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दादू पंथ की 500 साल पुरानी तपोभूमि भैराणा धाम को बचाने के लिए संतों और ग्रामीणों का बड़ा आंदोलन चल रहा है। पेड़ों की कटाई, पर्यावरण के विनाश और RIICO प्रोजेक्ट के विरोध में संत अग्नि तप कर रहे हैं, जो उनकी गहन पीड़ा और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। यह पवित्र तपोभूमि केवल ज़मीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि दादू दयाल जी के विचारों, शांति और तपस्या का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है, जिसका संरक्षण समाज और संस्कृति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। RIICO औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के नाम पर हो रही पेड़ों की कटाई और प्रकृति का विनाश एक गंभीर संकट है, क्योंकि विकास सदियों पुराने पारिस्थितिकी तंत्र की कीमत पर नहीं होना चाहिए। इस आंदोलन ने अब राष्ट्रीय स्तर पर जोर पकड़ लिया है, जहाँ संत प्रकाश नाथ जी ने गोरखपुर सहित देशभर के सभी संतों से भैराणा धाम पहुँचने का आह्वान किया है। कल होने वाली विशाल महापंचायत, जिसमें RLP सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल जी शामिल होंगे, इस आंदोलन को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगी, जिससे राजनीतिक और सामाजिक समर्थन के माध्यम से यह आवाज़ प्रशासन और सरकार तक और अधिक मज़बूती से पहुँचेगी। महापंचायत से पहले संतों का यह भारी जमावड़ा और हुंकार प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि "तपोभूमि और पर्यावरण को बचाने के लिए साधु समाज एकजुट हो" के नारे के साथ उनका अग्नि तप लगातार जारी है।

2 hrs ago
user_कुमार राजेश चौधरी
कुमार राजेश चौधरी
Voice of people चूरू, चूरू, राजस्थान•
2 hrs ago

दादू पंथ की 500 साल पुरानी तपोभूमि भैराणा धाम को बचाने के लिए संतों और ग्रामीणों का बड़ा आंदोलन चल रहा है। पेड़ों की कटाई, पर्यावरण के विनाश और RIICO प्रोजेक्ट के विरोध में संत अग्नि तप कर रहे हैं, जो उनकी गहन पीड़ा और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। यह पवित्र तपोभूमि केवल ज़मीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि दादू दयाल जी के विचारों, शांति और तपस्या का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है, जिसका संरक्षण समाज और संस्कृति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। RIICO औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के नाम पर हो रही पेड़ों की कटाई और प्रकृति का विनाश एक गंभीर संकट है, क्योंकि विकास सदियों पुराने पारिस्थितिकी तंत्र की कीमत पर नहीं होना चाहिए। इस आंदोलन ने अब राष्ट्रीय स्तर पर जोर पकड़ लिया है, जहाँ संत प्रकाश नाथ जी ने गोरखपुर सहित देशभर के सभी संतों से भैराणा धाम पहुँचने का आह्वान किया है। कल होने वाली विशाल महापंचायत, जिसमें RLP सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल जी शामिल होंगे, इस आंदोलन को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगी, जिससे राजनीतिक और सामाजिक समर्थन के माध्यम से यह आवाज़ प्रशासन और सरकार तक और अधिक मज़बूती से पहुँचेगी। महापंचायत से पहले संतों का यह भारी जमावड़ा और हुंकार प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि "तपोभूमि और पर्यावरण को बचाने के लिए साधु समाज एकजुट हो" के नारे के साथ उनका अग्नि तप लगातार जारी है।

