिंह चौधरी, जिला सोशल मीडिया प्रभारी संजय चौधरी भानोत, तहसील उपाध्यक्ष श्री राम डबास, तहसील मीडिया प्रभारी नरेश जाट, जिला सदस्य राजवीर चौधरी और मुकेश डबास सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य लोगों ने समाज में एकता, शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा देने का संकल्प दोहराया। अंत में, सभी ने मिलकर संगठन को और अधिक सशक्त बनाने तथा समाज हित में निरंतर कार्य करने का दृढ़ संकल्प लिया। यह पूरा कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।1
- अलवर के मत्स्य औद्योगिक क्षेत्र में सार्वजनिक और सुलभ शौचालयों की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण यहाँ कार्यरत मजदूरों, कर्मचारियों, ड्राइवरों और आगंतुकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विशेष रूप से महिलाओं और दूर-दराज से आने वाले वाहन चालकों के लिए यह समस्या गंभीर बनी हुई है। स्थानीय लोगों और श्रमिकों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता किसी भी क्षेत्र के विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है, लेकिन इस मामले में विकास के दावे खोखले साबित हुए हैं क्योंकि शौचालय तक की मूलभूत सुविधा नहीं है, जिससे ड्राइवर और श्रमिक परेशान हैं। संबंधित विभागों को इस ओर तत्काल ध्यान देकर शीघ्र समाधान करने की मांग की गई है।1
- अलवर जिले की आशा सहयोगिनियों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों के समाधान की अपील करते हुए एक मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने बताया कि वे वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बनकर कार्य कर रही हैं और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसके बावजूद, उनकी समस्याओं का समाधान अब तक नहीं हो पाया है, और उन्हें अपेक्षित सुविधाएं व सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल रही है। आशा सहयोगिनियों ने ज्ञापन में अपनी भूमिका को रेखांकित किया, जिसमें गर्भवती महिलाओं की देखभाल, नवजात शिशुओं की निगरानी, टीकाकरण अभियान, परिवार कल्याण कार्यक्रम, पोषण अभियान और विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं का सफल क्रियान्वयन शामिल है। उनकी प्रमुख मांगों में उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना, लंबित क्लेम एवं प्रोत्साहन राशि का एकमुश्त भुगतान करना, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन सुविधा लागू करना और केवल स्वास्थ्य विभाग से संबंधित कार्य ही उनसे करवाना शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि विभिन्न विभागों के अतिरिक्त कार्यों का बोझ बढ़ने से उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आशा सहयोगिनियों ने सरकार से इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे चरणबद्ध आंदोलन करने के लिए विवश होंगी। इस दौरान अध्यक्ष राजवती, सचिव अनिता, कोषाध्यक्ष अनीता, माया सैनी, सुनीता, संतोष, कविता, मनीषा, सोनू, राधा, नीलम, मीरा, ललिता, रविता, सीमा सहित बड़ी संख्या में आशा सहयोगिनियां मौजूद थीं, जिन्होंने एकजुट होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज़ उठाई और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।4
- एडवोकेट संगीता ने डॉ. BR अम्बेडकर राष्ट्रीय स्मारक का भ्रमण करने से पहले एक बयान दिया।1
- जयपुर रेंज के आईजी राहुल प्रकाश ने खैरथल का दौरा किया, जहाँ उन्होंने पुलिस अधिकारियों की एक क्राइम मीटिंग ली। इस बैठक में साइबर अपराधों सहित विभिन्न आपराधिक मामलों की समीक्षा की गई। बाद में मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में आईजी राहुल प्रकाश ने बताया कि बैठक में पुलिस मुख्यालय की प्राथमिकताओं, अपराध नियंत्रण और लंबित मामलों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। आईजी राहुल प्रकाश ने इस दौरान जिला पुलिस अधीक्षक ब्रजेश उपाध्याय के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे साइबर अपराधों की रोकथाम और अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए लगातार सराहनीय कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में इस क्षेत्र में और भी बेहतर परिणाम सामने आएंगे। सामाजिक पुलिसिंग के विषय पर जोर देते हुए, आईजी ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्य व्यक्ति किसी दुःख, परेशानी या पीड़ा के कारण ही थाने तक पहुँचता है, इसलिए उसकी बात को धैर्यपूर्वक सुनना और उचित सहायता प्रदान करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। आईजी ने यह भी कहा कि पुलिस थानों में स्थापित स्वागत कक्ष का उद्देश्य आमजन को बेहतर वातावरण और सहज सुनवाई उपलब्ध कराना है। उन्होंने पुलिसकर्मियों से जनसंपर्क को मजबूत करने तथा आमजन के प्रति सकारात्मक और सहयोगात्मक व्यवहार अपनाने का संदेश दिया।1
- अलवर में एक पुलिस कर्मचारी को बिना हेलमेट के घूमते हुए देखा गया है, जिस पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जनता पूछ रही है कि जब प्रशासन स्वयं हेलमेट पहनने के नियमों का पालन नहीं कर रहा है, तो आम लोग इन नियमों का पालन कैसे करेंगे? साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि बिना हेलमेट घूम रहे इन पुलिसकर्मियों का चालान कौन काटेगा।1
- कोटपूतली-बहरोड़ जिले में जोधपुरा संघर्ष समिति ने अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्ट्रेट पर अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू कर दिया है। यह आंदोलन एनजीटी (राष्ट्रीय हरित अधिकरण) के आदेशों की आठ माह बाद भी पालना न होने पर भारी नाराजगी और रोष व्यक्त करते हुए किया जा रहा है। महापड़ाव शुरू करने से पहले, धरणार्थी नगर परिषद पार्क में इकट्ठा हुए और नारेबाजी करते हुए पैदल मार्च कर जिला कलक्टर कार्यालय पहुंचे, जिसके बाद जिला कलक्टर कार्यालय के सामने नारेबाजी करते हुए अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू किया गया। इस महापड़ाव में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं भी शामिल हैं। निर्जला एकादशी के दिन महिलाओं ने मंदिर न जा पाने के कारण महापड़ाव स्थल पर ही भजन-कीर्तन कर भक्तिमय माहौल बना दिया, लेकिन उनकी मांगों को लेकर उनके तेवर बेहद सख्त नजर आए। सामाजिक कार्यकर्ता राधेश्याम शुक्लावास और सचिव कैलाश यादव ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन संवेदनहीन बना हुआ है। उन्होंने बताया कि भीषण गर्मी में महापड़ाव स्थल पर सुलभ शौचालय और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जिससे आंदोलनरत महिलाओं और उनके साथ आए छोटे बच्चों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद, प्रशासन पूरी तरह से मस्त और सुस्त बना हुआ है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते उनकी वाजिब मांगों पर ध्यान नहीं दिया और उनका समाधान नहीं किया, तो शुक्रवार से धरना स्थल पर ही क्रमिक अनशन के रूप में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। राधेश्याम शुक्लावास और कैलाश यादव ने दोहराया कि जब तक प्रशासन उनकी मांगों को पूरा नहीं करता, यह आंदोलन थमने वाला नहीं है, और प्रशासन की सुस्ती ही उन्हें आंदोलन को और अधिक उग्र बनाने पर मजबूर कर रही है।1