स्टोक गाँव में दो दिवसीय गुरु त्सेचु मठ उत्सव का आयोजन स्टोक, लेह: लद्दाख के विभिन्न गाँवों में हर वर्ष स्थानीय बौद्ध परंपराओं और धार्मिक आस्था के अनुरूप पारंपरिक उत्सवों का आयोजन किया जाता है। इसी परंपरा के तहत स्टोक गाँव में भी हर वर्ष गुरु त्सेचु का दो दिवसीय मठ उत्सव श्रद्धा और धार्मिक आस्था के साथ आयोजित किया जाता है। गुरु त्सेचु उत्सव के दौरान मठ परिसर में बौद्ध धार्मिक परंपराओं के अनुसार विभिन्न पूजा-अनुष्ठान, प्रार्थनाएँ तथा पारंपरिक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस अवसर पर स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ लद्दाख के विभिन्न क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग उत्सव में शामिल होने के लिए स्टोक पहुँचते हैं। उत्सव के दौरान पारंपरिक बौद्ध संस्कृति, धार्मिक अनुष्ठानों और स्थानीय परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। यह वार्षिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध बौद्ध एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गुरु त्सेचु के अवसर पर स्टोक गाँव में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और अन्य आगंतुकों का भी स्वागत किया जाता है। दो दिवसीय यह उत्सव स्थानीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर वर्ष लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिलता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे पारंपरिक उत्सवों के माध्यम से लद्दाख की सदियों पुरानी धार्मिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक परंपराओं को संरक्षित करने तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने में मदद मिलती है। उत्सव की तारीखें और स्थान जोड़ें दोहराव कम करके समाचार संक्षिप्त करें कार्यक्रमों का क्रम स्पष्ट करें
स्टोक गाँव में दो दिवसीय गुरु त्सेचु मठ उत्सव का आयोजन स्टोक, लेह: लद्दाख के विभिन्न गाँवों में हर वर्ष स्थानीय बौद्ध परंपराओं और धार्मिक आस्था के अनुरूप पारंपरिक उत्सवों का आयोजन किया जाता है। इसी परंपरा के तहत स्टोक गाँव में भी हर वर्ष गुरु त्सेचु का दो दिवसीय मठ उत्सव श्रद्धा और धार्मिक आस्था के साथ आयोजित किया जाता है। गुरु त्सेचु उत्सव के दौरान मठ परिसर में बौद्ध धार्मिक परंपराओं के अनुसार विभिन्न पूजा-अनुष्ठान, प्रार्थनाएँ तथा पारंपरिक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस अवसर पर स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ लद्दाख के विभिन्न क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग उत्सव में शामिल होने के लिए स्टोक पहुँचते हैं। उत्सव के दौरान पारंपरिक बौद्ध संस्कृति, धार्मिक अनुष्ठानों और स्थानीय परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। यह वार्षिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध बौद्ध एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गुरु त्सेचु के अवसर पर स्टोक गाँव में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और अन्य आगंतुकों का भी स्वागत किया जाता है। दो दिवसीय यह उत्सव स्थानीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर वर्ष लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिलता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे पारंपरिक उत्सवों के माध्यम से लद्दाख की सदियों पुरानी धार्मिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक परंपराओं को संरक्षित करने तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने में मदद मिलती है। उत्सव की तारीखें और स्थान जोड़ें दोहराव कम करके समाचार संक्षिप्त करें कार्यक्रमों का क्रम स्पष्ट करें
