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प्रयागराज दिनांक 15/8/ 26 को बिहार के दो लाल जो भारत भ्रमण पर स्केटिंग के दौरा यात्रा कर रहे है काफी कठिनाई का भी सामना करना पड़ रहा है इन दोनों युवकों को क्योंकि पानी बूंदी में ये इतना लंबा सफर तय कर रहे है जो एक मिशाल है जो हमारे भारत की गरिमा को बरकरार रखे हुए है इन बच्चों को जीपी न्यूज़ इंडिया आज भारत की तरफ से दिल से सलाम जीपी न्यूज़ इंडिया आज का भारत से चन्द्रमा प्रसाद यादव की खास रिपोर्ट उतर प्रदेश। प्रयागराज
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प्रयागराज दिनांक 15/8/ 26 को बिहार के दो लाल जो भारत भ्रमण पर स्केटिंग के दौरा यात्रा कर रहे है काफी कठिनाई का भी सामना करना पड़ रहा है इन दोनों युवकों को क्योंकि पानी बूंदी में ये इतना लंबा सफर तय कर रहे है जो एक मिशाल है जो हमारे भारत की गरिमा को बरकरार रखे हुए है इन बच्चों को जीपी न्यूज़ इंडिया आज भारत की तरफ से दिल से सलाम जीपी न्यूज़ इंडिया आज का भारत से चन्द्रमा प्रसाद यादव की खास रिपोर्ट उतर प्रदेश। प्रयागराज
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- प्रयागराज दिनांक 15/8/ 26 को बिहार के दो लाल जो भारत भ्रमण पर स्केटिंग के दौरा यात्रा कर रहे है काफी कठिनाई का भी सामना करना पड़ रहा है इन दोनों युवकों को क्योंकि पानी बूंदी में ये इतना लंबा सफर तय कर रहे है जो एक मिशाल है जो हमारे भारत की गरिमा को बरकरार रखे हुए है इन बच्चों को जीपी न्यूज़ इंडिया आज भारत की तरफ से दिल से सलाम जीपी न्यूज़ इंडिया आज का भारत से चन्द्रमा प्रसाद यादव की खास रिपोर्ट उतर प्रदेश। प्रयागराज1
- प्रयागराज के जीरो रोड स्थित जनहित मीडिया वेलफेयर सोसाइटी के ऑफिस में स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर किया गया झंडारोहण..... प्रयागराज के जीरो रोड स्थित जनहित मीडिया वेलफेयर सोसाइटी के ऑफिस में स्वतंत्रता दिवस पर जनहित मीडिया वेलफेयर सोसाइटी ने किया झंडारोहण, आज पूरा देश 80वां स्वतंत्रता दिवस बड़े ही हर्षोल्लास और देशभक्ति के माहौल में मना रहा है। इसी कड़ी में प्रयागराज के जीरो रोड स्थित जनहित मीडिया वेलफेयर सोसाइटी के ऑफिस में स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर एक विशेष झंडारोहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आज सुबह 10 बजे आयोजित किया गया, जिसमें सोसाइटी के तमाम पदाधिकारी, सदस्य और बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों और संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा तिरंगा फहराकर की गई, इस अवसर पर संगठन के सचिव मो0 राजिक, सह सम्पादक मो0 नईम, मो0 हारुन, अनिल कुमार, राम दरश कुशवाहा, सौरभ केशरवानी, रमेश सोनी, सुधीर दत्ता, अख़लाक़ हुसैन, आर के राठौर, सुरेश वर्मा, अर्जुन कुमार, इसरार अहमद, सतीश सोनकर, मो0 फैज़, जुल्फेकार, मो0 रशीद, इफ़्तेख़ार अंसारी, आशीष कुमार साहू, नैंसी सिंह, अफसाना, रिज़वाना बेग़म,नसरीन बानों, राना परवीन, रितिमा सिंह, इशिका सिंह और जनहित मीडिया वेलफेयर कोचिंग के बच्चों द्वारा राष्ट्रगान की गूंज और 'भारत माता की जय' के नारों के साथ पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में सराबोर हो उठा। इस खास मौके पर उपस्थित पदाधिकारियों ने समाज को संबोधित करते हुए देश की आजादी के वीर शहीदों को नमन किया। साथ ही, राष्ट्र के विकास में मीडिया और सामाजिक संस्थाओं की भूमिका पर भी चर्चा की गई। कार्यक्रम में 'महिला शक्ति' की विशेष उपस्थिति रही, जिन्होंने इस गौरवपूर्ण पर्व को पूरे उत्साह और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया। सभी सदस्यों ने देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने का संकल्प लिया।4
