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*दो किलोमीटर की सड़क, गिट्टी सिर्फ तीन सौ मीटर! बाकी हिस्से में डामरीकरण की तैयारी, भिलोर में निर्माण कार्य ने खड़े किए बड़े सवाल* *स्वीकृत धनराशि से लेकर तकनीकी मानक तक सवालों के घेरे में—ग्रामीण बोले, पहले पूरी सड़क की गिट्टी बिछे, फिर हो डामरीकरण; जिम्मेदार विभाग बताए आखिर बाकी सड़क का हिसाब क्या है?* भिलोर/बारा, प्रयागराज। लालापुर से प्रतापपुर मार्ग से भिलोर गांव की ओर जाने वाली करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण को लेकर मौके की स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को मीडिया की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, उसके मुताबिक करीब दो किलोमीटर की सड़क में आधार तैयार करने के लिए बड़ी गिट्टी का कार्य महज लगभग तीन सौ मीटर के आसपास ही दिखाई दे रहा है, जबकि शेष हिस्से में पूरी सड़क पर एकसमान गिट्टी बिछी नजर नहीं आती। कहीं गड्ढों में थोड़ी-थोड़ी गिट्टी डाली गई है तो कहीं पुरानी डामर की परत को उखाड़कर उसी सतह पर नया डामरीकरण कराने की तैयारी दिखाई दे रही है। यही अंतर अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता से आगे बढ़कर स्वीकृत प्राक्कलन, कार्य की वास्तविक मात्रा और सरकारी धनराशि के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करीब दो किलोमीटर सड़क का निर्माण स्वीकृत है और निर्माण में गिट्टी की निर्धारित परत का प्रावधान है तो फिर गिट्टी का काम केवल लगभग तीन सौ मीटर तक सीमित क्यों दिखाई दे रहा है? बाकी लगभग एक किलोमीटर सात सौ मीटर सड़क के लिए निर्धारित निर्माण प्रक्रिया कहां है? क्या उस हिस्से में पहले से मौजूद सड़क की सतह को ही आधार मानकर सीधे डामरीकरण कराया जाएगा? यदि ऐसा है तो क्या यह तकनीकी रूप से स्वीकृत है? और यदि स्वीकृति में पूरी सड़क को निर्धारित स्तर तक तैयार करने का प्रावधान है तो फिर मौके पर उसका पालन क्यों नहीं दिख रहा? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से स्पष्ट रूप से कहा कि पहले पूरी सड़क पर आवश्यक गिट्टी डलवाई जाए और उसके बाद डामरीकरण कराया जाए, लेकिन उनकी आपत्ति के बावजूद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उस सूचना-पट्ट का भी है, जिससे जनता को यह पता चल सके कि सड़क किस योजना से स्वीकृत हुई, इसकी कुल लागत कितनी है, लंबाई कितनी स्वीकृत है, कार्यदायी संस्था कौन है, ठेकेदार कौन है, कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की तिथि क्या है तथा इसकी निगरानी किस तकनीकी अधिकारी के जिम्मे है। मौके पर यदि ऐसा बोर्ड नहीं है तो इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क फरवरी महीने में स्वीकृत होने की बात सामने आई थी, लेकिन लगभग छह महीने तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब जब काम शुरू हुआ है तो करीब दो किलोमीटर की सड़क में महज लगभग तीन सौ मीटर हिस्से में गिट्टी बिछाने और शेष हिस्से में पुराने आधार पर काम बढ़ाने की स्थिति ने ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ा दी है। ऐसे में अब सवाल केवल ठेकेदार की कार्यशैली का नहीं, बल्कि कार्यदायी संस्था, संबंधित अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी का भी है। यदि कार्य की माप पुस्तिका में पूरी सड़क का काम दर्ज होता है तो मौके पर उसकी भौतिक स्थिति से मिलान होना चाहिए। यदि अभी भुगतान नहीं हुआ है तो भुगतान से पहले तकनीकी जांच और माप सत्यापन होना चाहिए, और यदि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो स्वीकृत प्राक्कलन के प्रत्येक मद का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इस मामले में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, उप जिलाधिकारी बारा, तहसीलदार बारा, संबंधित खंड विकास अधिकारी तथा संबंधित निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और तकनीकी अधिकारियों के स्तर से स्थलीय जांच कराया जाना आवश्यक है। जांच में सड़क की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, गिट्टी की मोटाई, गिट्टी की मात्रा, डामर की मोटाई, प्रयुक्त सामग्री, स्वीकृत लागत, कार्य की माप पुस्तिका और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है। यदि दो किलोमीटर की सड़क के लिए पूरा बजट और पूरा निर्माण स्वीकृत है तो लगभग तीन सौ मीटर में ही आधार सामग्री का काम दिखाई देने और बाकी हिस्से में सीधे डामरीकरण की तैयारी का कारण क्या है—इसका जवाब अब ग्रामीण ही नहीं, संबंधित विभाग से भी मांगा जा रहा है। यदि निर्माण नियम और स्वीकृत मानक के अनुसार हो रहा है तो विभाग को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, लेकिन यदि स्वीकृत कार्य और जमीन पर हुए कार्य में अंतर पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी होनी चाहिए। भिलोर की सड़क अब सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल बन गई है कि सरकारी निर्माण में कागज पर दर्ज मात्रा और जमीन पर दिखाई देने वाले काम के बीच आखिर कितना फासला है? *दो किलोमीटर की सड़क, गिट्टी सिर्फ तीन सौ मीटर! बाकी हिस्से में डामरीकरण की तैयारी, भिलोर में निर्माण कार्य ने खड़े किए बड़े सवाल* *स्वीकृत धनराशि से लेकर तकनीकी मानक तक सवालों के घेरे में—ग्रामीण बोले, पहले पूरी सड़क की गिट्टी बिछे, फिर हो डामरीकरण; जिम्मेदार विभाग बताए आखिर बाकी सड़क का हिसाब क्या है?* भिलोर/बारा, प्रयागराज। लालापुर से प्रतापपुर मार्ग से भिलोर गांव की ओर जाने वाली करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण को लेकर मौके की स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को मीडिया की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, उसके मुताबिक करीब दो किलोमीटर की सड़क में आधार तैयार करने के लिए बड़ी गिट्टी का कार्य महज लगभग तीन सौ मीटर के आसपास ही दिखाई दे रहा है, जबकि शेष हिस्से में पूरी सड़क पर एकसमान गिट्टी बिछी नजर नहीं आती। कहीं गड्ढों में थोड़ी-थोड़ी गिट्टी डाली गई है तो कहीं पुरानी डामर की परत को उखाड़कर उसी सतह पर नया डामरीकरण कराने की तैयारी दिखाई दे रही है। यही अंतर अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता से आगे बढ़कर स्वीकृत प्राक्कलन, कार्य की वास्तविक मात्रा और सरकारी धनराशि के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करीब दो किलोमीटर सड़क का निर्माण स्वीकृत है और निर्माण में गिट्टी की निर्धारित परत का प्रावधान है तो फिर गिट्टी का काम केवल लगभग तीन सौ मीटर तक सीमित क्यों दिखाई दे रहा है? बाकी लगभग एक किलोमीटर सात सौ मीटर सड़क के लिए निर्धारित निर्माण प्रक्रिया कहां है? क्या उस हिस्से में पहले से मौजूद सड़क की सतह को ही आधार मानकर सीधे डामरीकरण कराया जाएगा? यदि ऐसा है तो क्या यह तकनीकी रूप से स्वीकृत है? और यदि स्वीकृति में पूरी सड़क को निर्धारित स्तर तक तैयार करने का प्रावधान है तो फिर मौके पर उसका पालन क्यों नहीं दिख रहा? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से स्पष्ट रूप से कहा कि पहले पूरी सड़क पर आवश्यक गिट्टी डलवाई जाए और उसके बाद डामरीकरण कराया जाए, लेकिन उनकी आपत्ति के बावजूद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उस सूचना-पट्ट का भी है, जिससे जनता को यह पता चल सके कि सड़क किस योजना से स्वीकृत हुई, इसकी कुल लागत कितनी है, लंबाई कितनी स्वीकृत है, कार्यदायी संस्था कौन है, ठेकेदार कौन है, कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की तिथि क्या है तथा इसकी निगरानी किस तकनीकी अधिकारी के जिम्मे है। मौके पर यदि ऐसा बोर्ड नहीं है तो इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क फरवरी महीने में स्वीकृत होने की बात सामने आई थी, लेकिन लगभग छह महीने तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब जब काम शुरू हुआ है तो करीब दो किलोमीटर की सड़क में महज लगभग तीन सौ मीटर हिस्से में गिट्टी बिछाने और शेष हिस्से में पुराने आधार पर काम बढ़ाने की स्थिति ने ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ा दी है। ऐसे में अब सवाल केवल ठेकेदार की कार्यशैली का नहीं, बल्कि कार्यदायी संस्था, संबंधित अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी का भी है। यदि कार्य की माप पुस्तिका में पूरी सड़क का काम दर्ज होता है तो मौके पर उसकी भौतिक स्थिति से मिलान होना चाहिए। यदि अभी भुगतान नहीं हुआ है तो भुगतान से पहले तकनीकी जांच और माप सत्यापन होना चाहिए, और यदि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो स्वीकृत प्राक्कलन के प्रत्येक मद का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इस मामले में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, उप जिलाधिकारी बारा, तहसीलदार बारा, संबंधित खंड विकास अधिकारी तथा संबंधित निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और तकनीकी अधिकारियों के स्तर से स्थलीय जांच कराया जाना आवश्यक है। जांच में सड़क की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, गिट्टी की मोटाई, गिट्टी की मात्रा, डामर की मोटाई, प्रयुक्त सामग्री, स्वीकृत लागत, कार्य की माप पुस्तिका और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है। यदि दो किलोमीटर की सड़क के लिए पूरा बजट और पूरा निर्माण स्वीकृत है तो लगभग तीन सौ मीटर में ही आधार सामग्री का काम दिखाई देने और बाकी हिस्से में सीधे डामरीकरण की तैयारी का कारण क्या है—इसका जवाब अब ग्रामीण ही नहीं, संबंधित विभाग से भी मांगा जा रहा है। यदि निर्माण नियम और स्वीकृत मानक के अनुसार हो रहा है तो विभाग को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, लेकिन यदि स्वीकृत कार्य और जमीन पर हुए कार्य में अंतर पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी होनी चाहिए। भिलोर की सड़क अब सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल बन गई है कि सरकारी निर्माण में कागज पर दर्ज मात्रा और जमीन पर दिखाई देने वाले काम के बीच आखिर कितना फासला है?

