बस्ती में नगर बाजार से कप्तानगंज मार्ग के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी होने की राह साफ हो गई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस महत्वपूर्ण परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिससे क्षेत्र के हजारों निवासियों के लिए आवागमन अब सुगम और सुरक्षित हो जाएगा। इस पूरी परियोजना पर कुल 41.39 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। विभाग द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना के अनुसार, 9.685 किलोमीटर लंबे इस मार्ग का चौड़ीकरण किया जाएगा। यह सड़क बहादुरपुर और कप्तानगंज विकासखंड के दर्जनों गांवों को आपस में जोड़ने का काम करती है और बस्ती-लखनऊ फोरलेन को लुंबिनी-दुद्धी हाइवे से जोड़ने वाली एक मुख्य कड़ी है। महादेवा विधायक दूधराम ने इस सड़क के अत्यंत संकरे होने, वाहनों के भारी दबाव और लगातार होने वाली दुर्घटनाओं के खतरे को देखते हुए इस परियोजना की पहल की थी, जिसके बाद विभाग ने इसे प्राथमिकता पर लेकर अंतिम रूप दिया है। इस मार्ग के सुधरने से स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों से शिक्षा व स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने का समय भी कम हो जाएगा। पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के सहायक अभियंता धनंजय पांडेय ने बताया कि प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है, और वहां से स्वीकृति मिलते ही निविदा (टेंडर) प्रक्रिया समेत आगे की कार्रवाई युद्धस्तर पर शुरू कर दी जाएगी। इस फैसले से क्षेत्रीय लोगों में भारी उत्साह है।
बस्ती में नगर बाजार से कप्तानगंज मार्ग के चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी होने की राह साफ हो गई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस महत्वपूर्ण परियोजना का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिससे क्षेत्र के हजारों निवासियों के लिए आवागमन अब सुगम और सुरक्षित हो जाएगा। इस पूरी परियोजना पर कुल 41.39 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। विभाग द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना के अनुसार, 9.685 किलोमीटर लंबे इस मार्ग का चौड़ीकरण किया जाएगा। यह सड़क बहादुरपुर और कप्तानगंज विकासखंड के दर्जनों गांवों को आपस में जोड़ने का काम करती है और बस्ती-लखनऊ फोरलेन को लुंबिनी-दुद्धी हाइवे से जोड़ने वाली एक मुख्य कड़ी है। महादेवा विधायक दूधराम ने इस सड़क के अत्यंत संकरे होने, वाहनों के भारी दबाव और लगातार होने वाली दुर्घटनाओं के खतरे को देखते हुए इस परियोजना की पहल की थी, जिसके बाद विभाग ने इसे प्राथमिकता पर लेकर अंतिम रूप दिया है। इस मार्ग के सुधरने से स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों से शिक्षा व स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने का समय भी कम हो जाएगा। पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड के सहायक अभियंता धनंजय पांडेय ने बताया कि प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया गया है, और वहां से स्वीकृति मिलते ही निविदा (टेंडर) प्रक्रिया समेत आगे की कार्रवाई युद्धस्तर पर शुरू कर दी जाएगी। इस फैसले से क्षेत्रीय लोगों में भारी उत्साह है।
