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बिहार और उत्तर प्रदेश की 11 बड़ी खबरें देखें एक साथ * जलजमाव से सड़क की स्थिति भयावह, ग्रामीणों ने जताया विरोध * ‘स्वच्छ एवं सुंदर बेतिया’ केवल अभियान का नारा नहीं, हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी: गरिमा * बीडीसी की बैठक में योजनाओं को लेकर हंगामा, अधिकारियों-कर्मचारियों पर बरसे जनप्रतिनिधि * पिता की हत्या के मामले में फरार पुत्र पंजाब के जालंधर से गिरफ्तार * चंपारण में सजेगा ‘फिल्मी अखाड़ा’, प्रेम-सस्पेंस के साथ दिखेगी मिट्टी की कहानी * पॉक्सो के आरोपित को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला * सामाजिक सरोकार, पर्यावरण रक्षा और विश्वकर्मा जयंती के उल्लास के बीच मनाया गया अनूप सिंह का जन्मदिन * भारत-नेपाल सीमा पर SSB की बड़ी कार्रवाई, 7.705 किलो की गौतम बुद्ध प्रतिमा बरामद * बगहा में खाद दुकानदारों का विरोध प्रदर्शन, महंगे दाम पर खाद मिलने का आरोप * बेतिया में वरिष्ठ नागरिक मंच ने लगाया निशुल्क जांच शिविर * जलजमाव से जगीराहा के ग्रामीण परेशान, समाधान की मांग

3 hrs ago
user_A9Bharat News
A9Bharat News
Local News Reporter बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
3 hrs ago

बिहार और उत्तर प्रदेश की 11 बड़ी खबरें देखें एक साथ * जलजमाव से सड़क की स्थिति भयावह, ग्रामीणों ने जताया विरोध * ‘स्वच्छ एवं सुंदर बेतिया’ केवल अभियान का नारा नहीं, हर नागरिक की साझा जिम्मेदारी: गरिमा * बीडीसी की बैठक में योजनाओं को लेकर हंगामा, अधिकारियों-कर्मचारियों पर बरसे जनप्रतिनिधि * पिता की हत्या के मामले में फरार पुत्र पंजाब के जालंधर से गिरफ्तार * चंपारण में सजेगा ‘फिल्मी अखाड़ा’, प्रेम-सस्पेंस के साथ दिखेगी मिट्टी की कहानी * पॉक्सो के आरोपित को पकड़ने गई पुलिस टीम पर हमला * सामाजिक सरोकार, पर्यावरण रक्षा और विश्वकर्मा जयंती के उल्लास के बीच मनाया गया अनूप सिंह का जन्मदिन * भारत-नेपाल सीमा पर SSB की बड़ी कार्रवाई, 7.705 किलो की गौतम बुद्ध प्रतिमा बरामद * बगहा में खाद दुकानदारों का विरोध प्रदर्शन, महंगे दाम पर खाद मिलने का आरोप * बेतिया में वरिष्ठ नागरिक मंच ने लगाया निशुल्क जांच शिविर * जलजमाव से जगीराहा के ग्रामीण परेशान, समाधान की मांग

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  • कश्मीर नहीं, बिहार में लहलहा रहे सेब के बागान, 45 डिग्री की गर्मी में भी फलन, किसानों की आमदनी डबल पश्चिम चंपारण. जिस सेब की खेती को अब तक कश्मीर और हिमाचल जैसे ठंडे पहाड़ी इलाकों का समझा जाता था, वह अब बिहार जैसे गर्म प्रदेश की पहचान बन चुकी है.बड़ी बात यह है कि जिले के दर्जनों किसानों ने सीमित संसाधनों के बावजूद भी इसकी बागवानी बड़ी खूबसूरती से की है, जिससे उन्हें शानदार फलन की प्राप्ति भी हुई है. बताते चलें कि ज़िले में इसकी शुरुआत मझौलिया प्रखंड निवासी रविकांत पांडे ने वर्ष 2019 में ही की थी.