1 hr ago
user_राजेश कुमार
राजेश कुमार
रिपोर्टर मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
1 hr ago

*दो किलोमीटर की सड़क, गिट्टी सिर्फ तीन सौ मीटर! बाकी हिस्से में डामरीकरण की तैयारी, भिलोर में निर्माण कार्य ने खड़े किए बड़े सवाल* *स्वीकृत धनराशि से लेकर तकनीकी मानक तक सवालों के घेरे में—ग्रामीण बोले, पहले पूरी सड़क की गिट्टी बिछे, फिर हो डामरीकरण; जिम्मेदार विभाग बताए आखिर बाकी सड़क का हिसाब क्या है?* भिलोर/बारा, प्रयागराज। लालापुर से प्रतापपुर मार्ग से भिलोर गांव की ओर जाने वाली करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण को लेकर मौके की स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को मीडिया की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, उसके मुताबिक करीब दो किलोमीटर की सड़क में आधार तैयार करने के लिए बड़ी गिट्टी का कार्य महज लगभग तीन सौ मीटर के आसपास ही दिखाई दे रहा है, जबकि शेष हिस्से में पूरी सड़क पर एकसमान गिट्टी बिछी नजर नहीं आती। कहीं गड्ढों में थोड़ी-थोड़ी गिट्टी डाली गई है तो कहीं पुरानी डामर की परत को उखाड़कर उसी सतह पर नया डामरीकरण कराने की तैयारी दिखाई दे रही है। यही अंतर अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता से आगे बढ़कर स्वीकृत प्राक्कलन, कार्य की वास्तविक मात्रा और सरकारी धनराशि के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करीब दो किलोमीटर सड़क का निर्माण स्वीकृत है और निर्माण में गिट्टी की निर्धारित परत का प्रावधान है तो फिर गिट्टी का काम केवल लगभग तीन सौ मीटर तक सीमित क्यों दिखाई दे रहा है? बाकी लगभग एक किलोमीटर सात सौ मीटर सड़क के लिए निर्धारित निर्माण प्रक्रिया कहां है? क्या उस हिस्से में पहले से मौजूद सड़क की सतह को ही आधार मानकर सीधे डामरीकरण कराया जाएगा? यदि ऐसा है तो क्या यह तकनीकी रूप से स्वीकृत है? और यदि स्वीकृति में पूरी सड़क को निर्धारित स्तर तक तैयार करने का प्रावधान है तो फिर मौके पर उसका पालन क्यों नहीं दिख रहा? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से स्पष्ट रूप से कहा कि पहले पूरी सड़क पर आवश्यक गिट्टी डलवाई जाए और उसके बाद डामरीकरण कराया जाए, लेकिन उनकी आपत्ति के बावजूद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उस सूचना-पट्ट का भी है, जिससे जनता को यह पता चल सके कि सड़क किस योजना से स्वीकृत हुई, इसकी कुल लागत कितनी है, लंबाई कितनी स्वीकृत है, कार्यदायी संस्था कौन है, ठेकेदार कौन है, कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की तिथि क्या है तथा इसकी निगरानी किस तकनीकी अधिकारी के जिम्मे है। मौके पर यदि ऐसा बोर्ड नहीं है तो इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क फरवरी महीने में स्वीकृत होने की बात सामने आई थी, लेकिन लगभग छह महीने तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब जब काम शुरू हुआ है तो करीब दो किलोमीटर की सड़क में महज लगभग तीन सौ मीटर हिस्से में गिट्टी बिछाने और शेष हिस्से में पुराने आधार पर काम बढ़ाने की स्थिति ने ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ा दी है। ऐसे में अब सवाल केवल ठेकेदार की कार्यशैली का नहीं, बल्कि कार्यदायी संस्था, संबंधित अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी का भी है। यदि कार्य की माप पुस्तिका में पूरी सड़क का काम दर्ज होता है तो मौके पर उसकी भौतिक स्थिति से मिलान होना चाहिए। यदि अभी भुगतान नहीं हुआ है तो भुगतान से पहले तकनीकी जांच और माप सत्यापन होना चाहिए, और यदि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो स्वीकृत प्राक्कलन के प्रत्येक मद का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इस मामले में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, उप जिलाधिकारी बारा, तहसीलदार बारा, संबंधित खंड विकास अधिकारी तथा संबंधित निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और तकनीकी अधिकारियों के स्तर से स्थलीय जांच कराया जाना आवश्यक है। जांच में सड़क की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, गिट्टी की मोटाई, गिट्टी की मात्रा, डामर की मोटाई, प्रयुक्त सामग्री, स्वीकृत लागत, कार्य की माप पुस्तिका और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है। यदि दो किलोमीटर की सड़क के लिए पूरा बजट और पूरा निर्माण स्वीकृत है तो लगभग तीन सौ मीटर में ही आधार सामग्री का काम दिखाई देने और बाकी हिस्से में सीधे डामरीकरण की तैयारी का कारण क्या है—इसका जवाब अब ग्रामीण ही नहीं, संबंधित विभाग से भी मांगा जा रहा है। यदि निर्माण नियम और स्वीकृत मानक के अनुसार हो रहा है तो विभाग को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, लेकिन यदि स्वीकृत कार्य और जमीन पर हुए कार्य में अंतर पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी होनी चाहिए। भिलोर की सड़क अब सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल बन गई है कि सरकारी निर्माण में कागज पर दर्ज मात्रा और जमीन पर दिखाई देने वाले काम के बीच आखिर कितना फासला है? *दो किलोमीटर की सड़क, गिट्टी सिर्फ तीन सौ मीटर! बाकी हिस्से में डामरीकरण की तैयारी, भिलोर में निर्माण कार्य ने खड़े किए बड़े सवाल* *स्वीकृत धनराशि से लेकर तकनीकी मानक तक सवालों के घेरे में—ग्रामीण बोले, पहले पूरी सड़क की गिट्टी बिछे, फिर हो डामरीकरण; जिम्मेदार विभाग बताए आखिर बाकी सड़क का हिसाब क्या है?* भिलोर/बारा, प्रयागराज। लालापुर से प्रतापपुर मार्ग से भिलोर गांव की ओर जाने वाली करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण को लेकर मौके की स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को मीडिया की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, उसके मुताबिक करीब दो किलोमीटर की सड़क में आधार तैयार करने के लिए बड़ी गिट्टी का कार्य महज लगभग तीन सौ मीटर के आसपास ही दिखाई दे रहा है, जबकि शेष हिस्से में पूरी सड़क पर एकसमान गिट्टी बिछी नजर नहीं आती। कहीं गड्ढों में थोड़ी-थोड़ी गिट्टी डाली गई है तो कहीं पुरानी डामर की परत को उखाड़कर उसी सतह पर नया डामरीकरण कराने की तैयारी दिखाई दे रही है। यही अंतर अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता से आगे बढ़कर स्वीकृत प्राक्कलन, कार्य की वास्तविक मात्रा और सरकारी धनराशि के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करीब दो किलोमीटर सड़क का निर्माण स्वीकृत है और निर्माण में गिट्टी की निर्धारित परत का प्रावधान है तो फिर गिट्टी का काम केवल लगभग तीन सौ मीटर तक सीमित क्यों दिखाई दे रहा है? बाकी लगभग एक किलोमीटर सात सौ मीटर सड़क के लिए निर्धारित निर्माण प्रक्रिया कहां है? क्या उस हिस्से में पहले से मौजूद सड़क की सतह को ही आधार मानकर सीधे डामरीकरण कराया जाएगा? यदि ऐसा है तो क्या यह तकनीकी रूप से स्वीकृत है? और यदि स्वीकृति में पूरी सड़क को निर्धारित स्तर तक तैयार करने का प्रावधान है तो फिर मौके पर उसका पालन क्यों नहीं दिख रहा? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से स्पष्ट रूप से कहा कि पहले पूरी सड़क पर आवश्यक गिट्टी डलवाई जाए और उसके बाद डामरीकरण कराया जाए, लेकिन उनकी आपत्ति के बावजूद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उस सूचना-पट्ट का भी है, जिससे जनता को यह पता चल सके कि सड़क किस योजना से स्वीकृत हुई, इसकी कुल लागत कितनी है, लंबाई कितनी स्वीकृत है, कार्यदायी संस्था कौन है, ठेकेदार कौन है, कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की तिथि क्या है तथा इसकी निगरानी किस तकनीकी अधिकारी के जिम्मे है। मौके पर यदि ऐसा बोर्ड नहीं है तो इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क फरवरी महीने में स्वीकृत होने की बात सामने आई थी, लेकिन लगभग छह महीने तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब जब काम शुरू हुआ है तो करीब दो किलोमीटर की सड़क में महज लगभग तीन सौ मीटर हिस्से में गिट्टी बिछाने और शेष हिस्से में पुराने आधार पर काम बढ़ाने की स्थिति ने ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ा दी है। ऐसे में अब सवाल केवल ठेकेदार की कार्यशैली का नहीं, बल्कि कार्यदायी संस्था, संबंधित अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी का भी है। यदि कार्य की माप पुस्तिका में पूरी सड़क का काम दर्ज होता है तो मौके पर उसकी भौतिक स्थिति से मिलान होना चाहिए। यदि अभी भुगतान नहीं हुआ है तो भुगतान से पहले तकनीकी जांच और माप सत्यापन होना चाहिए, और यदि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो स्वीकृत प्राक्कलन के प्रत्येक मद का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इस मामले में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, उप जिलाधिकारी बारा, तहसीलदार बारा, संबंधित खंड विकास अधिकारी तथा संबंधित निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और तकनीकी अधिकारियों के स्तर से स्थलीय जांच कराया जाना आवश्यक है। जांच में सड़क की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, गिट्टी की मोटाई, गिट्टी की मात्रा, डामर की मोटाई, प्रयुक्त सामग्री, स्वीकृत लागत, कार्य की माप पुस्तिका और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है। यदि दो किलोमीटर की सड़क के लिए पूरा बजट और पूरा निर्माण स्वीकृत है तो लगभग तीन सौ मीटर में ही आधार सामग्री का काम दिखाई देने और बाकी हिस्से में सीधे डामरीकरण की तैयारी का कारण क्या है—इसका जवाब अब ग्रामीण ही नहीं, संबंधित विभाग से भी मांगा जा रहा है। यदि निर्माण नियम और स्वीकृत मानक के अनुसार हो रहा है तो विभाग को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, लेकिन यदि स्वीकृत कार्य और जमीन पर हुए कार्य में अंतर पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी होनी चाहिए। भिलोर की सड़क अब सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल बन गई है कि सरकारी निर्माण में कागज पर दर्ज मात्रा और जमीन पर दिखाई देने वाले काम के बीच आखिर कितना फासला है?

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  • *दो किलोमीटर की सड़क, गिट्टी सिर्फ तीन सौ मीटर! बाकी हिस्से में डामरीकरण की तैयारी, भिलोर में निर्माण कार्य ने खड़े किए बड़े सवाल* *स्वीकृत धनराशि से लेकर तकनीकी मानक तक सवालों के घेरे में—ग्रामीण बोले, पहले पूरी सड़क की गिट्टी बिछे, फिर हो डामरीकरण; जिम्मेदार विभाग बताए आखिर बाकी सड़क का हिसाब क्या है?* भिलोर/बारा, प्रयागराज। लालापुर से प्रतापपुर मार्ग से भिलोर गांव की ओर जाने वाली करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण को लेकर मौके की स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को मीडिया की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, उसके मुताबिक करीब दो किलोमीटर की सड़क में आधार तैयार करने के लिए बड़ी गिट्टी का कार्य महज लगभग तीन सौ मीटर के आसपास ही दिखाई दे रहा है, जबकि शेष हिस्से में पूरी सड़क पर एकसमान गिट्टी बिछी नजर नहीं आती। कहीं गड्ढों में थोड़ी-थोड़ी गिट्टी डाली गई है तो कहीं पुरानी डामर की परत को उखाड़कर उसी सतह पर नया डामरीकरण कराने की तैयारी दिखाई दे रही है। यही अंतर अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता से आगे बढ़कर स्वीकृत प्राक्कलन, कार्य की वास्तविक मात्रा और सरकारी धनराशि के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करीब दो किलोमीटर सड़क का निर्माण स्वीकृत है और निर्माण में गिट्टी की निर्धारित परत का प्रावधान है तो फिर गिट्टी का काम केवल लगभग तीन सौ मीटर तक सीमित क्यों दिखाई दे रहा है? बाकी लगभग एक किलोमीटर सात सौ मीटर सड़क के लिए निर्धारित निर्माण प्रक्रिया कहां है? क्या उस हिस्से में पहले से मौजूद सड़क की सतह को ही आधार मानकर सीधे डामरीकरण कराया जाएगा? यदि ऐसा है तो क्या यह तकनीकी रूप से स्वीकृत है? और यदि स्वीकृति में पूरी सड़क को निर्धारित स्तर तक तैयार करने का प्रावधान है तो फिर मौके पर उसका पालन क्यों नहीं दिख रहा? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से स्पष्ट रूप से कहा कि पहले पूरी सड़क पर आवश्यक गिट्टी डलवाई जाए और उसके बाद डामरीकरण कराया जाए, लेकिन उनकी आपत्ति के बावजूद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उस सूचना-पट्ट का भी है, जिससे जनता को यह पता चल सके कि सड़क किस योजना से स्वीकृत हुई, इसकी कुल लागत कितनी है, लंबाई कितनी स्वीकृत है, कार्यदायी संस्था कौन है, ठेकेदार कौन है, कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की तिथि क्या है तथा इसकी निगरानी किस तकनीकी अधिकारी के जिम्मे है। मौके पर यदि ऐसा बोर्ड नहीं है तो इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क फरवरी महीने में स्वीकृत होने की बात सामने आई थी, लेकिन लगभग छह महीने तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब जब काम शुरू हुआ है तो करीब दो किलोमीटर की सड़क में महज लगभग तीन सौ मीटर हिस्से में गिट्टी बिछाने और शेष हिस्से में पुराने आधार पर काम बढ़ाने की स्थिति ने ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ा दी है। ऐसे में अब सवाल केवल ठेकेदार की कार्यशैली का नहीं, बल्कि कार्यदायी संस्था, संबंधित अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी का भी है। यदि कार्य की माप पुस्तिका में पूरी सड़क