- बस्ती के हरैया में शुक्रवार को आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद को 504 करोड़ रुपये की लागत वाली 77 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। इस दौरान उन्होंने कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए हरैया विधायक अजय सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्पष्ट सोच और मजबूत नेतृत्व से ही किसी क्षेत्र का कायाकल्प संभव है। संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि 84 कोसी परिक्रमा मार्ग को अयोध्या रिंग रोड के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने भद्रेश्वरनाथ धाम, करण धाम और मखोड़ा धाम समेत प्रदेश के लगभग 1500 मंदिरों के जीर्णोद्धार का उल्लेख करते हुए दावा किया कि अब सरकारी संसाधन कब्रिस्तानों की बाउंड्री के बजाय धार्मिक धरोहरों पर खर्च किए जा रहे हैं। कानून-व्यवस्था पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब कानून का राज है और बस्ती में भी कब्रिस्तान के नाम पर किए गए अवैध कब्जों को हटा दिया गया है। विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर प्रदेश को अराजकता की ओर धकेलने का आरोप लगाया। उन्होंने सरकार की उपलब्धियों के रूप में राम मंदिर निर्माण, बेहतर बुनियादी सुविधाएं और जन कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र किया। अंत में, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को दोहराते हुए लोगों से विकास को प्राथमिकता देने वाले जनप्रतिनिधियों को चुनने की अपील की। कार्यक्रम में सूर्य प्रताप शाही, विनोद राय, संजय चौधरी, विवेकानंद मिश्रा, अजय सिंह, हरीश द्विवेदी, दयाराम चौधरी और रवि सोनकर समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।1
- उत्तर प्रदेश के बस्ती में भाजपा महामंत्री ने अपने ही विधायक पर सवाल खड़े करते हुए उन्हें घेरा है। इस पूरे घटनाक्रम में एसएसपी पांडेय के समर्थन में भी लोग उतर आए हैं। इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है, जिसमें 'पूजा मैडम' पर निशाना साधते हुए यह दावा किया गया है कि वे किसी को नहीं छोड़ती हैं। इस घटना ने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी है।1
- अयोध्या की बीकापुर विधानसभा में योगी जी ने एक बड़ी घोषणा करते हुए भदरसा का नाम बदलने का ऐलान किया है। अब भदरसा का नाम बदलकर भरतप... कर दिया जाएगा।1
- राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी जी से मुलाकात करने के बाद राजकुमार दास बाहर निकले, जहाँ मीडिया ने उन्हें घेर लिया। हालांकि, सवालों का सामना करने के दौरान राजकुमार दास ने किसी भी प्रश्न का कोई जवाब नहीं दिया।1
- संतकबीरनगर पुलिस ने गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद करने के अभियान में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए 161 एंड्रॉइड मोबाइल फोन बरामद किए हैं। बरामद किए गए इन मोबाइलों की अनुमानित कीमत लगभग 60 लाख रुपये बताई गई है। खोए हुए मोबाइल वापस मिलने के बाद उनके स्वामियों के चेहरों पर खुशी लौट आई और उन्होंने पुलिस टीम का आभार जताया है। इस उत्कृष्ट कार्य से खुश होकर पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना ने मोबाइल बरामद करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये के नगद पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की है। यह सफलता पुलिस अधीक्षक संदीप कुमार मीना के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह के मार्गदर्शन, क्षेत्राधिकारी सर्विलांस सेल अमित कुमार के पर्यवेक्षण तथा प्रभारी निरीक्षक सर्विलांस सेल अजय कुमार सिंह के नेतृत्व में गठित टीम ने हासिल की है। पुलिस ने जनपद के सभी थानों में सीईआईआर (CEIR) पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई की। सीईआईआर पोर्टल एवं सीसीटीएनएस प्रणाली से मिली तकनीकी जानकारी, आईएमईआई नंबर तथा सिम विश्लेषण के आधार पर मोबाइल फोन ट्रेस कर उन्हें बरामद किया गया। पुलिस के अनुसार, ये मोबाइल केवल संतकबीरनगर ही नहीं बल्कि दिल्ली, लखनऊ, बेंगलुरु, मुंबई, तमिलनाडु, बिहार, गुजरात, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना सहित देश के विभिन्न राज्यों से बरामद किए गए हैं, जिन्हें उनके वास्तविक स्वामियों को सौंपने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस अधीक्षक ने आम जनता से अपील की है कि मोबाइल