Shuru
Apke Nagar Ki App…
नगर पंचायत आलमनगर में स्थित एक स्कूल की हालत बेहद दयनीय हो गई है, जहाँ पूरा स्कूल भवन बंजर हो चुका है। इस गंभीर दुर्दशा के कारण, छात्रों की पढ़ाई अभी तक 'मारी के घर' में संचालित की जा रही है। लोगों ने स्थानीय विधायक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या उन्हें इस स्कूल की खराब हालत और इसे बनवाने की आवश्यकता दिखाई नहीं देती है।
Pintu Bihari
नगर पंचायत आलमनगर में स्थित एक स्कूल की हालत बेहद दयनीय हो गई है, जहाँ पूरा स्कूल भवन बंजर हो चुका है। इस गंभीर दुर्दशा के कारण, छात्रों की पढ़ाई अभी तक 'मारी के घर' में संचालित की जा रही है। लोगों ने स्थानीय विधायक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या उन्हें इस स्कूल की खराब हालत और इसे बनवाने की आवश्यकता दिखाई नहीं देती है।
More news from Madhepura and nearby areas
- मधेपुरा जिले की आलमनगर विधानसभा के भीतर स्कूलों की हालत बेहद खराब है, जिससे छात्रों को पढ़ाई करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। आलमनगर विधानसभा के नगर पंचायत वार्ड नंबर 2 और सोनबरसा वार्ड नंबर 2 में स्कूलों की स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि वे पूरी तरह से बदहाल दिखाई देते हैं, जिसके कारण बच्चे बेहद मुश्किल हालात में अपनी पढ़ाई जारी रखने को मजबूर हैं।1
- एक नाली से लगातार गंदा पानी बह रहा है। इसे तत्काल प्रभाव से बंद करने की मांग की गई है।1
- भागलपुर जिले के नौगछिया स्थित लत्तीपाकर से दरहरा तक की सड़क पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है। विशेष रूप से बारिश के बाद इस सड़क की हालत बेहद खराब हो गई है। बताया गया है कि पिछली बार वीडियो बनाने के बाद भी सड़क की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। इस समस्या को उजागर करने के लिए वीडियो को अधिक से अधिक साझा करने का आग्रह किया गया है।1
- पूर्णिया जिले के बनमनखी विधानसभा क्षेत्र के बी कोठी प्रखंड अंतर्गत रसदामपुर पंचायत में मुकुरजान चौक से सुखासन कोठी तक जाने वाले रोड की स्थिति का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही, बनमनखी विधानसभा क्षेत्र के इसी बी कोठी प्रखंड में स्थित रसदामपुर पंचायत के मुकुरजान गांव की वर्तमान स्थिति के बारे में भी जानकारी मांगी गई है।1
- खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड स्थित भरतखंड गांव का ऐतिहासिक मुगलकालीन महल "52 कोठरी, 53 द्वार" एक बार फिर सुर्खियों में है। यह बेशकीमती धरोहर, जो वर्षों से उपेक्षा का शिकार रही है, अब पर्यटन के नक्शे पर जगह बनाने की उम्मीद जगा रही है। इसी क्रम में, कला एवं संस्कृति विभाग की एक टीम ने महल का निरीक्षण कर इसके संरक्षण और पर्यटन विकास की संभावनाओं का आकलन किया है। 17वीं शताब्दी में निर्मित इस अद्भुत महल में 52 कोठरियां, 53 द्वार, एक गुप्त सुरंग, रानी स्नान तालाब और अलग-अलग ध्वनि उत्पन्न करने वाले खंभे आज भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। विभागीय अधिकारियों ने इस निरीक्षण की रिपोर्ट सरकार को भेजने की बात कही है। वहीं, ग्रामीणों ने पुरज़ोर ढंग से मांग दोहराई है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित कर एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए।1