रविकांत एक कृषि विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने गर्म प्रदेश में होने वाले सेव की HRMN 99 किस्म को सबसे पहले सफलता पूर्वक उपजाया था. बकौल रविकांत, HRMN के अलावे सेव की अन्ना, ट्रॉपिकल स्वीट, डोर्सेट गोल्डन और ग्रैनी स्मिथ जैसी किस्मों को भी बिहार सहित कुछ अन्य गर्म राज्यों में उपजाया जा सकता है. सेब के पौधे तैयार करने में M7 और M9 रूटस्टॉक का इस्तेमाल किया जाता है. रूटस्टॉक के ऊपर इच्छित सेब की प्रजाति की ग्राफ्टिंग यानी कलम बांधी जाती है. इसके लिए अन्ना, ट्रॉपिकल स्वीट, डोर्सेट गोल्डन और ग्रैनी स्मिथ जैसी किस्मों का इस्तेमाल किया जा रहा है.पौधे की ग्राफ्टिंग के बाद उचित समय और तापमान में उसकी देखभाल की जाती है. ध्यान रहे कि ग्राफ्टिंग वाले स्थान के ऊपर निकलने वाली शाखाओं को विकसित किया जाता है, जबकि रूटस्टॉक के नीचे से निकलने वाली अनावश्यक शाखाओं को हटा दिया जाता है. सेब के पेड़ में विकसित होने वाली फलदार छोटी शाखाएं ही आगे चलकर फल देने का आधार बनती हैं. इन्हीं शाखाओं पर फूल आते हैं और बाद में सेब के फल विकसित होते हैं. मजे की बात है कि HRMN को सिर्फ खेत में ही नहीं, बल्कि सीमित मिट्टी वाले कंटेनर में भी लगाया जा सकता है.बड़ी बात यह है कि रवीकांत ने इन्हीं कैरेट और गमलों में सेब की सफल उपज करके दिखाई है. बताते चलें कि सेब के पौधों के लिए करीब 8 फीट प्लांट-टू-प्लांट और 10 फीट लाइन-टू-लाइन दूरी रखने पर एक एकड़ में 500 से अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं। कुछ किस्में शुरुआती वर्षों में ही फल देना शुरू कर देती हैं, लेकिन कुछ को एक वर्ष से भी अधिक समय लगता है. मैदानी इलाकों में गर्मी पहाड़ी क्षेत्रों की तुलना में पहले आने के कारण यहां सेब का विकास और फल तैयार होने का समय भी पहले हो सकता है। उनका दावा है कि बिहार में तैयार होने वाला सेब कश्मीर के पारंपरिक सीजन से करीब डेढ़ से दो महीने पहले बाजार में आने की संभावना रखता है। रवीकांत पांडेय ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल पौधे तैयार करना नहीं, बल्कि किसानों को सेब की खेती की पूरी तकनीक समझाना भी है। इसमें पौधारोपण, प्रूनिंग यानी छंटाई, पोषण प्रबंधन, फलदार शाखाओं की देखभाल और उत्पादन बढ़ाने की तकनीक शामिल है। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में सेब के पौधों की कीमत करीब 1200 रुपये तक थी, लेकिन अब अपने उत्पादन के कारण अपेक्षाकृत कम कीमत पर पौधे उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इच्छुक किसान स्क्रीन पर जारी संपर्क नंबर के माध्यम से पौधों के लिए संपर्क कर सकते हैं।
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    कश्मीर नहीं, बिहार में लहलहा रहे सेब के बागान, 45 डिग्री की गर्मी में भी फलन, किसानों की आमदनी डबल
पश्चिम चंपारण. जिस सेब की खेती को अब तक कश्मीर और हिमाचल जैसे ठंडे पहाड़ी इलाकों का समझा जाता था, वह अब बिहार जैसे गर्म प्रदेश की पहचान बन चुकी है.बड़ी बात यह है कि जिले के दर्जनों किसानों ने सीमित संसाधनों के बावजूद भी इसकी बागवानी बड़ी खूबसूरती से की है, जिससे उन्हें शानदार फलन की प्राप्ति भी हुई है.
