“साला पंडित पागल हो गया है!” — बरेली के जिलाधिकारी आवास से निकली शर्मनाक प्रशासनिक भाषा शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के साथ प्रयागराज में माघ मेले के दौरान हुए कथित अभद्र व्यवहार और UGC के नए नियमों से आहत होकर पद से इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। अलंकार अग्निहोत्री के अनुसार, जब वे इस पूरे प्रकरण पर चर्चा करने जिलाधिकारी बरेली से मिलने उनके सरकारी आवास पहुंचे, तो उन्हें वहां जबर्दस्ती रोके रखा गया, जिसे वे बंधक जैसी स्थिति बताते हैं। इसी दौरान जिलाधिकारी ने लखनऊ के किसी व्यक्ति से स्पीकर पर बातचीत की, जहां से यह आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी सुनाई दी— “साला पंडित पागल हो गया है” यह कथित बयान न सिर्फ एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी के सम्मान को ठेस पहुंचाता है, बल्कि जातिसूचक और अपमानजनक भाषा के जरिए संविधान, प्रशासनिक मर्यादा और सिविल सर्विसेज की गरिमा पर भी सीधा हमला करता है। इस्तीफा देना किसी भी अधिकारी का व्यक्तिगत और संवैधानिक अधिकार है। असहमति रखना अपराध नहीं है। लेकिन किसी अधिकारी को उसकी जाति के नाम पर संबोधित करना, वह भी सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों द्वारा, बेहद निंदनीय और शर्मनाक है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि— क्या जिलाधिकारी बरेली इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से जवाब देंगे? क्या इस कथित जातिसूचक टिप्पणी की निष्पक्ष जांच होगी? और क्या प्रशासन के भीतर पनप रही इस मानसिकता पर कोई कार्रवाई होगी? बरेली प्रशासन के कथित बिगड़े बोल न केवल व्यवस्था की सच्चाई उजागर करते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि सत्ता के गलियारों में असहमति को आज किस भाषा में कुचला जा रहा है।
“साला पंडित पागल हो गया है!” — बरेली के जिलाधिकारी आवास से निकली शर्मनाक प्रशासनिक भाषा शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के साथ प्रयागराज में माघ मेले के दौरान हुए कथित अभद्र व्यवहार और UGC के नए नियमों से आहत होकर पद से इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। अलंकार अग्निहोत्री के अनुसार, जब वे इस पूरे प्रकरण पर चर्चा करने जिलाधिकारी बरेली से मिलने उनके सरकारी आवास पहुंचे, तो उन्हें वहां जबर्दस्ती रोके रखा गया, जिसे वे बंधक जैसी स्थिति बताते हैं। इसी दौरान जिलाधिकारी ने लखनऊ के किसी व्यक्ति से स्पीकर पर बातचीत की, जहां से यह आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी सुनाई दी— “साला पंडित पागल हो गया है” यह कथित बयान न सिर्फ एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी के सम्मान को ठेस पहुंचाता है, बल्कि जातिसूचक और अपमानजनक भाषा के जरिए संविधान, प्रशासनिक मर्यादा और सिविल सर्विसेज की गरिमा पर भी सीधा हमला करता है। इस्तीफा देना किसी भी अधिकारी का व्यक्तिगत और संवैधानिक अधिकार है। असहमति रखना अपराध नहीं है। लेकिन किसी अधिकारी को उसकी जाति के नाम पर संबोधित करना, वह भी सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों द्वारा, बेहद निंदनीय और शर्मनाक है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि— क्या जिलाधिकारी बरेली इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से जवाब देंगे? क्या इस कथित जातिसूचक टिप्पणी की निष्पक्ष जांच होगी? और क्या प्रशासन के भीतर पनप रही इस मानसिकता पर कोई कार्रवाई होगी? बरेली प्रशासन के कथित बिगड़े बोल न केवल व्यवस्था की सच्चाई उजागर करते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि सत्ता के गलियारों में असहमति को आज किस भाषा में कुचला जा रहा है।
