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एक कार्यक्रम में डॉ. अरविंद कुमार शाही ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस आयोजन के दौरान, विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
Avdhesh kumar raj
एक कार्यक्रम में डॉ. अरविंद कुमार शाही ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस आयोजन के दौरान, विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
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- एक कार्यक्रम में डॉ. अरविंद कुमार शाही ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस आयोजन के दौरान, विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।1
- जमुई जिले के अलीगंज स्थित चंद्रदीप थाना क्षेत्र के सहोड़ा गांव में मुहर्रम जुलूस के मार्ग को लेकर दो समुदायों के बीच उपजा विवाद आपसी सहमति से सुलझा लिया गया है। जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) के निर्देश पर आयोजित शांति समिति की बैठक में दोनों पक्षों ने सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने का संकल्प लिया। ग्रामीणों की जानकारी के अनुसार, विवाद मुहर्रम की चौथी तारीख को शुरू हुआ था जब सहोड़ा गांव के मुस्लिम समुदाय के लोग वर्षों से लाइसेंसशुदा निर्धारित मार्ग से मिट्टी काटने हेतु जुलूस ले जा रहे थे। इसी दौरान एक समुदाय के कुछ शरारती तत्वों ने जुलूस पर पथराव कर दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच मार्ग को लेकर विवाद बढ़ गया। घटना के बाद चंद्रदीप थाना में दोनों ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, और गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई थी जिसकी सूचना जिला प्रशासन को दी गई थी। जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर राजद के जिला अध्यक्ष त्रिवेणी यादव तथा मो. जियाउर रसूल गफ्फारी सहोड़ा गांव पहुंचे। उनकी पहल पर दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों के साथ बैठक आयोजित की गई, जहाँ सभी पक्षों ने आपसी संवाद के माध्यम से विवाद का समाधान किए जाने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया। यह तय किया गया कि भविष्य में विवादित स्थल से किसी भी समुदाय का जुलूस नहीं गुजरेगा। दोनों पक्षों ने भाईचारा, शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का भरोसा दिया है, हालांकि अभी दोनों तरफ से लिखित बाउंडेशन नहीं हुआ है, जिस पर दोनों समुदायों ने जिला प्रशासन से सहयोग करने की बात कही है। बैठक में लाइसेंसधारी गुलाम रवानी, मो. अकबर अंसारी, मो. खुर्रम, मो. मुख्तार, धीरेन्द्र यादव, जोगन यादव, जनार्दन यादव, महेश यादव, दिनेश यादव, वरजेश यादव, शशिकांत यादव और अरुण यादव सहित दोनों समुदायों के कई गणमान्य ग्रामीण उपस्थित रहे। वहीं, मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए और आपसी सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से तजिए का पहलाम करने इस्लाम नगर कर्बला नहीं जाने का निर्णय लिया। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि इस्लाम नगर जाने वाला वही निर्धारित मार्ग विवाद का कारण है, और उस रास्ते से जाने पर फिर से विवाद होने की आशंका थी। मुस्लिम समुदाय के इस कदम को लेकर पूरे प्रखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है।1
- सामाजिक कार्यकर्ता अमर आजाद पासवान ने दलित नेताओं के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दलित नेताओं को 'सोचना चाहिए था'।1
- बरबीघा नगर क्षेत्र में शनिवार को मोहर्रम के अवसर पर पारंपरिक ताजिया जुलूस पूरी श्रद्धा, अनुशासन और आपसी भाईचारे के साथ निकाला गया। इस जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने भाग लिया, जबकि विभिन्न अखाड़ों ने निर्धारित मार्गों से पारंपरिक करतबों का प्रदर्शन करते हुए ताजिया का भ्रमण कराया। पूरे नगर में धार्मिक उत्साह का माहौल बना रहा और लोगों ने जगह-जगह जुलूस का गर्मजोशी से स्वागत किया। मोहर्रम जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क था। बरबीघा थाना पुलिस के अधिकारी और पुलिस बल पूरे समय जुलूस के साथ तैनात रहे, जिन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार कड़ी नजर रखी। इसके साथ ही, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी भी मौके पर उपस्थित रहकर साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और अन्य आवश्यक इंतजामों का बारीकी से निरीक्षण करते रहे। प्रशासन की इस सतर्कता और स्थानीय लोगों के पूर्ण सहयोग के कारण पूरे आयोजन के दौरान किसी भी अप्रिय घटना की कोई सूचना नहीं मिली। ताजिया जुलूस का समापन शनिवार और रविवार की मध्य रात्रि को लगभग 1 बजे शांतिपूर्ण वातावरण में हुआ। इस सफल आयोजन पर प्रशासन ने सभी नागरिकों, आयोजन समितियों और स्वयंसेवकों के सहयोग की भरपूर सराहना की। प्रशासन ने विशेष रूप से यह उल्लेख किया कि आपसी सौहार्द और भाईचारे की मजबूत भावना के कारण ही मोहर्रम का यह पवित्र पर्व पूरी शांति और गरिमा के साथ संपन्न हो पाया।1
- मोहर्रम के अवसर पर नवादा जिले में ताजिया का पहलाम अत्यंत शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस दौरान जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय और मुस्तैद रहा, जिसने संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया और प्रशासनिक अधिकारी लगातार क्षेत्र का भ्रमण करते रहे। सदर अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (डीएसपी), नगर थाना प्रभारी और सर्किल इंस्पेक्टर ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और जुलूस व पहलाम के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की। प्रशासन और पुलिस की सतर्कता के कारण ही यह कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सका। इस अवसर पर सामाजिक सौहार्द की भी एक सुंदर मिसाल देखने को मिली। समाजसेवी अंशुमान शर्मा सहित मुस्लिम समाज के कई गणमान्य लोगों ने शांति, भाईचारे और आपसी सद्भाव का संदेश दिया। सभी ने मिलकर यह संदेश दोहराया कि नवादा की पहचान हमेशा गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी प्रेम और सामाजिक एकता रही है। प्रशासन ने भी शांतिपूर्ण आयोजन के लिए सभी अखाड़ा समितियों, ताजिया कमेटियों और आम नागरिकों के सहयोग की सराहना की और उन्हें धन्यवाद दिया। लोगों ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में भी सभी धार्मिक एवं सामाजिक पर्व इसी तरह आपसी सहयोग, सद्भाव और भाईचारे के साथ मनाए जाते रहेंगे।1
- शेखपुरा जिले के सदर प्रखंड स्थित कारे गाँव में हुई एक हत्या को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस हत्या के पीछे के मुख्य कारण क्या थे, और न ही प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा दी गई कोई जानकारी सामने आई है।1