का काम दर्ज होता है तो मौके पर उसकी भौतिक स्थिति से मिलान होना चाहिए। यदि अभी भुगतान नहीं हुआ है तो भुगतान से पहले तकनीकी जांच और माप सत्यापन होना चाहिए, और यदि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो स्वीकृत प्राक्कलन के प्रत्येक मद का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इस मामले में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, उप जिलाधिकारी बारा, तहसीलदार बारा, संबंधित खंड विकास अधिकारी तथा संबंधित निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और तकनीकी अधिकारियों के स्तर से स्थलीय जांच कराया जाना आवश्यक है। जांच में सड़क की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, गिट्टी की मोटाई, गिट्टी की मात्रा, डामर की मोटाई, प्रयुक्त सामग्री, स्वीकृत लागत, कार्य की माप पुस्तिका और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है। यदि दो किलोमीटर की सड़क के लिए पूरा बजट और पूरा निर्माण स्वीकृत है तो लगभग तीन सौ मीटर में ही आधार सामग्री का काम दिखाई देने और बाकी हिस्से में सीधे डामरीकरण की तैयारी का कारण क्या है—इसका जवाब अब ग्रामीण ही नहीं, संबंधित विभाग से भी मांगा जा रहा है। यदि निर्माण नियम और स्वीकृत मानक के अनुसार हो रहा है तो विभाग को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, लेकिन यदि स्वीकृत कार्य और जमीन पर हुए कार्य में अंतर पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी होनी चाहिए। भिलोर की सड़क अब सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल बन गई है कि सरकारी निर्माण में कागज पर दर्ज मात्रा और जमीन पर दिखाई देने वाले काम के बीच आखिर कितना फासला है? *दो किलोमीटर की सड़क, गिट्टी सिर्फ तीन सौ मीटर! बाकी हिस्से में डामरीकरण की तैयारी, भिलोर में निर्माण कार्य ने खड़े किए बड़े सवाल* *स्वीकृत धनराशि से लेकर तकनीकी मानक तक सवालों के घेरे में—ग्रामीण बोले, पहले पूरी सड़क की गिट्टी बिछे, फिर हो डामरीकरण; जिम्मेदार विभाग बताए आखिर बाकी सड़क का हिसाब क्या है?* भिलोर/बारा, प्रयागराज। लालापुर से प्रतापपुर मार्ग से भिलोर गांव की ओर जाने वाली करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण को लेकर मौके की स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को मीडिया की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, उसके मुताबिक करीब दो किलोमीटर की सड़क में आधार तैयार करने के लिए बड़ी गिट्टी का कार्य महज लगभग तीन सौ मीटर के आसपास ही दिखाई दे रहा है, जबकि शेष हिस्से में पूरी सड़क पर एकसमान गिट्टी बिछी नजर नहीं आती। कहीं गड्ढों में थोड़ी-थोड़ी गिट्टी डाली गई है तो कहीं पुरानी डामर की परत को उखाड़कर उसी सतह पर नया डामरीकरण कराने की तैयारी दिखाई दे रही है। यही अंतर अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता से आगे बढ़कर स्वीकृत प्राक्कलन, कार्य की वास्तविक मात्रा और सरकारी धनराशि के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करीब दो किलोमीटर सड़क का निर्माण स्वीकृत है और निर्माण में गिट्टी की निर्धारित परत का प्रावधान है तो फिर गिट्टी का काम केवल लगभग तीन सौ मीटर तक सीमित क्यों दिखाई दे रहा है? बाकी लगभग एक किलोमीटर सात सौ मीटर सड़क के लिए निर्धारित निर्माण प्रक्रिया कहां है? क्या उस हिस्से में पहले से मौजूद सड़क की सतह को ही आधार मानकर सीधे डामरीकरण कराया जाएगा? यदि ऐसा है तो क्या यह तकनीकी रूप से स्वीकृत है? और यदि स्वीकृति में पूरी सड़क को निर्धारित स्तर तक तैयार करने का प्रावधान है तो फिर मौके पर उसका पालन क्यों नहीं दिख रहा? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से स्पष्ट रूप से कहा कि पहले पूरी सड़क पर आवश्यक गिट्टी डलवाई जाए और उसके बाद डामरीकरण कराया जाए, लेकिन उनकी आपत्ति के बावजूद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उस सूचना-पट्ट का भी है, जिससे जनता को यह पता चल सके कि सड़क किस योजना से स्वीकृत हुई, इसकी कुल लागत कितनी है, लंबाई कितनी स्वीकृत है, कार्यदायी संस्था कौन है, ठेकेदार कौन है, कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की तिथि क्या है तथा इसकी निगरानी किस तकनीकी अधिकारी के जिम्मे है। मौके पर यदि ऐसा बोर्ड नहीं है तो इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क फरवरी महीने में स्वीकृत होने की बात सामने आई थी, लेकिन लगभग छह महीने तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब जब काम शुरू हुआ है तो करीब दो किलोमीटर की सड़क में महज लगभग तीन सौ मीटर हिस्से में गिट्टी बिछाने और शेष हिस्से में पुराने आधार पर काम बढ़ाने की स्थिति ने ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ा दी है। ऐसे में अब सवाल केवल ठेकेदार की कार्यशैली का नहीं, बल्कि कार्यदायी संस्था, संबंधित अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी का भी है। यदि कार्य की माप पुस्तिका में पूरी सड़क का काम दर्ज होता है तो मौके पर उसकी भौतिक स्थिति से मिलान होना चाहिए। यदि अभी भुगतान नहीं हुआ है तो भुगतान से पहले तकनीकी जांच और माप सत्यापन होना चाहिए, और यदि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो स्वीकृत प्राक्कलन के प्रत्येक मद का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इस मामले में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, उप जिलाधिकारी बारा, तहसीलदार बारा, संबंधित खंड विकास अधिकारी तथा संबंधित निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और तकनीकी अधिकारियों के स्तर से स्थलीय जांच कराया जाना आवश्यक है। जांच में सड़क की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, गिट्टी की मोटाई, गिट्टी की मात्रा, डामर की मोटाई, प्रयुक्त सामग्री, स्वीकृत लागत, कार्य की माप पुस्तिका और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है। यदि दो किलोमीटर की सड़क के लिए पूरा बजट और पूरा निर्माण स्वीकृत है तो लगभग तीन सौ मीटर में ही आधार सामग्री का काम दिखाई देने और बाकी हिस्से में सीधे डामरीकरण की तैयारी का कारण क्या है—इसका जवाब अब ग्रामीण ही नहीं, संबंधित विभाग से भी मांगा जा रहा है। यदि निर्माण नियम और स्वीकृत मानक के अनुसार हो रहा है तो विभाग को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, लेकिन यदि स्वीकृत कार्य और जमीन पर हुए कार्य में अंतर पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी होनी चाहिए। भिलोर की सड़क अब सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल बन गई है कि सरकारी निर्माण में कागज पर दर्ज मात्रा और जमीन पर दिखाई देने वाले काम के बीच आखिर कितना फासला है?