- ‘Voices Against Drugs’ युवा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन लेह, लद्दाख | 20 अगस्त 2026: युवाओं को नशे के बढ़ते दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने तथा समाज में नशामुक्ति का संदेश मजबूत करने के उद्देश्य से LASMoN Society, UT Ladakh द्वारा 20 अगस्त 2026 को लेह में “Voices Against Drugs” युवा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि छोसक्योंग पालगा रिनपोछे उपस्थित रहे। कार्यक्रम में डॉ. टी.सी. सतीश (Medeor Hospital, Dubai, UAE), सुचेथा/सुचिता सतीश, दोरजे स्तक्मो, पद्मा आंगमो, डिप्टी एसपी रेशब सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अतिथियों, युवाओं और प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने युवाओं को तंबाकू, शराब और नशीले पदार्थों से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी तथा नशे से दूर रहकर स्वस्थ और सकारात्मक जीवन अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम में पुलिस बैंड के श्री त्सेरिंग मुतुप ने भी सहभागिता की। कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं को अपनी प्रतिभा, ऊर्जा और रचनात्मकता का उपयोग समाज के सकारात्मक बदलाव के लिए करने के लिए प्रेरित किया गया। LASMoN Society, UT Ladakh के अध्यक्ष त्सेवांग दोरजेय ने कहा कि संस्था पिछले कई महीनों से लद्दाख में नशे और शराब के खिलाफ लगातार जागरूकता अभियान चला रही है। संस्था का उद्देश्य युवाओं, विद्यार्थियों, अभिभावकों और समुदाय को साथ लेकर एक सुरक्षित, स्वस्थ और नशामुक्त लद्दाख के निर्माण की दिशा में काम करना है। कार्यक्रम में युवाओं को विशेष रूप से यह संदेश दिया गया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाना प्रत्येक नागरिक की सामाजिक जिम्मेदारी है। युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ही नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान को मजबूत बनाया जा सकता है। कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा: “Voices Against Drugs — नशे के खिलाफ अपनी आवाज़ उठाएँ, जीवन को चुनें।2
- चंबा-किलाड़ सड़क को राष्ट्रीय महत्व की रणनीतिक परियोजना का दर्जा रक्षा मंत्रालय ने Strategic Project of National Importance में किया शामिल, NHDL मानकों के अनुरूप निर्माण पर होगा विचार कृष्ण चंद राणा जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी की सड़क कनेक्टिविटी को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने चंबा-किलाड़ सड़क परियोजना को Strategic Project of National Importance यानी राष्ट्रीय महत्व की रणनीतिक परियोजना के रूप में सूचीबद्ध किया है। रक्षा मंत्रालय के डी (बीआर-I) अनुभाग की ओर से 13 अगस्त 2026 को जारी कार्यालय ज्ञापन में देश की महत्वपूर्ण रणनीतिक सड़क परियोजनाओं की सूची जारी की गई है। इसमें चंबा-किलाड़ सड़क को भी शामिल किया गया है। रक्षा मंत्रालय के कार्यालय ज्ञापन संख्या MoD/04/937/2024/D (BR-I) के अनुसार चंबा-किलाड़ सड़क को NHDL specification के अनुरूप विकसित करने के लिए ग्रीनफील्ड सड़क के निर्माण पर विचार किया जाएगा। दस्तावेज में चंबा से किलाड़ तक कनेक्टिविटी के लिए ग्रीनफील्ड सड़क के प्रस्तावित अलाइनमेंट पर विचार करने की बात कही गई है। वहीं, किलाड़ से आगे लेह तक कनेक्टिविटी मौजूदा अथवा निर्माणाधीन सड़कों के माध्यम से प्रस्तावित की गई है। रणनीतिक रोड हेड फंड से होगा विकास ज्ञापन के अनुसार सूचीबद्ध सड़क परियोजनाओं का विकास एवं रखरखाव Strategic Road Head Fund के माध्यम से सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन किया जाएगा। परियोजनाओं की अंतर-प्राथमिकता DGMO की ओर से निर्धारित की गई है। चंबा-किलाड़ सड़क को इस सूची में शामिल किए जाने से पांगी घाटी की दीर्घकालीन सड़क कनेक्टिविटी को लेकर नई उम्मीद जगी है। पांगी की भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं और भारी बर्फबारी के कारण वर्ष के कई महीनों तक सड़क संपर्क प्रभावित रहता है। ऐसे में चंबा से किलाड़ तक आधुनिक मानकों के अनुरूप वैकल्पिक और रणनीतिक सड़क विकसित होने से क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूती मिलने की उम्मीद है। किलाड़ से आगे लेह तक सड़क नेटवर्क से जुड़ाव