बताते चलें कि ज़िले में इसकी शुरुआत मझौलिया प्रखंड निवासी रविकांत पांडे ने वर्ष 2019 में ही की थी.रविकांत एक  कृषि विशेषज्ञ हैं, जिन्होंने गर्म प्रदेश में होने वाले सेव की HRMN 99 किस्म को सबसे पहले सफलता पूर्वक उपजाया था.
बकौल रविकांत, HRMN के अलावे सेव की अन्ना, ट्रॉपिकल स्वीट, डोर्सेट गोल्डन और ग्रैनी स्मिथ जैसी किस्मों को भी बिहार सहित कुछ अन्य गर्म राज्यों में उपजाया जा सकता है.
सेब के पौधे तैयार करने में M7 और M9 रूटस्टॉक का इस्तेमाल किया जाता है. रूटस्टॉक के ऊपर इच्छित सेब की प्रजाति की ग्राफ्टिंग यानी कलम बांधी जाती है. इसके लिए अन्ना, ट्रॉपिकल स्वीट, डोर्सेट गोल्डन और ग्रैनी स्मिथ जैसी किस्मों का इस्तेमाल किया जा रहा है.पौधे की ग्राफ्टिंग के बाद उचित समय और तापमान में उसकी देखभाल की जाती है. 
ध्यान रहे कि ग्राफ्टिंग वाले स्थान के ऊपर निकलने वाली शाखाओं को विकसित किया जाता है, जबकि रूटस्टॉक के नीचे से निकलने वाली अनावश्यक शाखाओं को हटा दिया जाता है. सेब के पेड़ में विकसित होने वाली फलदार छोटी शाखाएं ही आगे चलकर फल देने का आधार बनती हैं. इन्हीं शाखाओं पर फूल आते हैं और बाद में सेब के फल विकसित होते हैं.
मजे की बात है कि HRMN को सिर्फ खेत में ही नहीं, बल्कि सीमित मिट्टी वाले कंटेनर में भी लगाया जा सकता है.बड़ी बात यह है कि रवीकांत ने इन्हीं कैरेट और गमलों में सेब की सफल उपज करके दिखाई है.
बताते चलें कि सेब के पौधों के लिए करीब 8 फीट प्लांट-टू-प्लांट और 10 फीट लाइन-टू-लाइन दूरी रखने पर एक एकड़ में 500 से अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं। कुछ किस्में शुरुआती वर्षों में ही फल देना शुरू कर देती हैं, लेकिन कुछ को एक वर्ष से भी अधिक समय लगता है.
मैदानी इलाकों में गर्मी पहाड़ी क्षेत्रों की तुलना में पहले आने के कारण यहां सेब का विकास और फल तैयार होने का समय भी पहले हो सकता है। उनका दावा है कि बिहार में तैयार होने वाला सेब कश्मीर के पारंपरिक सीजन से करीब डेढ़ से दो महीने पहले बाजार में आने की संभावना रखता है।
रवीकांत पांडेय ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल पौधे तैयार करना नहीं, बल्कि किसानों को सेब की खेती की पूरी तकनीक समझाना भी है। इसमें पौधारोपण, प्रूनिंग यानी छंटाई, पोषण प्रबंधन, फलदार शाखाओं की देखभाल और उत्पादन बढ़ाने की तकनीक शामिल है।
उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में सेब के पौधों की कीमत करीब 1200 रुपये तक थी, लेकिन अब अपने उत्पादन के कारण अपेक्षाकृत कम कीमत पर पौधे उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इच्छुक किसान स्क्रीन पर जारी संपर्क नंबर के माध्यम से पौधों के लिए संपर्क कर सकते हैं।
    user_S9 Bihar
    S9 Bihar
    News Anchor बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    7 hrs ago
  • जनप्रतिनिधियों की बैठक में दाखिल-खारिज सहित विभिन्न जनसमस्याओं के शीघ्र निष्पादन की मांग ।। मझौलिया प्रखंड सभागार में शनिवार को जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. राजीव रंजन कुमार ने की। इस दौरान प्रखंड क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं एवं विकास कार्यों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में जनप्रतिनिधियों ने अंचल कार्यालय से संबंधित समस्याओं को अंचलाधिकारी डॉली कुमारी के समक्ष रखा। दाखिल-खारिज, भूमि संबंधी मामलों सहित आम लोगों से जुड़ी समस्याओं के शीघ्र निष्पादन की मांग की गई। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि अंचल कार्यालय से संबंधित कार्यों में लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए समय पर मामलों का निष्पादन जरूरी है। अंचलाधिकारी डॉली कुमारी ने जनप्रतिनिधियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित मामलों की जानकारी ली। उन्होंने नियमानुसार समस्याओं के त्वरित निष्पादन का आश्वासन दिया। साथ ही आम लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया। बैठक में प्रखंड प्रमुख शुक्ता मुखी, उपप्रमुख नरेश कुमार यादव, विधायक प्रतिनिधि संदीप श्रीवास्तव सहित विभिन्न पंचायतों के मुखिया एवं पंचायत समिति सदस्य मौजूद रहे। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय से विकास कार्यों को गति देने पर भी चर्चा हुई।
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    जनप्रतिनिधियों की बैठक में दाखिल-खारिज सहित विभिन्न जनसमस्याओं के शीघ्र निष्पादन की मांग ।।
मझौलिया प्रखंड सभागार में शनिवार को जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासनिक पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. राजीव रंजन कुमार ने की। इस दौरान प्रखंड क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं एवं विकास कार्यों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में जनप्रतिनिधियों ने अंचल कार्यालय से संबंधित समस्याओं को अंचलाधिकारी डॉली कुमारी के समक्ष रखा। दाखिल-खारिज, भूमि संबंधी मामलों सहित आम लोगों से जुड़ी समस्याओं के शीघ्र निष्पादन की मांग की गई। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि अंचल कार्यालय से संबंधित कार्यों में लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए समय पर मामलों का निष्पादन जरूरी है।
अंचलाधिकारी डॉली कुमारी ने जनप्रतिनिधियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित मामलों की जानकारी ली। उन्होंने नियमानुसार समस्याओं के त्वरित निष्पादन का आश्वासन दिया। साथ ही आम लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
बैठक में प्रखंड प्रमुख शुक्ता मुखी, उपप्रमुख नरेश कुमार यादव, विधायक प्रतिनिधि संदीप श्रीवास्तव सहित विभिन्न पंचायतों के मुखिया एवं पंचायत समिति सदस्य मौजूद रहे। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय से विकास कार्यों को गति देने पर भी चर्चा हुई।
    user_RAVI PANDEY
    RAVI PANDEY
    Media and information sciences faculty मझौलिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    18 hrs ago
  • RPF Constable Accused of Hitting Passenger After Hiding His Phone: Security or Misconduct? A troubling incident inside a train has raised questions over passenger treatment and the conduct of railway security personnel. The passenger reportedly left his mobile phone charging and stepped away for a short while, after which an RPF constable allegedly hid the phone, reportedly saying it was to "teach him a lesson." #RPF #RailwaySecurity #IndianRailways #PassengerRights #RailwayNews
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    RPF Constable Accused of Hitting Passenger After Hiding His Phone: Security or Misconduct?

A troubling incident inside a train has raised questions over passenger treatment and the conduct of railway security personnel. The passenger reportedly left his mobile phone charging and stepped away for a short while, after which an RPF constable allegedly hid the phone, reportedly saying it was to "teach him a lesson."