- लखीसराय के चानन प्रखंड के कछुआ में मंगलवार को आदिवासी किसान परिवारों की आय बढ़ाने और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के तहत उच्च मूल्य वाले उद्यानिक पौधों का वितरण किया गया और किसानों ने जैविक खेती की शपथ ली। यह आयोजन जिला प्रशासन लखीसराय के मार्गदर्शन में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र लखीसराय, जिला कृषि कार्यालय और जिला उद्यान कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार, डीडीसी सुमित कुमार, प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रिया कुमारी सहित कृषि विभाग और जीविका के कई अधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। किसानों के बीच राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, भागलपुर द्वारा उपलब्ध कराए गए नींबू के उच्च मूल्य वाले उद्यानिक पौधों का वितरण किया गया। जिला पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छ वातावरण और जलवायु स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है और उन्होंने प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाकर पर्यावरण व मानव स्वास्थ्य की रक्षा करने की अपील की। उन्होंने स्थानीय किसान ऋषुदेव बिंद का उदाहरण भी दिया, जो स्ट्रॉबेरी की खेती से प्रतिवर्ष लगभग दो लाख रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। अधिकारियों ने हरित क्रांति के बाद रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से मिट्टी, केंचुओं और पर्यावरण को हुए नुकसान पर प्रकाश डालते हुए जैविक खेती की ओर लौटने का आह्वान किया, ताकि भूमि, जल और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखा जा सके। कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि जैविक प्रमाणन से जुड़ी संस्था किसानों की मिट्टी की जांच करेगी और उसके गुणवत्ता का आकलन करेगी। इसके अतिरिक्त, किसानों के बीज और जैविक उत्पादों के विपणन के लिए एक संगठन का गठन किया जाएगा, जिससे उन्हें बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं करेंगे, मिट्टी, जल, पर्यावरण और जैव विविधता का संरक्षण करेंगे तथा अन्य किसानों को भी जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे। इस पूरे कार्यक्रम का उद्देश्य आदिवासी किसान परिवारों को आत्मनिर्भर बनाते हुए उनकी आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना रहा।4
- नगर पंचायत आलमनगर में स्थित एक स्कूल की हालत बेहद दयनीय हो गई है, जहाँ पूरा स्कूल भवन बंजर हो चुका है। इस गंभीर दुर्दशा के कारण, छात्रों की पढ़ाई अभी तक 'मारी के घर' में संचालित की जा रही है। लोगों ने स्थानीय विधायक की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या उन्हें इस स्कूल की खराब हालत और इसे बनवाने की आवश्यकता दिखाई नहीं देती है।1
- बैजनाथपुर चौक पर उत्पन्न समस्या अब एक ऐतिहासिक स्वरूप ले चुकी है, जिसे लोग अपने जीवनकाल में शायद ही भूल पाएंगे। यह कुछ महीनों की नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही परेशानी है, जिसे लेकर हुए कष्ट को भुला पाना लोगों के लिए मुश्किल है। जहाँ एक ओर सरकार फ्लाईओवर निर्माण को लेकर अपनी वाहवाही लूटने का प्रयास कर रही है, वहीं यह फ्लाईओवर स्थानीय लोगों के लिए एक सिरदर्द बनकर उभरा है, जिसने कई गंभीर समस्याओं को जन्म दिया है। फ्लाईओवर के नीचे से गुजरने वाला सड़क मार्ग बारिश के दिनों में पूरी तरह जलमग्न हो जाता है, जिसके कारण न जाने कितने लोग और वाहन चालक दुर्घटनाओं का शिकार हो चुके हैं। स्थिति यह है कि जब कोई दुकानदार अपनी दुकान के सामने मिट्टी भरता भी है, तो उसे डरा-धमकाकर हटवा दिया जाता है, जिससे सड़क मार्ग जलमग्न रहता है। मिट्टी हटाने के बावजूद कई वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन सड़क निर्माण कार्य अभी तक पूरा नहीं किया गया है, जो सरकार की घोर नाकामी और स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। बैजनाथपुर चौक के निवासी इस भारी परेशानी से जूझ रहे हैं और जानना चाहते हैं कि उन्हें इस समस्या से कब निजात मिलेगी।1