की प्रस्तावित व्यवस्था इस परियोजना के रणनीतिक महत्व को और बढ़ाती है। वांगतू-मुद-अत्तरगू सड़क भी सूची में रक्षा मंत्रालय के इसी कार्यालय ज्ञापन में हिमाचल प्रदेश की वांगतू-मुद-अत्तरगू सड़क को भी NHDL specification के अनुरूप निर्माण के लिए शामिल किया गया है। दस्तावेज में इसे हिमाचल प्रदेश में वैकल्पिक axial connectivity उपलब्ध करवाने वाली परियोजना बताया गया है। पांगी की कनेक्टिविटी को मिलेगा नया आधार : डॉ. जनक राज भरमौर-पांगी के विधायक डॉ. जनक राज ने कहा कि चंबा-किलाड़ सड़क को राष्ट्रीय महत्व की रणनीतिक परियोजना में शामिल किया जाना पांगी क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पांगी की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए क्षेत्र को बेहतर और सुरक्षित सड़क कनेक्टिविटी की आवश्यकता है। केंद्र सरकार के इस निर्णय से चंबा-किलाड़ सड़क के विकास को रणनीतिक दृष्टि से नई दिशा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय के ज्ञापन में चंबा से किलाड़ तक ग्रीनफील्ड अलाइनमेंट और NHDL specification के अनुरूप सड़क विकसित करने पर विचार किया गया है। साथ ही किलाड़ से आगे लेह तक मौजूदा अथवा निर्माणाधीन सड़कों के माध्यम से कनेक्टिविटी का प्रस्ताव है। इससे पांगी को व्यापक सड़क नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार हुआ है। विधायक ने कहा कि अब परियोजना के सर्वेक्षण, अलाइनमेंट, तकनीकी प्रक्रिया और निर्माण से संबंधित आगामी कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि चंबा-किलाड़ सड़क परियोजना पांगी के विकास, पर्यटन, स्थानीय अर्थव्यवस्था और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि परियोजना को आगामी चरणों में प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।2
- Sajad Lone Corners Government Over Free Electricity Promises// Handwara MLA Sajad Gani Lone sharply criticized the National Conference-led administration after official data provided to him revealed a steep power tariff hike. The revision is projected to extract an additional ₹251 crore from consumers during the 2026–27 fiscal year. Lone slammed the government for burdening the public instead of delivering on its poll promise of 200 units of free power. Additionally, data provided to Lone confirmed that 11 lakh smart meters have been installed across J&K since October 20241
- Desperate for Jobs, Yet Offices Sit Empty: Why Are 64,439 Government Posts Still Vacant in Jammu & Kashmir? Desperate for Jobs, Yet Offices Sit Empty: Why Are 64,439 Government Posts Still Vacant in Jammu & Kashmir? #JammuAndKashmir #JKNews #UnemploymentCrisis #JKJobs #JKAssembly #JKSSB #JKPSC #KashmirUpdates #YouthEmployment #PublicHealthcare #SrinagarNews1
- ‘मेरी सरकार नहीं’ कहने वाले विधायक बताएं, इतने सालों में विधायक निधि कहाँ खर्च की: जीवन ठाकुर1
- Excise, Police destroy cannabis growth in Sadderbagh Serch Excise, Police destroy cannabis growth in Sadderbagh Serch GANDERBAL, 22 September 2026 — The Excise Department, assisted by the Police Department, carried out a destruction drive today in Sadderbagh Serch village, Tehsil Ganderbal. Authorities uprooted and destroyed approximately 11 kanals of wild cannabis growth, primarily found along roadsides. Officials said the operation aimed to remove illegal drug vegetation that poses public-safety and law-enforcement concerns. No arrests were reported during the drive.1