- *दो किलोमीटर की सड़क, गिट्टी सिर्फ तीन सौ मीटर! बाकी हिस्से में डामरीकरण की तैयारी, भिलोर में निर्माण कार्य ने खड़े किए बड़े सवाल* *स्वीकृत धनराशि से लेकर तकनीकी मानक तक सवालों के घेरे में—ग्रामीण बोले, पहले पूरी सड़क की गिट्टी बिछे, फिर हो डामरीकरण; जिम्मेदार विभाग बताए आखिर बाकी सड़क का हिसाब क्या है?* भिलोर/बारा, प्रयागराज। लालापुर से प्रतापपुर मार्ग से भिलोर गांव की ओर जाने वाली करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण को लेकर मौके की स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को मीडिया की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, उसके मुताबिक करीब दो किलोमीटर की सड़क में आधार तैयार करने के लिए बड़ी गिट्टी का कार्य महज लगभग तीन सौ मीटर के आसपास ही दिखाई दे रहा है, जबकि शेष हिस्से में पूरी सड़क पर एकसमान गिट्टी बिछी नजर नहीं आती। कहीं गड्ढों में थोड़ी-थोड़ी गिट्टी डाली गई है तो कहीं पुरानी डामर की परत को उखाड़कर उसी सतह पर नया डामरीकरण कराने की तैयारी दिखाई दे रही है। यही अंतर अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता से आगे बढ़कर स्वीकृत प्राक्कलन, कार्य की वास्तविक मात्रा और सरकारी धनराशि के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करीब दो किलोमीटर सड़क का निर्माण स्वीकृत है और निर्माण में गिट्टी की निर्धारित परत का प्रावधान है तो फिर गिट्टी का काम केवल लगभग तीन सौ मीटर तक सीमित क्यों दिखाई दे रहा है? बाकी लगभग एक किलोमीटर सात सौ मीटर सड़क के लिए निर्धारित निर्माण प्रक्रिया कहां है? क्या उस हिस्से में पहले से मौजूद सड़क की सतह को ही आधार मानकर सीधे डामरीकरण कराया जाएगा? यदि ऐसा है तो क्या यह तकनीकी रूप से स्वीकृत है? और यदि स्वीकृति में पूरी सड़क को निर्धारित स्तर तक तैयार करने का प्रावधान है तो फिर मौके पर उसका पालन क्यों नहीं दिख रहा? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से स्पष्ट रूप से कहा कि पहले पूरी सड़क पर आवश्यक गिट्टी डलवाई जाए और उसके बाद डामरीकरण कराया जाए, लेकिन उनकी आपत्ति के बावजूद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उस सूचना-पट्ट का भी है, जिससे जनता को यह पता चल सके कि सड़क किस योजना से स्वीकृत हुई, इसकी कुल लागत कितनी है, लंबाई कितनी स्वीकृत है, कार्यदायी संस्था कौन है, ठेकेदार कौन है, कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की तिथि क्या है तथा इसकी निगरानी किस तकनीकी अधिकारी के जिम्मे है। मौके पर यदि ऐसा बोर्ड नहीं है तो इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क फरवरी महीने में स्वीकृत होने की बात सामने आई थी, लेकिन लगभग छह महीने तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब जब काम शुरू हुआ है तो करीब दो किलोमीटर की सड़क में महज लगभग तीन सौ मीटर हिस्से में गिट्टी बिछाने और शेष हिस्से में पुराने आधार पर काम बढ़ाने की स्थिति ने ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ा दी है। ऐसे में अब सवाल केवल ठेकेदार की कार्यशैली का नहीं, बल्कि कार्यदायी संस्था, संबंधित अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी का भी