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दमोह के बटियागढ़ ब्लॉक के कनोरा कला के आदिवासियों ने एकता परिषद के बैनर तले कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा है।
सचिन सिंह राजपूत प्रदेश समय
दमोह के बटियागढ़ ब्लॉक के कनोरा कला के आदिवासियों ने एकता परिषद के बैनर तले कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा है।
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- जन संगठन एकता परिषद के बैनर तले दमोह जिले के बटियागढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम कनौरा कला के पीड़ित आदिवासी महिला-पुरुष बरसते पानी में पैदल चलकर जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। उन्होंने वन विभाग द्वारा किए जा रहे कथित अन्याय, अत्याचार, तानाशाही और अवैध कदाचार के विरोध में डिप्टी कलेक्टर के माध्यम से कलेक्टर प्रताप नारायण सिंह यादव को ज्ञापन सौंपकर अपने अधिकारों की पुरजोर मांग की। एकता परिषद के जिला समन्वयक सुजात खान, शिवलाल आदिवासी, बलराम पटेल, मोहन सिंह आदिवासी, रामकली बाई आदिवासी, रेखा रानी, कौशल बाई, प्रेम लाल, गोवर्धन, ज्ञानी सिंह, तुलसा रानी और बाबू आदिवासी सहित अन्य पीड़ितों ने बताया कि जिला प्रशासन और जनजातीय विभाग दमोह द्वारा वनाधिकार कानून के लंबित दावों के निराकरण में लगातार जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि 22 दिसंबर 2025 की जिला समन्वय बैठक में लिए गए निर्णयों पर समय सीमा में आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी लापरवाही के कारण बरसों से वन भूमि पर काबिज पात्र आदिवासियों को वन विभाग जबरन बेदखल कर रहा है। आदिवासियों के अनुसार, विगत 19 जुलाई 2026 को वन विभाग की टीम ने तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाते हुए आदिवासियों के खेतों में बनी लगभग 26 झोपड़ियों को बर्बाद कर दिया और वहां रखा राशन-पानी व कृषि संबंधी सामान लूट ले गए। इस दौरान हथियारों से लैस वन कर्मियों ने वर्दी का खौफ दिखाकर आदिवासियों, महिलाओं और बच्चों के साथ मारपीट व अभद्र गाली-गलौज की और उन्हें विस्थापित कर दिया, जिससे ये परिवार दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। मध्य प्रदेश एकता परिषद के जिलाध्यक्ष सुजात खान ने आरोप लगाया कि जिले में वन विभाग, पन्ना टाइगर रिजर्व बफर जोन प्रबंधन और नौरादेही अभ्यारण्य प्रबंधन द्वारा लगातार आदिवासियों और वनवासियों के साथ इसी तरह का अवैध व अनैतिक व्यवहार कर उन्हें भूमिहीन व बेघर बनाया जा रहा है। तथाकथित विकास के नाम पर उन्हें भय, भूख, गरीबी और पलायन के दलदल में धकेला जा रहा है, जिससे पूरे जिले के आदिवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। एकता परिषद ने मांग की है कि कनौरा कला सहित दमोह के सभी गरीब आदिवासियों के लंबित दावों का निराकरण किया जाए, त्रुटिपूर्ण दावों में सुधार हो, उन्हें भू-राजस्व पट्टे दिए जाएं और इस प्रकार की गुंडागर्दी पूर्ण बेदखली की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए। इसके साथ ही, वनाधिकार कानून, भू-राजस्व कानून, विस्थापन और आजीविका के मुद्दों के स्थायी व शांतिपूर्ण समाधान के लिए जिला स्तर पर शीघ्र जिला समन्वय बैठक बुलाने की भी पुरजोर मांग की गई है।1
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