- 52 पंचायतों के प्रतिनिधियों को दिया जा रहा बुनियादी प्रशिक्षण 52 पंचायतों के प्रतिनिधियों को दिया जा रहा बुनियादी प्रशिक्षण योजनाओं और विभागीय कार्यप्रणाली की दी जा रही जानकारी स्वच्छता पखवाड़ा की दिलाई शपथ लोकेशन-नूरपुर, भूषण शर्मा एंकर -जिला कांगड़ा के नूरपुर विकास खंड की 52 पंचायतों के पंचायत प्रतिनिधियों को चरणबद्ध तरीके से बुनियादी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में चार से पांच पंचायतों के प्रतिनिधियों को एक चरण में शामिल किया जा रहा है। इस दौरान विभिन्न विभागों के अधिकारी पंचायत प्रतिनिधियों को सरकार की विकास योजनाओं, विभागीय कार्यप्रणाली तथा उनके अधिकारों और दायित्वों की विस्तृत जानकारी दे रहे हैं। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों की कार्यक्षमता को बढ़ाना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को अधिक प्रभावी एवं योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना है। अधिकारियों द्वारा पंचायत प्रतिनिधियों को ग्रामीण विकास से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं, उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया तथा पंचायत स्तर पर निभाई जाने वाली जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी जा रही है। कार्यक्रम के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों को विभिन्न विभागों की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने, विकास कार्यों की निगरानी करने और पंचायत स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित करने के संबंध में भी जानकारी दी गई। चरणबद्ध प्रशिक्षण के माध्यम से सभी 52 पंचायतों के प्रतिनिधियों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जा रहा है। इस अवसर पर 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले स्वच्छता पखवाड़े के तहत पंचायत प्रतिनिधियों को स्वच्छता की शपथ भी दिलाई गई। प्रतिनिधियों ने अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों में स्वच्छता को बढ़ावा देने, लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने तथा स्वच्छ वातावरण बनाए रखने में सहयोग देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में खंड समन्वयक स्वच्छ भारत मिशन सन्नी शाहन भी मौजूद रहे। उन्होंने स्वच्छता अभियान को सफल बनाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। बाइट- अशोक कुमार, खंड विकास अधिकारी नूरपुर1
- स्टोक गाँव में दो दिवसीय गुरु त्सेचु मठ उत्सव का आयोजन स्टोक, लेह: लद्दाख के विभिन्न गाँवों में हर वर्ष स्थानीय बौद्ध परंपराओं और धार्मिक आस्था के अनुरूप पारंपरिक उत्सवों का आयोजन किया जाता है। इसी परंपरा के तहत स्टोक गाँव में भी हर वर्ष गुरु त्सेचु का दो दिवसीय मठ उत्सव श्रद्धा और धार्मिक आस्था के साथ आयोजित किया जाता है। गुरु त्सेचु उत्सव के दौरान मठ परिसर में बौद्ध धार्मिक परंपराओं के अनुसार विभिन्न पूजा-अनुष्ठान, प्रार्थनाएँ तथा पारंपरिक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस अवसर पर स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ-साथ लद्दाख के विभिन्न क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग उत्सव में शामिल होने के लिए स्टोक पहुँचते हैं। उत्सव के दौरान पारंपरिक बौद्ध संस्कृति, धार्मिक अनुष्ठानों और स्थानीय परंपराओं की झलक देखने को मिलती है। यह वार्षिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध बौद्ध एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गुरु त्सेचु के अवसर पर स्टोक गाँव में देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और अन्य आगंतुकों का भी स्वागत किया जाता है। दो दिवसीय यह उत्सव स्थानीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और हर वर्ष लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिलता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे पारंपरिक उत्सवों के माध्यम से लद्दाख की सदियों पुरानी धार्मिक, सांस्कृतिक और सामुदायिक परंपराओं को संरक्षित करने तथा आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने में मदद मिलती है। उत्सव की तारीखें और स्थान जोड़ें दोहराव कम करके समाचार संक्षिप्त करें कार्यक्रमों का क्रम स्पष्ट करें1