खमरिया में खनन माफियाओं का तांडव, ‘साहब’ मौन! शारदा नदी का सीना छलनी, खाकी की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल गोपाल कृष्ण | दैनिक भास्कर अपडेट खमरिया (लखीमपुर खीरी)। जनपद के थाना खमरिया क्षेत्र में अवैध खनन का काला कारोबार बेखौफ अंदाज में जारी है। शारदा नदी की शांत लहरों के बीच अब रातभर मशीनों की गरज सुनाई देती है। नदी का सीना चीरकर बालू और मिट्टी का अवैध उत्खनन खुलेआम किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और स्थानीय पुलिस रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए हैं। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। रात के अंधेरे में चलता है ‘पीले सोने’ का खेल स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सूरज ढलते ही खमरिया क्षेत्र के कई घाटों और नदी किनारे दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉली, डंपर और हाईटेक मशीनें सक्रिय हो जाती हैं। पूरी रात शारदा नदी की तलहटी से बालू और मिट्टी का अवैध खनन होता है और सुबह होने से पहले यह खेल खत्म कर दिया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध करने वालों को माफियाओं द्वारा धमकाया जाता है, जिससे इलाके में भय का माहौल बना हुआ है। जिम्मेदारों का पल्ला झाड़ने वाला रवैया जब ग्रामीणों और स्थानीय लोगों द्वारा थाना खमरिया पुलिस से शिकायत की जाती है, तो पुलिस का जवाब चौंकाने वाला होता है। पुलिस जिम्मेदारी से बचते हुए कहती है कि यह मामला खनन विभाग या एसडीएम का है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या क्षेत्र में चल रही अवैध गतिविधियों को रोकना पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है? आखिर पुलिस की यह चुप्पी मजबूरी है या मिलीभगत? सरकार को करोड़ों का नुकसान, पर्यावरण पर बड़ा खतरा अवैध खनन के कारण सरकार को करोड़ों रुपये की राजस्व हानि हो रही है। बिना रॉयल्टी के निकाली जा रही बालू और मिट्टी सीधे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा रही है। वहीं दूसरी ओर नदी किनारे की उपजाऊ कृषि भूमि गहरे गड्ढों में तब्दील होती जा रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहा अवैध खनन भविष्य में शारदा नदी के कटान को बढ़ा सकता है, जिससे आसपास के गांवों पर जलभराव और बाढ़ का खतरा मंडरा सकता है। ‘मंथली सेटिंग’ की चर्चाओं से गरम बाजार क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि खनन माफियाओं और जिम्मेदार अधिकारियों के बीच ‘मंथली सेटिंग’ का खेल चल रहा है। इसी कथित सांठगांठ के चलते उच्चाधिकारियों को भ्रामक रिपोर्ट भेजी जा रही है और जमीनी सच्चाई को दबाने की कोशिश की जा रही है। यही वजह है कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति नजर आती है। अब उठ रहे बड़े सवाल क्या जिला प्रशासन अवैध खनन के इस खेल पर सख्त कार्रवाई करेगा? क्या थाना खमरिया पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच होगी? क्या शासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी? अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों पर टिकी हैं। देखने वाली बात होगी कि खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन जागेगा या फिर खनन माफियाओं का यह ‘मिट्टी का साम्राज्य’ यूँ ही फलता-फूलता रहेगा।
खमरिया में खनन माफियाओं का तांडव, ‘साहब’ मौन! शारदा नदी का सीना छलनी, खाकी की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल गोपाल कृष्ण | दैनिक भास्कर अपडेट खमरिया (लखीमपुर खीरी)। जनपद के थाना खमरिया क्षेत्र में अवैध खनन का काला कारोबार बेखौफ अंदाज में जारी है। शारदा नदी की शांत लहरों के बीच अब रातभर मशीनों की गरज सुनाई देती है। नदी का सीना चीरकर बालू और मिट्टी का अवैध उत्खनन खुलेआम किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और स्थानीय पुलिस रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए हैं। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। रात के अंधेरे में चलता है ‘पीले सोने’ का खेल स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सूरज ढलते ही खमरिया क्षेत्र के कई घाटों और नदी किनारे दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रॉली, डंपर और हाईटेक मशीनें सक्रिय हो जाती हैं। पूरी रात शारदा नदी की तलहटी से बालू और मिट्टी का अवैध खनन होता है और सुबह होने से पहले यह खेल खत्म कर दिया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध करने वालों को माफियाओं द्वारा धमकाया जाता है, जिससे इलाके में भय का माहौल बना हुआ है। जिम्मेदारों का पल्ला झाड़ने वाला रवैया जब ग्रामीणों और स्थानीय लोगों द्वारा थाना खमरिया पुलिस से शिकायत की जाती है, तो पुलिस का जवाब चौंकाने वाला होता है। पुलिस जिम्मेदारी से बचते हुए कहती है कि यह मामला खनन विभाग या एसडीएम का है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या