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    *दो किलोमीटर की सड़क, गिट्टी सिर्फ तीन सौ मीटर! बाकी हिस्से में डामरीकरण की तैयारी, भिलोर में निर्माण कार्य ने खड़े किए बड़े सवाल*

*स्वीकृत धनराशि से लेकर तकनीकी मानक तक सवालों के घेरे में—ग्रामीण बोले, पहले पूरी सड़क की गिट्टी बिछे, फिर हो डामरीकरण; जिम्मेदार विभाग बताए आखिर बाकी सड़क का हिसाब क्या है?*

भिलोर/बारा, प्रयागराज। लालापुर से प्रतापपुर मार्ग से भिलोर गांव की ओर जाने वाली करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण को लेकर मौके की स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को मीडिया की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, उसके मुताबिक करीब दो किलोमीटर की सड़क में आधार तैयार करने के लिए बड़ी गिट्टी का कार्य महज लगभग तीन सौ मीटर के आसपास ही दिखाई दे रहा है, जबकि शेष हिस्से में पूरी सड़क पर एकसमान गिट्टी बिछी नजर नहीं आती। कहीं गड्ढों में थोड़ी-थोड़ी गिट्टी डाली गई है तो कहीं पुरानी डामर की परत को उखाड़कर उसी सतह पर नया डामरीकरण कराने की तैयारी दिखाई दे रही है। यही अंतर अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता से आगे बढ़कर स्वीकृत प्राक्कलन, कार्य की वास्तविक मात्रा और सरकारी धनराशि के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करीब दो किलोमीटर सड़क का निर्माण स्वीकृत है और निर्माण में गिट्टी की निर्धारित परत का प्रावधान है तो फिर गिट्टी का काम केवल लगभग तीन सौ मीटर तक सीमित क्यों दिखाई दे रहा है? बाकी लगभग एक किलोमीटर सात सौ मीटर सड़क के लिए निर्धारित निर्माण प्रक्रिया कहां है? क्या उस हिस्से में पहले से मौजूद सड़क की सतह को ही आधार मानकर सीधे डामरीकरण कराया जाएगा? यदि ऐसा है तो क्या यह तकनीकी रूप से स्वीकृत है? और यदि स्वीकृति में पूरी सड़क को निर्धारित स्तर तक तैयार करने का प्रावधान है तो फिर मौके पर उसका पालन क्यों नहीं दिख रहा? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से स्पष्ट रूप से कहा कि पहले पूरी सड़क पर आवश्यक गिट्टी डलवाई जाए और उसके बाद डामरीकरण कराया जाए, लेकिन उनकी आपत्ति के बावजूद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उस सूचना-पट्ट का भी है, जिससे जनता को यह पता चल सके कि सड़क किस योजना से स्वीकृत हुई, इसकी कुल लागत कितनी है, लंबाई कितनी स्वीकृत है, कार्यदायी संस्था कौन है, ठेकेदार कौन है, कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की तिथि क्या है तथा इसकी निगरानी किस तकनीकी अधिकारी के जिम्मे है। मौके पर यदि ऐसा बोर्ड नहीं है तो इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क फरवरी महीने में स्वीकृत होने की बात सामने आई थी, लेकिन लगभग छह महीने तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब जब काम शुरू हुआ है तो करीब दो किलोमीटर की सड़क में महज लगभग तीन सौ मीटर हिस्से में गिट्टी बिछाने और शेष हिस्से में पुराने आधार पर काम बढ़ाने की स्थिति ने ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ा दी है। ऐसे में अब सवाल केवल ठेकेदार की कार्यशैली का नहीं, बल्कि कार्यदायी संस्था, संबंधित अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी का भी है। यदि कार्य की माप पुस्तिका में पूरी सड़क का काम दर्ज होता है तो मौके पर उसकी भौतिक स्थिति से मिलान होना चाहिए। यदि अभी भुगतान नहीं हुआ है तो भुगतान से पहले तकनीकी जांच और माप सत्यापन होना चाहिए, और यदि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो स्वीकृत प्राक्कलन के प्रत्येक मद का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इस मामले में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, उप जिलाधिकारी बारा, तहसीलदार बारा, संबंधित खंड विकास अधिकारी तथा संबंधित निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और तकनीकी अधिकारियों के स्तर से स्थलीय जांच कराया जाना आवश्यक है। जांच में सड़क की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, गिट्टी की मोटाई, गिट्टी की मात्रा, डामर की मोटाई, प्रयुक्त सामग्री, स्वीकृत लागत, कार्य की माप पुस्तिका और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है। यदि दो किलोमीटर की सड़क के लिए पूरा बजट और पूरा निर्माण स्वीकृत है तो लगभग तीन सौ मीटर में ही आधार सामग्री का काम दिखाई देने और बाकी हिस्से में सीधे डामरीकरण की तैयारी का कारण क्या है—इसका जवाब अब ग्रामीण ही नहीं, संबंधित विभाग से भी मांगा जा रहा है। यदि निर्माण नियम और स्वीकृत मानक के अनुसार हो रहा है तो विभाग को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, लेकिन यदि स्वीकृत कार्य और जमीन पर हुए कार्य में अंतर पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी होनी चाहिए। भिलोर की सड़क अब सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल बन गई है कि सरकारी निर्माण में कागज पर दर्ज मात्रा और जमीन पर दिखाई देने वाले काम के बीच आखिर कितना फासला है?
*दो किलोमीटर की सड़क, गिट्टी सिर्फ तीन सौ मीटर! बाकी हिस्से में डामरीकरण की तैयारी, भिलोर में निर्माण कार्य ने खड़े किए बड़े सवाल*
*स्वीकृत धनराशि से लेकर तकनीकी मानक तक सवालों के घेरे में—ग्रामीण बोले, पहले पूरी सड़क की गिट्टी बिछे, फिर हो डामरीकरण; जिम्मेदार विभाग बताए आखिर बाकी सड़क का हिसाब क्या है?*
भिलोर/बारा, प्रयागराज। लालापुर से प्रतापपुर मार्ग से भिलोर गांव की ओर जाने वाली करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण को लेकर मौके की स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को मीडिया की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, उसके मुताबिक करीब दो किलोमीटर की सड़क में आधार तैयार करने के लिए बड़ी गिट्टी का कार्य महज लगभग तीन सौ मीटर के आसपास ही दिखाई दे रहा है, जबकि शेष हिस्से में पूरी सड़क पर एकसमान गिट्टी बिछी नजर नहीं आती। कहीं गड्ढों में थोड़ी-थोड़ी गिट्टी डाली गई है तो कहीं पुरानी डामर की परत को उखाड़कर उसी सतह पर नया डामरीकरण कराने की तैयारी दिखाई दे रही है। यही अंतर अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता से आगे बढ़कर स्वीकृत प्राक्कलन, कार्य की वास्तविक मात्रा और सरकारी धनराशि के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करीब दो किलोमीटर सड़क का निर्माण स्वीकृत है और निर्माण में गिट्टी की निर्धारित परत का प्रावधान है तो फिर गिट्टी का काम केवल लगभग तीन सौ मीटर तक सीमित क्यों दिखाई दे रहा है? बाकी लगभग एक किलोमीटर सात सौ मीटर सड़क के लिए निर्धारित निर्माण प्रक्रिया कहां है? क्या उस हिस्से में पहले से मौजूद सड़क की सतह को ही आधार मानकर सीधे डामरीकरण कराया जाएगा? यदि ऐसा है तो क्या यह तकनीकी रूप से स्वीकृत है? और यदि स्वीकृति में पूरी सड़क को निर्धारित स्तर तक तैयार करने का प्रावधान है तो फिर मौके पर उसका पालन क्यों नहीं दिख रहा? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से स्पष्ट रूप से कहा कि पहले पूरी सड़क पर आवश्यक गिट्टी डलवाई जाए और उसके बाद डामरीकरण कराया जाए, लेकिन उनकी आपत्ति के बावजूद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उस सूचना-पट्ट का भी है, जिससे जनता को यह पता चल सके कि सड़क किस योजना से स्वीकृत हुई, इसकी कुल लागत कितनी है, लंबाई कितनी स्वीकृत है, कार्यदायी संस्था कौन है, ठेकेदार कौन है, कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की तिथि क्या है तथा इसकी निगरानी किस तकनीकी अधिकारी के जिम्मे है। मौके पर यदि ऐसा बोर्ड नहीं है तो इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क फरवरी महीने में स्वीकृत होने की बात सामने आई थी, लेकिन लगभग छह महीने तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब जब काम शुरू हुआ है तो करीब दो किलोमीटर की सड़क में महज लगभग तीन सौ मीटर हिस्से में गिट्टी बिछाने और शेष हिस्से में पुराने आधार पर काम बढ़ाने की स्थिति ने ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ा दी है। ऐसे में अब सवाल केवल ठेकेदार की कार्यशैली का नहीं, बल्कि कार्यदायी संस्था, संबंधित अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी का भी है। यदि कार्य की माप पुस्तिका में पूरी सड़क का काम दर्ज होता है तो मौके पर उसकी भौतिक स्थिति से मिलान होना चाहिए। यदि अभी भुगतान नहीं हुआ है तो भुगतान से पहले तकनीकी जांच और माप सत्यापन होना चाहिए, और यदि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो स्वीकृत प्राक्कलन के प्रत्येक मद का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इस मामले में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, उप जिलाधिकारी बारा, तहसीलदार बारा, संबंधित खंड विकास अधिकारी तथा संबंधित निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और तकनीकी अधिकारियों के स्तर से स्थलीय जांच कराया जाना आवश्यक है। जांच में सड़क की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, गिट्टी की मोटाई, गिट्टी की मात्रा, डामर की मोटाई, प्रयुक्त सामग्री, स्वीकृत लागत, कार्य की माप पुस्तिका और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है। यदि दो किलोमीटर की सड़क के लिए पूरा बजट और पूरा निर्माण स्वीकृत है तो लगभग तीन सौ मीटर में ही आधार सामग्री का काम दिखाई देने और बाकी हिस्से में सीधे डामरीकरण की तैयारी का कारण क्या है—इसका जवाब अब ग्रामीण ही नहीं, संबंधित विभाग से भी मांगा जा रहा है। यदि निर्माण नियम और स्वीकृत मानक के अनुसार हो रहा है तो विभाग को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, लेकिन यदि स्वीकृत कार्य और जमीन पर हुए कार्य में अंतर पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी होनी चाहिए। भिलोर की सड़क अब सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल बन गई है कि सरकारी निर्माण में कागज पर दर्ज मात्रा और जमीन पर दिखाई देने वाले काम के बीच आखिर कितना फासला है?
