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धनबाद के बागमारा-कम-कटरास स्थित गजलीटांड़ क्षेत्र एक बार फिर चर्चा में है, जिससे 1995 के उस काले हादसे की यादें ताजा हो गई हैं। वर्तमान में कतरी नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण खदान में पानी घुसने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इस स्थिति को देखते हुए बीसीसीएल ने मोर्चा संभाल लिया है। खदान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रबंधन द्वारा एहतियाती उपाय और प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
जनता न्यूज़ 24
धनबाद के बागमारा-कम-कटरास स्थित गजलीटांड़ क्षेत्र एक बार फिर चर्चा में है, जिससे 1995 के उस काले हादसे की यादें ताजा हो गई हैं। वर्तमान में कतरी नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण खदान में पानी घुसने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इस स्थिति को देखते हुए बीसीसीएल ने मोर्चा संभाल लिया है। खदान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रबंधन द्वारा एहतियाती उपाय और प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
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- बियाडा के पूर्व अध्यक्ष सह समाज सेवी विजय कुमार झा ने बाघमारा और कोयलांचल क्षेत्र में हो रही कोयले की लूट के मुद्दे पर एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने कोयलांचल के विभिन्न हिस्सों में जारी अवैध खनन और लूट को लेकर अपनी बात रखी और मामले को जनता के सामने उठाया।1
- धनबाद के बागमारा-कम-कटरास स्थित गजलीटांड़ क्षेत्र एक बार फिर चर्चा में है, जिससे 1995 के उस काले हादसे की यादें ताजा हो गई हैं। वर्तमान में कतरी नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण खदान में पानी घुसने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। इस स्थिति को देखते हुए बीसीसीएल ने मोर्चा संभाल लिया है। खदान की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रबंधन द्वारा एहतियाती उपाय और प्रयास तेज कर दिए गए हैं।1
- विश्व मत्स्य दिवस के अवसर पर शुक्रवार को धनबाद के हीरापुर स्थित जिला मत्स्य कार्यालय में एक विशेष कार्यक्रम और कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस आयोजन में संयुक्त मत्स्य निदेशक संजय कुमार गुप्ता, जिला मत्स्य पदाधिकारी उषा किरण और बड़ी संख्या में मत्स्य किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर चर्चा करना था। संयुक्त मत्स्य निदेशक संजय कुमार गुप्ता ने कहा कि आधुनिक और कृत्रिम प्रजनन तकनीकों के इस्तेमाल से अब मत्स्य पालन की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और लाभदायक हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम झारखंड भर में मनाए जा रहे विश्व मत्स्य दिवस के क्रम में आयोजित किया गया है। जिला मत्स्य पदाधिकारी उषा किरण ने बताया कि कार्यशाला के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक विधि से मछली पालन, तालाब प्रबंधन, उत्पादन बढ़ाने के उपाय और विभिन्न सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। विभाग का लक्ष्य इन आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि करना और जिले में मत्स्य उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक ले जाना है।2
- बोकारो के उपायुक्त के निर्देश पर जिले के चंद्रपुरा थाना क्षेत्र में एक विशेष छापामारी अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान तरंगा मुख्य पथ के समीप अवैध रूप से स्टोन चिप्स खनिज का परिवहन करते हुए एक मिनी हाइवा को पकड़ा गया। पकड़े गए वाहन को विधिवत रूप से जब्त कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई के लिए इसे चंद्रपुरा थाना के सुपुर्द कर दिया गया है। इस पूरी कार्रवाई में खान निरीक्षक अजय कुमार महतो, खान निरीक्षक सीता राम टुडू और स्थानीय पुलिस बल के जवान शामिल थे।1
- झारखंड के बोकारो जिले में स्थित चंद्रपुरा डीवीसी पावर प्लांट की एक झलक सामने आई है। इस पावर प्लांट परिसर के दृश्य को तस्वीरों में देखा जा सकता है।1
- धनबाद जिले के गोविंदपुर में शुक्रवार दोपहर उत्पाद विभाग की सरकारी शराब दुकान का गोदाम खाली कराने के दौरान जमकर हंगामा हुआ। मकान मालिक ने उत्पाद विभाग की टीम पर आरोप लगाया कि विभाग ने करीब एक वर्ष का बकाया किराया चुकाए बिना ही जबरन गोदाम का शटर और ताला तोड़ दिया और अंदर रखी शराब को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया। इस दौरान मकान मालिक की उत्पाद विभाग के अधिकारियों के साथ तीखी बहस भी हुई, जिसके बाद उन्हें गोविंदपुर थाना ले जाया गया। घटना से बेहद नाराज मकान मालिक ने विभाग पर जबरदस्ती करने और रंगदारी जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि उन्हें इस मामले में न्याय नहीं मिला, तो वे न्यायालय की शरण लेंगे और कानूनी कार्रवाई करेंगे।1
- झारखंड के धनबाद जिले के बाघामारा-सह-कटरास क्षेत्र में अवैध कोयला खदानों में पानी भरने की खबर सामने आई है। इस क्षेत्र में पहले भी एक भीषण हादसे के दौरान 65 लोगों की एक साथ जान जा चुकी है, जिसके बाद अब फिर से वैसी ही तबाही की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर इन अवैध माइंस की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई है।1
- झारखंड के धनबाद स्थित छाताबाद में कोयला खनन के कारण एक भीषण हादसा हुआ है। खनन की गतिविधियों के चलते जमीन का बड़ा हिस्सा धंस गया, जिससे एक पूरा तालाब पाताल लोक की तरह जमीन में समा गया। इस भू-धंसाव की चपेट में आने से आधा दर्जन आवास बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। तबाही की यह तस्वीर स्थानीय स्तर पर बड़ा संकट लेकर आई है, जहाँ कोयला खनन की वजह से जमीन के भीतर खाली हुए स्थान ने आवासीय क्षेत्र को अपनी जद में ले लिया है।1