क्षेत्र में चल रही अवैध गतिविधियों को रोकना पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है? आखिर पुलिस की यह चुप्पी मजबूरी है या मिलीभगत? सरकार को करोड़ों का नुकसान, पर्यावरण पर बड़ा खतरा अवैध खनन के कारण सरकार को करोड़ों रुपये की राजस्व हानि हो रही है। बिना रॉयल्टी के निकाली जा रही बालू और मिट्टी सीधे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा रही है। वहीं दूसरी ओर नदी किनारे की उपजाऊ कृषि भूमि गहरे गड्ढों में तब्दील होती जा रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहा अवैध खनन भविष्य में शारदा नदी के कटान को बढ़ा सकता है, जिससे आसपास के गांवों पर जलभराव और बाढ़ का खतरा मंडरा सकता है। ‘मंथली सेटिंग’ की चर्चाओं से गरम बाजार क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि खनन माफियाओं और जिम्मेदार अधिकारियों के बीच ‘मंथली सेटिंग’ का खेल चल रहा है। इसी कथित सांठगांठ के चलते उच्चाधिकारियों को भ्रामक रिपोर्ट भेजी जा रही है और जमीनी सच्चाई को दबाने की कोशिश की जा रही है। यही वजह है कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति नजर आती है। अब उठ रहे बड़े सवाल क्या जिला प्रशासन अवैध खनन के इस खेल पर सख्त कार्रवाई करेगा? क्या थाना खमरिया पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच होगी? क्या शासन की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी? अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों पर टिकी हैं। देखने वाली बात होगी कि खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन जागेगा या फिर खनन माफियाओं का यह ‘मिट्टी का साम्राज्य’ यूँ ही फलता-फूलता रहेगा।
- भांग में ‘गोबर’ की मिलावट का आरोप, वायरल वीडियो से मचा हड़कंप अशोगापुर की सरकारी भांग दुकान पर गंभीर आरोप, ग्रामीणों ने लाइसेंस निरस्त करने की उठाई मांग दैनिक भास्कर अपडेट गोपाल कृष्ण अवस्थी नकहा, लखीमपुर खीरी। नकहा क्षेत्र के अशोगापुर में संचालित सरकारी भांग की दुकान एक बार फिर विवादों में घिर गई है। दुकान पर बिक रही भांग में गोबर की खाद मिलाकर वजन बढ़ाने और अधिक मुनाफा कमाने का सनसनीखेज आरोप सामने आया है। मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब रात के अंधेरे में कथित तौर पर भांग में गोबर की खाद मिलाते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि मिलावटी भांग खुलेआम बेची जा रही है और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है। लोगों का कहना है कि नशे के नाम पर लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। आरोप है कि भांग में गोबर की खाद मिलाने से उसका वजन बढ़ जाता है, जिससे विक्रेताओं को मोटा मुनाफा होता है। ठेकेदार अकील पर लगे गंभीर आरोप ग्रामीणों के मुताबिक अशोगापुर में भांग का ठेका अकील नामक व्यक्ति के पास है और उसकी जानकारी में ही यह पूरा खेल चल रहा है। लोगों का आरोप है कि लंबे समय से मिलावट का धंधा जारी है, लेकिन कभी कोई प्रभावी जांच नहीं हुई। वायरल वीडियो के बाद अब ग्रामीण खुलकर विरोध में उतर आए हैं। स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि गोबर या अन्य गंदगी मिली भांग का सेवन लोगों को गंभीर बीमारियों की ओर धकेल सकता है। इससे पेट संबंधी संक्रमण, फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त समेत कई खतरनाक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने इसे सीधे तौर पर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ बताया है। आबकारी विभाग पर उठे सवाल घटना के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय-समय पर गुणवत्ता की जांच होती तो इतनी बड़ी लापरवाही सामने नहीं आती। लोगों ने अधिकारियों पर मिलीभगत और लापरवाही का आरोप लगाया है। ग्रामीणों में भारी आक्रोश, कार्रवाई की मांग वायरल वीडियो के बाद ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने और संबंधित ठेकेदार का लाइसेंस तत्काल निरस्त करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।1
- वैश्विक तेल संकट पर पीएम मोदी की अपील: “पेट्रोल-डीजल बचाएं, मेट्रो और कार-पूलिंग अपनाएं” ASTv24 digital शाहिद लखाही Narendra Modi ने वैश्विक तेल और गैस संकट के बीच देशवासियों से पेट्रोल-डीजल का सोच-समझकर इस्तेमाल करने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में चल रहे ऊर्जा संकट का असर भारत पर भी पड़ रहा है, क्योंकि देश के पास तेल और गैस के पर्याप्त प्राकृतिक भंडार नहीं हैं। प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिन शहरों में मेट्रो सेवा उपलब्ध है, वहां नागरिकों को अधिक से अधिक मेट्रो का उपयोग करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कार-पूलिंग को बढ़ावा देने, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग अपनाने और जहां संभव हो वहां वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की खपत कम करना बेहद जरूरी है, ताकि देश ऊर्जा संसाधनों का बेहतर प्रबंधन कर सके और भविष्य की चुनौतियों से मजबूती से निपट सके। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा की बचत केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की भागीदारी से ही यह अभियान सफल हो सकता है।1
