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haldi ka Rasam Chhote bhai ka ghar ke sare Parivar and rishtedar Sabhi log aamantrit Hain haldi ke darshan mein
SUSHIL MAURYA
haldi ka Rasam Chhote bhai ka ghar ke sare Parivar and rishtedar Sabhi log aamantrit Hain haldi ke darshan mein
- Rahul Rajputबल्लभगढ़, फरीदाबाद, हरियाणाbhai ji aapki haldi ke samay बहुत-बहुत congretchulation19 hrs ago
- Rahul Rajputबल्लभगढ़, फरीदाबाद, हरियाणाbhai ji aap Maurya Ho Ham Rajput Hain Ham aapko nahin jante Ham Rajput Hain gotra hamara pathriya Hai pure Kisan hain from jila badayun ke Hain batchit karni ho to mil Lena aapki haldi ke rasam mein बहुत-बहुत congretchulation19 hrs ago
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- Post by SUSHIL MAURYA1
- अखिल भारत हिन्दू महासभा ने प्रदेश एबं केंद्र सरकार के समक्ष रखीं ११ बड़ी मांगे। हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ सिद्धार्थ भट्टाचार्य ने प्रेस को सम्बोधित करते हुए मांगो के बारे में बताया। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने सरकार से अपील की कि इन मांगो पर शीघ्र कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से संबिधान के दायरे में रहकर अपनी आवाज़ को और बुलंद करेगा। अधिक जानकारी और पूरी बात जानने के लिए देखें पूरी वीडियो...1
- महिलाओं के सपनों को कुचला गया बोले मोदी, बिल फेल होने का फायदा भी मोदी सरकार को, राहुल प्रियंका का हमला जारी और बीजेपी महिलाओं ने प्रदर्शन किया पुतला फूंका... देखिए महिला बिल पास न होने पर राजनीति महात्वाकांक्षा पूरी करने पैंतरे राजपथ न्यूज़ पर...1
- **होली जैसे पवित्र त्योहार पर अशोभनीय व्यवहार से समाज में गलत संदेश, जिम्मेदारी और मर्यादा बनाए रखना जरूरी** देशभर में मनाया जाने वाला रंगों का त्योहार होली खुशियों, भाईचारे और प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग आपसी मतभेद भूलकर एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और खुशी मनाते हैं। लेकिन हाल ही में एक वीडियो सामने आया है जिसमें कुछ लोग होली के मौके पर अशोभनीय तरीके से नाचते हुए नजर आ रहे हैं। इस तरह की गतिविधियां समाज में गलत संदेश फैलाती हैं और त्योहार की गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं। समाज के हर वर्ग की अपनी पहचान और सम्मान होता है, और हर किसी को अपनी अभिव्यक्ति का अधिकार है। लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर इस तरह का व्यवहार करना, खासकर ऐसे त्योहार पर जो सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व रखता है, लोगों की भावनाओं को आहत कर सकता है। बच्चों और युवाओं पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे समाज में गलत उदाहरण स्थापित होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारों के दौरान हमें अपनी जिम्मेदारियों को समझना चाहिए और मर्यादा का पालन करना चाहिए। स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं होता कि हम सामाजिक सीमाओं को नजरअंदाज करें। बल्कि हमें ऐसा आचरण करना चाहिए जिससे समाज में सकारात्मक संदेश जाए और हमारी संस्कृति की गरिमा बनी रहे। आखिरकार, यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम त्योहारों को शालीनता और सम्मान के साथ मनाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा मिल सके और हमारी परंपराएं सुरक्षित रह सकें।1
- भारत की मुश्किलें बढ़ी अब रूस और ईरान से तेल नहीं खरीद पाएगा भारत👇🏻1
- Post by Sonu Kanaujiya1
- Post by सनसनी ऑफ़ इंडिया SANSANI1
- Post by SUSHIL MAURYA1