है। यदि कार्य की माप पुस्तिका में पूरी सड़क का काम दर्ज होता है तो मौके पर उसकी भौतिक स्थिति से मिलान होना चाहिए। यदि अभी भुगतान नहीं हुआ है तो भुगतान से पहले तकनीकी जांच और माप सत्यापन होना चाहिए, और यदि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो स्वीकृत प्राक्कलन के प्रत्येक मद का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इस मामले में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, उप जिलाधिकारी बारा, तहसीलदार बारा, संबंधित खंड विकास अधिकारी तथा संबंधित निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और तकनीकी अधिकारियों के स्तर से स्थलीय जांच कराया जाना आवश्यक है। जांच में सड़क की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, गिट्टी की मोटाई, गिट्टी की मात्रा, डामर की मोटाई, प्रयुक्त सामग्री, स्वीकृत लागत, कार्य की माप पुस्तिका और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है। यदि दो किलोमीटर की सड़क के लिए पूरा बजट और पूरा निर्माण स्वीकृत है तो लगभग तीन सौ मीटर में ही आधार सामग्री का काम दिखाई देने और बाकी हिस्से में सीधे डामरीकरण की तैयारी का कारण क्या है—इसका जवाब अब ग्रामीण ही नहीं, संबंधित विभाग से भी मांगा जा रहा है। यदि निर्माण नियम और स्वीकृत मानक के अनुसार हो रहा है तो विभाग को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, लेकिन यदि स्वीकृत कार्य और जमीन पर हुए कार्य में अंतर पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी होनी चाहिए। भिलोर की सड़क अब सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल बन गई है कि सरकारी निर्माण में कागज पर दर्ज मात्रा और जमीन पर दिखाई देने वाले काम के बीच आखिर कितना फासला है? *दो किलोमीटर की सड़क, गिट्टी सिर्फ तीन सौ मीटर! बाकी हिस्से में डामरीकरण की तैयारी, भिलोर में निर्माण कार्य ने खड़े किए बड़े सवाल* *स्वीकृत धनराशि से लेकर तकनीकी मानक तक सवालों के घेरे में—ग्रामीण बोले, पहले पूरी सड़क की गिट्टी बिछे, फिर हो डामरीकरण; जिम्मेदार विभाग बताए आखिर बाकी सड़क का हिसाब क्या है?* भिलोर/बारा, प्रयागराज। लालापुर से प्रतापपुर मार्ग से भिलोर गांव की ओर जाने वाली करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण को लेकर मौके की स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को मीडिया की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, उसके मुताबिक करीब दो किलोमीटर की सड़क में आधार तैयार करने के लिए बड़ी गिट्टी का कार्य महज लगभग तीन सौ मीटर के आसपास ही दिखाई दे रहा है, जबकि शेष हिस्से में पूरी सड़क पर एकसमान गिट्टी बिछी नजर नहीं आती। कहीं गड्ढों में थोड़ी-थोड़ी गिट्टी डाली गई है तो कहीं पुरानी डामर की परत को उखाड़कर उसी सतह पर नया डामरीकरण कराने की तैयारी दिखाई दे रही है। यही अंतर अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता से आगे बढ़कर स्वीकृत प्राक्कलन, कार्य की वास्तविक मात्रा और सरकारी धनराशि के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करीब दो किलोमीटर सड़क का निर्माण स्वीकृत है और निर्माण में गिट्टी की निर्धारित परत का प्रावधान है तो फिर गिट्टी का काम केवल लगभग तीन सौ मीटर तक सीमित क्यों दिखाई दे रहा है? बाकी लगभग एक किलोमीटर सात सौ मीटर सड़क के लिए निर्धारित निर्माण प्रक्रिया कहां है? क्या उस हिस्से में पहले से मौजूद सड़क की सतह को ही आधार मानकर सीधे डामरीकरण कराया जाएगा? यदि ऐसा है तो क्या यह तकनीकी रूप से स्वीकृत है? और यदि स्वीकृति में पूरी सड़क को निर्धारित स्तर तक तैयार करने का प्रावधान है तो फिर मौके पर उसका पालन क्यों नहीं दिख रहा? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से स्पष्ट रूप से कहा कि पहले पूरी सड़क पर आवश्यक गिट्टी डलवाई जाए और उसके बाद डामरीकरण कराया जाए, लेकिन उनकी आपत्ति के बावजूद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उस सूचना-पट्ट का भी है, जिससे जनता को यह पता चल सके कि सड़क किस योजना से स्वीकृत हुई, इसकी कुल लागत कितनी है, लंबाई कितनी स्वीकृत है, कार्यदायी संस्था कौन है, ठेकेदार कौन है, कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की तिथि क्या है तथा इसकी निगरानी किस तकनीकी अधिकारी के जिम्मे है। मौके पर यदि ऐसा बोर्ड नहीं है तो इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क फरवरी महीने में स्वीकृत होने की बात सामने आई थी, लेकिन लगभग छह महीने तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब जब काम शुरू हुआ है तो करीब दो किलोमीटर की सड़क में महज लगभग तीन सौ मीटर हिस्से में गिट्टी बिछाने और शेष हिस्से में पुराने आधार पर काम बढ़ाने की स्थिति ने ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ा दी है। ऐसे में अब सवाल केवल ठेकेदार की कार्यशैली का नहीं, बल्कि कार्यदायी संस्था, संबंधित अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी का भी है। यदि कार्य की माप पुस्तिका में पूरी सड़क का काम दर्ज होता है तो मौके पर उसकी भौतिक स्थिति से मिलान होना चाहिए। यदि अभी भुगतान नहीं हुआ है तो भुगतान से पहले तकनीकी जांच और माप सत्यापन होना चाहिए, और यदि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो स्वीकृत प्राक्कलन के प्रत्येक मद का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इस मामले में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, उप जिलाधिकारी बारा, तहसीलदार बारा, संबंधित खंड विकास अधिकारी तथा संबंधित निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और तकनीकी अधिकारियों के स्तर से स्थलीय जांच कराया जाना आवश्यक है। जांच में सड़क की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, गिट्टी की मोटाई, गिट्टी की मात्रा, डामर की मोटाई, प्रयुक्त सामग्री, स्वीकृत लागत, कार्य की माप पुस्तिका और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है। यदि दो किलोमीटर की सड़क के लिए पूरा बजट और पूरा निर्माण स्वीकृत है तो लगभग तीन सौ मीटर में ही आधार सामग्री का काम दिखाई देने और बाकी हिस्से में सीधे डामरीकरण की तैयारी का कारण क्या है—इसका जवाब अब ग्रामीण ही नहीं, संबंधित विभाग से भी मांगा जा रहा है। यदि निर्माण नियम और स्वीकृत मानक के अनुसार हो रहा है तो विभाग को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, लेकिन यदि स्वीकृत कार्य और जमीन पर हुए कार्य में अंतर पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी होनी चाहिए। भिलोर की सड़क अब सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल बन गई है कि सरकारी निर्माण में कागज पर दर्ज मात्रा और जमीन पर दिखाई देने वाले काम के बीच आखिर कितना फासला है?1
- वायु सेना बैंड की देशभक्तिमयी धुनों से गूंजा प्रयागराज का चंद्रशेखर आजाद पार्क1
- प्रयागराज स्वतंत्रता दिवस को अद्भुत और अलौकिक ढंग से बनाया गया जय हिन्द1