    user_राजेश कुमार
    राजेश कुमार
    रिपोर्टर मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
    user_Umesh chandra patrkar
    Umesh chandra patrkar
    Advertising Photographer मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    12 hrs ago
  • नाजरेथ हॉस्पिटल में हर्षोल्लास से मनाया गया 80वाँ स्वतंत्रता दिवस, SDM ने किया ध्वजारोहण। नाजरेथ हॉस्पिटल में हर्षोल्लास से मनाया गया 80वाँ स्वतंत्रता दिवस, SDM ने किया ध्वजारोहण प्रयागराज शहर में नाजरेथ हॉस्पिटल* में 80वाँ स्वतंत्रता दिवस देशभक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। समारोह में हॉस्पिटल प्रशासन, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और नाजरेथ स्कूल ऑफ नर्सिंग की छात्राएँ मौजूद रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत नर्सिंग स्कूल की क्वायर के प्रार्थना गीत से हुई। सहायक निदेशक रेव. फादर चिन्नप्पा ने स्वागत भाषण दिया। प्रशासक रेव. फादर इसिडोर डी सूजा ने मुख्य अतिथि SDM सदर अंकित कुमार वर्मा का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। गायन मंडली ने "वंदे मातरम्" प्रस्तुत किया। समारोह का मुख्य आकर्षण SDM अंकित कुमार वर्मा द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराना रहा। उन्होंने कहा कि हर नागरिक का राष्ट्र के प्रति दायित्व है और नाजरेथ हॉस्पिटल की स्वास्थ्य सेवाओं की सराहना की। साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों को करुणा और समर्पण से सेवा करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में मैट्रन रेव. सिस्टर प्रीमा, प्रिंसिपल सिस्टर अल्वीना, डॉ. अशोक अग्रवाल सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। अंत में अन्ना मेरी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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    नाजरेथ हॉस्पिटल में हर्षोल्लास से मनाया गया 80वाँ स्वतंत्रता दिवस, SDM ने किया ध्वजारोहण।
नाजरेथ हॉस्पिटल में हर्षोल्लास से मनाया गया 80वाँ स्वतंत्रता दिवस, SDM ने किया ध्वजारोहण
प्रयागराज शहर में नाजरेथ हॉस्पिटल* में 80वाँ स्वतंत्रता दिवस देशभक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। समारोह में हॉस्पिटल प्रशासन, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और नाजरेथ स्कूल ऑफ नर्सिंग की छात्राएँ मौजूद रहीं।
कार्यक्रम की शुरुआत नर्सिंग स्कूल की क्वायर के प्रार्थना गीत से हुई। सहायक निदेशक रेव. फादर चिन्नप्पा ने स्वागत भाषण दिया। 
प्रशासक रेव. फादर इसिडोर डी सूजा ने मुख्य अतिथि SDM सदर अंकित कुमार वर्मा का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। गायन मंडली ने "वंदे मातरम्" प्रस्तुत किया।
समारोह का मुख्य आकर्षण SDM अंकित कुमार वर्मा द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराना रहा। उन्होंने कहा कि हर नागरिक का राष्ट्र के प्रति दायित्व है और नाजरेथ हॉस्पिटल की स्वास्थ्य सेवाओं की सराहना की। साथ ही स्वास्थ्यकर्मियों को करुणा और समर्पण से सेवा करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में मैट्रन रेव. सिस्टर प्रीमा, प्रिंसिपल सिस्टर अल्वीना, डॉ. अशोक अग्रवाल सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। अंत में अन्ना मेरी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
    user_Rohit Sharma
    Rohit Sharma
    निष्पक्षता से खबर को प्रकाशित करना मेरा बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • चार किलोमीटर का तिरंगा जुलूस, हजारों बच्चों का जोश—लेकिन तपती धूप में पानी और सुरक्षा की कमी ने उठाए गंभीर सवाल चार किलोमीटर का तिरंगा जुलूस, हजारों बच्चों का जोश—लेकिन तपती धूप में पानी और सुरक्षा की कमी ने उठाए गंभीर सवाल घूरपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राधाकृष्णन इंटर कॉलेज एंड कॉन्वेंट स्कूल की ओर से हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भव्य तिरंगा जुलूस निकाला गया। जुलूस में हजारों की संख्या में छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह और देशभक्ति के जज्बे के साथ हिस्सा लिया। घूरपुर थाने के सामने स्थित विद्यालय परिसर से शुरू हुआ यह जुलूस इरादतगंज, ग्लास फैक्ट्री और सब्जी मंडी क्षेत्र से होकर करीब चार किलोमीटर की यात्रा पूरी करते हुए पुनः विद्यालय पहुंचकर समाप्त हुआ। तेज धूप और उमस भरी गर्मी के बावजूद बच्चों का उत्साह और देशप्रेम देखने लायक रहा। जुलूस के दौरान घूरपुर थाना पुलिस भी सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रही। निश्चित रूप से ऐसे आयोजन बच्चों में देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। हजारों बच्चों का हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता के जयकारे लगाते हुए सड़कों पर निकलना क्षेत्र के लिए भी गौरव का विषय रहा। लेकिन तपती धूप में मासूमों की प्यास ने व्यवस्था पर खड़े किए सवाल इतने बड़े और करीब चार किलोमीटर लंबे जुलूस के बीच एक महत्वपूर्ण कमी भी नजर आई। जिस समय भीषण गर्मी और तेज धूप में छोटे-छोटे बच्चे और बच्चियां लंबी दूरी तय कर रहे थे, ऐसे में रास्ते में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था दिखाई नहीं दी। इतने बड़े आयोजन में बच्चों के लिए प्रमुख स्थानों पर पानी, प्राथमिक उपचार और आकस्मिक स्वास्थ्य सहायता की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। खासकर छोटे बच्चों के लंबे समय तक धूप में रहने को देखते हुए उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यह सवाल किसी आयोजन को कटघरे में खड़ा करने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के आयोजनों को और बेहतर एवं सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से उठना जरूरी है। बच्चों का उत्साह जरूरी, लेकिन उनकी सुरक्षा उससे भी ज्यादा जरूरी स्कूल प्रबंधन, प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाज के जिम्मेदार लोगों को ऐसे आयोजनों से पहले संयुक्त रूप से सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। रास्ते में पर्याप्त पेयजल, प्राथमिक उपचार, मेडिकल टीम/एंबुलेंस की उपलब्धता, यातायात नियंत्रण और बच्चों के साथ पर्याप्त शिक्षक-कर्मचारियों की मौजूदगी जैसे इंतजाम पहले से तय किए जाने चाहिए। स्वतंत्रता दिवस का जश्न बच्चों के लिए यादगार बने, यह हर किसी की जिम्मेदारी है। देशभक्ति के जज्बे से निकली रैली में बच्चों की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होना चाहिए। राधाकृष्णन इंटर कॉलेज का यह आयोजन निश्चित तौर पर बच्चों के भीतर राष्ट्रप्रेम की भावना जगाने वाला रहा, लेकिन इस आयोजन से एक सकारात्मक सीख भी सामने आती है—आगे जब भी इतनी बड़ी और लंबी रैली हो, तो उत्साह के साथ-साथ बच्चों की सुविधा, स्वास्थ्य और सुरक्षा की भी पूरी तैयारी हो। क्योंकि बच्चे केवल किसी स्कूल के विद्यार्थी नहीं, बल्कि देश का भविष्य हैं—और भविष्य की सुरक्षा हमारी पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।
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    चार किलोमीटर का तिरंगा जुलूस, हजारों बच्चों का जोश—लेकिन तपती धूप में पानी और सुरक्षा की कमी ने उठाए गंभीर सवाल
चार किलोमीटर का तिरंगा जुलूस, हजारों बच्चों का जोश—लेकिन तपती धूप में पानी और सुरक्षा की कमी ने उठाए गंभीर सवाल
घूरपुर। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राधाकृष्णन इंटर कॉलेज एंड कॉन्वेंट स्कूल की ओर से हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भव्य तिरंगा जुलूस निकाला गया। जुलूस में हजारों की संख्या में छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह और देशभक्ति के जज्बे के साथ हिस्सा लिया।
घूरपुर थाने के सामने स्थित विद्यालय परिसर से शुरू हुआ यह जुलूस इरादतगंज, ग्लास फैक्ट्री और सब्जी मंडी क्षेत्र से होकर करीब चार किलोमीटर की यात्रा पूरी करते हुए पुनः विद्यालय पहुंचकर समाप्त हुआ। तेज धूप और उमस भरी गर्मी के बावजूद बच्चों का उत्साह और देशप्रेम देखने लायक रहा। जुलूस के दौरान घूरपुर थाना पुलिस भी सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रही।
निश्चित रूप से ऐसे आयोजन बच्चों में देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। हजारों बच्चों का हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता के जयकारे लगाते हुए सड़कों पर निकलना क्षेत्र के लिए भी गौरव का विषय रहा।