#RPF #RailwaySecurity #IndianRailways #PassengerRights #RailwayNews
    user_Desi Dispatch News
    Desi Dispatch News
    Commercial property estate agent तमकुही राज, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • बिहार में दारू बंदी है और दारू माफिया अपना अलग अलग दिमाग चला रहा है,, तरह तरह का दिमाग चला रहा है दारू माफिया,, जिसका पर्दाफाश हुआ,,
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    बिहार में दारू बंदी है और दारू माफिया अपना अलग अलग दिमाग चला रहा है,,
तरह तरह का दिमाग चला रहा है दारू माफिया,, जिसका पर्दाफाश हुआ,,
    user_गोपालगंज की जनता
    गोपालगंज की जनता
    Local News Reporter गोपालगंज, गोपालगंज, बिहार•
    6 hrs ago
  • damad aur sas ka prem prasang par hangama beto ne kiya birodh
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    damad aur sas ka prem prasang par hangama beto ne kiya birodh
    user_Mr Zakir Husain
    Mr Zakir Husain
    गोपालगंज, गोपालगंज, बिहार•
    10 hrs ago
  • अखिलेश यादव की PDA यात्रा पर बीजेपी का पलटवार | संजय सरावगी ने किया जीत का दावा
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    अखिलेश यादव की PDA यात्रा पर बीजेपी का पलटवार | संजय सरावगी ने किया जीत का दावा
    user_Niraj Raj
    Niraj Raj
    बैरिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    15 hrs ago
  • समेकित आजीविका परियोजना सम्मेलन-सह-कृषि मेला का आयोजन, ग्रामीण विकास पर जोर मझौलिया। राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, अमवा मझार में एसएसवीएस (समग्र शिक्षण एवं विकास संस्थान), बेतिया के तत्वावधान में आयोजित समेकित आजीविका परियोजना सम्मेलन-सह-कृषि मेला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। सम्मेलन में कृषि और आजीविका के नए अवसरों पर चर्चा करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास पर विशेष जोर दिया गया। किसानों को आधुनिक खेती, स्वरोजगार, आय बढ़ाने के उपाय तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि ऐसी पहल ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कृषि मेले में आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीज, जैविक खेती और आजीविका से जुड़े विभिन्न मॉडल भी प्रदर्शित किए गए, जिन्हें किसानों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक देखा। आयोजकों ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ सतत और समावेशी ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना है।
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    समेकित आजीविका परियोजना सम्मेलन-सह-कृषि मेला का आयोजन, ग्रामीण विकास पर जोर
मझौलिया। राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, अमवा मझार में एसएसवीएस (समग्र शिक्षण एवं विकास संस्थान), बेतिया के तत्वावधान में आयोजित समेकित आजीविका परियोजना सम्मेलन-सह-कृषि मेला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। सम्मेलन में कृषि और आजीविका के नए अवसरों पर चर्चा करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों के समग्र विकास पर विशेष जोर दिया गया। किसानों को आधुनिक खेती, स्वरोजगार, आय बढ़ाने के उपाय तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि ऐसी पहल ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कृषि मेले में आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीज, जैविक खेती और आजीविका से जुड़े विभिन्न मॉडल भी प्रदर्शित किए गए, जिन्हें किसानों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक देखा। आयोजकों ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ सतत और समावेशी ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना है।
    user_Makhan Kumar
    Makhan Kumar
    Bettiah, Pashchim Champaran•
    3 hrs ago
  • मशरूम उत्पादन से स्वरोजगार की राह, 55 लोगों ने लिया प्रशिक्षण पश्चिम चंपारण जिले के मझौलिया प्रखंड के माधोपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित चार दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों, ग्रामीण युवाओं और अन्य इच्छुक लोगों को कम लागत में स्वरोजगार से जोड़ना और मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी देना था। प्रशिक्षण में करीब 55 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। चार दिनों तक चले प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन के लिए जरूरी सामग्री, उत्पादन की पूरी प्रक्रिया, रखरखाव, तापमान और नमी का प्रबंधन, फसल की देखभाल समेत कई महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के समापन पर कृषि विज्ञान केंद्र के अभिषेक प्रताप सिंह ने प्रतिभागियों के बीच प्रमाण पत्र वितरित किए। इसके साथ ही सभी प्रतिभागियों को मशरूम के बीज भी उपलब्ध कराए गए, ताकि प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीक का इस्तेमाल कर वे अपने स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू कर सकें। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को तैयार मशरूम को बाजार तक पहुंचाने और उसकी बिक्री से जुड़ी जानकारी भी दी गई। बताया गया कि मशरूम उत्पादन कम जगह और अपेक्षाकृत कम लागत में शुरू किया जा सकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोग इसे स्वरोजगार के विकल्प के रूप में अपना सकते हैं। अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि इच्छुक लोग घर या छोटे स्तर से भी मशरूम उत्पादन की शुरुआत कर सकते हैं। इससे परिवार की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ आगे चलकर दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार किए जा सकते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं, किसानों और अन्य इच्छुक लोगों को खेती आधारित स्वरोजगार से जोड़ना और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रमाण पत्र और मशरूम के बीज मिलने से प्रतिभागियों में भी उत्साह देखने को मिला। अब प्रशिक्षण लेने वाले लोग सीखी गई तकनीक के जरिए अपने घर और छोटे स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू करने की तैयारी में हैं।
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    मशरूम उत्पादन से स्वरोजगार की राह, 55 लोगों ने लिया प्रशिक्षण
पश्चिम चंपारण जिले के मझौलिया प्रखंड के माधोपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित चार दिवसीय मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हो गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों, ग्रामीण युवाओं और अन्य इच्छुक लोगों को कम लागत में स्वरोजगार से जोड़ना और मशरूम उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक की जानकारी देना था।
प्रशिक्षण में करीब 55 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। चार दिनों तक चले प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन के लिए जरूरी सामग्री, उत्पादन की पूरी प्रक्रिया, रखरखाव, तापमान और नमी का प्रबंधन, फसल की देखभाल समेत कई महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के समापन पर कृषि विज्ञान केंद्र के अभिषेक प्रताप सिंह ने प्रतिभागियों के बीच प्रमाण पत्र वितरित किए। इसके साथ ही सभी प्रतिभागियों को मशरूम के बीज भी उपलब्ध कराए गए, ताकि प्रशिक्षण में सीखी गई तकनीक का इस्तेमाल कर वे अपने स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू कर सकें।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को तैयार मशरूम को बाजार तक पहुंचाने और उसकी बिक्री से जुड़ी जानकारी भी दी गई। बताया गया कि मशरूम उत्पादन कम जगह और अपेक्षाकृत कम लागत में शुरू किया जा सकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोग इसे स्वरोजगार के विकल्प के रूप में अपना सकते हैं।
अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि इच्छुक लोग घर या छोटे स्तर से भी मशरूम उत्पादन की शुरुआत कर सकते हैं। इससे परिवार की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ आगे चलकर दूसरे लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र की इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं, किसानों और अन्य इच्छुक लोगों को खेती आधारित स्वरोजगार से जोड़ना और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है।
प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रमाण पत्र और मशरूम के बीज मिलने से प्रतिभागियों में भी उत्साह देखने को मिला। अब प्रशिक्षण लेने वाले लोग सीखी गई तकनीक के जरिए अपने घर और छोटे स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू करने की तैयारी में हैं।
    user_S9 Bihar
    S9 Bihar
    News Anchor बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    9 hrs ago
  • Vikas ki pol kholti ye taza khabar! Janta ke tax ke paise aur suraksha ke saath khilwaad kab tak? Dekhiye sarak ki kharab sthiti ka ye viral video. ​#TaazaKhabar #RoadInfrastructure #CorruptionExposed #BiharNews #DesiDispatch
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    Vikas ki pol kholti ye taza khabar! Janta ke tax ke paise aur suraksha ke saath khilwaad kab tak? Dekhiye sarak ki kharab sthiti ka ye viral video.

​#TaazaKhabar #RoadInfrastructure #CorruptionExposed #BiharNews #DesiDispatch
    user_Desi Dispatch News
    Desi Dispatch News
    Commercial property estate agent तमकुही राज, कुशी नगर, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
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