- प्रयागराज के कोराव थाना क्षेत्र अंतर्गत शनिवार की दोपहर नदी के ऊपर बने भोगन पुल पर साइकिल चला रहा एक लड़का अचानक अनियंत्रित होकर साइकिल सहित नदी मे डूब गया। *प्रयागराज के कोराव थाना क्षेत्र अंतर्गत शनिवार की दोपहर नदी के ऊपर बने भोगन पुल पर साइकिल चला रहा एक लड़का अचानक अनियंत्रित होकर साइकिल सहित नदी मे डूब गया। गांव के ही कुछ लोगों ने उसे डूबता देख उसे बचाने की कोशिश की लेकिन पानी का दबाव इतना अधिक था की उसके पता नहीं चल सका। कुछ ही पलों मे पूरा गांव पुल पर इकठ्ठा हो गया। सूचना मिलते ही कोरांव थाने की पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और उसके बाद NDRF की टीम भी पहुंची और लड़के की तलाश मे जुट गई।* *फिर लोगों द्वारा पता लगाया गया की जो लड़का डूबा है उसका नाम मोनू चौबे पुत्र आदित्य चौबे है और वो ग्राम पंचायत ख़िवली पोस्ट बड़ोखर थाना कोराव का रहने वाला है।*1
- *प्रयागराज के कोराव थाना क्षेत्र अंतर्गत शनिवार की दोपहर नदी के ऊपर बने भोगन पुल पर साइकिल चला रहा एक लड़का अचानक अनियंत्रित होकर साइकिल सहित नदी मे डूब गया। गांव के ही कुछ लोगों ने उसे डूबता देख उसे बचाने की कोशिश की लेकिन पानी का दबाव इतना अधिक था की उसके पता नहीं चल सका। कुछ ही पलों मे पूरा गांव पुल पर इकठ्ठा हो गया। सूचना मिलते ही कोरांव थाने की पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और उसके बाद NDRF की टीम भी पहुंची और लड़के की तलाश मे जुट गई।* *फिर लोगों द्वारा पता लगाया गया की जो लड़का डूबा है उसका नाम मोनू चौबे पुत्र आदित्य चौबे है और वो ग्राम पंचायत ख़िवली पोस्ट बड़ोखर थाना कोराव का रहने वाला है।* *प्रयागराज के कोराव थाना क्षेत्र अंतर्गत शनिवार की दोपहर नदी के ऊपर बने भोगन पुल पर साइकिल चला रहा एक लड़का अचानक अनियंत्रित होकर साइकिल सहित नदी मे डूब गया। गांव के ही कुछ लोगों ने उसे डूबता देख उसे बचाने की कोशिश की लेकिन पानी का दबाव इतना अधिक था की उसके पता नहीं चल सका। कुछ ही पलों मे पूरा गांव पुल पर इकठ्ठा हो गया। सूचना मिलते ही कोरांव थाने की पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची और उसके बाद NDRF की टीम भी पहुंची और लड़के की तलाश मे जुट गई।* *फिर लोगों द्वारा पता लगाया गया की जो लड़का डूबा है उसका नाम मोनू चौबे पुत्र आदित्य चौबे है और वो ग्राम पंचायत ख़िवली पोस्ट बड़ोखर थाना कोराव का रहने वाला है।*1
- प्रयागराज नैनी महेवा पश्चिम पट्टी डॉ. भीमराव अंबेडकर प्राइमरी स्कूल में स्वतंत्रता दिवस धूम धाम से मनाया गया जीपी न्यूज़ इंडिया और आज का भारत की ओर से आप सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस एवं नागपंचमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं इस अवसर पर सर्व प्रथम झंडा रोहण किया गया झंडा रोहण प्रबंधक डॉ. निरंजन रॉय, वरिष्ठ पत्रकार शकील खान समाज सेवी पत्रकार मोहम्मद हमज़ाह शोहरत जी ने किया झंडा रोहण के बाद सभी ने झंडे को सलामी दी राष्ट्रगान गाया गया बच्चों ने देश भक्ति गीत गा कर स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया इस अवसर पर स्कूल के सभी अध्यापक उपस्थित रहे श्रीमती कोमल, हलीमा, सबा जी अंशिका, आराधना, ऋतु श्रीवास्तव वैभव केसरवानी हिमांशु सुरेश चन्द्र निषाद रईस भाई एवं सोनू खान आदि उपस्थित रहे चैनल को सब्सक्राइब करें लाइक करें और शेयर करें उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से जीपी न्यूज़ इंडिया आज का भारत के लिए सोनू खान की खास रिपोर्ट1