- “साला पंडित पागल हो गया है!” — बरेली के जिलाधिकारी आवास से निकली शर्मनाक प्रशासनिक भाषा शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज के साथ प्रयागराज में माघ मेले के दौरान हुए कथित अभद्र व्यवहार और UGC के नए नियमों से आहत होकर पद से इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। अलंकार अग्निहोत्री के अनुसार, जब वे इस पूरे प्रकरण पर चर्चा करने जिलाधिकारी बरेली से मिलने उनके सरकारी आवास पहुंचे, तो उन्हें वहां जबर्दस्ती रोके रखा गया, जिसे वे बंधक जैसी स्थिति बताते हैं। इसी दौरान जिलाधिकारी ने लखनऊ के किसी व्यक्ति से स्पीकर पर बातचीत की, जहां से यह आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी सुनाई दी— “साला पंडित पागल हो गया है” यह कथित बयान न सिर्फ एक पूर्व प्रशासनिक अधिकारी के सम्मान को ठेस पहुंचाता है, बल्कि जातिसूचक और अपमानजनक भाषा के जरिए संविधान, प्रशासनिक मर्यादा और सिविल सर्विसेज की गरिमा पर भी सीधा हमला करता है। इस्तीफा देना किसी भी अधिकारी का व्यक्तिगत और संवैधानिक अधिकार है। असहमति रखना अपराध नहीं है। लेकिन किसी अधिकारी को उसकी जाति के नाम पर संबोधित करना, वह भी सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों द्वारा, बेहद निंदनीय और शर्मनाक है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि— क्या जिलाधिकारी बरेली इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से जवाब देंगे? क्या इस कथित जातिसूचक टिप्पणी की निष्पक्ष जांच होगी? और क्या प्रशासन के भीतर पनप रही इस मानसिकता पर कोई कार्रवाई होगी? बरेली प्रशासन के कथित बिगड़े बोल न केवल व्यवस्था की सच्चाई उजागर करते हैं, बल्कि यह भी दिखाते हैं कि सत्ता के गलियारों में असहमति को आज किस भाषा में कुचला जा रहा है।1
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- बहुजन समाज पार्टी के बरेली मण्डल के मण्डल प्रभारी हरिराम कश्यप ने SIR को लेकर जलालबाद के रेस्टोरेंट मे की अहम् बैठक1
- Post by Anoop Kumar/ media1
- गणतंत्र दिवस पर अल्लाहगंज में ऐतिहासिक तिरंगा यात्रा भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने पहली बार निकाली भव्य तिरंगा यात्रा 📍 अल्लाहगंज (शाहजहांपुर) देश के 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर नगर अल्लाहगंज में पहली बार भीम आर्मी भारत एकता मिशन के तत्वावधान में भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा का शुभारंभ अल्लाहगंज थाने से हुआ और यह मऊ शाहजहांपुर स्थित परमपूज्य बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा तक निकाली गई। तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों, बुजुर्गों, माताओं, भाइयों-बहनों तथा भीम आर्मी के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। देशभक्ति नारों और तिरंगे की शान के साथ निकली इस यात्रा ने नगर में देशप्रेम का संदेश दिया। 👉 यात्रा को सफल बनाने में अल्लाहगंज थाना पुलिस प्रशासन की भूमिका सराहनीय रही। पुलिस प्रशासन द्वारा पूरी यात्रा के दौरान बेहतर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण व सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर एडवोकेट रिन्शू डागा, अवनीश वर्मा, मानसिंह, अनुज कुमार, अर्जुन सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। आयोजकों ने यात्रा को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया और एक बार फिर सभी क्षेत्रवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।2
- ग्राम पंचायत खंडहर में शिव मंदिर के सामने के रस्ते की दुर्दशा प्रधान के द्वारा इस रस्ते को न ही डलवाया जा रहा है और न ही कोई समाधान दिया जा रहा है शिव मंदिर में जाने वाले भक्त लोगों को किंच और गंदगी से होकर जाना पड़ता है2
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