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प्रयागराज के बाबूगंज, सिकंदरा में स्थित दिव्या आयुर्वेदिक संस्थान, डॉ. अशोक पाल और उनकी टीम के नेतृत्व में, जोड़ों के दर्द, सूजन, बवासीर और पथरी सहित विभिन्न बीमारियों के लिए 100% आयुर्वेदिक उपचार प्रदान करता है। संस्थान विशेष रूप से दावा करता है कि पथरी को बिना किसी ऑपरेशन के मात्र 7 दिनों में शरीर से बाहर निकाला जाता है। जो लोग अपनी बीमारियों के लिए हर जगह से इलाज कराकर परेशान हो चुके हैं, उन्हें एक बार इस आयुर्वेदिक औषधि से उपचार शुरू करने का आह्वान किया गया है, जिससे उन्हें ठीक होने में मदद मिलेगी। संस्थान निःशुल्क परामर्श की सुविधा देता है और ऑनलाइन दवा मंगवाने का विकल्प भी प्रदान करता है। किसी भी प्रकार के परामर्श के लिए 7859878185 पर संपर्क करने का आग्रह किया गया है।
Divya aurvedic sansthan
प्रयागराज के बाबूगंज, सिकंदरा में स्थित दिव्या आयुर्वेदिक संस्थान, डॉ. अशोक पाल और उनकी टीम के नेतृत्व में, जोड़ों के दर्द, सूजन, बवासीर और पथरी सहित विभिन्न बीमारियों के लिए 100% आयुर्वेदिक उपचार प्रदान करता है। संस्थान विशेष रूप से दावा करता है कि पथरी को बिना किसी ऑपरेशन के मात्र 7 दिनों में शरीर से बाहर निकाला जाता है। जो लोग अपनी बीमारियों के लिए हर जगह से इलाज कराकर परेशान हो चुके हैं, उन्हें एक बार इस आयुर्वेदिक औषधि से उपचार शुरू करने का आह्वान किया गया है, जिससे उन्हें ठीक होने में मदद मिलेगी। संस्थान निःशुल्क परामर्श की सुविधा देता है और ऑनलाइन दवा मंगवाने का विकल्प भी प्रदान करता है। किसी भी प्रकार के परामर्श के लिए 7859878185 पर संपर्क करने का आग्रह किया गया है।
More news from उत्तर प्रदेश and nearby areas
- उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में सरकारी इंजीनियरों द्वारा बारिश के मौसम में सड़क निर्माण कार्य पर तीखी टिप्पणी की गई है। इस प्रक्रिया पर कटाक्ष करते हुए कहा गया है कि बारिश में सड़क कैसे बनाई जाती है, यह उत्तर प्रदेश के सरकारी इंजीनियरों से सीखा जा सकता है। यह टिप्पणी सीधे तौर पर सरकारी धन की बर्बादी की ओर इशारा करती है, क्योंकि जिस तरह सड़क पर बारिश का पानी बह रहा है, उसी प्रकार सरकारी पैसा भी व्यर्थ बहाया जा रहा है। यह पोस्ट स्पष्ट रूप से सरकारी धन के दुरुपयोग और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर तीव्र आलोचना व्यक्त करती है।1
- देशभर में मानसून पूरी तरह सक्रिय है, जिसके चलते कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से मध्य प्रदेश में, पन्ना, छतरपुर, खंडवा सहित कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, जहाँ कई सड़कें बंद हो गई हैं और नदियां उफान पर हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने प्रदेश के कई जिलों में अगले चार दिनों तक अति भारी और भारी बारिश के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसमें उज्जैन समेत 28 जिलों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने लोगों को एहतियात बरतने और केवल आवश्यक होने पर ही घरों से बाहर निकलने की सलाह दी है। वहीं, उत्तर प्रदेश में भी मानसून ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है। मथुरा, गाजियाबाद, हाथरस और लखनऊ सहित कई जिलों में लगातार बारिश के कारण जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे आम जनजीवन पर असर पड़ा है।1
- प्रयागराज के सहसों इलाके में हाल ही में बना एक नया हाईवे लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गया है। बड़ी संख्या में लोग इस नवनिर्मित हाईवे के मनमोहक नजारों को देखने के लिए पहुँच रहे हैं। यहाँ आए हुए लोग हाईवे के दृश्य को अपने कैमरे में कैद करने के लिए वीडियो बना रहे हैं और तस्वीरें खींच रहे हैं। इन वीडियो और तस्वीरों को लगातार सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है, जिसके चलते यह नया हाईवे इन दिनों एक प्रमुख चर्चा का विषय बना हुआ है।1
