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आप देख सकते हैं किस तरह से कविता यादव ने एक पुलिया का निर्माण करके गमन किया / यह पुलिया निस्वार्थ भाव से पैसे की लूट की ही बनाया गया था आप देख सकते हैं किस तरह से कविता यादव ने एक पुलिया का निर्माण करके गमन किया / यह पुलिया निस्वार्थ भाव से पैसे की लूट की ही बनाया गया था
Bihar News 24
आप देख सकते हैं किस तरह से कविता यादव ने एक पुलिया का निर्माण करके गमन किया / यह पुलिया निस्वार्थ भाव से पैसे की लूट की ही बनाया गया था आप देख सकते हैं किस तरह से कविता यादव ने एक पुलिया का निर्माण करके गमन किया / यह पुलिया निस्वार्थ भाव से पैसे की लूट की ही बनाया गया था
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- आप देख सकते हैं किस तरह से कविता यादव ने एक पुलिया का निर्माण करके गमन किया / यह पुलिया निस्वार्थ भाव से पैसे की लूट की ही बनाया गया था1
- बक्सर का 15 मिनट का खरबपति मजदूर-खाते में 600 करोड़: पैसा देख चौंककर बोला- इतना पैसा कैसे, निकालने लगा तो अकाउंट फ्रीज हो गया बक्सर में एक मजदूर 15 मिनट के लिए खरबपति बन गया। दरअसल, उसके बैंक अकांउट में 600 करोड़ रुपए आ गए। यह जानकारी उन्हें तब मिली, जब वो बैलेंस चेक करने CSP केंद्र पहुंचा था। इस मामले की जानकारी बैंक अधिकारियों को मिली, फिर वो अकाउंट फ्रीज कर दिया। मजदूरी करने वाला जितेंद्र रविवार को CSP केंद्र पर पैसे निकालने पहुंचा था। जहां बैलेंस चेक कराने के दौरान उसे खाते में रुपए की जानकारी मिली। फिर CSP संचालक ने तत्काल इसकी सूचना बैंक को दी और खाते को फ्रीज किया गया। मामले की सूचना स्थानीय थाने और साइबर थाने को दी गई। सूचना मिलने के बाद थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही जितेंद्र से पूछताछ की जा रही है। CSP केंद्र पर बैलेंस चेक कराने गया था मजदूर हाता थाना क्षेत्र के बड़का राजपुर गांव निवासी जितेंद्र साह ने अपना अकाउंट फीनो बैंक के सीएसपी में खुलवाया था। जितेंद्र साह ने बताया कि मेरे खाते में 478.20 रुपए थे। मैं सीएसपी केंद्र पर खाते में बैलेंस चेक करवाने के लिए गया था। सीएसपी संचालक ने सिस्टम पर दिखाते हुए 6,00,00,00,478.20 रुपए (लगभग 600 करोड़) होने की बात कही। इतनी बड़ी धनराशि देखकर मैं और सीएसपी संचालक दोनों हैरान हो गए।1
- Post by Chandan chook kaup3
- भोजपुर आरा में श्री सिद्धेश्वर नाथ प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ सम्पन्न, हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद आरा। भोजपुर जिले के विश्राम नगर, धनपुरा में आयोजित पांच दिवसीय श्री श्री सिद्धेश्वर नाथ प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ का समापन गुरुवार को भव्य धार्मिक अनुष्ठान के साथ हुआ। 29 मार्च से 2 अप्रैल 2026 तक चले इस महायज्ञ के अंतिम दिन विधि-विधान से भगवान सिद्धेश्वर नाथ की प्राण प्रतिष्ठा की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। महायज्ञ के समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जहां हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला और कार्यक्रम को लेकर लोगों में खासा उत्साह रहा। इस अवसर पर आरा नगर निगम के वार्ड पार्षद एवं वार्ड परिषद प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। सभी जनप्रतिनिधियों ने प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आपसी भाईचारा मजबूत होता है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने महायज्ञ के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि प्राण प्रतिष्ठा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और संस्कृति का प्रतीक है। यह भव्य आयोजन विश्राम नगर वासियों के सहयोग से संपन्न हुआ, जिसमें स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी और समर्पण साफ देखने को मिला।1
- नालंदा के शीतला माता मंदिर में मचे भगदड़ की वजह से 9 महिला श्रद्धालुओं की मृत्यु के बाद उनके शवों को इस तरह अस्पताल में फेंक दिया गया। क्या बिहार में मृत्यु पर भी सरकारी मशीनरी से अपमान और अनदेखी ही मिलेगी? सोचिए, जब मृत्यु के बाद भी इंसान को सम्मान न मिले, तो जिम्मेदारी किसकी है?1
- मां आरण्य देवी (जिन्हें स्थानीय स्तर पर कई बार 'आयरन देवी' कहा जाता है) बिहार के आरा (भोजपुर) शहर की सबसे प्रमुख अधिष्ठात्री देवी हैं। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक (सिद्धपीठ) माना जाता है, जिसका संबंध रामायण काल और पांडवों (महाभारत) से है। यहाँ माँ के महालक्ष्मी और महासरस्वती रूप की पूजा होती है। मां आरण्य देवी के बारे में मुख्य बातें: स्थान: यह मंदिर बिहार के आरा शहर के शीश महल चौक के पास स्थित है। इतिहास और मान्यता: मान्यता है कि पांडवों ने वनवास के दौरान इस स्थान पर देवी की स्थापना की थी। रामायण काल में भी भगवान राम ने यहाँ पूजा की थी। नाम का अर्थ: 'आरण्य' का अर्थ है 'वन' (जंगल)। चूँकि यह क्षेत्र प्राचीन काल में वन (आरण्य) था, इसलिए इन्हें आरण्य देवी कहा जाता है। 'आरा' शहर का नाम भी इन्हीं देवी के नाम पर पड़ा है। प्रतिमा: मंदिर के गर्भगृह में दो प्रमुख प्रतिमाएँ हैं - एक काली (महा सरस्वती) और दूसरी श्वेत (महालक्ष्मी), जो ५ फीट ऊँचे सिंहासन पर विराजमान हैं। महत्व: यह सिद्धपीठ है और नवरात्र के दौरान यहाँ विशेष उत्सव और भारी भीड़ होती है1
- Post by Sushil kumar sharma संपादक1
- Post by Chandan chook kaup3