लेकिन तपती धूप में मासूमों की प्यास ने व्यवस्था पर खड़े किए सवाल
इतने बड़े और करीब चार किलोमीटर लंबे जुलूस के बीच एक महत्वपूर्ण कमी भी नजर आई। जिस समय भीषण गर्मी और तेज धूप में छोटे-छोटे बच्चे और बच्चियां लंबी दूरी तय कर रहे थे, ऐसे में रास्ते में पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था दिखाई नहीं दी।
इतने बड़े आयोजन में बच्चों के लिए प्रमुख स्थानों पर पानी, प्राथमिक उपचार और आकस्मिक स्वास्थ्य सहायता की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। खासकर छोटे बच्चों के लंबे समय तक धूप में रहने को देखते हुए उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
यह सवाल किसी आयोजन को कटघरे में खड़ा करने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के आयोजनों को और बेहतर एवं सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से उठना जरूरी है।
बच्चों का उत्साह जरूरी, लेकिन उनकी सुरक्षा उससे भी ज्यादा जरूरी
स्कूल प्रबंधन, प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाज के जिम्मेदार लोगों को ऐसे आयोजनों से पहले संयुक्त रूप से सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। रास्ते में पर्याप्त पेयजल, प्राथमिक उपचार, मेडिकल टीम/एंबुलेंस की उपलब्धता, यातायात नियंत्रण और बच्चों के साथ पर्याप्त शिक्षक-कर्मचारियों की मौजूदगी जैसे इंतजाम पहले से तय किए जाने चाहिए।
स्वतंत्रता दिवस का जश्न बच्चों के लिए यादगार बने, यह हर किसी की जिम्मेदारी है। देशभक्ति के जज्बे से निकली रैली में बच्चों की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होना चाहिए।
राधाकृष्णन इंटर कॉलेज का यह आयोजन निश्चित तौर पर बच्चों के भीतर राष्ट्रप्रेम की भावना जगाने वाला रहा, लेकिन इस आयोजन से एक सकारात्मक सीख भी सामने आती है—आगे जब भी इतनी बड़ी और लंबी रैली हो, तो उत्साह के साथ-साथ बच्चों की सुविधा, स्वास्थ्य और सुरक्षा की भी पूरी तैयारी हो।
क्योंकि बच्चे केवल किसी स्कूल के विद्यार्थी नहीं, बल्कि देश का भविष्य हैं—और भविष्य की सुरक्षा हमारी पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।
    user_Mohd Kamar
    Mohd Kamar
    Financial Advisor बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
  • प्रयागराज दिनांक 15/8/ 26 को बिहार के दो लाल जो भारत भ्रमण पर स्केटिंग के दौरा यात्रा कर रहे है काफी कठिनाई का भी सामना करना पड़ रहा है इन दोनों युवकों को क्योंकि पानी बूंदी में ये इतना लंबा सफर तय कर रहे है जो एक मिशाल है जो हमारे भारत की गरिमा को बरकरार रखे हुए है इन बच्चों को जीपी न्यूज़ इंडिया आज भारत की तरफ से दिल से सलाम जीपी न्यूज़ इंडिया आज का भारत से चन्द्रमा प्रसाद यादव की खास रिपोर्ट उतर प्रदेश। प्रयागराज
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    प्रयागराज दिनांक 15/8/ 26 को बिहार के दो लाल जो भारत भ्रमण पर स्केटिंग के दौरा यात्रा कर रहे है काफी कठिनाई का भी सामना करना पड़ रहा है इन दोनों युवकों को क्योंकि पानी बूंदी में ये इतना लंबा सफर तय कर रहे है जो एक मिशाल है  जो हमारे भारत की गरिमा को बरकरार रखे हुए है इन बच्चों को जीपी न्यूज़ इंडिया आज भारत की तरफ से दिल से सलाम 

जीपी न्यूज़ इंडिया आज का भारत से 

चन्द्रमा प्रसाद यादव की खास रिपोर्ट 

उतर प्रदेश।  प्रयागराज
    user_GP News INDIA
    GP News INDIA
    Tour and travels करछना, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • प्रयागराज में पुलिस से कथित पीड़ित तीन युवक पानी की टंकी पर चढ़े, लगाए पुलिस विरोधी नारे प्रयागराज में पुलिस से कथित पीड़ित तीन युवक पानी की टंकी पर चढ़े, लगाए पुलिस विरोधी नारे प्रयागराज। नवाबगंज थाना क्षेत्र के खोड़ियार में एक निर्माण कार्य को लेकर विवाद उस समय गंभीर हो गया, जब तीन युवक पानी की टंकी पर चढ़ गए और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। युवकों का आरोप है कि मामले में उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया। बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य से जुड़े मामले को लेकर युवक पुलिस की कार्रवाई से नाराज थे। युवकों ने थाना नवाबगंज के प्रभारी निरीक्षक पंकज अवस्थी पर कथित मिलीभगत का आरोप लगाते हुए विरोध जताया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। तीनों युवकों के पानी की टंकी पर चढ़ने की सूचना मिलते ही मौके पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई। काफी देर तक वहां अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बना रहा। युवकों द्वारा पुलिस के खिलाफ नारेबाजी किए जाने से स्थानीय लोगों में भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली और संबंधित निर्माण विवाद में अब तक हुई कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल पुलिस की ओर से पूरे मामले में आधिकारिक बयान का इंतजार है।
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    प्रयागराज में पुलिस से कथित पीड़ित तीन युवक पानी की टंकी पर चढ़े, लगाए पुलिस विरोधी नारे
प्रयागराज में पुलिस से कथित पीड़ित तीन युवक पानी की टंकी पर चढ़े, लगाए पुलिस विरोधी नारे
प्रयागराज। नवाबगंज थाना क्षेत्र के खोड़ियार में एक निर्माण कार्य को लेकर विवाद उस समय गंभीर हो गया, जब तीन युवक पानी की टंकी पर चढ़ गए और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। युवकों का आरोप है कि मामले में उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया।
बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य से जुड़े मामले को लेकर युवक पुलिस की कार्रवाई से नाराज थे। युवकों ने थाना नवाबगंज के प्रभारी निरीक्षक पंकज अवस्थी पर कथित मिलीभगत का आरोप लगाते हुए विरोध जताया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
तीनों युवकों के पानी की टंकी पर चढ़ने की सूचना मिलते ही मौके पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई। काफी देर तक वहां अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बना रहा। युवकों द्वारा पुलिस के खिलाफ नारेबाजी किए जाने से स्थानीय लोगों में भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली और संबंधित निर्माण विवाद में अब तक हुई कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल पुलिस की ओर से पूरे मामले में आधिकारिक बयान का इंतजार है।
    user_हंडिया न्यूज़ प्रयाग पांडेय पत्रकार
    हंडिया न्यूज़ प्रयाग पांडेय पत्रकार
    Farmer हंडिया, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    15 hrs ago
  • उत्तराखंड के मुनस्यारी में बादल फटने से भारी तबाही, विडियो वायरल नीचे आया मलबा देखकर लगता है कि ऊपर कोई बड़ी आपदा आई होगी मलबा इस क़दर ताक़तवर था कि बड़े बड़े बोल्डर खिलौने की तरह बहते दिखे ये पिथौरागढ़ में थल-मुनस्यारी रोड के ला-झेकला के पास की घटना है। उत्तराखंड के मुनस्यारी में बादल फटने से भारी तबाही, विडियो वायरल नीचे आया मलबा देखकर लगता है कि ऊपर कोई बड़ी आपदा आई होगी मलबा इस क़दर ताक़तवर था कि बड़े बड़े बोल्डर खिलौने की तरह बहते दिखे ये पिथौरागढ़ में थल-मुनस्यारी रोड के ला-झेकला के पास की घटना है।
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    उत्तराखंड के मुनस्यारी में बादल फटने से भारी तबाही, विडियो वायरल 

नीचे आया मलबा देखकर लगता है कि ऊपर कोई बड़ी आपदा आई होगी

मलबा इस क़दर ताक़तवर था कि बड़े बड़े बोल्डर खिलौने की तरह बहते दिखे

ये पिथौरागढ़ में थल-मुनस्यारी रोड के ला-झेकला के पास की घटना है।
उत्तराखंड के मुनस्यारी में बादल फटने से भारी तबाही, विडियो वायरल 
नीचे आया मलबा देखकर लगता है कि ऊपर कोई बड़ी आपदा आई होगी
मलबा इस क़दर ताक़तवर था कि बड़े बड़े बोल्डर खिलौने की तरह बहते दिखे
ये पिथौरागढ़ में थल-मुनस्यारी रोड के ला-झेकला के पास की घटना है।
    user_Umesh chandra patrkar
    Umesh chandra patrkar