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  • दादू पंथ की 500 साल पुरानी तपोभूमि भैराणा धाम को बचाने के लिए संतों और ग्रामीणों का बड़ा आंदोलन चल रहा है। पेड़ों की कटाई, पर्यावरण के विनाश और RIICO प्रोजेक्ट के विरोध में संत अग्नि तप कर रहे हैं, जो उनकी गहन पीड़ा और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। यह पवित्र तपोभूमि केवल ज़मीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि दादू दयाल जी के विचारों, शांति और तपस्या का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है, जिसका संरक्षण समाज और संस्कृति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। RIICO औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के नाम पर हो रही पेड़ों की कटाई और प्रकृति का विनाश एक गंभीर संकट है, क्योंकि विकास सदियों पुराने पारिस्थितिकी तंत्र की कीमत पर नहीं होना चाहिए। इस आंदोलन ने अब राष्ट्रीय स्तर पर जोर पकड़ लिया है, जहाँ संत प्रकाश नाथ जी ने गोरखपुर सहित देशभर के सभी संतों से भैराणा धाम पहुँचने का आह्वान किया है। कल होने वाली विशाल महापंचायत, जिसमें RLP सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल जी शामिल होंगे, इस आंदोलन को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगी, जिससे राजनीतिक और सामाजिक समर्थन के माध्यम से यह आवाज़ प्रशासन और सरकार तक और अधिक मज़बूती से पहुँचेगी। महापंचायत से पहले संतों का यह भारी जमावड़ा और हुंकार प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि "तपोभूमि और पर्यावरण को बचाने के लिए साधु समाज एकजुट हो" के नारे के साथ उनका अग्नि तप लगातार जारी है।
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    दादू पंथ की 500 साल पुरानी तपोभूमि भैराणा धाम को बचाने के लिए संतों और ग्रामीणों का बड़ा आंदोलन चल रहा है। पेड़ों की कटाई, पर्यावरण के विनाश और RIICO प्रोजेक्ट के विरोध में संत अग्नि तप कर रहे हैं, जो उनकी गहन पीड़ा और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। यह पवित्र तपोभूमि केवल ज़मीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि दादू दयाल जी के विचारों, शांति और तपस्या का एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है, जिसका संरक्षण समाज और संस्कृति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

RIICO औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के नाम पर हो रही पेड़ों की कटाई और प्रकृति का विनाश एक गंभीर संकट है, क्योंकि विकास सदियों पुराने पारिस्थितिकी तंत्र की कीमत पर नहीं होना चाहिए। इस आंदोलन ने अब राष्ट्रीय स्तर पर जोर पकड़ लिया है, जहाँ संत प्रकाश नाथ जी ने गोरखपुर सहित देशभर के सभी संतों से भैराणा धाम पहुँचने का आह्वान किया है।

कल होने वाली विशाल महापंचायत, जिसमें RLP सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल जी शामिल होंगे, इस आंदोलन को नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगी, जिससे राजनीतिक और सामाजिक समर्थन के माध्यम से यह आवाज़ प्रशासन और सरकार तक और अधिक मज़बूती से पहुँचेगी। महापंचायत से पहले संतों का यह भारी जमावड़ा और हुंकार प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि "तपोभूमि और पर्यावरण को बचाने के लिए साधु समाज एकजुट हो" के नारे के साथ उनका अग्नि तप लगातार जारी है।
    user_कुमार राजेश चौधरी
    कुमार राजेश चौधरी
    Voice of people चूरू, चूरू, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • एक महत्वपूर्ण चिंता यह जताई गई है कि ईरान-अमेरिका के बीच संभावित जंग और अल-नीनो के प्रभावों से आम आदमी की खाने की थाली पर कितना और कैसा असर पड़ेगा। इस स्थिति को देखते हुए, यह सवाल उठाया गया है कि आम आदमी और किसानों को साल 2007 तक क्या कदम उठाने चाहिए।
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    एक महत्वपूर्ण चिंता यह जताई गई है कि ईरान-अमेरिका के बीच संभावित जंग और अल-नीनो के प्रभावों से आम आदमी की खाने की थाली पर कितना और कैसा असर पड़ेगा। इस स्थिति को देखते हुए, यह सवाल उठाया गया है कि आम आदमी और किसानों को साल 2007 तक क्या कदम उठाने चाहिए।
    user_Bhajan lal sharma
    Bhajan lal sharma
    Farmer चूरू, चूरू, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • मंडावा कस्बे में मुकुंदगढ़ मार्ग पर स्थित प्रमुख पर्यटन स्थल अलखियान जोहड़ में गंदा पानी जमा होने से इसकी खूबसूरती पर गहरा दाग लग रहा है। जिले में इन दिनों 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' चलाया जा रहा है, जिसके मद्देनजर नगर पालिका प्रशासन से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह जन सहयोग से इस जोहड़ की साफ-सफाई करवाकर इसकी सुंदरता को वापस लाए। आगामी मानसून से पहले यदि साफ-सफाई ठीक ढंग से हो जाती है, तो बरसाती पानी का भराव अत्यंत फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके लिए प्रशासन को सबसे पहले जोहड़ में पानी आने वाले नालों पर जाली लगाकर उन्हें ढकना चाहिए, ताकि बाहरी गंदगी अंदर न आ सके। साथ ही, जोहड़ के अंदर जमा गंदे पानी को पूरी तरह बाहर निकालकर साफ-सफाई की जानी चाहिए। यदि इसका निचला फर्श क्षतिग्रस्त है, तो उसकी मरम्मत करवाना भी आवश्यक है ताकि पानी का रिसाव न हो और इसमें साफ पानी का भराव हो सके, जो पक्षियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा। 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' के तहत जिले में तालाबों और बावड़ियों की सफाई की जा रही है, और यदि अलखियान जोहड़ में जमा गंदा पानी हटकर इसकी दशा सुधर जाती है, तो इस प्रमुख पर्यटन स्थल की सुंदरता में चार चांद लग जाएंगे।
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    मंडावा कस्बे में मुकुंदगढ़ मार्ग पर स्थित प्रमुख पर्यटन स्थल अलखियान जोहड़ में गंदा पानी जमा होने से इसकी खूबसूरती पर गहरा दाग लग रहा है। जिले में इन दिनों 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' चलाया जा रहा है, जिसके मद्देनजर नगर पालिका प्रशासन से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह जन सहयोग से इस जोहड़ की साफ-सफाई करवाकर इसकी सुंदरता को वापस लाए।

