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रुद्रपुर में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। शहर के रोडवेज बस स्टैंड के पास स्थित शराब की दुकान के सामने हाईवे किनारे खुलेआम नशे में धुत लोगों का जमावड़ा देखने को मिला। सार्वजनिक स्थान पर नशे में हंगामा और अभद्र हरकतों से राहगीरों, महिलाओं और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस क्षेत्र में अक्सर नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और पुलिस की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। रोडवेज बस स्टैंड जैसे व्यस्त स्थान के पास इस तरह का माहौल कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाए, सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने और हुड़दंग मचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए
UTTARAKHAND SHAKTI NEWS
रुद्रपुर में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। शहर के रोडवेज बस स्टैंड के पास स्थित शराब की दुकान के सामने हाईवे किनारे खुलेआम नशे में धुत लोगों का जमावड़ा देखने को मिला। सार्वजनिक स्थान पर नशे में हंगामा और अभद्र हरकतों से राहगीरों, महिलाओं और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस क्षेत्र में अक्सर नशेड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और पुलिस की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। रोडवेज बस स्टैंड जैसे व्यस्त स्थान के पास इस तरह का माहौल कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में नियमित पुलिस गश्त बढ़ाई जाए, सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने और हुड़दंग मचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए
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- खुली बैठक में हंगामे के बीच हुआ राशन दुकान का चयन, सुरजीत बने नए कोटा डीलर बरेली l विकासखंड मझगवां की ग्राम पंचायत मुगलपुर थर्ड में राशन दुकान के चयन को लेकर आयोजित खुली बैठक हंगामे और तेज बारिश के बीच संपन्न हुई। बैठक के दौरान दो पक्षों के बीच जमकर विरोध हुआ, जिससे कुछ समय तक विवाद की स्थिति बनी रही। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। बताया जाता है कि समर्थकों की संख्या कम होने पर एक पक्ष बैठक छोड़कर चला गया। इसके बाद दूसरे पक्ष के समर्थक तेज बारिश के बावजूद बैठक में डटे रहे। समर्थन प्रक्रिया में सुरजीत के पक्ष में 34 महिलाओं और 167 पुरुषों ने समर्थन दिया, जिसके आधार पर उन्हें नया उचित दर विक्रेता (कोटा डीलर) चुना गया। गौरतलब है कि इससे पहले गांव की राशन दुकान का आवंटन शिकायतों के बाद निरस्त कर दिया गया था। जिलाधिकारी के निर्देश पर मंगलवार को दोबारा खुली बैठक आयोजित कर चयन प्रक्रिया पूरी कराई गई। बैठक में ग्राम प्रधान, ग्राम सचिव, एडीओ पंचायत सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।2
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- आप सहमत हैं:::जेन G के आंदोलन के बाद AI ने यह जवाब दिया है। सुनिए क्या कह रही पत्रकार गरिमा सिंह युवा मतदाता निर्णायक बन सकते हैं आंदोलन ने परीक्षा प्रणाली, रोजगार और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। इससे राजनीतिक दलों को युवाओं के लिए अधिक ठोस घोषणाएँ करनी पड़ सकती हैं। मुद्दा-आधारित राजनीति को बढ़ावा यह आंदोलन पारंपरिक जाति और धर्म आधारित राजनीति से हटकर शिक्षा, रोजगार और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा। यदि यह रुझान जारी रहता है, तो चुनावी विमर्श में बदलाव आ सकता है। सरकार पर सुधारों का दबाव आंदोलन के बाद परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कदमों पर चर्चा तेज हुई है। नए राजनीतिक नेतृत्व का उभरना आंदोलन से जुड़े कुछ चेहरे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं। यदि वे भविष्य में संगठित राजनीतिक विकल्प बनाते हैं, तो 2029 के आम चुनावों तक उनका प्रभाव दिखाई दे सकता है। हालांकि आंदोलन के प्रमुख नेताओं ने फिलहाल सीधे चुनावी राजनीति में उतरने से दूरी बनाई है। डिजिटल राजनीति का विस्तार इस आंदोलन में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका रही। इससे स्पष्ट हुआ कि भविष्य में ऑनलाइन अभियान और युवा-आधारित डिजिटल लामबंदी चुनावी राजनीति को और अधिक प्रभावित कर सकती है। क्या यह भारतीय राजनीति बदल देगा? अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी। इतिहास बताता है कि बड़े जन आंदोलनों का स्थायी राजनीतिक प्रभाव तभी पड़ता है जब वे: लंबे समय तक जनसमर्थन बनाए रखें, स्पष्ट संगठन और नेतृत्व विकसित करें, और चुनावी या नीतिगत बदलावों में परिवर्तित हों। इसलिए फिलहाल इतना कहा जा सकता है कि इस आंदोलन ने भारतीय राजनीति में युवाओं की राजनीतिक शक्ति को प्रमुखता से सामने ला दिया है, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले वर्षों, विशेषकर 2029 के आम चुनावों और राज्य चुनावों में अधिक स्पष्ट होगा।1
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