- लखीमपुर खीरी खराब हैंडपंप से ग्रामीण परेशान ब्लॉक ईसानगर के ग्राम पंचायत ऐरा भिठौली लखीमपुर खीरी आंगनवाड़ी केन्द्र परिसर का पिछले 2 सालों से खराब पड़ा हैंडपंप लोग हो रहे परेशान बहुत चलाने के बाद पानी आता है ओ भी खराब1
- लखीमपुर खीरी के मोहम्मदपुर कहमारा गाँव में हज़रत नौ गज़े पीर रह0 का सालाना उर्स धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर भारी संख्या में ज़ायरीन ने शिरकत कर देश में अमन-चैन की दुआएं मांगी।1
- लखीमपुर खीरी के निघासन थाना क्षेत्र में पुलिस ने दो फरार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इन पर मारपीट और गाली-गलौज का आरोप था, जिसके बाद घायल व्यक्ति की लखनऊ ले जाते समय मृत्यु हो गई थी। ये आरोपी 7 मई से फरार थे और अब उन्हें अग्रिम विधिक कार्यवाही के लिए न्यायालय में पेश किया जाएगा।1
- लखीमपुर खीरी के फरधान कस्बे में एक शानदार कुश्ती दंगल का आयोजन हुआ। इसमें हरियाणा, राजस्थान और नेपाल जैसे देशों के नामी पहलवानों ने अपने दांव-पेंच का प्रदर्शन किया, जिससे दर्शकों में खासा उत्साह दिखा।1
- उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में भीरा-मैलानी मार्ग पर 42 साल पुरानी बरगद पुलिस चौकी बंद कर दी गई है। इससे जंगल क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ गए हैं, जहाँ यात्रियों को लूटपाट और आपराधिक घटनाओं का डर सता रहा है। स्थानीय लोग चौकी को तुरंत फिर से चालू करने की मांग कर रहे हैं ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।1
- टेढ़ेनाथ मंदिर मार्ग पर शराब दुकान का महिलाओं ने किया जोरदार विरोध, सड़क पर उतरीं महिलाएं, जमकर हंगामा “मंदिर मार्ग पर शराब की दुकान नहीं चलेगी” के नारों से गूंजा मोहम्मदी कस्बा महिलाओं ने प्रशासन को दी चेतावनी, कहा— धार्मिक स्थल के पास शराब बिक्री बर्दाश्त नहीं ✍️ गोपाल कृष्ण अवस्थी दैनिक भास्कर अपडेट मोहम्मदी, लखीमपुर खीरी। मोहम्मदी कस्बे के प्रसिद्ध टेढ़ेनाथ मंदिर मार्ग पर खोली जा रही शराब की दुकान को लेकर रविवार को महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में महिलाओं ने सड़क पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया और शराब दुकान के खिलाफ जमकर हंगामा काटा। महिलाओं का आरोप है कि मंदिर मार्ग जैसे धार्मिक और सार्वजनिक रास्ते पर शराब दुकान खोले जाने से क्षेत्र का माहौल खराब होगा और महिलाओं-बच्चियों की सुरक्षा पर भी असर पड़ेगा। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने “शराब दुकान हटाओ”, “मंदिर मार्ग बचाओ” और “धार्मिक स्थल का सम्मान करो” जैसे नारे लगाकर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर की। देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और इलाके में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। स्थानीय महिलाओं का कहना था कि टेढ़ेनाथ मंदिर मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु, महिलाएं और छात्र-छात्राएं गुजरते हैं। ऐसे स्थान पर शराब की दुकान खुलने से आए दिन शराबियों का जमावड़ा लगेगा, जिससे सामाजिक वातावरण दूषित होगा। महिलाओं ने साफ शब्दों में कहा कि यदि प्रशासन ने दुकान को यहां से नहीं हटाया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने आरोप लगाया कि बिना स्थानीय लोगों की सहमति के शराब दुकान का संचालन शुरू कराया जा रहा है, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है। महिलाओं ने प्रशासन से तत्काल दुकान हटाने और धार्मिक स्थल की गरिमा बनाए रखने की मांग की। हंगामे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और महिलाओं को समझाने का प्रयास किया। हालांकि महिलाएं अपनी मांगों पर अड़ी रहीं। काफी देर तक चली नोकझोंक और विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन को मामले में जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन देना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मोहम्मदी क्षेत्र में शराब दुकान को लेकर बहस तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थलों और आबादी वाले इलाकों में इस तरह शराब दुकानों की अनुमति देना प्रशासनिक संवेदनहीनता को दर्शाता है। क्षेत्र में बना चर्चा का विषय टेढ़ेनाथ मंदिर मार्ग पर शराब दुकान का विरोध अब पूरे मोहम्मदी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। महिलाओं के इस उग्र प्रदर्शन के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है और अब सभी की नजरें आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।1