आगामी मानसून से पहले यदि साफ-सफाई ठीक ढंग से हो जाती है, तो बरसाती पानी का भराव अत्यंत फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके लिए प्रशासन को सबसे पहले जोहड़ में पानी आने वाले नालों पर जाली लगाकर उन्हें ढकना चाहिए, ताकि बाहरी गंदगी अंदर न आ सके। साथ ही, जोहड़ के अंदर जमा गंदे पानी को पूरी तरह बाहर निकालकर साफ-सफाई की जानी चाहिए। यदि इसका निचला फर्श क्षतिग्रस्त है, तो उसकी मरम्मत करवाना भी आवश्यक है ताकि पानी का रिसाव न हो और इसमें साफ पानी का भराव हो सके, जो पक्षियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा। 'वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान' के तहत जिले में तालाबों और बावड़ियों की सफाई की जा रही है, और यदि अलखियान जोहड़ में जमा गंदा पानी हटकर इसकी दशा सुधर जाती है, तो इस प्रमुख पर्यटन स्थल की सुंदरता में चार चांद लग जाएंगे।
    user_Jitender singh
    Jitender singh
    Artist मंडावा, झुंझुनू, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • राजस्थान के चूरू जिले की तारानगर तहसील के धीरवास बड़ा गाँव में स्थित राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में चिकित्सा प्रशासन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहाँ स्टेट हाईवे के पास ही, अस्पताल परिसर के नजदीक भारी मात्रा में एक्सपायर हो चुकी दवाइयाँ खुले में फेंकी जा रही हैं, जिसका वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। अस्पताल प्रशासन द्वारा इन खतरनाक दवाओं का सुरक्षित तरीके से निस्तारण करने की बजाय, घोर लापरवाही बरती जा रही है। इस लापरवाही के कारण आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। धीरवास बड़ा पीएचसी जैसे संवेदनशील चिकित्सा संस्थान के पास खुले में पड़ी एक्सपायर दवाइयाँ गंभीर बीमारियों को न्योता दे रही हैं। यदि ये दवाइयाँ गलती से बच्चों, आवारा पशुओं या आम लोगों के संपर्क में आ जाती हैं, तो इसके जानलेवा परिणाम हो सकते हैं। इसके अलावा, बारिश या खुले में पड़े रहने से इनमें मौजूद रसायन मिट्टी और पानी को भी दूषित कर सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, हर एक्सपायर्ड दवा को वापस कंपनी को भेजने या नष्ट करने के लिए सख्त प्रोटोकॉल बनाए गए हैं। ऐसे में धीरवास बड़ा पीएचसी में एक्सपायर्ड दवाइयों का इस तरह खुले में मिलना, अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े करता है, कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है? जागरूक ग्रामीणों ने उच्च चिकित्सा अधिकारियों (सीएमएचओ) और जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की तत्काल जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और पीएचसी परिसर में सुरक्षित कचरा निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की है।
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    राजस्थान के चूरू जिले की तारानगर तहसील के धीरवास बड़ा गाँव में स्थित राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में चिकित्सा प्रशासन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहाँ स्टेट हाईवे के पास ही, अस्पताल परिसर के नजदीक भारी मात्रा में एक्सपायर हो चुकी दवाइयाँ खुले में फेंकी जा रही हैं, जिसका वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। अस्पताल प्रशासन द्वारा इन खतरनाक दवाओं का सुरक्षित तरीके से निस्तारण करने की बजाय, घोर लापरवाही बरती जा रही है।