- प्रयागराज के एयर पोर्ट थाना क्षेत्र के अंतर्गत असरौली कला सहित कई जगहों पर प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) ने बड़ी कार्रवाई की है। इस दौरान, अवैध प्लाटिंग पर बुलडोजर चलाया गया, जिससे कई बीघा अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त कर दिया गया। अवैध प्लॉटिंग के खिलाफ नगर निगम ने भी अपनी कार्रवाई जारी रखते हुए बुलडोजर का इस्तेमाल किया और कई बीघा जमीन को जमींदोज किया।1
- शंकरगढ़ में जनता की दुर्दशा सामने आई है, जहाँ नगर टाउन एरिया कार्यालय के ठीक सामने 8 जुलाई, 2026 को सुबह लोगों की दिनचर्या ही ऐसी बन गई है। न्यूज़ रिपोर्टर कन्हैया लाल वर्मा के अनुसार, करोड़ों रुपए का बजट होने के बावजूद उसका कोई असर नहीं दिख रहा है, जिससे अधिकारी मस्त हैं और जनता त्रस्त है।1
- चित्रकूट के रामघाट पर आने वाले श्रद्धालुओं को इन दिनों दूषित और गंदे पानी में ही स्नान करना पड़ रहा है। इस स्थिति के कारण उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ हो रहा है, जिससे उन्हें विवशता में इस अस्वच्छ जल में डुबकी लगानी पड़ रही है।1
- कौशाम्बी में सुबह हाइवे किनारे एक अज्ञात वाहन ने चार युवकों को रौंद दिया, जिससे सभी की मौके पर ही मौत हो गई। यह भीषण सड़क हादसा सैनी थाना क्षेत्र के त्रिलोकपुर स्थित कंगन होटल के पास हुआ। मृतकों की पहचान अनवर, एहसान, साबिर और एक अन्य एहसान के रूप में हुई है। ये सभी युवक एक वाहन से चारपाई लेकर जा रहे थे, जब उनके वाहन का टायर पंचर हो गया था। जब ये चारों पंचर बनवा रहे थे, तभी एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। पुलिस ने चारों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और फरार अज्ञात वाहन की तलाश में जुट गई है।1
- उत्तर प्रदेश के झांसी में एक दारोगा और सिपाही को एंटी करप्शन टीम ने रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा है। यह घूस मारपीट के एक मामले में दर्ज एफआईआर से नाम हटाने के लिए ली जा रही थी। जानकारी के अनुसार, आरोपी दारोगा, जिसे 'साहब' कहकर संबोधित किया गया है, पहले ही तीन किस्तें ले चुका था, और आज चौथी किस्त के रूप में ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए टीम ने उन्हें धर दबोचा। इस घटना ने एक बार फिर कानून के रखवालों की निष्ठा पर सवाल खड़े किए हैं, जो अपनी ट्रेनिंग के बाद संविधान के प्रति वफादारी, ईमानदारी, कानून का निष्पक्ष पालन करने और बिना किसी भेदभाव के जनसेवा करने की प्रतिज्ञा लेते हैं, लेकिन उसे भूलकर कानून का ही शोषण करते हैं। पोस्ट में गहरी निराशा व्यक्त की गई है कि ये सब रुकने वाला नहीं है, और ऐसे अधिकारी दो-चार महीने बाद फिर किसी थाने में पोस्टिंग पाकर 'सुविधा शुल्क' वसूलना शुरू कर देंगे। यह भी बताया गया है कि उत्तर प्रदेश में रिश्वतखोरी की घटनाएं आम हो गई हैं, और आगरा में भी बहुत से ऐसे मामले हैं जो अभी तक विजिलेंस या एंटी करप्शन टीम की पकड़ से दूर हैं।1
- एक ओर जहाँ देश में बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएँ लोगों की जान ले रही हैं, वहीं दूसरी ओर जर्जर दीवारें, इमारतें और मकान ढहने से भी मासूमों की मौत हो रही है। यदि प्राकृतिक आपदाओं को रोकना इंसानों के वश में नहीं है, तो जर्जर ढाँचों के ढहने का कारण केवल और केवल लापरवाही है, जिससे ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। सजग और सतर्क रहकर इन मौतों को टाला जा सकता है, लेकिन इस दिशा में कोई कोशिश नहीं की जाती। जर्जर मकान और इमारतें सालों तक वैसी ही खड़ी रहती हैं, उन्हें गिराने की ज़हमत तक नहीं उठाई जाती। न तो ऐसे ढाँचों को नोटिस दिया जाता है और न ही दिए गए नोटिस का पालन करवाया जाता है। विडंबना यह है कि कई बार तो ऐसे खतरनाक भवनों में शादी-ब्याह से लेकर अनेक धार्मिक आयोजन तक कर लिए जाते हैं, जिससे जान का जोखिम और बढ़ जाता है। सरकारी नियम स्पष्ट रूप से कहता है कि सभी कमजोर और जर्जर भवनों का नियमित रूप से पता लगाकर उन्हें तोड़ने की कार्रवाई स्थानीय प्रशासन या निकाय द्वारा की जानी चाहिए। हालाँकि, इस महत्वपूर्ण नियम का पालन ही नहीं हो पाता, जिसका खामियाज़ा लोगों को अपनी जान गँवाकर भुगतना पड़ता है।1