फोन गुम या चोरी होने पर तत्काल CEIR पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि आईएमईआई नंबर को ब्लॉक कर उसे ट्रेस किया जा सके। इसके लिए आधार कार्ड, मोबाइल खरीद का बिल, गुमशुदगी या एफआईआर की प्रति, मोबाइल नंबर, आईएमईआई नंबर और मोबाइल मॉडल की जानकारी होना आवश्यक है। इस अभियान के तहत कोतवाली खलीलाबाद से 18, दुधारा से 20, महिला थाना से 8, धनघटा से 14, महुली से 41, मेंहदावल से 9, बखिरा से 13, बेलहरकला से 36 तथा धर्मसिंहवा थाना से 2 मोबाइल बरामद किए गए। इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में सर्विलांस सेल के प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार सिंह, मुख्य आरक्षी विनोद कुमार सिंह, आरक्षी ज्ञान प्रकाश सिंह, अमरजीत मौर्य, नितीश कुमार और पीयूष कुमार गुप्ता सहित विभिन्न थानों के पुलिसकर्मियों ने मुख्य भूमिका निभाई।1
- अंबेडकरनगर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहां एक गरीब व्यक्ति अपनी मेहनत के 3 लाख रुपये वापस मांगने के बदले पुलिसिया उत्पीड़न का शिकार हो गया है। पीड़ित व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि जब उसने अपने बकाया पैसों की मांग की, तो इंस्पेक्टर दीपक रघुवंशी ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया। न्याय की गुहार लेकर जब वह पुलिस अधीक्षक (SP) के कार्यालय पहुंचा, तो वहां तैनात पीआरओ जितेन्द्र रघुवंशी ने उसकी मदद करने के बजाय सीधे टांडा कोतवाली पुलिस को इसकी सूचना दे दी, जिसके बाद बिना किसी FIR के पुलिस उसे गिरफ्तार करने पहुंच गई। पीड़ित सड़क पर लेटकर विरोध करने और वहां मौजूद लोगों के वीडियो बनाने के कारण ही पुलिस के चंगुल से बच पाया। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सीओ सिटी अकबरपुर ने पीड़ित पर आपराधिक इतिहास होने का आरोप लगाया है। इस पर पलटवार करते हुए पीड़ित का कहना है कि उसके नाम पर केवल वही एक मुकदमा दर्ज है, जिसे इंस्पेक्टर दीपक रघुवंशी ने स्वयं दर्ज किया था, और इसके अलावा उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। पीड़ित ने प्रशासन से सवाल किया है कि क्या मेहनत के पैसे मांगना अपराध है और क्या पुलिस अधीक्षक कार्यालय में न्याय की मांग करना गिरफ्तारी का निमंत्रण बन गया है। इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए प्रशासन से पीड़ित को न्याय दिलाने की अपील की गई है।1
- उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले के एक प्राथमिक विद्यालय का वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक अभिभावक को प्रधानाध्यापिका द्वारा चप्पल से प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। यह घटना तब हुई जब अभिभावक अपने बच्चे के भविष्य के लिए जरूरी टीसी (TC) लेने स्कूल गए थे। इस कृत्य ने शिक्षा व्यवस्था की गरिमा और शिक्षक-अभिभावक के बीच के संबंध पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल को शिक्षा का मंदिर माना जाता है, लेकिन वहां हुई इस घटना ने व्यवस्था के भीतर पनप रहे अहंकार और 'गुंडागर्दी' को उजागर किया है। एक शिक्षक का इस तरह का व्यवहार बच्चों के भविष्य और उनके कोमल मन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। जब शिक्षक 'गुरु' के बजाय 'शासक' की भूमिका में आ जाए, तो स्कूल का वातावरण अखाड़े में तब्दील हो जाता है। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, घटना पर उठ रहे सवाल अब प्रशासन की जवाबदेही और ऐसे शिक्षकों के प्रति सख्त कार्रवाई की मांग की ओर इशारा कर रहे हैं। समाज में इस बात पर बहस तेज है कि शिक्षा विभाग कब तक ऐसी अराजकता को बर्दाश्त करेगा। यह घटना इस बात की चेतावनी है कि यदि शिक्षा के मंदिरों में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाली पीढ़ी शिक्षित होने के बजाय भय के साये में पलेगी।1