इस लापरवाही के कारण आमजन के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। धीरवास बड़ा पीएचसी जैसे संवेदनशील चिकित्सा संस्थान के पास खुले में पड़ी एक्सपायर दवाइयाँ गंभीर बीमारियों को न्योता दे रही हैं। यदि ये दवाइयाँ गलती से बच्चों, आवारा पशुओं या आम लोगों के संपर्क में आ जाती हैं, तो इसके जानलेवा परिणाम हो सकते हैं। इसके अलावा, बारिश या खुले में पड़े रहने से इनमें मौजूद रसायन मिट्टी और पानी को भी दूषित कर सकते हैं।

स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, हर एक्सपायर्ड दवा को वापस कंपनी को भेजने या नष्ट करने के लिए सख्त प्रोटोकॉल बनाए गए हैं। ऐसे में धीरवास बड़ा पीएचसी में एक्सपायर्ड दवाइयों का इस तरह खुले में मिलना, अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े करता है, कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है?

जागरूक ग्रामीणों ने उच्च चिकित्सा अधिकारियों (सीएमएचओ) और जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की तत्काल जांच की मांग की है। ग्रामीणों ने दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और पीएचसी परिसर में सुरक्षित कचरा निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग भी की है।
    user_Mangilal Sihag
    Mangilal Sihag
    Local News Reporter तारानगर, चूरू, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • राजस्थान सरकार द्वारा नियुक्त प्रदेश स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर के.के. गुप्ता ने मंगलवार को राजसमंद के नाथद्वारा नगर परिषद में आयोजित स्वच्छता कार्यशाला को संबोधित करते हुए शहर को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास की सार्थकता तभी है जब शहर साफ हों, विशेषकर नाथद्वारा जैसी प्रमुख धार्मिक नगरी को स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए प्रशासन तथा आमजन को मिलकर कड़े कदम उठाने होंगे। गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा है कि प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों को स्वच्छता, संस्कृति और पर्यटन के मॉडल के रूप में विकसित किया जाए, जिसके तहत राज्य सरकार विभिन्न धार्मिक सर्किट भी विकसित कर रही है ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर वातावरण मिल सके। उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक को धार्मिक स्थलों की गरिमा और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इसके उपयोग पर प्रभावी रोक लगाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यशाला में निकाय अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए के.के. गुप्ता ने स्वच्छ भारत मिशन के सभी मानकों को गंभीरता से लागू करने और जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि नगर क्षेत्र में कहीं भी कचरा या गंदगी दिखाई न दे। उन्होंने प्लास्टिक के उपयोग की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। गुप्ता ने स्वच्छता को विकास की आधारशिला बताया, यह रेखांकित करते हुए कि बिना साफ-सफाई के विकास के प्रयासों का अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में विकास और निवेश के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं, जिसमें “राइजिंग राजस्थान” कार्यक्रम के तहत हजारों करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट धरातल पर शुरू हो चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार स्वच्छ भारत मिशन के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अभियान को “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत संचालित किया जाएगा। स्वच्छता कार्यों में कोताही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। गुप्ता ने स्वच्छता अभियान के पाँच प्रमुख घटकों पर विशेष जोर देते हुए शत-प्रतिशत घर-घर कचरा संग्रहण सुबह 10 बजे से पहले सुनिश्चित करने, स्रोत स्तर पर गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण कराने, वाणिज्यिक क्षेत्रों में नियमित नाइट स्वीपिंग, सार्वजनिक शौचालयों की दिन में तीन बार सफाई और प्लास्टिक थैलियों के उत्पादन व उपयोग पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने खाली पड़े भूखंडों में जमा होने वाले कचरे की समस्या के समाधान के लिए भूखंड मालिकों को जिम्मेदार बनाने को कहा। उन्होंने शहर में सभी स्ट्रीट लाइटों के संचालन, पार्कों की नियमित सफाई, अवैध मांस दुकानों पर कार्रवाई, निर्माण सामग्री से सड़कों और नालियों को मुक्त रखने तथा सरकारी संपत्तियों पर पोस्टरबाजी रोकने जैसे अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वच्छ, सुंदर और विकसित नाथद्वारा के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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    राजस्थान सरकार द्वारा नियुक्त प्रदेश स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर के.