गजलीटांड कतरास हादसा: बरसी पर उमड़ी भीड़, शहीद स्तम्भ पर दी गई अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि झारखंड के धनबाद जिले में स्थित कतरास का गजलीटांड (Gajli Tand) हादसा भारतीय औद्योगिक और खनन इतिहास के सबसे काले और वीभत्स अध्यायों में से एक है। यह वह त्रासदी थी, जिसने न सिर्फ जमीन के अंदर काम करने वाले मजदूरों के हौसलों को झकझोरा, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी थी। आज एक बार फिर, इस दर्दनाक हादसे की याद में पूरा इलाका गमगीन हो उठा।" आज इस भीषण त्रासदी की बरसी पर मृतक मजदूरों के परिवारजनों समेत सैंकड़ों स्थानीय लोगों ने गजली टांड शहीद स्तम्भ पर पहुंचकर नम आँखों से श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वहाँ मौजूद पीड़ित परिवारों के दर्द और सिसकियों से पूरा माहौल गमगीन दिखा। दशकों बीत जाने के बाद भी अपनों को खोने का गम इन परिवारों के दिलों में आज भी जिंदा है। लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उन तमाम अनाम शहीदों को याद किया, जिन्होंने अपनी जान गँवाई थी। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की गजलीटांड कोलियरी में भारी मानसूनी बारिश के कारण पास की कतरा नदी का बांध टूट गया था, जिससे करोड़ों गैलन पानी अचानक भूमिगत खदान (Underground Mine) के अंदर जा घुसा था और सैकड़ों मजदूर अंदर ही फंस गए थे। सरकारी रिकॉर्ड में इस हादसे में 64 से अधिक मजदूरों की मौत दर्ज की गई, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि मृतकों का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा था, क्योंकि कई शव कभी बरामद ही नहीं हो सके। "गजलीटांड सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि यह सुरक्षा मानकों की अनदेखी और घोर प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा थी।" सुरक्षा पर सवाल: इस घटना ने देश भर की खदानों में मजदूरों की सुरक्षा और आपातकालीन निकास मार्गों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। आज शहीद स्तम्भ पर उमड़ी यह भीड़ इस बात की गवाही देती है कि भले ही समय बीत गया हो, लेकिन इस खूनी हादसे के जख्म आज भी पूरी तरह हरे हैं। "गजलीटांड का यह हादसा हमें आज भी यह याद दिलाता है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए जो कोयला हम निकालते हैं, उसकी कीमत इन बेकसूर मजदूरों ने अपनी जान देकर चुकाई है। आज शहीद स्तम्भ पर श्रद्धांजलि देते हुए हर शख्स की बस यही मांग थी कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो और मजदूरों की सुरक्षा से कभी समझौता न किया जाए। इन्हें शत-शत नमन, धन्यवाद।"
गजलीटांड कतरास हादसा: बरसी पर उमड़ी भीड़, शहीद स्तम्भ पर दी गई अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि झारखंड के धनबाद जिले में स्थित कतरास का गजलीटांड (Gajli Tand) हादसा भारतीय औद्योगिक और खनन इतिहास के सबसे काले और वीभत्स अध्यायों में से एक है। यह वह त्रासदी थी, जिसने न सिर्फ जमीन के अंदर काम करने वाले मजदूरों के हौसलों को झकझोरा, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी थी। आज एक बार फिर, इस दर्दनाक हादसे की याद में पूरा इलाका गमगीन हो उठा।" आज इस भीषण त्रासदी की बरसी पर मृतक मजदूरों के परिवारजनों समेत सैंकड़ों स्थानीय लोगों ने गजली टांड शहीद स्तम्भ पर पहुंचकर नम आँखों से श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वहाँ मौजूद पीड़ित परिवारों के दर्द और सिसकियों से पूरा माहौल गमगीन दिखा। दशकों बीत जाने के बाद भी अपनों को खोने का गम इन परिवारों के दिलों में आज भी जिंदा है। लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उन तमाम अनाम शहीदों को याद किया, जिन्होंने अपनी जान गँवाई थी। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की गजलीटांड कोलियरी में भारी मानसूनी बारिश के कारण पास की कतरा नदी का बांध टूट गया था, जिससे करोड़ों गैलन पानी अचानक भूमिगत खदान (Underground Mine) के अंदर जा घुसा था और सैकड़ों मजदूर अंदर ही फंस गए थे। सरकारी रिकॉर्ड में इस हादसे में 64 से अधिक मजदूरों की मौत दर्ज की गई, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि मृतकों का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा था, क्योंकि कई शव कभी बरामद ही नहीं हो सके। "गजलीटांड सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि यह सुरक्षा मानकों की अनदेखी और घोर प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा थी।" सुरक्षा पर सवाल: इस घटना ने देश भर की खदानों में मजदूरों की सुरक्षा और आपातकालीन निकास मार्गों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। आज शहीद स्तम्भ पर उमड़ी यह भीड़ इस बात की गवाही देती है कि भले ही समय बीत गया हो, लेकिन इस खूनी हादसे के जख्म आज भी पूरी तरह हरे हैं। "गजलीटांड का यह हादसा हमें आज भी यह याद दिलाता है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए जो कोयला हम निकालते हैं, उसकी कीमत इन बेकसूर मजदूरों ने अपनी जान देकर चुकाई है। आज शहीद स्तम्भ पर श्रद्धांजलि देते हुए हर शख्स की बस यही मांग थी कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो और मजदूरों की सुरक्षा से कभी समझौता न किया जाए। इन्हें शत-शत नमन, धन्यवाद।"
- FIR के बाद कतरास में गरमाया सियासी माहौल! पार्षद निरुपमा देवी की आंदोलन की चेतावनी, अशोक लाल बोले—“डरने वाले नहीं!”1
- धनबाद जिले के कतरास में अवैध खनन से शुरू हुए विवाद में कुल 3 FIR दर्ज की गई है जिसमे कई आरोपी नामज़द है मामला अवैध कोयला खनन , सड़क जाम , वीडियो बनाने को लेकर दर्ज है नामजद आरोपी में वार्ड 5 की पार्षद ने कतरास थाना प्रभारी , समाजसेवी भाजपा नेता वशिष्ठ चौहान पर गंभीर आरोप लगाए हैं । #dhanbad1
- कतरास स्थित पांचगढ़ी बाजार हनुमान मेंशन में खुला आहर रेस्टोरेंट1
- गजलीटांड कतरास हादसा: बरसी पर उमड़ी भीड़, शहीद स्तम्भ पर दी गई अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि झारखंड के धनबाद जिले में स्थित कतरास का गजलीटांड (Gajli Tand) हादसा भारतीय औद्योगिक और खनन इतिहास के सबसे काले और वीभत्स अध्यायों में से एक है। यह वह त्रासदी थी, जिसने न सिर्फ जमीन के अंदर काम करने वाले मजदूरों के हौसलों को झकझोरा, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी थी। आज एक बार फिर, इस दर्दनाक हादसे की याद में पूरा इलाका गमगीन हो उठा।" आज इस भीषण त्रासदी की बरसी पर मृतक मजदूरों के परिवारजनों समेत सैंकड़ों स्थानीय लोगों ने गजली टांड शहीद स्तम्भ पर पहुंचकर नम आँखों से श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वहाँ मौजूद पीड़ित परिवारों के दर्द और सिसकियों से पूरा माहौल गमगीन दिखा। दशकों बीत जाने के बाद भी अपनों को खोने का गम इन परिवारों के दिलों में आज भी जिंदा है। लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उन तमाम अनाम शहीदों को याद किया, जिन्होंने अपनी जान गँवाई थी। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) की गजलीटांड कोलियरी में भारी मानसूनी बारिश के कारण पास की कतरा नदी का बांध टूट गया था, जिससे करोड़ों गैलन पानी अचानक भूमिगत खदान (Underground Mine) के अंदर जा घुसा था और सैकड़ों मजदूर अंदर ही फंस गए थे। सरकारी रिकॉर्ड में इस हादसे में 64 से अधिक मजदूरों की मौत दर्ज की गई, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि मृतकों का आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा था, क्योंकि कई शव कभी बरामद ही नहीं हो सके। "गजलीटांड सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं थी, बल्कि यह सुरक्षा मानकों की अनदेखी और घोर प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा थी।" सुरक्षा पर सवाल: इस घटना ने देश भर की खदानों में मजदूरों की सुरक्षा और आपातकालीन निकास मार्गों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। आज शहीद स्तम्भ पर उमड़ी यह भीड़ इस बात की गवाही देती है कि भले ही समय बीत गया हो, लेकिन इस खूनी हादसे के जख्म आज भी पूरी तरह हरे हैं। "गजलीटांड का यह हादसा हमें आज भी यह याद दिलाता है कि देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए जो कोयला हम निकालते हैं, उसकी कीमत इन बेकसूर मजदूरों ने अपनी जान देकर चुकाई है। आज शहीद स्तम्भ पर श्रद्धांजलि देते हुए हर शख्स की बस यही मांग थी कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो और मजदूरों की सुरक्षा से कभी समझौता न किया जाए। इन्हें शत-शत नमन, धन्यवाद।"1
