अंबेडकरनगर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहां एक गरीब व्यक्ति अपनी मेहनत के 3 लाख रुपये वापस मांगने के बदले पुलिसिया उत्पीड़न का शिकार हो गया है। पीड़ित व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि जब उसने अपने बकाया पैसों की मांग की, तो इंस्पेक्टर दीपक रघुवंशी ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया। न्याय की गुहार लेकर जब वह पुलिस अधीक्षक (SP) के कार्यालय पहुंचा, तो वहां तैनात पीआरओ जितेन्द्र रघुवंशी ने उसकी मदद करने के बजाय सीधे टांडा कोतवाली पुलिस को इसकी सूचना दे दी, जिसके बाद बिना किसी FIR के पुलिस उसे गिरफ्तार करने पहुंच गई। पीड़ित सड़क पर लेटकर विरोध करने और वहां मौजूद लोगों के वीडियो बनाने के कारण ही पुलिस के चंगुल से बच पाया। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सीओ सिटी अकबरपुर ने पीड़ित पर आपराधिक इतिहास होने का आरोप लगाया है। इस पर पलटवार करते हुए पीड़ित का कहना है कि उसके नाम पर केवल वही एक मुकदमा दर्ज है, जिसे इंस्पेक्टर दीपक रघुवंशी ने स्वयं दर्ज किया था, और इसके अलावा उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। पीड़ित ने प्रशासन से सवाल किया है कि क्या मेहनत के पैसे मांगना अपराध है और क्या पुलिस अधीक्षक कार्यालय में न्याय की मांग करना गिरफ्तारी का निमंत्रण बन गया है। इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए प्रशासन से पीड़ित को न्याय दिलाने की अपील की गई है।
अंबेडकरनगर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहां एक गरीब व्यक्ति अपनी मेहनत के 3 लाख रुपये वापस मांगने के बदले पुलिसिया उत्पीड़न का शिकार हो गया है। पीड़ित व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि जब उसने अपने बकाया पैसों की मांग की, तो इंस्पेक्टर दीपक रघुवंशी ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया। न्याय की गुहार लेकर जब वह पुलिस अधीक्षक (SP) के कार्यालय पहुंचा, तो वहां तैनात पीआरओ जितेन्द्र रघुवंशी ने उसकी मदद करने के बजाय सीधे टांडा कोतवाली पुलिस को इसकी सूचना दे दी, जिसके बाद बिना किसी FIR के पुलिस उसे गिरफ्तार करने पहुंच गई। पीड़ित सड़क पर लेटकर विरोध करने और वहां मौजूद लोगों के वीडियो बनाने के कारण ही पुलिस के चंगुल से बच पाया। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सीओ सिटी अकबरपुर ने पीड़ित पर आपराधिक इतिहास होने का आरोप लगाया है। इस पर पलटवार करते हुए पीड़ित का कहना है कि उसके नाम पर केवल वही एक मुकदमा दर्ज है, जिसे इंस्पेक्टर दीपक रघुवंशी ने स्वयं दर्ज किया था, और इसके अलावा उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। पीड़ित ने प्रशासन से सवाल किया है कि क्या मेहनत के पैसे मांगना अपराध है और क्या पुलिस अधीक्षक कार्यालय में न्याय की मांग करना गिरफ्तारी का निमंत्रण बन गया है। इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए प्रशासन से पीड़ित को न्याय दिलाने की अपील की गई है।
- बस्ती के हरैया में शुक्रवार को आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद को 504 करोड़ रुपये की लागत वाली 77 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। इस दौरान उन्होंने कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास के लिए हरैया विधायक अजय सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्पष्ट सोच और मजबूत नेतृत्व से ही किसी क्षेत्र का कायाकल्प संभव है। संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि 84 कोसी परिक्रमा मार्ग को अयोध्या रिंग रोड के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने भद्रेश्वरनाथ धाम, करण धाम और मखोड़ा धाम समेत प्रदेश के लगभग 1500 मंदिरों के जीर्णोद्धार का उल्लेख करते हुए दावा किया कि अब सरकारी संसाधन कब्रिस्तानों की बाउंड्री के बजाय धार्मिक धरोहरों पर खर्च किए जा रहे हैं। कानून-व्यवस्था पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में अब कानून का राज है और बस्ती में भी कब्रिस्तान के नाम पर किए गए अवैध कब्जों को हटा दिया गया है। विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर प्रदेश को अराजकता की ओर धकेलने का आरोप लगाया। उन्होंने सरकार की उपलब्धियों के रूप में राम मंदिर निर्माण, बेहतर बुनियादी सुविधाएं और जन कल्याणकारी योजनाओं का जिक्र किया। अंत में, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को दोहराते हुए लोगों से विकास को प्राथमिकता देने वाले जनप्रतिनिधियों को चुनने की अपील की। कार्यक्रम में सूर्य प्रताप शाही, विनोद राय, संजय चौधरी, विवेकानंद मिश्रा, अजय सिंह, हरीश द्विवेदी, दयाराम चौधरी और रवि सोनकर समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।1
- राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी जी से मुलाकात के बाद बाहर निकले राजकुमार दास को मीडिया ने घेर लिया। इस दौरान राजकुमार दास ने मीडिया के सवालों का कोई जवाब नहीं दिया और वहां से निकल गए।1
- 10 जुलाई 2026 की शाम तक देश और दुनिया की मुख्य खबरों का संकलन जारी किया गया है। आज की इन ताज़ा सुर्खियों में दिनभर के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों को शामिल किया गया है।1
- उत्तर प्रदेश के बस्ती में भाजपा महामंत्री ने अपने ही विधायक पर सवाल खड़े करते हुए उन्हें घेरा है। इस पूरे घटनाक्रम में एसएसपी पांडेय के समर्थन में भी लोग उतर आए हैं। इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है, जिसमें 'पूजा मैडम' पर निशाना साधते हुए यह दावा किया गया है कि वे किसी को नहीं छोड़ती हैं। इस घटना ने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी है।1
- अंबेडकरनगर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जहां एक गरीब व्यक्ति अपनी मेहनत के 3 लाख रुपये वापस मांगने के बदले पुलिसिया उत्पीड़न का शिकार हो गया है। पीड़ित व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि जब उसने अपने बकाया पैसों की मांग की, तो इंस्पेक्टर दीपक रघुवंशी ने उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दिया। न्याय की गुहार लेकर जब वह पुलिस अधीक्षक (SP) के कार्यालय पहुंचा, तो वहां तैनात पीआरओ जितेन्द्र रघुवंशी ने उसकी मदद करने के बजाय सीधे टांडा कोतवाली पुलिस को इसकी सूचना दे दी, जिसके बाद बिना किसी FIR के पुलिस उसे गिरफ्तार करने पहुंच गई। पीड़ित सड़क पर लेटकर विरोध करने और वहां मौजूद लोगों के वीडियो बनाने के कारण ही पुलिस के चंगुल से बच पाया। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सीओ सिटी अकबरपुर ने पीड़ित पर आपराधिक इतिहास होने का आरोप लगाया है। इस पर पलटवार करते हुए पीड़ित का कहना है कि उसके नाम पर केवल वही एक मुकदमा दर्ज है, जिसे इंस्पेक्टर दीपक रघुवंशी ने स्वयं दर्ज किया था, और इसके अलावा उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। पीड़ित ने प्रशासन से सवाल किया है कि क्या मेहनत के पैसे मांगना अपराध है और क्या पुलिस अधीक्षक कार्यालय में न्याय की मांग करना गिरफ्तारी का निमंत्रण बन गया है। इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए प्रशासन से पीड़ित को न्याय दिलाने की अपील की गई है।1
- उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले के एक प्राथमिक विद्यालय का वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक अभिभावक को प्रधानाध्यापिका द्वारा चप्पल से प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। यह घटना तब हुई जब अभिभावक अपने बच्चे के भविष्य के लिए जरूरी टीसी (TC) लेने स्कूल गए थे। इस कृत्य ने शिक्षा व्यवस्था की गरिमा और शिक्षक-अभिभावक के बीच के संबंध पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल को शिक्षा का मंदिर माना जाता है, लेकिन वहां हुई इस घटना ने व्यवस्था के भीतर पनप रहे अहंकार और 'गुंडागर्दी' को उजागर किया है। एक शिक्षक का इस तरह का व्यवहार बच्चों के भविष्य और उनके कोमल मन पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। जब शिक्षक 'गुरु' के बजाय 'शासक' की भूमिका में आ जाए, तो स्कूल का वातावरण अखाड़े में तब्दील हो जाता है। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, घटना पर उठ रहे सवाल अब प्रशासन की जवाबदेही और ऐसे शिक्षकों के प्रति सख्त कार्रवाई की मांग की ओर इशारा कर रहे हैं। समाज में इस बात पर बहस तेज है कि शिक्षा विभाग कब तक ऐसी अराजकता को बर्दाश्त करेगा। यह घटना इस बात की चेतावनी है कि यदि शिक्षा के मंदिरों में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाली पीढ़ी शिक्षित होने के बजाय भय के साये में पलेगी।1