    Advertising Photographer मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • बद्रीनाथ तिवारी इंटर कॉलेज के छात्रों ने स्वतंत्रता दिवस पर निकाली रैली भारत माता के जयकारों से गूंजा मेजारोड बाजार, तिरंगा लेकर निकले छात्र-छात्राओं ने दिया राष्ट्रप्रेम का संदेश मेजा, प्रयागराज। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार सुबह मेजारोड बाजार स्थित बद्रीनाथ तिवारी इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने उत्साह और देशभक्ति के जज्बे के साथ भव्य रैली निकाली। रैली में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता की जय और वंदे मातरम् के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। इससे पूरा मेजारोड बाजार देशभक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। कॉलेज परिसर से शुरू हुई रैली मेजारोड बाजार के विभिन्न मार्गों से होते हुए निकली। भारत माता के जयकारों के साथ छात्रों ने समूचे बाजार का भ्रमण किया। इस दौरान छात्रों ने लोगों को देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। जगह-जगह लोगों ने रैली का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। छात्र-छात्राओं में रैली को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। प्रधानाचार्य दीपक पांडेय ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें देश के वीर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करने का अवसर देता है। विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करना हम सभी की जिम्मेदारी है। रैली के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर मेजारोड चौकी प्रभारी हरिओम सिंह पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।
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    बद्रीनाथ तिवारी इंटर कॉलेज के छात्रों ने स्वतंत्रता दिवस पर निकाली रैली
भारत माता के जयकारों से गूंजा मेजारोड बाजार, तिरंगा लेकर निकले छात्र-छात्राओं ने दिया राष्ट्रप्रेम का संदेश
मेजा, प्रयागराज। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार सुबह मेजारोड बाजार स्थित बद्रीनाथ तिवारी इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने उत्साह और देशभक्ति के जज्बे के साथ भव्य रैली निकाली। रैली में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता की जय और वंदे मातरम् के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। इससे पूरा मेजारोड बाजार देशभक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।
कॉलेज परिसर से शुरू हुई रैली मेजारोड बाजार के विभिन्न मार्गों से होते हुए निकली। भारत माता के जयकारों के साथ छात्रों ने समूचे बाजार का भ्रमण किया। इस दौरान छात्रों ने लोगों को देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। जगह-जगह लोगों ने रैली का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। छात्र-छात्राओं में रैली को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।
प्रधानाचार्य दीपक पांडेय ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें देश के वीर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करने का अवसर देता है। विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
रैली के दौरान शांति और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर मेजारोड चौकी प्रभारी हरिओम सिंह पुलिस बल के साथ मौजूद रहे।
    user_राजेश कुमार
    राजेश कुमार
    रिपोर्टर मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • *मदरसा मुहम्मदिया गौसिया में धूमधाम से मनाया गया 80वां स्वतंत्रता दिवस *मदरसा मुहम्मदिया गौसिया में धूमधाम से मनाया गया 80वां स्वतंत्रता दिवस* *इस्लाम हमे अमन भाईचारे,इंसाफ,इंसानियत और मुल्क से वफादारी का पैगाम देता है-जहीर अहमद* भंडरा उमरगंज, प्रयागराज। आज 15 अगस्त 2026 को मदरसा मुहम्मदिया गौसिया, भंडरा उमरगंज, प्रयागराज में देश की आजादी की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर स्वतंत्रता दिवस बड़े ही जोश, उत्साह और गरिमापूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर मदरसे में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा शान से फहराया गया और उपस्थित लोगों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं तरक्की के लिए दुआ की। *कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी एवं पूर्व प्रधान जनाब जहीर अहमद रहे।उन्होंने तिरंगा फहराकर उपस्थित छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं क्षेत्रवासियों को स्वतंत्रता दिवस की मुबारकबाद दी।* अपने संबोधन में जहीर अहमद ने कहा कि आजादी अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है, जिसकी हिफाजत करना और देश की तरक्की में अपना योगदान देना हम सभी की जिम्मेदारी है। भारत की आजादी के लिए हर धर्म और समुदाय के लोगों ने मिलकर कुर्बानियां दीं। हमें उन तमाम शहीदों को हमेशा याद रखना चाहिए जिन्होंने मुल्क की आजादी के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर दी। उन्होंने कहा कि इस्लाम हमें अमन, भाईचारे, इंसाफ, इंसानियत और मुल्क से वफादारी का पैगाम देता है। हमें अपने बच्चों को बेहतर तालीम के साथ अच्छे अखलाक, देशप्रेम और समाज के प्रति जिम्मेदारी का एहसास भी कराना चाहिए। कार्यक्रम में मदरसे के बच्चों ने राष्ट्रीय एकता, देशप्रेम और शहीदों की कुर्बानी को याद करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। पूरे कार्यक्रम के दौरान हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारों से वातावरण गूंजता रहा। इस अवसर पर मदरसा प्रबंधन, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं, अभिभावक तथा क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में देश की खुशहाली, अमन-चैन, तरक्की और आपसी भाईचारे के लिए विशेष दुआ की गई। मुल्क की तरक्की, समाज की एकता और इंसानियत की खिदमत-यही आजादी के इस मुबारक दिन का असल पैगाम है।
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    *मदरसा मुहम्मदिया गौसिया में धूमधाम से मनाया गया 80वां स्वतंत्रता दिवस
*मदरसा मुहम्मदिया गौसिया में धूमधाम से मनाया गया 80वां स्वतंत्रता दिवस*
*इस्लाम हमे अमन भाईचारे,इंसाफ,इंसानियत और मुल्क से वफादारी का पैगाम देता है-जहीर अहमद*
भंडरा उमरगंज, प्रयागराज।
आज 15 अगस्त 2026 को मदरसा मुहम्मदिया गौसिया, भंडरा उमरगंज, प्रयागराज में देश की आजादी की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर स्वतंत्रता दिवस बड़े ही जोश, उत्साह और गरिमापूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर मदरसे में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा शान से फहराया गया और उपस्थित लोगों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता एवं तरक्की के लिए दुआ की।
*कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी एवं पूर्व प्रधान जनाब जहीर अहमद रहे।उन्होंने तिरंगा फहराकर उपस्थित छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं क्षेत्रवासियों को स्वतंत्रता दिवस की मुबारकबाद दी।*
अपने संबोधन में जहीर अहमद ने कहा कि आजादी अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है, जिसकी हिफाजत करना और देश की तरक्की में अपना योगदान देना हम सभी की जिम्मेदारी है। भारत की आजादी के लिए हर धर्म और समुदाय के लोगों ने मिलकर कुर्बानियां दीं। हमें उन तमाम शहीदों को हमेशा याद रखना चाहिए जिन्होंने मुल्क की आजादी के लिए अपनी जान तक कुर्बान कर दी।
उन्होंने कहा कि इस्लाम हमें अमन, भाईचारे, इंसाफ, इंसानियत और मुल्क से वफादारी का पैगाम देता है। हमें अपने बच्चों को बेहतर तालीम के साथ अच्छे अखलाक, देशप्रेम और समाज के प्रति जिम्मेदारी का एहसास भी कराना चाहिए।
कार्यक्रम में मदरसे के बच्चों ने राष्ट्रीय एकता, देशप्रेम और शहीदों की कुर्बानी को याद करते हुए अपने विचार व्यक्त किए। पूरे कार्यक्रम के दौरान हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारों से वातावरण गूंजता रहा।
इस अवसर पर मदरसा प्रबंधन, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं, अभिभावक तथा क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में देश की खुशहाली, अमन-चैन, तरक्की और आपसी भाईचारे के लिए विशेष दुआ की गई।
मुल्क की तरक्की, समाज की एकता और इंसानियत की खिदमत-यही आजादी के इस मुबारक दिन का असल पैगाम है।
    user_Mohd Kamar
    Mohd Kamar
    Financial Advisor बारा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    23 hrs ago
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