- लोकेशन धनबाद झारखंड रिपोर्ट नीरज कुमार जनसेतु न्यूज़। मोबाइल नंबर 9304322626 SLUG- *लगभग 20 घंटे बाद निकाला गया तालाब में डूबी बच्ची का शव* V./O.- बाघमारा के रामकनाली ओपी अंतर्गत झिंझिपहाड़ी बस्ती में बुढ़ा बाबा मंदिर के समीप तालाब में कल शाम एक बच्ची नहाने के दौरान डूब गई थी।झिंझिपहाड़ी निवासी लालमोहन कर्मकार की 12 वर्षीय पुत्री शीतल कुमारी नाम बताया जा रहा है।खबर पाकर ग्रामीणों द्वारा और तेतुलमारी से आए अनुभवी गोताखोरों द्वारा देर शाम तक खोजबीन की गई ,लेकिन कुछ भी पता नहीं चला। वहीं आज बागमारा विधायक शत्रुघ्न महतो की पहल पर डीसी के निर्देशानुसार भटिंडा फॉल के रेस्क्यू टीम घटनास्थल पहुँची।जिनके द्वारा रेस्क्यू के दौरान बच्ची के शव को निकाला गया।शव निकलते ही परिजनों में चीख पुकार मच गई।फिलहाल रामकनाली ओपी द्वारा शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है वहीं स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि ने यह भी आश्वासन दिया है को मृतिका के परिवार को आपदा प्रबंधन के तहत मिलने वाली राशि का भी भुगतान कराया जाएगा। बाइट - गणेश महतो(मुखिया प्रतिनिधि) लोकेशन धनबाद झारखंड SLUG- *लगभग 20 घंटे बाद निकाला गया तालाब में डूबी बच्ची का शव* V./O.- बाघमारा के रामकनाली ओपी अंतर्गत झिंझिपहाड़ी बस्ती में बुढ़ा बाबा मंदिर के समीप तालाब में कल शाम एक बच्ची नहाने के दौरान डूब गई थी।झिंझिपहाड़ी निवासी लालमोहन कर्मकार की 12 वर्षीय पुत्री शीतल कुमारी नाम बताया जा रहा है।खबर पाकर ग्रामीणों द्वारा और तेतुलमारी से आए अनुभवी गोताखोरों द्वारा देर शाम तक खोजबीन की गई ,लेकिन कुछ भी पता नहीं चला। वहीं आज बागमारा विधायक शत्रुघ्न महतो की पहल पर डीसी के निर्देशानुसार भटिंडा फॉल के रेस्क्यू टीम घटनास्थल पहुँची।जिनके द्वारा रेस्क्यू के दौरान बच्ची के शव को निकाला गया।शव निकलते ही परिजनों में चीख पुकार मच गई।फिलहाल रामकनाली ओपी द्वारा शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है वहीं स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि ने यह भी आश्वासन दिया है को मृतिका के परिवार को आपदा प्रबंधन के तहत मिलने वाली राशि का भी भुगतान कराया जाएगा। बाइट - गणेश महतो(मुखिया प्रतिनिधि)1
- गोबिंदपुर बाजार स्थित दिल्ली मार्ग पर शनिवार को कई घंटों तक लगा ट्रैफिक जाम गोबिंदपुर थाने की पुलिस के अथक प्रयास के से हटा जाम1
- *बिष्णुगढ़ के बिलंडी में 300 फीट गहरे एयर वेंट में तलाश की कोशिश नाकाम, NDRF टीम बैरंग लौटी* बिष्णुगढ़: बिष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के रखवा गांव निवासी गणेश महतो के लापता होने के चार दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। मंगलवार को घर से निकलने के बाद परिजन और ग्रामीणों ने बिलंडी गांव स्थित कोनार नहर के करीब 300 फीट गहरे एयर वेंट के पास उनकी चप्पलें बरामद की थीं। आशंका है कि गणेश महतो इसी एयर वेंट में गिर गए होंगे। सूचना पर घटना के 3 दिन बाद शुक्रवार रात NDRF की 30 सदस्यीय टीम बिष्णुगढ़ पहुंची और शनिवार को खोजबीन की तैयारी की, लेकिन अत्यंत गहराई और जोखिम के कारण टीम ने हाथ खड़े कर दिए इसके बाद टीम बैरंग वापस लौट गई। NDRF की कोशिश नाकाम होने से परिजनों में मायूसी है। अब परिजन खुद शव की तलाश करने का मन बना रहे हैं। बिष्णुगढ़ सीओ नित्यानंद दास ने घटना पर अफसोस जताते हुए कहा कि वरीय पदाधिकारियों को स्थिति की जानकारी दी जा रही है। आगे की रणनीति वरीय अधिकारी तय करेंगे।1
- Post by जनता न्यूज़ 241