के. गुप्ता ने मंगलवार को राजसमंद के नाथद्वारा नगर परिषद में आयोजित स्वच्छता कार्यशाला को संबोधित करते हुए शहर को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास की सार्थकता तभी है जब शहर साफ हों, विशेषकर नाथद्वारा जैसी प्रमुख धार्मिक नगरी को स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए प्रशासन तथा आमजन को मिलकर कड़े कदम उठाने होंगे। गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशा है कि प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों को स्वच्छता, संस्कृति और पर्यटन के मॉडल के रूप में विकसित किया जाए, जिसके तहत राज्य सरकार विभिन्न धार्मिक सर्किट भी विकसित कर रही है ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर वातावरण मिल सके। उन्होंने सिंगल यूज प्लास्टिक को धार्मिक स्थलों की गरिमा और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इसके उपयोग पर प्रभावी रोक लगाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यशाला में निकाय अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए के.के. गुप्ता ने स्वच्छ भारत मिशन के सभी मानकों को गंभीरता से लागू करने और जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया, ताकि नगर क्षेत्र में कहीं भी कचरा या गंदगी दिखाई न दे। उन्होंने प्लास्टिक के उपयोग की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। गुप्ता ने स्वच्छता को विकास की आधारशिला बताया, यह रेखांकित करते हुए कि बिना साफ-सफाई के विकास के प्रयासों का अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में विकास और निवेश के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं, जिसमें “राइजिंग राजस्थान” कार्यक्रम के तहत हजारों करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट धरातल पर शुरू हो चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार स्वच्छ भारत मिशन के कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अभियान को “जीरो टॉलरेंस” नीति के तहत संचालित किया जाएगा। स्वच्छता कार्यों में कोताही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।

गुप्ता ने स्वच्छता अभियान के पाँच प्रमुख घटकों पर विशेष जोर देते हुए शत-प्रतिशत घर-घर कचरा संग्रहण सुबह 10 बजे से पहले सुनिश्चित करने, स्रोत स्तर पर गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण कराने, वाणिज्यिक क्षेत्रों में नियमित नाइट स्वीपिंग, सार्वजनिक शौचालयों की दिन में तीन बार सफाई और प्लास्टिक थैलियों के उत्पादन व उपयोग पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए। इसके अतिरिक्त, उन्होंने खाली पड़े भूखंडों में जमा होने वाले कचरे की समस्या के समाधान के लिए भूखंड मालिकों को जिम्मेदार बनाने को कहा। उन्होंने शहर में सभी स्ट्रीट लाइटों के संचालन, पार्कों की नियमित सफाई, अवैध मांस दुकानों पर कार्रवाई, निर्माण सामग्री से सड़कों और नालियों को मुक्त रखने तथा सरकारी संपत्तियों पर पोस्टरबाजी रोकने जैसे अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर भी आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वच्छ, सुंदर और विकसित नाथद्वारा के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
    user_Jjn good news ( Rakesh Agrawal
    Jjn good news ( Rakesh Agrawal
    Newsagent झुंझुनू, झुंझुनू, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • झुंझुनूं जिले की मुकुंदगढ़ पुलिस ने दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी समीर पुत्र अब्दुल सलाम निवासी मुकुंदगढ़ को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक कावेंद्र सिंह सागर के निर्देश पर थानाधिकारी ताराचंद के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा की गई। मिली जानकारी के अनुसार, परिवादिया ने थाना में उपस्थित होकर एक प्रकरण दर्ज करवाया था। इसमें उसने बताया कि आरोपी ने उसे फोन करके अपने घर बुलाया और शादी का झांसा देकर उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया। पुलिस ने इस रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर तुरंत अनुसंधान शुरू किया। प्रकरण में घटना की गंभीरता को देखते हुए, गठित टीम ने आरोपी समीर को दस्तयाब कर गहन अनुसंधान के बाद गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपी से आगे की पूछताछ और अनुसंधान जारी है।
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    झुंझुनूं जिले की मुकुंदगढ़ पुलिस ने दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी समीर पुत्र अब्दुल सलाम निवासी मुकुंदगढ़ को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक कावेंद्र सिंह सागर के निर्देश पर थानाधिकारी ताराचंद के नेतृत्व में गठित टीम द्वारा की गई।

मिली जानकारी के अनुसार, परिवादिया ने थाना में उपस्थित होकर एक प्रकरण दर्ज करवाया था। इसमें उसने बताया कि आरोपी ने उसे फोन करके अपने घर बुलाया और शादी का झांसा देकर उसके साथ जबरदस्ती दुष्कर्म किया। पुलिस ने इस रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर तुरंत अनुसंधान शुरू किया। प्रकरण में घटना की गंभीरता को देखते हुए, गठित टीम ने आरोपी समीर को दस्तयाब कर गहन अनुसंधान के बाद गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपी से आगे की पूछताछ और अनुसंधान जारी है।
    user_Amit Sharma
    Amit Sharma
    पत्रकार झुंझुनू, झुंझुनू, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • विनोद जाखड़ से संबंधित मांगों को तुरंत पूरा करने की स्पष्ट और सशक्त अपील की गई है। इस दौरान विनोद जाखड़ की मांगों को पूरा करने पर जोर दिया गया।
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    विनोद जाखड़ से संबंधित मांगों को तुरंत पूरा करने की स्पष्ट और सशक्त अपील की गई है। इस दौरान विनोद जाखड़ की मांगों को पूरा करने पर जोर दिया गया।
    user_Keshari chand
    Keshari chand
    सरदारशहर, चूरू, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • भयंकर 45°C की गर्मी के बीच, आदिवासी क्षेत्रों में माताओं और बहनों को पानी की एक घूंट के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर 45 फीट गहरे कुएं में उतरना पड़ रहा है। इस दर्दनाक स्थिति की भयावहता 'कागज़ की पाइपलाइन' और 'सूखे हुए कंठ' जैसे वाक्यांशों से उजागर होती है, जो क्षेत्र में गंभीर जल संकट की ओर इशारा करते हैं। सूत्रों से मिली इस जानकारी के अनुसार, आदिवासियों की यह हकीकत गंभीर सवाल खड़े करती है कि क्या हम 'विश्व गुरु' बनने की होड़ में आगे बढ़ रहे हैं। यह स्थिति इस तरह के सभी सपनों और दावों को धूमिल कर देती है।
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    भयंकर 45°C की गर्मी के बीच, आदिवासी क्षेत्रों में माताओं और बहनों को पानी की एक घूंट के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर 45 फीट गहरे कुएं में उतरना पड़ रहा है। इस दर्दनाक स्थिति की भयावहता 'कागज़ की पाइपलाइन' और 'सूखे हुए कंठ' जैसे वाक्यांशों से उजागर होती है, जो क्षेत्र में गंभीर जल संकट की ओर इशारा करते हैं।

सूत्रों से मिली इस जानकारी के अनुसार, आदिवासियों की यह हकीकत गंभीर सवाल खड़े करती है कि क्या हम 'विश्व गुरु' बनने की होड़ में आगे बढ़ रहे हैं। यह स्थिति इस तरह के सभी सपनों और दावों को धूमिल कर देती है।
    user_Bhajan lal sharma
    Bhajan lal sharma
    Farmer चूरू, चूरू, राजस्थान•
    11 hrs ago
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